मस्त विचार 241

सोच रहा हूँ कुछ अपने बारे में लिखूँ.

मन है परेशान उसकी व्यथा क्या लिखूँ.

मिलना- बिछुड़ना सब हो रहा एक साथ.

इसको क्या तो गाऊं और क्या तो रोऊँ.

सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.

बाकि क्या बताऊँ कि मुझपे क्या गुजरी है.

अब अपने बारे में और क्या लिखूँ.

सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.

मस्त विचार 240

पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.

तू याद कर या न याद कर.

फागुन के फूल झरते, फागुन जब आये.

गीत तेरे गाऊँगा, मस्त हो जाऊँगा.

जब तक रहूँ मैं तेरे इस खेल में.

साथ मैं तेरा ही पाऊँ, इसलिए गीत यूँ ही गाऊं.

पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.

मस्त विचार 239

अच्छे दिनों में बुरी बात, कि वो एक दिन ख़त्म हो जाते हैं.

बुरे दिनों में अच्छी बात, कि वो भी एक दिन ख़त्म हो जाते हैं.

मस्त विचार 237

शब्द पहचान बनें मेरी तो बेहतर है.

चेहरा का क्या है, वो तो मेरे साथ ही चला जाएगा एक दिन…

मस्त विचार 236

गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए,

जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,

ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,

दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,

समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ

मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,

गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.

मस्त विचार 235

औरों के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत ना थी ,

जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.

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