अजीब ढंग से मुझको मिली है आज़ादी !
_ परिंदा पिंजरे में पिंजरा हवा में रक्खा गया..!
पिंजरा खोल दो, तो भी पंछी उड़ा नहीं करते.
_ यह प्यार नहीं, आराम और आदत का मामला है..!!
कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को..
_ याद तो उनकी आती है, जो उड़ जाया करते हैं.!!
_ याद तो उनकी आती है, जो उड़ जाया करते हैं.!!






