मस्त विचार 4173
एक ही किताब में थे हम,
फिर भी फ़ासला कई पन्नों का था..
फिर भी फ़ासला कई पन्नों का था..
रचना इसकी सुंदर अति सुंदर यह सौरव !”
खबर पक्की है दौलत साथ नहीं जायेगी.
_ लेकिन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए !!
_ क्या पता आपके लिए वो सबक ज़्यादा जरूरी था..!!
_ आपके द्वारा किया गया हर कर्म दोगुना चौगुना होकर आपके पास वापस ज़रूर लौटेगा.!!
हौसलों के पंख नसी़ब होते हैं “
और सुनाने से कई मसले उलझ जाते हैं !