कोई कितना भी बोले अपने आप को शांत रखो,
_ क्योंकि धूप कितनी भी तेज हो, समुद्र को सुखा नहीं सकती.
समुद्र के सिरहाने खड़े होकर लगा कि हमें अपनी सीमाएं ख़ुद निर्धारित करनी चाहिए.
_ हर द्वार खटखटाने की आवश्यकता नहीं होती, हर बात स्वीकारने योग्य नहीं होती, और हर लड़ाई लड़ने लायक नहीं होती.
_ ऊँची आवाज़ से अधिक मूल्य शांति का होता है.
_ कठोर समय में मौन और धैर्य सबसे प्रभावी साधन साबित होते हैं— यह बात किताबों से नहीं, अनुभव से सीखी जाती है.
_ समय का प्रवाह अपनी गति से गांठें खोल देता है, मनुष्य का शोर नहीं.
_ इन्हीं दिनों कई गहरे और अच्छे लोग भी मिले, व्यवहार में विनम्र, उनके साथ समझ आया कि अच्छाई हमेशा बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि छोटे- छोटे, शांत कर्मों में होती है.
_ एक व्यक्ति से मिला जिनके लिए हुई एक छोटी सी कोशिश ने उनका जीवन बदल दिया.
_ इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने सिखाया कि कैसा नहीं होना चाहिए और कौन-सी दिशा मनुष्य को खोखला बना देती है.
_ यह आवश्यक सीख है—क्योंकि अनुभव केवल प्रेरणा से नहीं, निषेध से भी निर्मित होता है.
_ ख़ैर ! जीवन में बहुतेरी तरंगें आती-जाती रहती हैं, पर मनुष्य को समय-समय पर समुद्र की तरह अपने अस्तित्व में स्थिरता का अभ्यास करना चाहिए.!!
– Anjum Sharma






