सुविचार – तुम इस मन को राह दो – 1068

तुम इस जड़ को प्राण दो, तुम इस जड़ को धड़कन दो,

तुम इस जड़ को शब्द दो,
और ये तुमसे प्यार न करती हो, ये कैसे हो.
तुम इस मन को सुख दो, तुम इस मन को विश्वास दो,
तुम इस मन को राह दो,
ये तुम्हे प्यार न करता हो, ये कैसे हो.
तुम इस बुद्धि को समझ दो, तुम इस बुद्धि को ज्ञान दो,
तुम इस बुद्धि को कल्पनाएं दो,
ये तुम्हे प्यार न करती हो, ये कैसे हो.
बस इसी प्यार के सहारे ये जड़ मन बुद्धि जीवित है.
आपके ही तो सहारे हम इस मुश्किल राह पर चलने के लिए प्रेरित हैं.
इसीलिए तो आ जाते हैं हम आपके बुलाने पर.
तुम इस जड़ को प्राण दो, तुम इस जड़ को धड़कन दो,
मन में कुछ भर कर जीयंगे.., तो मन भर कर नहीं जी पाएंगे.!!
जब भीतर का मन स्थिर हो जाता है, तब बाहरी तूफान भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते.!!
जो हाथ में न हो, उसे मन से भी आज़ाद कर देना चाहिए..!!
अपने मन पर काबू रखना सीखो,
_ क्योंकि एक शांत मन बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना भी कर सकता है.!!
हर किसी को लगता है कि सब कुछ उसके मन का ही हो..

_ दुनिया उसी के हिसाब से चले..
_ लोग वैसा ही करें.. जैसा वह चाहता है और हालात उसके मुताबिक बनते जाएँ.
_ लेकिन सच यह है कि ऐसा कभी नहीं होता..
_ जिंदगी किसी एक इंसान की सोच पर नहीं चलती..
_ यहाँ सबकी इच्छाएँ टकराती हैं, सबकी उम्मीदें अलग होती हैं..
_ इसलिए हर बार मन का होना संभव नहीं होता और शायद यही जिंदगी की असली सच्चाई है.!!

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