निर्णय लेते समय ना ज़्यादा खुश हों, ना ज़्यादा दुखी हों,
_ दोनों परिस्थितियां आपको सही निर्णय लेने नहीं देती.
हर कोई निर्णय लेने वाला बन रहा है..
_ लेकिन अपने जीवन में, वे सही निर्णय लेना भूल गए हैं.!!
हमारे निर्णयों पर अक्सर हमारी कमियाँ हावी हो जाती हैं, और जब हम असफल होकर तन्हा खड़े होते हैं, तो अंतर्मन में उतरकर खुद से सवाल करने के बजाय हम इल्ज़ामों की तलाश में भटकते रहते हैं.. ये सब मैं समझता हूँ, जानता भी हूँ फिर भी अजीब है कि इतना ज्ञान खुद के लिए कभी उतना मददगार नहीं बन पाता, जितना दूसरों को समझाने में बन जाता है.!!




