सुविचार 394
हमें अधिक शान्ति मिलती, यदि हम अपने को दूसरों के काम और वचनों में उलझाये न होते ; उन वस्तुओं में न फंसे होते, जिनसे हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है.
_ पर बाद में वे आपको ही कष्ट पहुँचाते हैं.
_ सर उठा के जीता हूँ पारदर्शिता में गर्व, शिकायतें ढूँढना.
_ कई जगहों पर अपूर्णता लेकिन कोई पछतावा नहीं.
_ और शायद इस अपूर्णता में मैं खुद को बार-बार पाता हूँ.!!