लम्बी चौड़ी बातें फेकना कतई नहीं पसंद,
_ बस जो भी हुँ अपने दम पर हुँ ” यही मेरे लिए काफी है “
हम सिर्फ़ अपनी पसंद से नहीं पहचाने जाते..
_ बल्कि जिन चीज़ों को हम स्वीकार नहीं करते, वे भी हमें परिभाषित करती हैं.
_ बल्कि जिन चीज़ों को हम स्वीकार नहीं करते, वे भी हमें परिभाषित करती हैं.
हमारी पसन्दीदा चीज़े दरअसल हमारी हद बयां करती है,
_ कि हमने इस से बेहतर अभी आगे कुछ अनुभव नही किया.!!
_ कि हमने इस से बेहतर अभी आगे कुछ अनुभव नही किया.!!
– कई बार हम पसन्दीदा चीज़े इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि हमने बेहतर नहीं देखा.
_ और कई बार बेहतर देखने के बाद भी वही पसंद रहता है, क्योंकि वह हमारे स्वभाव से मेल खाता है.!!





