सबसे ज़्यादा altu-faltu बातें वो होती हैं, जो सुनने में ज़रूरी लगती हैं पर ज़िंदगी में कुछ जोड़ती नहीं.
जैसे –
_ लोग क्या कहेंगे — बिना ये देखे कि वो लोग खुद क्या और कैसे जी रहे हैं ?
_ तुलना [Comparison] — किसी और की reel से अपनी real life तौलना.
_ स्टेटस [Status] और image [इमेज ] की चिंता — जबकि अंदर सब बिखरा है.
_ Future का बेकार anxiety — जिस पर हमारा control ही नहीं.
_ Past को बार-बार घूमना — जिससे कुछ सीखा नहीं जा रहा.
_ हर बात पर opinion देना — बिना experience के.
_ Busy दिखना — productive होने के नाम पर.
_ झूठी positivity — जब अंदर सब थका हो.
_ ज़रुरत से ज़्यादा समझना — लोगों को समझना ही नहीं चाहते.
Altu-faltu बात की पहचान simple है :
_ जो आपको ज्यादा शोर दे, पर जरा-सी भी स्पष्टता [clarity] न दे.
_ मेरे जैसे लोग अक्सर इसी शोर से थक जाते हैं..-
_ इसलिए ये कम बोलते हैं, गहरा सोचते हैं, और बेकार बातों से स्वाभाविक [naturally] रूप से दूर हो जाते हैं.!!





