सुविचार – हक़, अधिकार – 171

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“अपना हक़ लेने में सकुचाइये मत”

_ वर्ना आपके हिस्से की ज़मीं और आसमाँ निगलने में कोई नहीं सकुचायेगा.!!

जिन मौकों पर हम बड़प्पन दिखाकर बात को जाने देते हैं और खुद को महान साबित करते हैं, वो हर बार महानता नहीं होती.. कई बार वो हमारा डर या कमजोरी भी होती है.

_ हमें ये भी सीखना चाहिए कि कब हठी बनना ज़रूरी है, और हर हाल में अपना हक़ लेना भी उतना ही ज़रूरी है,सिर्फ जाने देना नहीं.!!

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