सुविचार – CRISIS OF COOKING CYLINDER – 236

CRISIS OF COOKING CYLINDER

जैसे ही घर में गैस सिलेंडर खत्म होने की सूचना मिलती है,
घर का वातावरण अचानक आपातकाल जैसा हो जाता है.
_ सबसे पहला सवाल उठता है – अब खाना कैसे बनेगा ?
_ मानो प्रकृति ने खाने के लिए सिर्फ गैस का चूल्हा ही बनाया हो.
_ थोड़ा ठहरकर सोचिए..
_ कुछ दिन कम व्यंजन भी बन सकते हैं.
_ अगर कभी गैस सिलेंडर की समस्या आ जाए तो थोड़ा सरल और धैर्यपूर्ण जीवन अपनाकर कुछ दिन आराम से निकाले जा सकते हैं.
कुछ और तरीके भी काम आ सकते हैं:
1. एक समय का भोजन सरल रखें.
_ दिन में एक बार पका हुआ साधारण खाना और एक समय हल्का भोजन (फल, सलाद, अंकुरित) लिया जा सकता है.
2. अंकुरित अनाज और फल सब्जी का उपयोग.
_ चना, मूंग, मूंगफली को भिगोकर अंकुरित कर लें.
_ यह पौष्टिक भी होता है और पकाने की जरूरत भी नहीं पड़ती.
_ फल हैं, गाजर, खीरा, टमाटर, चुकंदर, पत्तागोभी – कितनी चीजें हैं जो कच्ची भी खाई जा सकती हैं.
_ गाजर, खीरा, टमाटर, चुकन्दर, प्याज पत्तागोभी गोभी..- तमाम तरह का रायता बनाकर कर खा सकते हैं.
_ दही, दूध, शरबत – इनसे भी पेट को थोड़ा आराम मिल जाता है.
_ प्रकृति ने इतना कुछ दिया है कि बिना गैस के भी कुछ दिन गुजारा हो सकता है.
3. पहले से बने खाने का उपयोग.
_ कई चीजें पहले से बनाकर कुछ दिन चल सकती हैं : भुना चना, सत्तू, मुरमुरा / चिवड़ा, सूखे मेवे – इनसे हल्का भोजन हो सकता है.
4. वैकल्पिक छोटे साधन.
_ अगर ज़रूरत हो तो कुछ लोग अस्थायी रूप से उपयोग करते हैं :
_ इलेक्ट्रिक केतली (पानी, दलिया, ओट्स)
_ इंडक्शन चूल्हा
_ छोटा सोलर कुकर
_ मिट्टी का चूल्हा / सिगड़ी (जहाँ संभव हो)
5. भोजन की मात्रा कम और सरल रखें.
_ जब संसाधन कम हों तो शरीर को भी थोड़ा हल्का भोजन देना अच्छा होता है.
_ कभी-कभी यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो जाता है.
6. पड़ोस और साझेदारी.
_ पहले समाज में लोग एक-दूसरे से गैस या खाना साझा कर लेते थे.
_ यह परंपरा अभी भी कई जगह काम करती है.
ज़रा याद कीजिए – जब आग का आविष्कार नहीं हुआ था,
तब भी मनुष्य जीवन जी ही रहा था.
_ असल समस्या गैस की नहीं है, समस्या यह है कि..
“हम सभ्य और समझदार होते गये और धैर्य और विवेक खोते गये”
_ “समस्या अक्सर साधनों की नहीं होती, समस्या तब होती है जब धैर्य कम पड़ जाता है”

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