लम्बी चौड़ी बातें फेकना कतई नहीं पसंद,
_ बस जो भी हुँ अपने दम पर हुँ ” यही मेरे लिए काफी है “
हम सिर्फ़ अपनी पसंद से नहीं पहचाने जाते..
_ बल्कि जिन चीज़ों को हम स्वीकार नहीं करते, वे भी हमें परिभाषित करती हैं.
_ बल्कि जिन चीज़ों को हम स्वीकार नहीं करते, वे भी हमें परिभाषित करती हैं.



