मस्त विचार 242
अब जिसको देखिए उसे अपनी तलाश है……….
अब जिसको देखिए उसे अपनी तलाश है……….
मन है परेशान उसकी व्यथा क्या लिखूँ.
मिलना- बिछुड़ना सब हो रहा एक साथ.
इसको क्या तो गाऊं और क्या तो रोऊँ.
सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.
बाकि क्या बताऊँ कि मुझपे क्या गुजरी है.
अब अपने बारे में और क्या लिखूँ.
सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.
तू याद कर या न याद कर.
फागुन के फूल झरते, फागुन जब आये.
गीत तेरे गाऊँगा, मस्त हो जाऊँगा.
जब तक रहूँ मैं तेरे इस खेल में.
साथ मैं तेरा ही पाऊँ, इसलिए गीत यूँ ही गाऊं.
पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.
बुरे दिनों में अच्छी बात, कि वो भी एक दिन ख़त्म हो जाते हैं.
ये जो जिंदगी है हर बात का अहसास कराती है.
चेहरा का क्या है, वो तो मेरे साथ ही चला जाएगा एक दिन…
जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,
ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,
दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,
समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ
मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.
जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.
हालांकि तुझे आँख से देखा भी नही………..
वही मौका होता है करतब दिखाने का.