सुविचार – 2026 नया साल – 4762

“..अलविदा 2025”..
तुम्हारे साथ कि बहुत खट्टी मीठी बातें, जो इस साल ही घटी.. बहुत कुछ सिखाया तुमने.!
“2025 में मैंने कुछ नया जोड़ने की कोशिश नहीं की ;

_ बस जो अनावश्यक था, उसे गिरने दिया..- और उसी में हल्कापन मिला.”

हर बीतता साल मेरे भीतर अपना एक हिस्सा छोड़ जाता है..

_ कभी किसी अधूरी ख़्वाहिश के रूप में, कभी किसी सीख की तरह, तो कभी ऐसी याद बनकर.. जो चुपचाप मेरे स्वभाव में घुल जाती है.
_ वक़्त गुजरता नहीं, बस जमा होता जाता है, और मैं हर साल के साथ थोड़ा कम मासूम, थोड़ा ज़्यादा समझदार और थोड़ा और ख़ामोश हो जाता हूँ.!!
अब नए साल में, मुझे पुरानी चीजों और पुरानी यादों से छुटकारा पाने का मन कर रहा है.

_ नए साल के आगमन के साथ, ऐसा लग रहा है कि आज की सुबह कल से बिलकुल अलग है.
_ ‘अतीत बीत चुका है;..
_ “एक नई सुबह, और एक नया दृष्टिकोण”
_ जीवन में नई ऊर्जा, नई इच्छाएं और नया उत्साह.!!
साल का पहला दिन बिल्कुल उम्मीदों जैसा ही रहा न कुछ ऐसा जो आसमान छू जाए, न कुछ ऐसा जो दिल को तोड़ दे..

_ बस एक ठहरी हुई सी शुरुआत, जहाँ न खुशी शोर मचाती है और न ही उदासी हावी होती है..- शायद यही संतुलन आने वाले दिनों का संकेत है.!!
हर साल जनवरी के महीने में कुछ समय के लिए, पता नहीं क्यों, एक अजीब सी उदासी मेरे मन को घेर लेती है.. बिना किसी ठोस कारण के, सब कुछ फीका और नीरस लगने लगता है, _ मानो नए साल की शुरुआत भी कहीं न कहीं भीतर खालीपन छोड़ जाती है.!!
“तारीखों में क्या रखा है, वक्त बदलने के लिए, एक पल ही काफी है..”
2026

_ “कम शोर, ज़्यादा सच”
_ “तेज़ नहीं, सही”
_ “छोड़ना भी आगे बढ़ना है”
_ “हर बात ज़रूरी नहीं”
_ “संतुलन ही प्रगति है”
_ “भीतर साफ़, बाहर सरल”
_ “आज ठीक है”
_ “कम चाहिए”
_ “चुप भी जवाब है”
_ “खुद के पास लौटो”

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