सुविचार – “..खुद को खो देना” – 264

..”खुद को खो देना”

_ याद है जब उन्होंने तुम्हारे साथ बार-बार बुरा बर्ताव किया,
_ इतना कि तुमने कहना शुरू कर दिया — “अब आदत सी हो गई है”
_ याद है जब उन्होंने कभी भी तुम्हारी कोशिशों की कद्र नहीं की,
_ और तुमने खुद से कहना शुरू कर दिया — “सब ठीक हो जाएगा।”
_ याद है जब वो हर बार तुम्हें कमतर समझते थे,
_ और तुमने कहना सीख लिया — “मैं ठीक हूँ।”
_ याद है जब तुम्हें हमेशा आखिरी जगह दी जाती थी,
_ और तुम बस इतना कहते — “कोई बात नहीं”
_ याद है जब उन्होंने तुम्हें हमेशा हल्के में लिया,
_ और तुमने हर बार खुद को समझाया — “सब अच्छा हो जाएगा”
_ याद है जब तुम अंदर से टूटे हुए थे,
_ फिर भी हर दिन सबसे कहते थे — “मैं ठीक-ठाक हूँ”
_ अगर तुम ये पढ़ रहे हो, तो एक बात समझ लो…
_ दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है, जिसके लिए तुम्हें खुद को खो देना पड़े.
_ कोई भी इंसान इतना क़ीमती नहीं होता कि उसकी खुशी के लिए तुम अपनी तकलीफ़ सहो.
_ और कोई भी इतना ज़रूरी नहीं है कि उसके लिए तुम खुद को रोज़-रोज़ तकलीफ़ में डालो.
_ शायद तुम ये सुनना नहीं चाहते, लेकिन सच्चाई यही है —
उस इंसान को छोड़ देना ही तुम्हारा पहला कदम होगा खुद को दोबारा पाने की ओर..
मेरी सलाह मानो —
_ उनकी बेरुख़ी के मुक़ाबले, उनकी गैरमौजूदगी को चुनो.
_ जिसने भी लिखा धन्यवाद.. चलो ढूंढे ख़ुद को ख़ुद के अंदर.!!

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