What can we really do ?
हम इस उम्मीद के साथ जीते हैं कि हमारे माता-पिता, दोस्त और दुनिया हमें समझे और हमारा समर्थन करे
_यह समझने की अपेक्षा [ expectation ] रखना सबसे बड़ी गलती है जो हम कर सकते हैं.
_सच तो यह है कि कोई भी ठीक-ठीक यह नहीं समझ सकता कि हम क्या करना चाहते हैं और कैसे अपना जीवन जीना चाहते हैं.
_लोगों को केवल इस बात का अंदाजा हो सकता है कि जीवन में चीजों को कैसे करना है.
_यह उम्मीद न करें कि दुनिया भी आपका समर्थन करेगी.
हम वास्तव में क्या कर सकते हैं ? What can we really do ?
हम सभी को आत्म-जांच [ self inquiry ] की अपनी यात्रा या हमारे पास जो भी लक्ष्य [ whatever goals ] हैं उन्हें जीने की कोशिश अकेले ही शुरू करनी होगी.
_और यदि हम स्वयं के प्रति ईमानदार हैं और जो हम करना चाहते हैं उसे करने के लिए सभी प्रयास करते हैं.
तो दो चीज़ें होंगी: —-
पहली: आप दुनिया की मान्यता नहीं तलाशेंगे क्योंकि आप जो करना चाहते हैं उसे करने में बहुत व्यस्त हैं.
you will not seek validation of the world because you are too busy doing what you want to do.
दूसरा है: दुनिया अनुशासन का सम्मान करती है.
यदि आप लंबे समय तक बहुत जुनून के साथ कुछ करते हैं, तो दुनिया यह देखेगी कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो आपके लिए सार्थक है.
इससे उन्हें अपने जीवन के लक्ष्य [ life goals ] दिखेंगे.
_वे अभी भी समझ नहीं पाएंगे कि आप क्या कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वे स्वीकार करेंगे कि _आप क्या कर रहे हैं _क्योंकि वे आपका दिल और जुनून देखेंगे.
इसलिए, यदि आप कुछ करना चाहते हैं, तो करें. भले ही कोई आपको समझे या न समझे.
so, if you want to do something, do it. Whether someone understands you or not.
एक प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी ऊर्जा का उपयोग करता है और एक सामान्य व्यक्ति इसे अत्यधिक सोचने और शिकायत करने में बर्बाद कर देता है.
There is no difference between an extraordinary human and the an ordinary – except how they utilise their energy.
A genius use the energy and an ordinary person waste it in overthinking and complaining.
_ हम अपने जीवन की जिम्मेदारी किसी और को सौंप देते हैं.
_ हम ऐसा इसलिए कहते हैं ..क्योंकि हमारे दुख के लिए हमारे माता-पिता, मित्र, समाज, व्यवस्था, शिक्षा, मन जिम्मेदार हैं.
_ दोष किसी और पर मढ़ने के लिए ..हमारे पास सैकड़ों बहाने और तर्क हैं.
_ लोग अक्सर कहते हैं: अगर यह स्थिति बदल जाए या कोई निश्चित तरीके से व्यवहार करना शुरू कर दे, तभी मुझे खुशी होगी.
_ लोग एक के बाद एक बहाने बनाते हैं और एक काम करने के अलावा ..कुछ भी और सब कुछ करते हैं: सिवाय “जीवन की जिम्मेदारी लेना”
_ हम काम तो करते हैं ..लेकिन अपने कार्यों के परिणामों को अपने ऊपर नहीं लेना चाहते.
_ अगर हम यह कहने लगें: यह मेरा जीवन है और मैं अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं.
_ केवल इस कथन [statement] से 70-80% कष्ट दूर हो जाते हैं और बाकी स्वयं पर काम करने [ working on the self] से पूरा हो जाता है.
_ जब तक हम दुनिया को दोष देते रहेंगे,
_हम खुश या शांतिपूर्ण नहीं रह सकते.
_ सब कुछ कथन [statement] से शुरू होता है:
_ “मैं अपने जीवन के लिए जिम्मेदार हूं.”
_हम किसी पर भरोसा नहीं करते.
_न माँ-बाप अपनी संतान पर न संतान अपने माँ-बाप पर.
_सहोदर अपने ही भाई-बहन पर भरोसा नहीं करता.
_बीवी को शौहर पर भरोसा नहीं न शौहर को अपनी बीवी पर.
_मित्र मित्र पर भरोसा नहीं करता.
_भरोसे की इस कमी से समाज टूट रहा है.
_मैं सभी पर भरोसा कर लेता हूँ तो लोग कहते हैं, “आप बुद्धू हो”.. पर मैं करता हूँ.
_मैंने जिसे अपना माना ..वह कितना भी मेरा भरोसा तोड़े ..पर मैं नहीं तोड़ता..!!
_ वे जीवन के सामान्य परिभाषित तरीके से बंधे नहीं रहे. [They did not stick to the normal defined way of life.]
_वे बहुमत के विचार से सहमत नहीं थे. [They didi not settle with the idea of majority.]
_उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी की सुरक्षा के जाल को तोड़ने का फैसला किया. [They chose to break the net of safety of everyday life.]
–यदि आप चाहते हैं कि जीवन आपके साथ घटित हो, तो आपको जीवन को चुनना होगा. [If you want life to happen to you, then you need to choose life.]
_ आपको अपने दिल की पुकार सुनने की ज़रूरत है. [You need to listen to the call of your heart.]
_दिल की पुकार सुनने का मतलब दुनिया भर में घूमना या यात्रा करना नहीं है. [Listening to the call of heart doesn’t mean wandering or traveling around the world.]
_बहुत से लोग स्वतंत्रता को पर्यटन स्थलों की यात्रा समझने में भ्रमित कर देते हैं. [Lot of people confuse freedom with traveling to touristy spots.]
_आप जो हैं उसके प्रति पूरी तरह सच्चा होना ही स्वतंत्रता है. [Freedom is being fully truthful to who you are.]
_स्वतंत्रता का अर्थ है अपनी क्षमताओं का सम्मान करना. [Freedom means honouring your abilities.]
_ख़ुशी का एक रहस्य है – अपना सब कुछ इस विचार पर लगा देना कि “आप कौन हैं.” [There is one secret- to happiness – to give your everything to the idea of “who you are”.]
_आप कैसे जीना चाहते हैं, इसकी प्रक्रिया में अपना सारा ज्ञान और प्रयास लगाना. [Putting all your knowledge and effort into the process of how you want to live.]
— हम जो जीवन जीना चाहते हैं उसकी कीमत हमें चुकानी होगी. [We have to pay the price for the life we want to live.]
_ आपको नजारे का आनंद लेना है तो आपको पहाड़ पर चढ़ना होगा, पहाड़ पर चढ़ने के लिए आपका स्वस्थ शरीर होना जरूरी है, स्वस्थ शरीर के लिए आपको रोज सुबह उठना होगा- कुछ घंटे व्यायाम, दौड़, ध्यान में लगाएं. [You want to enjoy the view, then you have to climb the mountain, to climb the mountain, you need to have a healthy body, for a healthy body, you need to wake up every morning- put some hours of exercise, running, meditation.]
_ आप जो कुछ भी करते हैं वह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कैसे जीना चाहते हैं. [Everything you do count towards how you want to live.]
_ जब तक आप जीवन के बाहरी आराम से बाहर नहीं जाते, तब तक आपको आंतरिक आराम नहीं मिलेगा. [As long as you don’t go out of outer comfort of life, inner comfort won’t happen to you.]
चुनाव पूरी तरह आपका है, मेरे दोस्त. [The choice is entirely yours, my friend.]
मेरे विचार और मेरा विवेक मेरे साथी हैं और मैं उन्हें किसी भी दबाव में नहीं छोड़ने वाला. My thoughts and my conscience are my companions and I am not going to leave them under any pressure.
_ चाय, फूल और सम्मान सब स्वीकार करें.
_ लेकिन क्या हम यह स्वीकार कर सकते हैं कि जब कोई दरवाजा नहीं खोले, जब रास्ता कंटीला हो और लोग आपको संदेह की नजर से देखें.
_ मैं अपमान और सम्मान दोनों का हकदार नहीं हूं ..या मैं दोनों को जीवन यात्रा के हिस्से के रूप में स्वीकार करता हूं.
_ ऐसी स्वीकृति [Such acceptance] तब हो सकती है जब कोई हर समय पूरी तरह से जागरूक [totally aware] हो.
_ हम एक पल के लिए यह समझ [understanding] खो देते हैं और जीवन की इच्छा [ life’s desire] हावी हो जाती है.
_ और अगर इच्छाएं पूरी हो जाएं तो दुनिया अच्छी हो जाती है और अगर इच्छाओं पर ध्यान न दिया जाए तो बुरी हो जाती है.
_लोग हमारे मित्र बन जाते हैं यदि वे हमारी भावना और विचारों से मेल खाते हैं. [People become our friends if they match with our vibe and ideas.]
_और यदि वे हमारी बातों से सहमत नहीं हैं, तो हम उन्हें अब पसंद नहीं करते हैं.
— संक्षेप में, जीवन संघर्षों की एक शृंखला बन जाता है. [In a nutshell, life becomes a series of conflicts.]
_ जब हम जीवन की सभी घटनाओं को एक ही दिल से स्वीकार करना शुरू करते हैं, तो जीवन आसान हो जाता है, और आगे बढ़ना सांस लेने की तरह सहज हो जाता है.
_ दूसरी ओर, मैंने इसे महत्व देना बंद कर दिया है _ जब लोग मेरे कामों के बारे में कठोर शब्द कहते हैं तो _मैंने परेशान होना बंद कर दिया है.
_ मुझे लगता है कि _मुझे किसी भी अनुभव का कोई मतलब निकालने की जरूरत नहीं है.!!
_हमारे सभी दुखों का कारण भ्रम है.
_ और स्वयं का ज्ञान ही शांति है.
_ जब हम अपने आप को अंदर और बाहर समझते हैं, तो सभी संघर्ष एक साथ रह सकते हैं और अशांति नहीं होगी.
_और जीवन बिल्कुल एक नाटक बन जाता है.
_ इसलिए ज्ञान की तलाश करो ..शांति की नहीं.
_ एक बार जब हम जान जाते हैं, तो शांति पहले से ही मौजूद है.
—– हम उन चीज़ों को पकड़कर रखते हैं ..जो बदलने वाली हैं.
_हम लोगों से एक निश्चित तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद करते हैं.
_हम चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें समझें, लेकिन हम दूसरों को या यहां तक कि खुद को समझने की कोशिश नहीं करते.
_ जब तक आप अपना ध्यान खुद पर केंद्रित नहीं करते और खुद पर काम करना शुरू नहीं करते, तब तक निराशाओं का सिलसिला बना रहेगा.
——हम कष्ट क्यों सहते हैं ?
_ हमें इस बात से कष्ट नहीं होता कि लोग हमारे साथ कैसा व्यवहार करते हैं या दुनिया हमारे साथ कैसा व्यवहार करती है.
_ हम सोचते हैं कि ये सही है.. ..लेकिन हमारे दुखों के लिए कोई और नहीं ..बल्कि हमारा भ्रम जिम्मेदार है.
_ हमें इसलिए दुख होता है क्योंकि हम गलत [misunderstand] को सही समझते हैं.
_हम पीड़ित [victim] हैं ..क्योंकि इसके लिए हमने अपना मन बना लिया है.
_हम पीड़ित हैं पर औरो को दोष देते रहते हैं.
_ और बाहर खुश दिखने के लिए पीड़ितों और धोखेबाज़ों की भूमिका निभाना पसंद करते हैं.
_ वाक्य “सब कुछ ठीक है” के बाद हमेशा परंतु आता है.
_हर कोई कहता है “मैं ठीक हूं लेकिन कुछ तो है जो ठीक नहीं है.” – वो क्या है ?
_पूरा समाज इन्हीं प्रकार के व्यक्तियों से बना है और ये व्यक्ति कोई और नहीं ..बल्कि मैं और आप हैं.
_हम शांति और कई बड़े शब्दजाल के बारे में बात करते हैं.
_यदि प्रत्येक व्यक्ति के मानसिक मानस में गुटनिरपेक्षता और संघर्ष है तो ..शांति कैसे हो सकती है.
_यदि व्यक्तिगत शांति नहीं है तो ..सामाजिक शांति भी नहीं हो सकती.
_हम सद्भाव लाने और लोगों को एक साथ लाने के लिए कई कार्यक्रम और त्यौहार मनाते हैं.
_पार्टी ख़त्म होने के बाद ..शायद ही किसी को शांति मिलती है.
_चूंकि हर कोई किसी और की तरह है,
_आंतरिक संघर्ष होने पर ..हमें बाहरी शांति नहीं मिल सकती है.
_ यही कारण है कि संसार वैसा है ..जैसा वह है.
_ लोग बाहरी जीवन को सजाकर ..अपने आंतरिक जीवन को छिपाने की कोशिश करते हैं.
_ लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि बाहरी का निर्माण आंतरिक से ही होता है.
_ वास्तव में कोई आंतरिक और बाह्य नहीं है.
_हम अपने परिवार, दोस्तों, साथियों, समाज, पड़ोसी के साथ सामंजस्य [harmony] बिठाने में सक्षम नहीं हैं.
_हम बस संदिग्ध दोषियों पर अपना गुस्सा उतारने का एक अवसर चाहते हैं.
_सड़कों पर हम दूसरों से डरते हैं, बंद कमरों में हम अपने आप से डरते हैं.
_हम कहते हैं कि पूरी दुनिया जुड़ी हुई है और एक बड़ा परिवार है _लेकिन हमारे पास सीमाएँ हैं.
_ सामाजिक संघर्ष एक ऐसी चीज़ है ..जिस पर कम से कम हम सभी ..थोड़ी बहस के साथ सहमत हो सकते हैं.
_ एक ऐसा द्वंद्व है ..जिसके बारे में बहुत कम लोग ही चिंतन करते हैं.
_ वह संघर्ष प्रकृति के साथ ही संघर्ष है.
_हर दिन हम यह सोचकर प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाने की कोशिश करते हैं कि ..कोई नहीं देख रहा है.
_हम प्रकृति के नियमों के साथ नहीं जी रहे हैं.
_हालाँकि हमारे लिए यह समझना कठिन है कि प्रकृति क्या है.
_शायद प्रकृति से कुछ भी बाहर नहीं रखा गया है, शायद सब कुछ इसमें शामिल है.
_ एक ऐसी दुनिया में जो रात-दिन आपको अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश कर रही है.
_ हम क्या करेंगे ?
_क्या हम वह जीवन जीना जारी रखेंगे ?
_ या क्या हम उस जीवन को जीना जारी रखेंगे और उसमें अर्थ ढूंढेंगे और खुद को समझाएंगे या हम यह सब छोड़ देंगे ..क्योंकि यह एक बड़ा झूठ है और फिर से एक बच्चे की तरह तलाश करना शुरू कर देंगे ?
_ कोई भी इंसान जो इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता, उसे बस अपने लिए चीजों को आसान बनाना बंद कर देना चाहिए.
_ उसे अपने विवेक का अनुसरण करने दें, जो उसे पुकारता है: “तुम स्वयं बनो !”
_अभी आप जो कुछ भी कर रहे हैं, सोच रहे हैं, इच्छा कर रहे हैं, वह सब आप नहीं हैं.”
_ प्रत्येक आत्मा दिन और रात में इस पुकार को सुनती है और खुशी की उस डिग्री के उत्साह से कांपती है ..जो अनंत काल से उन लोगों के लिए तैयार की गई है ..जो अपनी सच्ची मुक्ति के बारे में सोचेंगे.
_ हालाँकि, किसी भी आत्मा को इस खुशी को प्राप्त करने में मदद करने का कोई तरीका नहीं है, जब तक कि वह दूसरों की राय और भय की जंजीरों में जकड़ी हुई है.
_और ऐसी मुक्ति के बिना जीवन कितना निराशाजनक और अर्थहीन हो सकता है.
_ प्रकृति में उस आदमी से बड़ा कोई दुःख या दुर्भाग्य नहीं है ..जिसने अपनी प्रतिभा को नजरअंदाज कर दिया है..
..और जो कभी दाहिनी ओर, कभी बायीं ओर, कभी पीछे की ओर, अब किसी भी दिशा में झुकता है.
_जिस क्षण आपने किसी और से प्रेम की इच्छा की, उसी क्षण आपने स्वयं को त्याग दिया. [You abandoned yourself the moment you desired love from someone else.]
_अपमानित और त्यागा हुआ वही व्यक्ति हो सकता है जिसके अंदर सच्चा प्यार नहीं है. [Only the one can be insulted and abandoned who does not have true love inside.]
जो बिना मांगे मिले उसे ग्रहण करो और दो क्योंकि यह तुम्हारा स्वभाव है और जब दो तो पूर्णविराम समझो, भूल जाओ कि तुमने कुछ दिया है. [Receive that comes without asking and give because it is your nature. And when you give, consider it a full stop, forget you have given something.]
_ मेरे जीवन में सबसे ख़ूबसूरत और गहरी चीज़ें तब घटित हुईं जब मैंने जीवन को गंभीरता के साथ नहीं बल्कि एक खेल के रूप में जीया. [Most beautiful and profound things happened in my life when I have lived life as a play and not with seriousness.]
_ गंभीरता से जीना सबसे बुरी बात है. [Living seriously is worst thing]
_ यह गलत समझ और विकृत विचारों के अलावा कुछ नहीं लाता है. [It brings nothing but wrong understandings and twisted ideas.]
_ केवल चीज़ें बनाने के लिए जीवन जीना भविष्य का उद्देश्य नहीं है. [Living life just to make things is not a purpose for the future.]
_ जब हम जीवन को खेल की तरह जीते हैं. [When we live life as play.]
_ हम एक समय में केवल एक क्षण खेलते हैं, बिना किसी इच्छा के और इसलिए चंचल जीवन साक्षीभाव का एक तरीका है. [We just play one moment at a time, desiring nothing and hence a life of playfulness is a way of witnessing.]
_ इससे जीवन जादुई ढंग से बदल जाता है. [This change life magically.]
_ वर्तमान का विवरण उपलब्ध हो जाता है और एक पूरी दुनिया एक ही गली में विद्यमान होने लगती है. [The details of present become available and a whole world start existing in a single street.]
_ फिर आप जहां भी हों, वह स्थान ईश्वर का राज्य है[Then wherever you are, that place is kingdom of God.]
_ या जो आपको घटिया, बेहूदा लगा ..वो दूसरे को भी ऐसा ही लगे.
_ पसंद, नापसंद अपनी अपनी होती है, और ये इंसान के इंट्रेस्ट, मिजाज़ पर डिपेंड करती है.
_ किसी को कोई फिल्म सीरीज अच्छी लगी और आपको नहीं ..तो क्या हुआ.
_ सबका अपना अपना मानसिक स्तर भी तो होता है.
_ कोई हमारी तरह नहीं सोचता.. तो क्या वो हिकारत से देखे जाने का हकदार है.
_ नहीं ऐसा नहीं है.
_ सिद्धान्त तो हम सहिष्णुता का बघारते हैं, लेकिन भाव हमारा यह होता है कि सब लोग वैसे ही सोचें, जैसे हम सोचते हैं और जब भी कोई हमसे भिन्न प्रकार से सोचता है ..तब हम उसे बर्दाश्त नहीं कर सकते.
_ जो दूसरे कर रहे हैं ..वही हम आप जैसे लोग करने लगेंगे तो ..क्या फर्क बचेगा ..उनमें और हम में..!!
_ हमें अपने को सरल और सहज रखना होगा.
_ हम अपने अंदर नफरत, हिकारत या दूसरों के लिए हीन भावना नहीं रख सकते.
_ अगर आपके अंदर ये सब है तो ..आप कुछ भी हो सकते हैं ..अच्छे इंसान नहीं..!!
_ इन्सान को ‘फील-गुड’ होने लगता है.
_ घर में प्रेम-व्यवहार हो तो और भी अच्छा लगता है,
_ लेकिन शांत जल में कोई-न-कोई कंकड़ टपक ही जाता है और लहरों में हाहाकार मच जाता है.
_ यह समझना बड़ा मुश्किल है कि जीवन में मधुरता कैसे बनी रहे ?
_ अच्छा करो तो बुरा वापस आता है और अगर बुरा करो तो बुरा वापस आना ही है.
_ इसका एक अर्थ यह निकलता है कि अच्छाई ‘वन वे ट्रेफिक’ है,
_ जैसे गुलाब के पौधे की कलम इस उम्मीद से जमीन में खोंसो कि एक दिन इसमें गुलाब के खुशबूदार फूल होंगे,
_ रोज खाद-पानी दिया..
_ वह बढ़ा और जंगली काँटेदार पौधा निकल गया,
_गुलाब का फूल कभी उगा ही नहीं..!!
_ बस बैठना, सांस लेना और आराम करना इतना मुश्किल क्यों है – बिना किसी बाहरी मदद की ज़रूरत के ?
_ तनाव सिर्फ़ मांसपेशियों में नहीं होता.. यह एक मानसिकता है, एक आदत.. पर्याप्त न होने या तैयार न होने का डर..
_ तनाव का मतलब है कि आप पहले से ही कल में जी रहे हैं,
_ ऐसे भविष्य का अभ्यास कर रहे हैं जो अभी तक नहीं हुआ है..
_ या इसका मतलब है कि आप अभी भी कल को घसीट रहे हैं.. जिसे आपने कभी पूरी तरह से नहीं जिया –
– ऐसे अजीवित पल जो लंबे समय तक बने रहते हैं और पूरे होने की मांग करते हैं.
_ कोई भी अनुभव जो पूरी तरह से नहीं जीया गया है, आपके अंदर चक्कर लगाता रहेगा, और पूछता रहेगा—“मुझे खत्म कर दो.. मुझे जियो.. मुझे आगे बढ़ने दो”
_ इसलिए हमें शरीर से शुरुआत करनी चाहिए.
_ रुकें.. अपना ध्यान अंदर की ओर ले जाएँ.
_ पूछें: मैं कहाँ जकड़ रहा हूँ ? जबड़े में ? कंधों में ? छाती में ?
_ फिर धीरे से वहाँ जाएँ.. अपनी आँखें बंद करें..
_ अपने शरीर के उस हिस्से से एक दोस्त की तरह बात करें:
_ “अब तुम छोड़ सकते हो.. “मैं यहाँ हूँ”
_ अगर आप अपने शरीर के साथ प्यार से पेश आते हैं, तो यह आपकी बात सुनता है.. आखिरकार, यह आपका है.
_ जब शरीर भरोसा करना शुरू करता है, तो आप देखेंगे कि कुछ और भी नरम हो जाता है- “मन’
_ लेकिन मन से शुरुआत न करें.. यहीं पर हममें से ज़्यादातर लोग असफल हो जाते हैं.
_ हम बीच से तूफ़ान को शांत करने की कोशिश करते हैं.. किनारे से शुरू करें.. शरीर से शुरू करें.
_ जब शरीर आराम करना सीखता है, तो मन उसका अनुसरण करता है और जब मन शांत होने लगता है, तो दिल खुल जाता है- यह भी सांस लेना शुरू कर देता है.
_ मेरे दोस्त, आराम करना छोड़ देने की कला है. बलपूर्वक नहीं, बल्कि प्रेम से.!!
— इसे याद रखें:
_ हमें एक समय में सिर्फ़ एक पल ही दिया जाता है.
_ इसलिए अच्छी तरह से जीने के लिए, हमें अपने पूरे जीवन का पता लगाने की ज़रूरत नहीं है – – हमें बस यह जानना है कि यहाँ और अभी पूरी तरह से कैसे मौजूद रहना है.
_ अगर हम इस पल का ध्यान रख सकते हैं, तो बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा.!!
NOTES :
“मेरा शरीर जाग चुका है, मैं उसकी सुखद गति में हूँ”
“हम हर चीज़ की शुरुआत मन से करते हैं, इसलिए असफल हो जाते हैं…जबकी शुरुआत शरीर से होनी चाहिए”
“मन को बदलने की चाह, मन से ही करना – एक चक्रव्यूह है :
– “शरीर से शुरू करो, सांस से शुरू करो – मन स्वयं पिघलने लगेगा”
_ कोई महान उद्देश्य, कोई दिव्य संकेत..
_ हम सोचते रहते हैं कि मैं ये करूँगा और फिर ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी.
_ इसके बाद, मैं अपनी मर्ज़ी से जी पाऊँगा.
_ लेकिन सच्चाई यह है कि यह सब पहले से ही यहाँ है.
_ पवित्रता किसी पहाड़ी गुफा या मंदिर के अनुष्ठान में नहीं है.
_ यह इस बात में है कि हम अपने हाथ कैसे धोते हैं, हम अपनी चाय कैसे बनाते हैं और बर्तन कैसे धोते हैं या हम कैसे जागते और सोते हैं, हम कैसे चलते हैं.
_ हमें अधिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, हमें अधिक उपस्थिति की आवश्यकता है.
_ यही पूरा अंतर है.. वही क्रिया – जागरूकता के साथ – पूजा बन जाती है.
_ जागरूकता के बिना, यह केवल दोहराव है – एक ऑटोपायलट.
_ हममें से ज़्यादातर लोग नींद में जी रहे हैं, यहाँ तक कि जब हम जाग रहे होते हैं,
_ लेकिन जिस पल आप अपनी साँस वापस ले लेते हैं, जिस पल आप यहाँ होते हैं, यहाँ तक कि कंबल मोड़ना भी एक तरह की प्रार्थना बन जाती है.
_ आपको कोई चोगा पहनने या संस्कृत में मंत्रोच्चार करने की ज़रूरत नहीं है.
_ आपको बस वहाँ होना चाहिए,, पूरी तरह से..
_ यही चीज़ किसी चीज़ को पवित्र बनाती है.
_ आप क्या कर रहे हैं, यह नहीं बल्कि आप इसे कैसे कर रहे हैं.. शांति के साथ, सतर्कता के साथ.. यही असली शिक्षा है.
_ आप अपना पूरा जीवन एक ही काम करते हुए जी सकते हैं – लेकिन अगर आप बदलते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.
_ जब आपका कार्य आपके ध्यान के साथ एक हो जाता है, तो आपको सत्य की तलाश करने की ज़रूरत नहीं होती.
_ यह आपके दैनिक जीवन में चमकने लगता है.!!
_ मुझे क्या छोड़ना पड़ा, मुझे क्या स्वीकार करना पड़ा, और आख़िरकार मुझे वो क्या बनाता है जो मैं हूँ-
_ मैंने बार-बार यह देखा है कि चुप रहना कमज़ोरी नहीं—यह ताक़त है.
_ जब मैं बहस करना या खुद को सही ठहराना बंद कर देता हूँ, तो खामोशी मेरे लिए बोलती है.
_ मैं अब कुछ साबित करने के लिए नहीं जीता.
_ मुझे पता है कि यही मेरा इरादा है और अगर दूसरा इसे नहीं देख पा रहा है, तो मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लूँ, मैं उसे यह नहीं दिखा पाऊँगा.
_ मैं किसी को यह समझाने की कोशिश नहीं करता कि मैं अच्छा हूँ.
_ मेरा सच कोई विज्ञापन नहीं, एक खुशबू है—चाहे महसूस हो या न हो.
_ मैंने उन चीज़ों के लिए अपराधबोध पालना छोड़ दिया है.. जो कभी मेरी थीं ही नहीं.
_ उस बोझ को लेकर क्यों चलूँ.. जो मैंने बनाया ही नहीं ?
_ जो मैंने तोड़ा ही नहीं, उसे मैं ठीक नहीं करता या उसका दोष अपने ऊपर नहीं लेता.
_ कभी-कभी प्यार और परवाह का मतलब होता है.. दूसरों को उनके अपने अँधेरे से रूबरू होने देना.
_ मैं अपनी कीमत दिखाने के लिए संघर्ष नहीं करता..
_ अगर यह खुद नहीं चमकती, तो कोई भी तर्क इसे कभी ज़ाहिर नहीं कर पाएगा.
_ मैं दूसरों को अपनी पसंद खुद चुनने देता हूँ..
_ उनका रास्ता उनका है, मेरा अपना है..
_ मैं बस इतना कर सकता हूँ कि बिना दोष लिए उनके साथ रहूँ.
_ और अब, मैं बस एक ही बात पूछता हूँ—क्या मैं उस व्यक्ति का सम्मान कर सकता हूँ.. जिसे मैं आईने में देखता हूँ ?
_ जब जवाब हाँ होता है, चाहे थोड़ा सा ही क्यों न हो, तो मुझे पता है कि मैं सही रास्ते पर चल रहा हूँ.
_ आज़ादी दुनिया को समझाने में नहीं है… “आज़ादी खुद के साथ शांति से रहने में है” – Sachin
_ हमें लगता है कि लोग हमें देख रहे हैं, हमारे फैसलों को आंक रहे हैं, हमारे कदमों को नाप रहे हैं.. – पर यहाँ किसी को परवाह नहीं.
_ हर कोई अपने संघर्षों में खोया हुआ है, अपने मुखौटे पहने हुए व्यस्त है. _ सबसे बड़ा भ्रम कभी बाहर नहीं होता- वो हमारे अंदर होता है, हम खुद अपनी जेल बन गए हैं. _ हम नाच सकते थे, हम गा सकते थे, हम बेखौफ, खामोश, जैसा हमारा दिल चाहता, जी सकते थे. _ लेकिन हम ऐसा नहीं करते और दुनिया की नज़रों को दोष देते हैं.
_ आज़ादी हमेशा हमारी पहुँच में होती है, लेकिन हम उस इजाज़त का इंतज़ार करते रहते हैं जो कभी नहीं मिलती.
_ एक दिन, शायद बहुत देर हो चुकी होगी, हम सब देख लेंगे: कोई नहीं देख रहा था.
_ और उस पल, अफ़सोस डर से भी ज़्यादा भारी लगेगा..
_ तो आइए हम दर्शकों के लिए न जिएं.
_ आइए हम किसी और के होने का दिखावा करके न जिएं.
_ आइए हम कच्चे तौर पर जिएं, आइए हम सच्चे तौर पर जिएं, आइए हम अभी जिएं.
_ आइए हम अपनी सच्चाई जिएं- भले ही उसमें खामियां हों, लेकिन अगर आप अपनी यात्रा के प्रति ईमानदार हैं, तो वो आपको सही रास्ते पर ले आएगी.
_ क्योंकि एक ऐसी दुनिया में, जो हमें लगातार किसी और में बदलने की कोशिश कर रही है, स्वयं बने रहना ही सबसे बड़ा साहस है और यही वास्तविक यात्रा है.!!
-SACHIN
_ समस्याएं तभी उत्पन्न होती हैं जब हम स्वयं में केंद्रित नहीं होते.
_ जब तक आप खुद का सामना करने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक आपको सच्चा जीवन नहीं मिल सकता.
_ जब तक आप स्वयं को पूरी तरह समर्पित नहीं करते, आप सतही ही रहते हैं.
_ गहराई में जाने के डर ने हमारे जीवन को सतही और असुरक्षित बना दिया है.
_ एक सच्चे जीवन के लिए गहरी जड़ों की आवश्यकता होती है.
_ हम इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि हमने अपने ज्ञान के प्रति सच्चाई नहीं दिखाई है.
_ अंततः सभी विचार व्यर्थ हो जाते हैं… विचार तो बस मनुष्य की बनाई हुई वस्तु है, ठीक वैसे ही जैसे चार दीवारों और छत वाला घर, जो अंत में ढह जाता है.!!
– Sachin
_ एक मन अनुशासन का पालन करना चाहता है.
_ दूसरा मन इसे तोड़कर स्वतंत्रता के साथ भ्रमित करना चाहता है.
_ इसी ने लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचा दी है.
We are trying to split one mind in twos. The one mind wants to follow the discipline. The other wants to break it & confuse it with freedom. This alone has created a mess in ones’s life.
– SACHIN
_ वृक्ष शहरों की तरह बातें नहीं करते.
_ वे आपसे आपका नाम, आपकी महत्वाकांक्षा या आपका धर्म नहीं पूछते.
_ वे बस मौन और ध्वनि की उस भाषा में फुसफुसाते हैं जिसका कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है.
_ प्रकृति अपने मूल रूप में मात्र एक स्थान नहीं है- यह एक द्वार है.
_ एक ऐसा गहरा मौन कि आपकी धड़कन भी आपके भीतर गूंजने लगती है.
_ वहीं, इस उन्मादी भीड़ से दूर, आप वह सुनना शुरू करते हैं जो हमेशा से सुनने की प्रतीक्षा कर रहा था – आपका अपना सच्चा स्वरूप.
_ यह आपको आपकी परेशानियों और उनसे छुटकारा पाने के तरीके बताएगा.
_ प्रकृति की कोई महत्वाकांक्षा नहीं होती.
_ एक झरना रेगिस्तान बनने की कोशिश नहीं करता.
_ एक चीड़ का पेड़ सेब का पेड़ बनने की इच्छा नहीं रखता.
_ वे संतुष्ट हैं, पूरी तरह से अपने आप में हैं और अपने अस्तित्व में, वे आपको सबसे बड़ा सबक सिखाते हैं: बस मौलिक बनो.
_ हमारे जीवन में जो शोर हम महसूस करते हैं वह केवल ध्वनि नहीं है – शोर विचार, निर्णय, तुलना और निरंतर क्रिया है.
_ व्यवस्था ने हमें कुशल तो बना दिया है, लेकिन शांति नहीं दी.
_ हमने दौड़ना तो सीख लिया है, लेकिन यह भूल गए हैं कि हम कहाँ जा रहे हैं.
_ आपको खुशी किसी पिज्जा की दुकान, थिएटर या बार में नहीं मिल सकती.
_ लेकिन आप इसे जंगल की शांति में, पक्षी के गीत में या नदी की लय में पा सकते हैं.
_ यह बहुत आसान है.
_ जब आप जंगल में जाते हैं, तो आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं – शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से.
_ आपकी पहचान, आपका नाम, आपकी शिक्षा, आपका अतीत, सब कुछ सूरज की गर्मी में बर्फ की तरह पिघलने लगता है.
_ जंगल आपको नंगा कर देता है, और उस नंगेपन में आप किसी पवित्र चीज को छूते हैं.
_ ध्यान पत्तों के बीच की खामोशी को सुनने की कला है, पक्षियों की चहचाहट के बीच के विराम को, हवा चलने से पहले की शांति को.
_ और उस सुनने में, आपके भीतर कुछ प्रकृति की इच्छा के साथ तालमेल बिठाने लगता है.
_ जंगल शब्दों में नहीं बोलता.
_ वह अपनी उपस्थिति से बोलता है.
_ और जितना अधिक आप उसके साथ बैठते हैं, उतना ही भीतरी शोर घुल जाता है- जैसे सुबह के सूरज से पहले की धुंध.!!
– Sachin





