*कठिनाइयां” जब आती हैं* *तो “कष्ट” देती हैं* *पर जब जाती हैं*
*तो “आत्मबल” का ऐसा उत्तम उपहार दे जाती है*
*जो उन “कष्टों” “दुःखों” की तुलना में “हजारों” गुना “मूल्यवान” होता है*
*तो “आत्मबल” का ऐसा उत्तम उपहार दे जाती है*
*जो उन “कष्टों” “दुःखों” की तुलना में “हजारों” गुना “मूल्यवान” होता है*