**हमें सुविधाएं तो सारी चाहिये.
_ लेकिन न तो उसकी तैयारी करते हैं न कुछ सोचते हैं.!!
_ लेकिन न तो उसकी तैयारी करते हैं न कुछ सोचते हैं.!!
**’सुविधा बदलती है’, लेकिन समझदार वही है, जो हर साधन को जीवन के अनुकूल बना ले.
**सुविधा (Facility)
पहले लोग कम में भी संतुष्ट थे.
आज सब कुछ होते हुए भी कमी महसूस होती है.
हर चीज instant चाहिए.
हर feeling जल्दी बदलनी है.
हर discomfort से भागना है.
patience कम हो जाता है.
सहने की क्षमता घट जाती है.
छोटी-छोटी बातों में disturb होने लगते हैं.
– सही balance क्या है ?
सुविधा का use करो..
लेकिन खुद को उसके बिना भी capable रखो.
Final truth
_ आज का इंसान सुविधा से घिरा हुआ है…
_ हर काम आसान हो गया है…
_ लेकिन अजीब बात यह है कि
_ जीवन उतना ही उलझता जा रहा है.
_ क्यों ?
_ क्योंकि
_ सुविधा बाहर बढ़ी है…
_ लेकिन अंदर की स्थिरता कम हो गई है.
_ हम जीवन को आसान बनाने के चक्कर में, उसे गहरा जीना भूल गए हैं.
लेकिन सच यह है –
_ जो चीजें हमें grow करती हैं… वो अक्सर uncomfortable होती हैं.
– सुविधा धीरे-धीरे हमें कमजोर बना देती है.
_ सुविधा गलत नहीं है…
_ लेकिन उस पर depend हो जाना गलत है.
_ “सुविधा जीवन को आसान बना सकती है… लेकिन मजबूत नहीं बनाती”
देखें “क्या मैं सुविधा का उपयोग कर रहा हूँ… या सुविधा मुझे चला रही है ?”





