मस्त विचार 4191

जब नासमझ थे, तो ख्वाब हमारी मुट्ठी में थे,

_ समझ आयी तो हम ख्वाबों की मुट्ठी में थे !!

कुछ ख्वाब उन्होंने तोड़ दिए, बाकी मैंने देखने छोड़ दिए !!
आसान नहीं इस दुनिया में, ख्वाबों के सहारे जी लेना.!

_ संगीन और कड़वी हकीकत है दुनिया, यह कोई सुनहरा ख्वाब नहीं.!!

मुझे बुरा नहीं लगता, कितनी ही कड़वी बात कहो..

_ बातों का भी एक्सपायरी डेट होता है, आखिर सालों से वही-वही कोई कब तक सुनें..!

मस्त विचार 4190

ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब है,

_ कम्बख्त वहीं से गुजरता है जहां रास्ते नहीं होते..

मैंने इस दुनिया को अजीब देखा है.

_ हर किसी के पास कुछ ना कुछ कमी है.!!

मस्त विचार 4187

अपने अपने तरीकों से सब ने इस्तेमाल किया हमें,

_ और हम समझते रहे की लोग हमें पसंद करते हैं..!!

हकीकत से सामना हुआ तो पता चला “लोग सिर्फ बातों से अपने थे”

मस्त विचार 4186

जिंदगी की किताबों पर बेशक नया कवर चढ़ाइए,

_ लेकिन बिखरे पन्नों को सबसे पहले प्यार से चिपकाइए..

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