जीवन मे अन्याय और झूठ का सहारा लेकर जीवन यापन करना बहुत ही बड़ा अपराध है.
इस दुनिया में नरक कोई दूसरी जगह नहीं है,
_ नरक वो है.. जहाँ इंसान अपने अपराधों के साथ बिना अपराधबोध के जीना सीख ले.
किसी और की छाया में खड़े होकर खुद को ‘बड़ा’ समझना आसान है,
_ पर असली मजा तो तब है.. जब छोटी सी छाया भी खुद की हो.!!





