वे इसे “बदलाव” कहते हैं। 
पर यह बदलाव नहीं—clarity है।
उनके अनुसार–
मुझमें पहले जैसा passion नहीं है।
मेरी priorities बदल गई हैं,
मेरे reactions भी।
पर सच तो यह है—
मैंने खुद को बदला नहीं है,
बस भीतर का Clutter साफ़ किया है। 
कुछ पुराने belief छोड़े, 
कुछ बेकार की Anxiety कम की 
कुछ रिश्तों की धूल झाड़ी,
कुछ पुरानी बातों का बोझ।
✓जब भीतर जगह बनती है– 
✓तो कुछ नया आने लगता है।
अब मन में ज्यादा free space है। 
पुरानी बातें कम अटकती हैं, 
नई सोच आसानी से साँस लेती है।
तो क्या मैं बदल गया हूँ? 

✓हाँ—
पर उस तरह नहीं
जैसे कोई पेड़ अपनी जड़ें बदल दे।
मैं तो बदला हूँ–
वैसे जैसे किसी पतझड़ के बाद
नए पत्ते आते हैं—

पेड़ तो वही रहता है– 
बस हरियाली नई हो जाती है।
~ Yu hi | बस यूँ ही
हम सब स्वभाव से ही planner हैं।
स्कूल ।करियर ।शादी ।बिज़नेस ।
फिटनेस । पैसों की सेविंग…
वो plan हमे तो perfect लगते हैं।
हम सब कुछ assume करते हैं।
सोचते हैं—अगर ये करूँगा, तो ऐसा होगा।
Life अक्सर गलत साबित करती है?
कभी अचानक बीमारी आ जाती है,
आर्थिक संकट, रिश्तों में धोखा।
कभी बस समय ही दिशा बदल देता है।
और सच यह भी है—
सबका अपना एक प्लान होता है।
दो प्लान crash होंगे तो एक टूटेगा।
प्लान ज़रूरी है–इसे flexible रखो।
Backup–
1st फेल तो 2nd या फिर 3rd।
प्लान बनाओ, ‘What if’ पर भी सोचो।
क्योंकि जीवन एक Ring ही है—
जीतेगा वही जो प्लान टूटने के बाद भी लड़ेगा।
अगली बार–
जब कुछ प्लान के हिसाब से न हो,
बस हल्की-सी
के साथ कहो—
“ठीक है…Round 2 शुरू।” 
– Yu Hi
मुझे अकेलापन पसंद है—
वहीं मैं सच में खुद से मिलता हूँ। 
कोई दर्शक नहीं, उम्मीद नहीं,
कोई performance का दबाव नहीं
बस मैं और मेरी साँसें
मेरे Raw Thoughts 
यही My safest place है। 
फिर भी मैं मिलनसार हूँ– 
मैं लोगों की ऊर्जा पढ़ता हूँ—
गर्मजोशी मिले तो खुल जाता हूँ, 
शांति मिले तो ठहर जाता हूँ, 
ज़िंदादिली मिले तो बहता हूँ। 
मैं mirror बन जाता हूँ— 
दिखावे से नहीं, सच में। 
कभी Outspoken हो जाता हूँ—
•जब space मिलता है,
•जब बात सुनी जाती है,
•जब चुप रहना गलत लगता है। 
कभी Calm हो जाता हूँ— 
जब शोर ज़्यादा हो,
और सुनने वाला कोई न हो।
हाँ, मैं थोड़ा बदलता हूँ… 
पर रंग बदलने के लिए नहीं,
उस पल को सच में जीने के लिए।
शायद इसी वजह से
कभी-कभी थक भी जाता हूँ… 
अपनी ही rhythm खो देता हूँ।
पर एक बात साफ़ है—
मैं खुद को सबसे अच्छे से
अकेले में ही समझ पाता हूँ। 
कभी-कभी लगता है— 
मैं इंसान नहीं
चलता-फिरता आईना ज़्यादा हूँ…
जो सबको
उनका सच दिखाता है—
और अपना सच
सिर्फ़ अकेले में देख पाता है। 
– Yu Hi
आजकल खुशी का मतलब—
नया फोन, नई गाड़ी, बड़ा घर।
जितना ज़्यादा, उतना बेहतर…
जितना महंगा, उतना खुश।
फिर भी—
सब Sad/Stressed/Scared
और अंदर से खाली क्यों हैं??
मैंने थोड़ा अलग रास्ता चुना है।
चीज़ें जोड़ने से ज़्यादा–
मैंने खुद को संभालना सीखा है।
जहाँ दुनिया “और” ढूँढ रही है–
मैंने “काफी है” में खुशी ढूँढता हूं।
मेरे लिए—
कम होना कमी नहीं, हल्का होना है।
मैं Enough की जगह पर खड़ा हूँ।
और हाँ—
ये Escape नहीं है।
मैं अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहा हूँ,
और निभाई भी हैं।
बस इतना बदला है—
अब मैं उन के नीचे दबा नहीं,
conscious होकर जी रहा हूँ।
मैं उस race से बाहर हूँ—
जहाँ सब भाग रहे हैं…
पर मंज़िल किसी को नहीं मिलती।
ये सादगी मजबूरी नहीं, चुनाव है।
मैं यहीं हूँ—

थोड़ा शांत, थोड़ा हल्का…
और सच में खुश हूँ।
Yu Hi
जब आपके पास कुछ नहीं होता—
न पैसा, न सपोर्ट, न बैकग्राउंड…
और फिर भी आगे बढ़ते हो—
बस यहीं से समस्या शुरू होती है।
आप उनकी कहानी को झुठलाते हो।
जो failure का बहाना ढूंढते हैं।
मेरे पास chance नहीं था…
मेरे पास Resource नहीं थे…
आप prove करते हो—
Excuse जरूरी नहीं होते।
ये खुद को Privileged मानते हैं।
आप उन्हें challenge करते हो।
सोचते है ये आगे कैसे निकला?
Insecurity बाहर आती है।
Ego को चोट लगती है।
ये आपसे नफरत करते हैं।
ये Hate आपके हौसले से है।
उस संघर्ष से जो उन्होंने नहीं किया।
आपकी Success को किस्मत कहेंगे।
अंत में एक बात:
तुम्हारे पास कुछ नहीं था
और फिर भी कुछ कर दिखाया—
तभी तुम उन सबसे अलग हो गए।
तो चलते रहो—शांत, लगातार।
जो समझेंगे, वो साथ आएंगे।
तुम आगे बढ़ो–
बाकी लोग जलते रहेंगे।
ये उनका प्रॉब्लम है, तुम्हारा नहीं। 
– Yu Hi
हर इंसान एक किताब है।
हम सिर्फ कवर देखकर जज कर लेते हैं—
बिना पढ़े, बिना समझे।
कुछ का cover आलीशान होता है, कुछ सादे/ चमकते/ पुराने/ फटे हुए।
लेकिन असली कहानी तो अंदर है—
उस सफ़र में, जिसने उसे बनाया है।
हम मिलते ही Decision सुनाते हैं—
अकड़ू है। भाग्यशाली है।

नाकाम है। दिखावाटी है।

लेकिन उसकी journey नहीं देखी
जहां वो टूटा ,उसने खुद को जोड़ा।
और फिर भी रोज आगे बढ़ता रहा।
किसी की मुस्कान
के पीछे–
कई रातों की anxiety छुपी होती है।
हम “अभी” देखते हैं, “कल” नहीं।
आँसू जो किसी को पता ही नहीं।
मेहनत जो किसी ने देखी ही नहीं।
ये सब समझना सही में difficult है।
अगली दफा थोड़ा ध्यान दे, ठहरे।
हर इंसान की अपनी एक कहानी है।
और वो सुनने लायक होती है—
बस हमें सुनने का दिल चाहिए। 
– Yu Hi
पहले मुझे लगता था—
ज़िंदगी जीतने के लिए race ज़रूरी है।
ज़्यादा काम, ज़्यादा कमाई, ज़्यादा नाम।
अब लगता है—
असली जीत तब होगी
जब मैं रुककर साँस ले सकूँ,,
और मन कहे—
“बस यार… अब जीने का वक़्त है।”
ये आलस नहीं selection है।
अब मैं चीज़ों को चुनता हूँ सहता नहीं।
जो मुझे ज़िंदा महसूस कराए—
वो ही रख रहा हूँ। 
बाक़ी सब—धीरे-धीरे छोड़ रहा हूँ…
No Guilt, No Regret
समय कम है, ये तो सच है–
इसी सच ने मुझे free किया है।
अब समझ आया—
खाली दिन भी एक उपलब्धि है।
अपने लोगों का साथ productivity है।
और कभी-कभी—
अपना साथ ही सबसे बड़ा goal है।
Life वो नहीं जो सिर्फ काम करके गुज़ारी।
बल्कि वो है जो मैने जीकर छोड़ी।
अब Target साफ़ है—
कम काम, ज़्यादा मुस्कान।
कम hustle, ज़्यादा presence।
कम achievements, ज़्यादा यादें।
और ये सफ़र…
अब जल्दबाज़ी में नहीं—
पूरी तरह जीकर पूरा करना है।
– Yu Hi
दुनिया जटिल होती जा रही है—
मैं जानबूझकर सरल बनता जा रहा हूँ।
लोग मुझे अलग समझते हैं…
पर सच में, मैं बस दिखावा नहीं करता।
मैं वही कहता हूँ–
जो सच में Feel करता हूँ—
बिना चेहरे पर दूसरा रंग चढ़ाए।
कोई पूछे “कैसा है?”
तो सच बताता हूँ…जितना हूँ, उतना ही।
Life को भी
मैं उसी तरह लेता हूँ—
बिना Philosophy या Show off
मुझे खुशी मिल जाती है—
बारिश की भीगी महक में,
सुबह की पहली रोशनी में…
कुछ देर–
बिना phone के बैठने में,
अपनी साँसों को महसूस करने में।
दुनिया आज खुद को
Complex बनाती जा रही है—
लेयर्स पर लेयर्स, इमेज पर इमेज…
मैं ऐसा हूँ, मैं वैसा हूँ– शोर बहुत है।
मुझसे ये सब नहीं होता…
मैं बस वही हूँ— जो हूँ।
सरल होना मतलब—
कम में रहना नहीं, कम में खुश रहना है।
शायद इसलिए–
कुछ लोगों को मैं “अलग” लगता हूँ…
क्योंकि आजकल—
सरल होना ही सबसे बड़ा revolt है।
मैं अलग नहीं हूँ बस उतना सरल हूँ,
जितना लोग होना भूल गए हैं। 
– Yu Hi





