अपनी बीती जिंदगी का स्वार्थ से परे खालीपन में अवलोकन करें, तो पता चलेगा आपने कहां छल- कपट से जीत हासिल की और कहां ईमानदारी से.
_ अगर अपने छल पर पछतावा होता है, तो अवश्य ही उसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी.
_ यह प्रेरणा उम्र के साथ स्वतः ही उत्पन्न होती है, जो मनुष्य को अनुभवी बनाती है.
खुद को देखें और स्वयं का अवलोकन करें, जब हम स्वयं का अवलोकन करते हैं, तो एक स्वाभाविक और करने योग्य क्रिया उत्पन्न होती है.
_ अन्यथा, हमारे द्वारा की जाने वाली क्रियाएँ जबरन और ज़बरदस्ती वाली होंगी,
और ज़बरदस्ती करने से हम थक जाते हैं.!!





