Rahul Kumar Jha

मैंने जीवन में एक आदत बहुत देर से छोड़ी लोगों को देखकर उनके बारे में निर्णय बना लेना.

_ पहले मुझे लगता था कि जो दिखाई देता है, वही सच है.

_ जो व्यक्ति बार-बार एक ही रास्ते पर जाता है, वह उसी मंज़िल का मुसाफ़िर होगा.

_ जो लोगों की नज़रों में गलत है, वह सचमुच गलत ही होगा.

_ फिर जीवन ने मुझे सिखाया कि आँखें दृश्य देखती हैं, लेकिन सत्य नहीं._ सत्य अक्सर वहाँ रहता है, जहाँ हमारी नज़र पहुँचती ही नहीं.

_ तब से मैंने किसी भी इंसान पर अंतिम निर्णय देने से पहले अपने भीतर एक प्रश्न जगाना शुरू कर दिया…”क्या पता मैं गलत हूँ ?”

_ क्या पता जिस व्यक्ति को मैं पापी समझ रहा हूँ, वह किसी और के पापों का बोझ अपने सिर पर लेकर चल रहा हो.

_ क्या पता जिसे मैं स्वार्थी समझ रहा हूँ, उसने अपना सबसे सुंदर हिस्सा किसी अनजान इंसान की ज़िंदगी सँवारने में खर्च कर दिया हो.

_ क्या पता जिसे मैं गिरा हुआ मान रहा हूँ, वह किसी और को गिरने से बचाने के लिए स्वयं गिरा हुआ दिखाई देना स्वीकार कर चुका हो.

_ जीवन ने मुझे यह भी समझाया कि सबसे गहरे त्याग कभी मंचों पर नहीं होते.

_ उन पर तालियाँ नहीं बजतीं, उनके लिए समाचार नहीं लिखे जाते, उनके सम्मान में स्मारक नहीं बनते.

_ वे त्याग चुपचाप होते हैं…

_ इतने चुपचाप कि दुनिया उन्हें गलत समझ बैठती है.

_ हम अक्सर किसी इंसान की पूरी कहानी उसके जीवन के एक दृश्य से लिख देते हैं.

_ हम उसके संघर्ष नहीं देखते, केवल उसका परिणाम देखते हैं._ हम उसके घाव नहीं देखते, केवल उसका व्यवहार देखते हैं.

_ हम उसकी नीयत नहीं पढ़ते, केवल उसके कदमों का रास्ता देखते हैं.

_ और यहीं हम सबसे बड़ी भूल कर बैठते हैं.

_ क्योंकि संसार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी प्रतिष्ठा बचाने के बजाय किसी और की इज़्ज़त बचा लेते हैं.

_ वे सफ़ाई दे सकते हैं, लेकिन नहीं देते.

_ वे सच बता सकते हैं, लेकिन चुप रहते हैं.

_ वे सम्मान पा सकते हैं, लेकिन किसी और का भविष्य उनसे अधिक मूल्यवान होता है.

_ ऐसे लोग दुनिया की नज़रों में हार जाते हैं, लेकिन ईश्वर की दृष्टि में वही सबसे ऊँचे खड़े होते हैं.

_ अब मैं समझ चुका हूँ कि किसी इंसान की महानता इस बात से नहीं मापी जा सकती कि लोग उसके बारे में क्या कहते हैं.

_ महानता तो वहाँ जन्म लेती है, जहाँ कोई व्यक्ति सही काम करता रहता है, भले ही पूरी दुनिया उसे गलत समझती रहे.

_ इसलिए अब मैं किसी पर उँगली उठाने से पहले अपने भीतर झाँकता हूँ.

_ क्योंकि मैंने सीखा है कि निर्णय देना आसान है, समझना कठिन.

_ आरोप लगाना सरल है, करुणा रखना दुर्लभ.

_ और शायद मनुष्य की सबसे बड़ी परिपक्वता यही है कि वह हर चेहरे के पीछे छिपी उस अनकही कहानी की संभावना को कभी मरने न दे.

_ हो सकता है जिसे मैं आज दोष दे रहा हूँ, वही कल मेरी इंसानियत का सबसे बड़ा पाठ निकले.

_ इसलिए अब मैं लोगों को उनके बारे में सुनी हुई बातों से नहीं, बल्कि अपनी करुणा की आँखों से देखने की कोशिश करता हूँ.

_ क्योंकि जीवन ने मुझे एक ऐसा सत्य सिखाया है जो शायद हर युग में अमर रहेगा…

_ हर दिखाई देने वाला सत्य, पूरा सत्य नहीं होता.

_ और कई बार…

_ सबसे पवित्र आत्माएँ वही होती हैं, जिन्हें दुनिया सबसे पहले अपवित्र घोषित कर देती है.

Rahul Kumar Jha

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“अब कुछ समझ नहीं आता”
_ अब कुछ समझ नहीं आता, जहाँ भी जाऊँ, चैन नहीं आता.
_ जिस मंज़िल की चाह थी दिल में, वहीं पहुँच कर सुकून नहीं आता.
_ पल बीत रहे हैं सैकंडों की तरह, हर रोज़ एक सा लगता है अब हर पहर.
_ कौन अपना है, कौन पराया, इस सवाल का जवाब कभी नहीं आया.
_ रिश्ते पुराने हो गए हैं अब, जैसे किसी पुराने बर्तन पर जंग लग गई हो सब.
_ अब उन रिश्तों को संभालना मुश्किल है, लड़ने की हिम्मत भी कम हो गई है.
_ कभी बच्चों को हँसते-खिलखिलाते देखा, अब वही बच्चे हमें चुप-चुप सा देख रहे हैं.
_ हमने उन्हें बड़ा किया प्यार से, अब वो हमें बूढ़ा बना रहे हैं वक़्त के भार से.
_ कौन सही है, कौन गलत – ये अब हालात तय करते हैं,
_ सच भी कभी-कभी झूठ लगने लगता है, जब अपनी सोच से परे कुछ होता है.
_ “बस अब मन थक गया है सोचते-सोचते, थोड़ी राहत चाहिए, थोड़ी ख़ुशी… थोड़ी शांति”


Krishna Chaudhary

मासूम लोग ज़िंदगी से बहुत ज़्यादा नहीं माँगते.

_ उन्हें बस एक ऐसा घर चाहिए, जहाँ सुबह की शुरुआत हँसी से हो.

_ जहाँ मुस्कुराहटें हों, फूलों खुशबू हो, न कि टूटे रिश्तों की चुभन और बिखरे बर्तनों की आवाज़.

_ उन्हें बस इतना चाहिए कि वे अपने काम पर खुशी से जाएँ.

_ जहाँ उन्हें सिर्फ़ काम निकालने का साधन न समझा जाए, बल्कि एक इंसान की तरह देखा जाए.

_ जहाँ उनकी बात इसलिए सुनी जाए कि उन्हें समझा जा सके, न कि उन्हें ग़लत साबित करने के लिए.

_ उन्हें ऐसी हवा भी चाहिए जिसमें टारगेट, डेडलाइन और चिंता की घुटन न हो, बल्कि बारिश के बाद भीगी मिट्टी की खुशबू हो, और बालकनी में खड़े होकर चाय पीते हुए गहरी साँस लेने की आज़ादी हो.

_ उन्हें इतना समय चाहिए कि किसी पार्क की बेंच पर बैठकर अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ सकें.

_ ऐसा कोना चाहिए जहाँ वे खुलकर गा सकें, नाच सकें, चित्र बना सकें, अपनी लिखी हुई बातें ज़ोर से पढ़ सकें, बिना इस डर के कि कोई उनका मज़ाक ना उड़ाए.

_ वे अपने माँ-बाप के अकेलेपन, दुख और टूटन को विरासत में नहीं पाना चाहते.

_ क्योंकि अकेलापन भी कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चला जाता है.

_ फिर इंसान लोगों के बीच रहकर भी अकेला रह जाता है.

_ रातों को जागता है, ख़ाली बिस्तर पर करवटें बदलता है और सोचता रहता है- “आख़िर मेरे साथ ही क्यों ?”

_ कभी फ़ोन की स्क्रीन पर अनजान लोगों में अपनापन ढूँढ़ता है, सिर्फ़ इसलिए कि कुछ पल के लिए अकेलापन कम हो जाए.

_ कोई भी ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहता.

_ लोग बस ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ बच्चों के चेहरों पर मिट्टी खेलते-खेलते लगे.

_ वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय डर के साथ विदा न करें.

_ ख़ासकर बेटियों के लिए हर पल मन में उठने वाले डर और बुरे ख़यालों के साथ न जिएँ._ हर इंसान चाहता है कि उसकी ज़िंदगी का एक छोटा-सा हिस्सा सिर्फ़ उसका अपना हो.

_ कुछ सपने, कुछ पल, कुछ यादें- जिन्हें कोई उससे छीन न सके._ वे बस कभी-कभी रात भर आसमान के तारों को देखते रहना चाहते हैं.

_ बिना किसी जल्दी के.

_ बिना किसी चिंता के.

_ वे चाहते हैं कि नींद उन्हें लेटते ही आजाये, न कि अपने ही मन के शोर के बीच जागते रहें.!!

मुझे फैसले लेने में हमेशा डर लगता है.

_ इसलिए नहीं कि मुझे अपने फैसलों पर भरोसा नहीं होता, बल्कि इसलिए कि हर फैसले के साथ एक दूसरी ज़िंदगी हमेशा के लिए छूट जाती है.

_ जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, दाएँ जाओ या बाएँ तो मेरा मन बस इतना चाहता है कि जाने से पहले दोनों रास्तों पर थोड़ा-सा आगे तक देख सकूँ.

– बस एक झलक.

_ इतना पता चल जाए कि अगर दाएँ गया तो क्या खोऊँगा, क्या पाऊँगा… और अगर बाएँ गया तो मेरी कहानी किस तरह बदल जाएगी.

– मैं भविष्य जानना नहीं चाहता.

_ मैं बस उन ज़िंदगियों को देखना चाहता हूँ, जो मेरे एक छोटे-से फैसले की वजह से कभी जी ही नहीं गईं.

_ कभी सोचता हूँ अगर उस दिन मैंने हाँ कह दी होती तो ?

_ क्या आज मेरी ज़िंदगी सच में अलग होती ?

_ अगर उस दिन मैंने चुप रहने के बजाय अपने लिए आवाज़ उठाई होती तो ?

_ क्या कुछ बदल जाता ?

_ अगर वो नौकरी चुन ली होती, वो शहर चुन लिया होता, वो इंसान चुन लिया होता, वो रिश्ता बचा लिया होता, या फिर उसे उसी दिन छोड़ दिया होता… तो आज मैं कौन होता ?

_ क्या मैं ज़्यादा खुश होता ?

_ या बस अलग तरह से परेशान ?

_ कभी-कभी मन करता है कि ज़िंदगी के किसी कोने में एक छोटा-सा दरवाज़ा हो.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे खोलकर मैं अपनी दूसरी ज़िंदगियों में झाँक सकूँ.

_ एक कमरे में वो मैं हो जिसने “हाँ” कहा था.

_ दूसरे कमरे में वो, जिसने “नहीं”,

_ कहीं वो मैं हो जो किसी और शहर में रहता है.

_ कहीं वो जो किसी और के साथ बूढ़ा हो रहा है.

_ कहीं वो जिसने वो जोखिम उठा लिया था जिससे मैं डर गया था.

_ और शायद किसी कमरे में वो भी हो जिसने मेरी तरह ही कोई फैसला लिया था, लेकिन आज भी सोचता है, काश, मैंने दूसरा रास्ता चुना होता.

_ शायद यही सबसे अजीब बात है इंसान होने की.

_ हम जिस ज़िंदगी को जी रहे होते हैं, उसके साथ-साथ उन सारी ज़िंदगियों को भी अपने भीतर कहीं चुपचाप ढोते रहते हैं, जिन्हें हम जी सकते थे.

– लेकिन फिर एक बात समझ आती है.

_ शायद हर रास्ते का अंत हमें पहले से दिख जाए, तो चुनाव का मतलब ही खत्म हो जाए.

_ क्योंकि ज़िंदगी शायद सही रास्ता चुनने का नाम नहीं है.

_ ज़िंदगी उस रास्ते को अपना बनाने का नाम है जिसे हमने चुन लिया.

_ लेकिन शायद उन्होंने जो बात हमें नहीं बताई, वो ये है कि इंसान उम्र भर कभी-कभी पीछे मुड़कर उन दोनों रास्तों को देखता रहता है.

_ सोचता है अगर मैं उस तरफ चला होता तो ?

_ और शायद इस सवाल का कोई जवाब कभी नहीं मिलेगा, शायद मिलना भी नहीं चाहिए.

_ क्योंकि अगर हमें हर “क्या होता अगर” का जवाब मिल जाए, तो हम अपनी आज की ज़िंदगी को कभी पूरी तरह जी ही नहीं पाएँगे.

– फिर भी…

_ काश, ज़िंदगी मुझे सिर्फ पाँच मिनट देती.

_ बस पाँच मिनट.

_ मैं अपने उन सारे रूपों से मिलना चाहता, जो मैं हो सकता था.

_ मैं उनसे पूछना चाहता कि क्या वे मुझसे ज़्यादा खुश हैं.

_ क्या उन्हें भी कभी मेरी ज़िंदगी की याद आती है ?

_ क्या उन्हें भी कभी लगता है, कि काश, मैंने वो दूसरा रास्ता चुना होता… और फिर शायद मैं वापस लौट आता.

_ अपने इसी जीवन में.

_ उसी इंसान के पास.

_ उसी अधूरी कहानी के बीच.

– और इस बार शायद मुझे अपने फैसलों से शिकायत न होती.

_ क्योंकि मैंने देख लिया होता कि दूसरी ज़िंदगी भी आखिर एक ज़िंदगी ही थी, उसमें भी कुछ खुशियाँ थीं, कुछ पछतावे थे, कुछ लोग मिले थे, कुछ लोग छूटे थे… और कुछ सवाल वहाँ भी अनुत्तरित थे.

_ तब शायद मैं समझ पाता कि हमें दूसरी ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं होती.

_ हमें बस अपनी इस ज़िंदगी को देखकर ये यक़ीन करने की ज़रूरत होती है कि जो नहीं हुआ, वो ज़रूरी नहीं कि बेहतर होता.

_ और जो हो गया है…शायद उसे बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी अब हमारी है.

_ इसलिए आज भी जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, मेरा मन उस पुराने दरवाज़े को ढूँढता है.

_ लेकिन अब मैं शायद बिना खोले ही आगे बढ़ जाऊँगा.

_ क्योंकि हर रास्ते के आगे क्या है, ये जान लेना ज़िंदगी नहीं है.

_ अनजान रास्ते पर अपने कदमों से एक नयी कहानी लिख देना, शायद यही ज़िंदगी है.

Quotes by एंथनी हॉपकिंस Anthony Hopkins

“उन लोगों को छोड़ दो जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं” और इसके पीछे कारण ये है:

_ उन्हें छोड़ना जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं — शायद यह सबसे कठिन, और सबसे ज़रूरी काम होगा जो तुम कभी करोगे.

_ उन लोगों के साथ कठिन बातचीत करना बंद करो जो बदलना नहीं चाहते.

_ उन लोगों के लिए बार-बार हाज़िर होना बंद करो जिन्हें तुम्हारी मौजूदगी में कोई दिलचस्पी नहीं.

_ खुद को थकाना बंद करो उन लोगों से प्यार पाने के लिए, जो उसे देने में ही सक्षम नहीं हैं.

_ जब तुम उठने का फ़ैसला करते हो — खुशी, मकसद और जुनून से भरी ज़िंदगी जीने का — तो हर कोई तुम्हारे साथ नहीं उठेगा.

_ यह तुम्हारी गलती नहीं है, और इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि तुम्हें खुद को छोटा करना होगा ताकि वे सहज महसूस कर सकें.

_ अगर कोई तुम्हें नज़रअंदाज़ करता है, अपमान करता है, या भूल जाता है — तो उन्हें अपना समय और ऊर्जा देना बंद करो.

_ तुम सबके लिए नहीं हो और सब तुम्हारे लिए नहीं हैं.

_ यही असली जुड़ाव को इतना दुर्लभ और कीमती बनाता है.

_ जितना ज़्यादा तुम उस इंसान से प्यार पाने के लिए लड़ते हो जो तुम्हें प्यार नहीं कर सकता, उतना ही तुम उन लोगों से वक्त छीन रहे हो — जो कर सकते हैं, जो करेंगे.

_ कुछ लोग तुम्हें सिर्फ एक तकिया बनाना चाहते हैं, एक बैकअप विकल्प, या एक भावनात्मक मरम्मत करने वाला.

_ जितना ज़्यादा तुम खुद को उस भूमिका में फिट करने की कोशिश करते हो, उतना ही तुम उन रिश्तों और उस समुदाय से दूर होते हो जो सच में तुम्हारे लिए बना है.

_ अगर तुम कॉल करना बंद कर दो — शायद कोई वापस कॉल नहीं करेगा.

_ अगर तुम कोशिश करना बंद कर दो — शायद रिश्ता अपने आप फीका पड़ जाएगा.

_ अगर तुम मैसेज भेजना बंद कर दो — शायद फ़ोन खामोश ही रहेगा.

_ यह अस्वीकृति नहीं है — यह स्पष्टता है.

_ इसका मतलब है कि वह जुड़ाव केवल इसलिए ज़िंदा था क्योंकि तुम उसे ज़िंदा रखे हुए थे, अकेले.

_ यह प्यार नहीं है — यह केवल एक आदत है और तुम इससे बेहतर के हकदार हो.

_ तुम्हारा समय और ऊर्जा सबसे कीमती चीजें हैं जो तुम्हारे पास हैं, उन्हें बुद्धिमानी से लगाओ.

_ तुम उन्हें जहाँ रखते हो, वही तुम्हारी पूरी ज़िंदगी की दिशा तय करेगा.

_ और जब तुम सच में यह समझ लेते हो — तब तुम्हें यह भी समझ में आने लगता है कि कुछ लोगों या जगहों के आस-पास क्यों तुम्हें घबराहट, थकावट या अदृश्यता महसूस होती है.

_ क्योंकि वे तुम्हारे भीतर की पवित्रता को खींच रहे हैं, तो अपनी ऊर्जा की रक्षा करो.. पूरी ताकत से,

_ अपनी ज़िंदगी को एक पवित्र जगह बना दो.

_ सिर्फ उन्हें अंदर आने दो जो तुम्हारी आत्मा से मेल खाते हैं.

_ तुम यहाँ किसी को ठीक करने, बचाने या खुद को साबित करने नहीं आए हो.

_ तुम यहाँ हो — पूरी तरह जीने के लिए.

_ प्यार देने और पाने के लिए, पूरी तरह.

_ तुम सच्ची दोस्ती के हकदार हो, असली जुड़ाव के, अडिग प्रेम के.

_ और जब तुम उसे चुनते हो — दुनिया बदल जाती है.

_ क्योंकि जो तुम चुनते हो — वही तुम बन जाते हो.

— एंथनी हॉपकिंस

My philosophy is: It’s none of my business what people say of me and think of me. I am what I am, and I do what I do. I expect nothing and accept everything. And it makes life so much easier.

मेरा दर्शन है: लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं और क्या सोचते हैं, इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मैं वही हूँ जो मैं हूँ, और मैं वही करता हूँ जो मैं करता हूँ. मैं किसी से कुछ भी अपेक्षा नहीं करता और सब कुछ स्वीकार करता हूँ और इससे जीवन बहुत आसान हो जाता है.

I don’t want to be anything else other than what I am. I can say that with passion. No regrets.

मैं जो हूँ उसके अलावा कुछ और नहीं बनना चाहता. मैं यह बात पूरे जोश के साथ कह सकता हूँ. कोई पछतावा नहीं.

Living with reality is a very good trick, it gives you tremendous freedom and it changes the structure of the molecules of your soul by living with reality because you don’t expect anything anymore. Which is a weird paradox.

वास्तविकता के साथ जीना एक बहुत अच्छी तरकीब है, यह आपको जबरदस्त आज़ादी देता है और वास्तविकता के साथ जीने से आपकी आत्मा के अणुओं की संरचना बदल जाती है क्योंकि आप अब किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करते. जो एक अजीब विरोधाभास है.

Multiply it by infinity and take it to the depths of forever, and you will still have barely a glimpse of what I’m talking about.

इसे अनंत से गुणा करें और अनंत की गहराई तक ले जाएं, और फिर भी आपको मुश्किल से ही उसकी एक झलक मिलेगी जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं.

Try not to be concerned with it. It’s a spiritual thing. Don’t look for the results, don’t live in the payoff. Live in the moment which is a spiritual principle. Live in the moment and let the results take care of themselves. It’s in the hands of God. The rest is all ego. And I have learned, over the years, it’s got nothing to do with me. As my life is none of my business.

इससे चिंतित न होने का प्रयास करें. यह एक आध्यात्मिक बात है. परिणाम की तलाश न करें, लाभ में न जियें. वर्तमान में जियें जो एक आध्यात्मिक सिद्धांत है. वर्तमान में जियें और परिणामों को स्वयं ही ठीक होने दें. यह ईश्वर के हाथ में है. बाकी सब अहंकार है. और मैंने वर्षों से सीखा है कि इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. क्योंकि मेरा जीवन मेरा कोई काम नहीं है.

Once you accept the fact that there’s nothing to fear, you drill into the primal oil well. I believe when we do things without fear, we can do anything. As long as you don’t worry about the consequences.

एक बार जब आप इस तथ्य को स्वीकार कर लेते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है, तो आप मूल तेल के कुएं में खुदाई कर लेते हैं. मेरा मानना ​​है कि जब हम बिना किसी डर के काम करते हैं, तो हम कुछ भी कर सकते हैं. जब तक आप परिणामों के बारे में चिंता नहीं करते.

I learn poetry, learn text, and that really keeps you alive.

मैं कविता सीखता हूं, पाठ सीखता हूं और यह वास्तव में आपको जीवित रखता है.

I am a bit of a solitude person – a solitary personality. I like being on my own. I don’t have any major friendships or relationships with people.

मैं एकांतप्रिय व्यक्ति हूँ – एकांतप्रिय व्यक्तित्व. मुझे अकेले रहना पसंद है. मेरी लोगों के साथ कोई बड़ी दोस्ती या रिश्ता नहीं है.

I’m very much a loner. I don’t like long relationships with people and I always keep people at a distance.

मैं बहुत अकेला रहता हूँ. मुझे लोगों के साथ लंबे समय तक संबंध रखना पसंद नहीं है और मैं हमेशा लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ.

I love life because what more is there?

मैं जीवन से प्रेम करता हूं, क्योंकि इससे अधिक और क्या चाहिए ?

My life turned out to be beyond my greatest dreams.

मेरा जीवन मेरे महानतम सपनों से भी परे निकला.

I never cling on to hope or certainty. They’re the enemies of peace.

मैं कभी भी आशा या निश्चितता से नहीं चिपकता. वे शांति के दुश्मन हैं.

I’m more and more convinced that life is a dream. What has happened to me is surely a dream.

मैं धीरे-धीरे इस बात पर यकीन करने लगा हूँ कि जीवन एक सपना है. मेरे साथ जो हुआ है, वह निश्चित रूप से एक सपना है.

By giving up ‘the need’ and ‘the want’, things begin to happen for you.

‘आवश्यकता’ और ‘इच्छा’ को त्यागने से, चीजें आपके लिए घटित होने लगती हैं.

Relish everything that’s inside of you, the imperfections, the darkness, the richness and light and everything. And that makes for a full life.

अपने अंदर की हर चीज़ का आनंद लें, खामियाँ, अंधकार, समृद्धि और प्रकाश और सब कुछ. और इससे एक पूर्ण जीवन बनता है.

We are dying from overthinking. We are slowly killing ourselves by thinking about everything. Think. Think. Think. You can never trust the human mind anyway. It’s a death trap.

हम बहुत ज़्यादा सोचने से मर रहे हैं. हम हर चीज़ के बारे में सोचकर धीरे-धीरे खुद को मार रहे हैं. सोचो। सोचो। सोचो। वैसे भी आप इंसानी दिमाग पर कभी भरोसा नहीं कर सकते. यह मौत का जाल है.

Non-expectation and acceptance. Because expectation leads to resentment and depression, so I have no expectations.

अपेक्षा न रखना और स्वीकार करना. क्योंकि अपेक्षा करने से नाराजगी और अवसाद पैदा होता है, इसलिए मेरी कोई अपेक्षा नहीं है.

No expectations. Ask nothing, expect nothing and accept everything, and life is very well.

कोई अपेक्षा न रखें. कुछ न मांगें, कुछ न अपेक्षा करें और सब कुछ स्वीकार करें, और जीवन बहुत अच्छा रहेगा.

Keep low expectations and life gets pretty good.

उम्मीदें कम रखें और जीवन बहुत अच्छा हो जाएगा.

If you have high expectations you’re going to get resentments and all kinds of tension.

यदि आपकी अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं तो आपको असंतोष और सभी प्रकार का तनाव मिलेगा.

Beware the tyranny of the weak. They just suck you dry.

कमज़ोरों के अत्याचार से सावधान रहें. वे आपको पूरी तरह से चूस लेंगे.

Life’s too short to deal with other people’s insecurities.

दूसरों की असुरक्षाओं से निपटने के लिए जीवन बहुत छोटा है.

When you’re younger you have so many ideas about yourself; everything is important. It’s not when you look back, nothing is that important. It’s only life.

जब आप युवा होते हैं तो आपके पास अपने बारे में बहुत सारे विचार होते हैं; सब कुछ महत्वपूर्ण होता है. जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं लगता. यह केवल जीवन है.

When you’re young, you’re very insecure. And if I could learn, if I could revisit my own past I could say to myself, don’t think too much, just get on and do it.

जब आप युवा होते हैं, तो आप बहुत असुरक्षित होते हैं. और अगर मैं सीख सकता, अगर मैं अपने अतीत को फिर से देख सकता तो मैं खुद से कह सकता, ज़्यादा मत सोचो, बस आगे बढ़ो और काम करो.

When I was a young guy, I knew everything. Now I know very little. I know less and less as the time goes on.

जब मैं जवान था, तो मुझे सब कुछ पता था. अब मुझे बहुत कम पता है. समय बीतने के साथ-साथ मुझे कम जानकारी होती जा रही है.

You look closely enough, you’ll find that everything has a weak spot where it can break, sooner or later.

यदि आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि हर चीज में एक कमजोर जगह होती है, जहां वह देर-सवेर टूट सकती है.

Sachin

Question : हम वास्तव में क्या कर सकते हैं ?

What can we really do ?

हम इस उम्मीद के साथ जीते हैं कि हमारे माता-पिता, दोस्त और दुनिया हमें समझे और हमारा समर्थन करे

_यह समझने की अपेक्षा [ expectation ] रखना सबसे बड़ी गलती है जो हम कर सकते हैं.

_सच तो यह है कि कोई भी ठीक-ठीक यह नहीं समझ सकता कि हम क्या करना चाहते हैं और कैसे अपना जीवन जीना चाहते हैं.

_लोगों को केवल इस बात का अंदाजा हो सकता है कि जीवन में चीजों को कैसे करना है.

_यह उम्मीद न करें कि दुनिया भी आपका समर्थन करेगी.

हम वास्तव में क्या कर सकते हैं ? What can we really do ?

हम सभी को आत्म-जांच [ self inquiry ] की अपनी यात्रा या हमारे पास जो भी लक्ष्य [ whatever goals ] हैं उन्हें जीने की कोशिश अकेले ही शुरू करनी होगी.

_और यदि हम स्वयं के प्रति ईमानदार हैं और जो हम करना चाहते हैं उसे करने के लिए सभी प्रयास करते हैं.

तो दो चीज़ें होंगी: —-

पहली: आप दुनिया की मान्यता नहीं तलाशेंगे क्योंकि आप जो करना चाहते हैं उसे करने में बहुत व्यस्त हैं.

you will not seek validation of the world because you are too busy doing what you want to do.

दूसरा है: दुनिया अनुशासन का सम्मान करती है.

यदि आप लंबे समय तक बहुत जुनून के साथ कुछ करते हैं, तो दुनिया यह देखेगी कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो आपके लिए सार्थक है.

इससे उन्हें अपने जीवन के लक्ष्य [ life goals ] दिखेंगे.

_वे अभी भी समझ नहीं पाएंगे कि आप क्या कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वे स्वीकार करेंगे कि _आप क्या कर रहे हैं _क्योंकि वे आपका दिल और जुनून देखेंगे.

इसलिए, यदि आप कुछ करना चाहते हैं, तो करें. भले ही कोई आपको समझे या न समझे.

so, if you want to do something, do it. Whether someone understands you or not.

एक असाधारण इंसान और एक साधारण इंसान में कोई अंतर नहीं है – सिवाय इसके कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग कैसे करते हैं.

एक प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी ऊर्जा का उपयोग करता है और एक सामान्य व्यक्ति इसे अत्यधिक सोचने और शिकायत करने में बर्बाद कर देता है.

There is no difference between an extraordinary human and the an ordinary – except how they utilise their energy.

A genius use the energy and an ordinary person waste it in overthinking and complaining.

हम अक्सर दूसरों पर दोष मढ़ते रहते हैं.

_ हम अपने जीवन की जिम्मेदारी किसी और को सौंप देते हैं.

_ हम ऐसा इसलिए कहते हैं ..क्योंकि हमारे दुख के लिए हमारे माता-पिता, मित्र, समाज, व्यवस्था, शिक्षा, मन जिम्मेदार हैं.

_ दोष किसी और पर मढ़ने के लिए ..हमारे पास सैकड़ों बहाने और तर्क हैं.

_ लोग अक्सर कहते हैं: अगर यह स्थिति बदल जाए या कोई निश्चित तरीके से व्यवहार करना शुरू कर दे, तभी मुझे खुशी होगी.

_ लोग एक के बाद एक बहाने बनाते हैं और एक काम करने के अलावा ..कुछ भी और सब कुछ करते हैं: सिवाय “जीवन की जिम्मेदारी लेना”

_ हम काम तो करते हैं ..लेकिन अपने कार्यों के परिणामों को अपने ऊपर नहीं लेना चाहते.

_ अगर हम यह कहने लगें: यह मेरा जीवन है और मैं अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं.

_ केवल इस कथन [statement] से 70-80% कष्ट दूर हो जाते हैं और बाकी स्वयं पर काम करने [ working on the self] से पूरा हो जाता है.

_ जब तक हम दुनिया को दोष देते रहेंगे,

_हम खुश या शांतिपूर्ण नहीं रह सकते.

_ सब कुछ कथन [statement] से शुरू होता है:

_ “मैं अपने जीवन के लिए जिम्मेदार हूं.”

इस सदी और इस पीढ़ी की सबसे बड़ी ख़ामी है परस्पर भरोसा खो देना.

_हम किसी पर भरोसा नहीं करते.

_न माँ-बाप अपनी संतान पर न संतान अपने माँ-बाप पर.

_सहोदर अपने ही भाई-बहन पर भरोसा नहीं करता.

_बीवी को शौहर पर भरोसा नहीं न शौहर को अपनी बीवी पर.

_मित्र मित्र पर भरोसा नहीं करता.

_भरोसे की इस कमी से समाज टूट रहा है.

_मैं सभी पर भरोसा कर लेता हूँ तो लोग कहते हैं, “आप बुद्धू हो”.. पर मैं करता हूँ.

_मैंने जिसे अपना माना ..वह कितना भी मेरा भरोसा तोड़े ..पर मैं नहीं तोड़ता..!!

यदि आप उन सभी लोगों के जीवन को देखें _जिन्होंने आपको किसी न किसी तरह से प्रेरित [inspired] किया है – तो उन सभी में एक समान [common ] बात है.

_ वे जीवन के सामान्य परिभाषित तरीके से बंधे नहीं रहे. [They did not stick to the normal defined way of life.]

_वे बहुमत के विचार से सहमत नहीं थे. [They didi not settle with the idea of majority.]

_उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी की सुरक्षा के जाल को तोड़ने का फैसला किया. [They chose to break the net of safety of everyday life.]

–यदि आप चाहते हैं कि जीवन आपके साथ घटित हो, तो आपको जीवन को चुनना होगा. [If you want life to happen to you, then you need to choose life.]

_ आपको अपने दिल की पुकार सुनने की ज़रूरत है. [You need to listen to the call of your heart.]

_दिल की पुकार सुनने का मतलब दुनिया भर में घूमना या यात्रा करना नहीं है. [Listening to the call of heart doesn’t mean wandering or traveling around the world.]

_बहुत से लोग स्वतंत्रता को पर्यटन स्थलों की यात्रा समझने में भ्रमित कर देते हैं. [Lot of people confuse freedom with traveling to touristy spots.]

_आप जो हैं उसके प्रति पूरी तरह सच्चा होना ही स्वतंत्रता है. [Freedom is being fully truthful to who you are.]

_स्वतंत्रता का अर्थ है अपनी क्षमताओं का सम्मान करना. [Freedom means honouring your abilities.]

_ख़ुशी का एक रहस्य है – अपना सब कुछ इस विचार पर लगा देना कि “आप कौन हैं.” [There is one secret- to happiness – to give your everything to the idea of “who you are”.]

_आप कैसे जीना चाहते हैं, इसकी प्रक्रिया में अपना सारा ज्ञान और प्रयास लगाना. [Putting all your knowledge and effort into the process of how you want to live.]

— हम जो जीवन जीना चाहते हैं उसकी कीमत हमें चुकानी होगी. [We have to pay the price for the life we want to live.]

_ आपको नजारे का आनंद लेना है तो आपको पहाड़ पर चढ़ना होगा, पहाड़ पर चढ़ने के लिए आपका स्वस्थ शरीर होना जरूरी है, स्वस्थ शरीर के लिए आपको रोज सुबह उठना होगा- कुछ घंटे व्यायाम, दौड़, ध्यान में लगाएं. [You want to enjoy the view, then you have to climb the mountain, to climb the mountain, you need to have a healthy body, for a healthy body, you need to wake up every morning- put some hours of exercise, running, meditation.]

_ आप जो कुछ भी करते हैं वह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कैसे जीना चाहते हैं. [Everything you do count towards how you want to live.]

_ जब तक आप जीवन के बाहरी आराम से बाहर नहीं जाते, तब तक आपको आंतरिक आराम नहीं मिलेगा. [As long as you don’t go out of outer comfort of life, inner comfort won’t happen to you.]

चुनाव पूरी तरह आपका है, मेरे दोस्त. [The choice is entirely yours, my friend.]

मेरे विचार और मेरा विवेक मेरे साथी हैं और मैं उन्हें किसी भी दबाव में नहीं छोड़ने वाला. My thoughts and my conscience are my companions and I am not going to leave them under any pressure.

जीवन में जो कुछ भी होता है उसे स्वीकार करना जरूरी है.

_ चाय, फूल और सम्मान सब स्वीकार करें.

_ लेकिन क्या हम यह स्वीकार कर सकते हैं कि जब कोई दरवाजा नहीं खोले, जब रास्ता कंटीला हो और लोग आपको संदेह की नजर से देखें.

_ मैं अपमान और सम्मान दोनों का हकदार नहीं हूं ..या मैं दोनों को जीवन यात्रा के हिस्से के रूप में स्वीकार करता हूं.

_ ऐसी स्वीकृति [Such acceptance] तब हो सकती है जब कोई हर समय पूरी तरह से जागरूक [totally aware] हो.

_ हम एक पल के लिए यह समझ [understanding] खो देते हैं और जीवन की इच्छा [ life’s desire] हावी हो जाती है.

_ और अगर इच्छाएं पूरी हो जाएं तो दुनिया अच्छी हो जाती है और अगर इच्छाओं पर ध्यान न दिया जाए तो बुरी हो जाती है.

_लोग हमारे मित्र बन जाते हैं यदि वे हमारी भावना और विचारों से मेल खाते हैं. [People become our friends if they match with our vibe and ideas.]

_और यदि वे हमारी बातों से सहमत नहीं हैं, तो हम उन्हें अब पसंद नहीं करते हैं.

— संक्षेप में, जीवन संघर्षों की एक शृंखला बन जाता है. [In a nutshell, life becomes a series of conflicts.]

_ जब हम जीवन की सभी घटनाओं को एक ही दिल से स्वीकार करना शुरू करते हैं, तो जीवन आसान हो जाता है, और आगे बढ़ना सांस लेने की तरह सहज हो जाता है.

जब कुछ अनुभव होते हैं, तो मुझे अक्सर आश्चर्य होता है कि _ मैंने दुनिया से ऐसी अच्छाई पाने और जो भी कुछ मुझे मिला है _ उसके लिए _क्या अच्छा किया है.

_ दूसरी ओर, मैंने इसे महत्व देना बंद कर दिया है _ जब लोग मेरे कामों के बारे में कठोर शब्द कहते हैं तो _मैंने परेशान होना बंद कर दिया है.

_ मुझे लगता है कि _मुझे किसी भी अनुभव का कोई मतलब निकालने की जरूरत नहीं है.!!

भगवत गीता कहती है – “अजानना अवतरम जनना”

_हमारे सभी दुखों का कारण भ्रम है.

_ और स्वयं का ज्ञान ही शांति है.

_ जब हम अपने आप को अंदर और बाहर समझते हैं, तो सभी संघर्ष एक साथ रह सकते हैं और अशांति नहीं होगी.

_और जीवन बिल्कुल एक नाटक बन जाता है.

_ इसलिए ज्ञान की तलाश करो ..शांति की नहीं.

_ एक बार जब हम जान जाते हैं, तो शांति पहले से ही मौजूद है.

—– हम उन चीज़ों को पकड़कर रखते हैं ..जो बदलने वाली हैं.

_हम लोगों से एक निश्चित तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद करते हैं.

_हम चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें समझें, लेकिन हम दूसरों को या यहां तक ​​कि खुद को समझने की कोशिश नहीं करते.

_ जब तक आप अपना ध्यान खुद पर केंद्रित नहीं करते और खुद पर काम करना शुरू नहीं करते, तब तक निराशाओं का सिलसिला बना रहेगा.

——हम कष्ट क्यों सहते हैं ?

_ हमें इस बात से कष्ट नहीं होता कि लोग हमारे साथ कैसा व्यवहार करते हैं या दुनिया हमारे साथ कैसा व्यवहार करती है.

_ हम सोचते हैं कि ये सही है.. ..लेकिन हमारे दुखों के लिए कोई और नहीं ..बल्कि हमारा भ्रम जिम्मेदार है.

_ हमें इसलिए दुख होता है क्योंकि हम गलत [misunderstand] को सही समझते हैं.

_हम पीड़ित [victim] हैं ..क्योंकि इसके लिए हमने अपना मन बना लिया है.

_हम पीड़ित हैं पर औरो को दोष देते रहते हैं.

_ और बाहर खुश दिखने के लिए पीड़ितों और धोखेबाज़ों की भूमिका निभाना पसंद करते हैं.

मैंने शायद ही कभी किसी को यह कहते हुए देखा हो कि “सब कुछ ठीक है”

_ वाक्य “सब कुछ ठीक है” के बाद हमेशा परंतु आता है.

_हर कोई कहता है “मैं ठीक हूं लेकिन कुछ तो है जो ठीक नहीं है.” – वो क्या है ?

_पूरा समाज इन्हीं प्रकार के व्यक्तियों से बना है और ये व्यक्ति कोई और नहीं ..बल्कि मैं और आप हैं.

_हम शांति और कई बड़े शब्दजाल के बारे में बात करते हैं.

_यदि प्रत्येक व्यक्ति के मानसिक मानस में गुटनिरपेक्षता और संघर्ष है तो ..शांति कैसे हो सकती है.

_यदि व्यक्तिगत शांति नहीं है तो ..सामाजिक शांति भी नहीं हो सकती.

_हम सद्भाव लाने और लोगों को एक साथ लाने के लिए कई कार्यक्रम और त्यौहार मनाते हैं.

_पार्टी ख़त्म होने के बाद ..शायद ही किसी को शांति मिलती है.

_चूंकि हर कोई किसी और की तरह है,

_आंतरिक संघर्ष होने पर ..हमें बाहरी शांति नहीं मिल सकती है.

_ यही कारण है कि संसार वैसा है ..जैसा वह है.

_ लोग बाहरी जीवन को सजाकर ..अपने आंतरिक जीवन को छिपाने की कोशिश करते हैं.

_ लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि बाहरी का निर्माण आंतरिक से ही होता है.

_ वास्तव में कोई आंतरिक और बाह्य नहीं है.

_हम अपने परिवार, दोस्तों, साथियों, समाज, पड़ोसी के साथ सामंजस्य [harmony] बिठाने में सक्षम नहीं हैं.

_हम बस संदिग्ध दोषियों पर अपना गुस्सा उतारने का एक अवसर चाहते हैं.

_सड़कों पर हम दूसरों से डरते हैं, बंद कमरों में हम अपने आप से डरते हैं.

_हम कहते हैं कि पूरी दुनिया जुड़ी हुई है और एक बड़ा परिवार है _लेकिन हमारे पास सीमाएँ हैं.

_ सामाजिक संघर्ष एक ऐसी चीज़ है ..जिस पर कम से कम हम सभी ..थोड़ी बहस के साथ सहमत हो सकते हैं.

_ एक ऐसा द्वंद्व है ..जिसके बारे में बहुत कम लोग ही चिंतन करते हैं.

_ वह संघर्ष प्रकृति के साथ ही संघर्ष है.

_हर दिन हम यह सोचकर प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाने की कोशिश करते हैं कि ..कोई नहीं देख रहा है.

_हम प्रकृति के नियमों के साथ नहीं जी रहे हैं.

_हालाँकि हमारे लिए यह समझना कठिन है कि प्रकृति क्या है.

_शायद प्रकृति से कुछ भी बाहर नहीं रखा गया है, शायद सब कुछ इसमें शामिल है.

अगर एक दिन, हमें एहसास हो कि यह पागलपन भरी व्यस्तता केवल पैसा कमाने और उन लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से है ..जो कभी हमारे नहीं थे ..बल्कि किसी और द्वारा हम पर थोपे गए थे.

_ एक ऐसी दुनिया में जो रात-दिन आपको अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश कर रही है.

_ हम क्या करेंगे ?

_क्या हम वह जीवन जीना जारी रखेंगे ?

_ या क्या हम उस जीवन को जीना जारी रखेंगे और उसमें अर्थ ढूंढेंगे और खुद को समझाएंगे या हम यह सब छोड़ देंगे ..क्योंकि यह एक बड़ा झूठ है और फिर से एक बच्चे की तरह तलाश करना शुरू कर देंगे ?

_ कोई भी इंसान जो इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता, उसे बस अपने लिए चीजों को आसान बनाना बंद कर देना चाहिए.

_ उसे अपने विवेक का अनुसरण करने दें, जो उसे पुकारता है: “तुम स्वयं बनो !”

_अभी आप जो कुछ भी कर रहे हैं, सोच रहे हैं, इच्छा कर रहे हैं, वह सब आप नहीं हैं.”

_ प्रत्येक आत्मा दिन और रात में इस पुकार को सुनती है और खुशी की उस डिग्री के उत्साह से कांपती है ..जो अनंत काल से उन लोगों के लिए तैयार की गई है ..जो अपनी सच्ची मुक्ति के बारे में सोचेंगे.

_ हालाँकि, किसी भी आत्मा को इस खुशी को प्राप्त करने में मदद करने का कोई तरीका नहीं है, जब तक कि वह दूसरों की राय और भय की जंजीरों में जकड़ी हुई है.

_और ऐसी मुक्ति के बिना जीवन कितना निराशाजनक और अर्थहीन हो सकता है.

_ प्रकृति में उस आदमी से बड़ा कोई दुःख या दुर्भाग्य नहीं है ..जिसने अपनी प्रतिभा को नजरअंदाज कर दिया है..

..और जो कभी दाहिनी ओर, कभी बायीं ओर, कभी पीछे की ओर, अब किसी भी दिशा में झुकता है.

जब आप दूसरों से सम्मान चाहते थे तो आपने अपना अपमान किया. [You insulted yourself when you wanted respect from others.]

_जिस क्षण आपने किसी और से प्रेम की इच्छा की, उसी क्षण आपने स्वयं को त्याग दिया. [You abandoned yourself the moment you desired love from someone else.]

_अपमानित और त्यागा हुआ वही व्यक्ति हो सकता है जिसके अंदर सच्चा प्यार नहीं है. [Only the one can be insulted and abandoned who does not have true love inside.]

जो बिना मांगे मिले उसे ग्रहण करो और दो क्योंकि यह तुम्हारा स्वभाव है और जब दो तो पूर्णविराम समझो, भूल जाओ कि तुमने कुछ दिया है. [Receive that comes without asking and give because it is your nature. And when you give, consider it a full stop, forget you have given something.]

जीना ही जीवन का लक्ष्य है और इसे जीने का खेल-खेलने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है. [Living itself is the goal of life and what better way to live it than playfulness.]

_ मेरे जीवन में सबसे ख़ूबसूरत और गहरी चीज़ें तब घटित हुईं जब मैंने जीवन को गंभीरता के साथ नहीं बल्कि एक खेल के रूप में जीया. [Most beautiful and profound things happened in my life when I have lived life as a play and not with seriousness.]

_ गंभीरता से जीना सबसे बुरी बात है. [Living seriously is worst thing]

_ यह गलत समझ और विकृत विचारों के अलावा कुछ नहीं लाता है. [It brings nothing but wrong understandings and twisted ideas.]

_ केवल चीज़ें बनाने के लिए जीवन जीना भविष्य का उद्देश्य नहीं है. [Living life just to make things is not a purpose for the future.]

_ जब हम जीवन को खेल की तरह जीते हैं. [When we live life as play.]

_ हम एक समय में केवल एक क्षण खेलते हैं, बिना किसी इच्छा के और इसलिए चंचल जीवन साक्षीभाव का एक तरीका है. [We just play one moment at a time, desiring nothing and hence a life of playfulness is a way of witnessing.]

_ इससे जीवन जादुई ढंग से बदल जाता है. [This change life magically.]

_ वर्तमान का विवरण उपलब्ध हो जाता है और एक पूरी दुनिया एक ही गली में विद्यमान होने लगती है. [The details of present become available and a whole world start existing in a single street.]

_ फिर आप जहां भी हों, वह स्थान ईश्वर का राज्य है[Then wherever you are, that place is kingdom of God.]

आप क्यों चाहते हैं कि जो आपको पसंद आया ..वो दूसरों को भी अच्छा लगे,

_ या जो आपको घटिया, बेहूदा लगा ..वो दूसरे को भी ऐसा ही लगे.

_ पसंद, नापसंद अपनी अपनी होती है, और ये इंसान के इंट्रेस्ट, मिजाज़ पर डिपेंड करती है.

_ किसी को कोई फिल्म सीरीज अच्छी लगी और आपको नहीं ..तो क्या हुआ.

_ सबका अपना अपना मानसिक स्तर भी तो होता है.

_ कोई हमारी तरह नहीं सोचता.. तो क्या वो हिकारत से देखे जाने का हकदार है.

_ नहीं ऐसा नहीं है.

_ सिद्धान्त तो हम सहिष्णुता का बघारते हैं, लेकिन भाव हमारा यह होता है कि सब लोग वैसे ही सोचें, जैसे हम सोचते हैं और जब भी कोई हमसे भिन्न प्रकार से सोचता है ..तब हम उसे बर्दाश्त नहीं कर सकते.

_ जो दूसरे कर रहे हैं ..वही हम आप जैसे लोग करने लगेंगे तो ..क्या फर्क बचेगा ..उनमें और हम में..!!

_ हमें अपने को सरल और सहज रखना होगा.

_ हम अपने अंदर नफरत, हिकारत या दूसरों के लिए हीन भावना नहीं रख सकते.

_ अगर आपके अंदर ये सब है तो ..आप कुछ भी हो सकते हैं ..अच्छे इंसान नहीं..!!

जब धंधा और स्वास्थ्य अच्छा चल रहा हो तो..

_ इन्सान को ‘फील-गुड’ होने लगता है.

_ घर में प्रेम-व्यवहार हो तो और भी अच्छा लगता है,

_ लेकिन शांत जल में कोई-न-कोई कंकड़ टपक ही जाता है और लहरों में हाहाकार मच जाता है.

_ यह समझना बड़ा मुश्किल है कि जीवन में मधुरता कैसे बनी रहे ?

_ अच्छा करो तो बुरा वापस आता है और अगर बुरा करो तो बुरा वापस आना ही है.

_ इसका एक अर्थ यह निकलता है कि अच्छाई ‘वन वे ट्रेफिक’ है,

_ जैसे गुलाब के पौधे की कलम इस उम्मीद से जमीन में खोंसो कि एक दिन इसमें गुलाब के खुशबूदार फूल होंगे,

_ रोज खाद-पानी दिया..

_ वह बढ़ा और जंगली काँटेदार पौधा निकल गया,

_गुलाब का फूल कभी उगा ही नहीं..!!

हम अपने शरीर में घर जैसा महसूस क्यों नहीं करते ?

_ बस बैठना, सांस लेना और आराम करना इतना मुश्किल क्यों है – बिना किसी बाहरी मदद की ज़रूरत के ?

_ तनाव सिर्फ़ मांसपेशियों में नहीं होता.. यह एक मानसिकता है, एक आदत.. पर्याप्त न होने या तैयार न होने का डर..

_ तनाव का मतलब है कि आप पहले से ही कल में जी रहे हैं,

_ ऐसे भविष्य का अभ्यास कर रहे हैं जो अभी तक नहीं हुआ है..

_ या इसका मतलब है कि आप अभी भी कल को घसीट रहे हैं.. जिसे आपने कभी पूरी तरह से नहीं जिया –

– ऐसे अजीवित पल जो लंबे समय तक बने रहते हैं और पूरे होने की मांग करते हैं.

_ कोई भी अनुभव जो पूरी तरह से नहीं जीया गया है, आपके अंदर चक्कर लगाता रहेगा, और पूछता रहेगा—“मुझे खत्म कर दो.. मुझे जियो.. मुझे आगे बढ़ने दो”

_ इसलिए हमें शरीर से शुरुआत करनी चाहिए.

_ रुकें.. अपना ध्यान अंदर की ओर ले जाएँ.

_ पूछें: मैं कहाँ जकड़ रहा हूँ ? जबड़े में ? कंधों में ? छाती में ?

_ फिर धीरे से वहाँ जाएँ.. अपनी आँखें बंद करें..

_ अपने शरीर के उस हिस्से से एक दोस्त की तरह बात करें:

_ “अब तुम छोड़ सकते हो.. “मैं यहाँ हूँ”

_ अगर आप अपने शरीर के साथ प्यार से पेश आते हैं, तो यह आपकी बात सुनता है.. आखिरकार, यह आपका है.

_ जब शरीर भरोसा करना शुरू करता है, तो आप देखेंगे कि कुछ और भी नरम हो जाता है- “मन’

_ लेकिन मन से शुरुआत न करें.. यहीं पर हममें से ज़्यादातर लोग असफल हो जाते हैं.

_ हम बीच से तूफ़ान को शांत करने की कोशिश करते हैं.. किनारे से शुरू करें.. शरीर से शुरू करें.

_ जब शरीर आराम करना सीखता है, तो मन उसका अनुसरण करता है और जब मन शांत होने लगता है, तो दिल खुल जाता है- यह भी सांस लेना शुरू कर देता है.

_ मेरे दोस्त, आराम करना छोड़ देने की कला है. बलपूर्वक नहीं, बल्कि प्रेम से.!!

— इसे याद रखें:

_ हमें एक समय में सिर्फ़ एक पल ही दिया जाता है.

_ इसलिए अच्छी तरह से जीने के लिए, हमें अपने पूरे जीवन का पता लगाने की ज़रूरत नहीं है – – हमें बस यह जानना है कि यहाँ और अभी पूरी तरह से कैसे मौजूद रहना है.

_ अगर हम इस पल का ध्यान रख सकते हैं, तो बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा.!!

NOTES :

“मेरा शरीर जाग चुका है, मैं उसकी सुखद गति में हूँ”

“हम हर चीज़ की शुरुआत मन से करते हैं, इसलिए असफल हो जाते हैं…जबकी शुरुआत शरीर से होनी चाहिए”

“मन को बदलने की चाह, मन से ही करना – एक चक्रव्यूह है :

– “शरीर से शुरू करो, सांस से शुरू करो – मन स्वयं पिघलने लगेगा”

हम सबकी ज़िंदगी किसी बड़ी चीज़ के होने का इंतज़ार करती रहती है.

_ कोई महान उद्देश्य, कोई दिव्य संकेत..

_ हम सोचते रहते हैं कि मैं ये करूँगा और फिर ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी.

_ इसके बाद, मैं अपनी मर्ज़ी से जी पाऊँगा.

_ लेकिन सच्चाई यह है कि यह सब पहले से ही यहाँ है.

_ पवित्रता किसी पहाड़ी गुफा या मंदिर के अनुष्ठान में नहीं है.

_ यह इस बात में है कि हम अपने हाथ कैसे धोते हैं, हम अपनी चाय कैसे बनाते हैं और बर्तन कैसे धोते हैं या हम कैसे जागते और सोते हैं, हम कैसे चलते हैं.

_ हमें अधिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, हमें अधिक उपस्थिति की आवश्यकता है.

_ यही पूरा अंतर है.. वही क्रिया – जागरूकता के साथ – पूजा बन जाती है.

_ जागरूकता के बिना, यह केवल दोहराव है – एक ऑटोपायलट.

_ हममें से ज़्यादातर लोग नींद में जी रहे हैं, यहाँ तक कि जब हम जाग रहे होते हैं,

_ लेकिन जिस पल आप अपनी साँस वापस ले लेते हैं, जिस पल आप यहाँ होते हैं, यहाँ तक कि कंबल मोड़ना भी एक तरह की प्रार्थना बन जाती है.

_ आपको कोई चोगा पहनने या संस्कृत में मंत्रोच्चार करने की ज़रूरत नहीं है.

_ आपको बस वहाँ होना चाहिए,, पूरी तरह से..

_ यही चीज़ किसी चीज़ को पवित्र बनाती है.

_ आप क्या कर रहे हैं, यह नहीं बल्कि आप इसे कैसे कर रहे हैं.. शांति के साथ, सतर्कता के साथ.. यही असली शिक्षा है.

_ आप अपना पूरा जीवन एक ही काम करते हुए जी सकते हैं – लेकिन अगर आप बदलते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.

_ जब आपका कार्य आपके ध्यान के साथ एक हो जाता है, तो आपको सत्य की तलाश करने की ज़रूरत नहीं होती.

_ यह आपके दैनिक जीवन में चमकने लगता है.!!

ये किसी किताब से नहीं, बल्कि मेरी अपनी भटकती हुई ज़िंदगी से सीख हैं…

_ मुझे क्या छोड़ना पड़ा, मुझे क्या स्वीकार करना पड़ा, और आख़िरकार मुझे वो क्या बनाता है जो मैं हूँ-

_ मैंने बार-बार यह देखा है कि चुप रहना कमज़ोरी नहीं—यह ताक़त है.

_ जब मैं बहस करना या खुद को सही ठहराना बंद कर देता हूँ, तो खामोशी मेरे लिए बोलती है.

_ मैं अब कुछ साबित करने के लिए नहीं जीता.

_ मुझे पता है कि यही मेरा इरादा है और अगर दूसरा इसे नहीं देख पा रहा है, तो मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लूँ, मैं उसे यह नहीं दिखा पाऊँगा.

_ मैं किसी को यह समझाने की कोशिश नहीं करता कि मैं अच्छा हूँ.

_ मेरा सच कोई विज्ञापन नहीं, एक खुशबू है—चाहे महसूस हो या न हो.

_ मैंने उन चीज़ों के लिए अपराधबोध पालना छोड़ दिया है.. जो कभी मेरी थीं ही नहीं.

_ उस बोझ को लेकर क्यों चलूँ.. जो मैंने बनाया ही नहीं ?

_ जो मैंने तोड़ा ही नहीं, उसे मैं ठीक नहीं करता या उसका दोष अपने ऊपर नहीं लेता.

_ कभी-कभी प्यार और परवाह का मतलब होता है.. दूसरों को उनके अपने अँधेरे से रूबरू होने देना.

_ मैं अपनी कीमत दिखाने के लिए संघर्ष नहीं करता..

_ अगर यह खुद नहीं चमकती, तो कोई भी तर्क इसे कभी ज़ाहिर नहीं कर पाएगा.

_ मैं दूसरों को अपनी पसंद खुद चुनने देता हूँ..

_ उनका रास्ता उनका है, मेरा अपना है..

_ मैं बस इतना कर सकता हूँ कि बिना दोष लिए उनके साथ रहूँ.

_ और अब, मैं बस एक ही बात पूछता हूँ—क्या मैं उस व्यक्ति का सम्मान कर सकता हूँ.. जिसे मैं आईने में देखता हूँ ?

_ जब जवाब हाँ होता है, चाहे थोड़ा सा ही क्यों न हो, तो मुझे पता है कि मैं सही रास्ते पर चल रहा हूँ.

_ आज़ादी दुनिया को समझाने में नहीं है… “आज़ादी खुद के साथ शांति से रहने में है” – Sachin

“लोग क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे” ये कहना सबसे बड़ा झूठ है जो हम खुद को धोखा देने के लिए खुद से कहते हैं.

_ हमें लगता है कि लोग हमें देख रहे हैं, हमारे फैसलों को आंक रहे हैं, हमारे कदमों को नाप रहे हैं.. – पर यहाँ किसी को परवाह नहीं.

_ हर कोई अपने संघर्षों में खोया हुआ है, अपने मुखौटे पहने हुए व्यस्त है. _ सबसे बड़ा भ्रम कभी बाहर नहीं होता- वो हमारे अंदर होता है, हम खुद अपनी जेल बन गए हैं. _ हम नाच सकते थे, हम गा सकते थे, हम बेखौफ, खामोश, जैसा हमारा दिल चाहता, जी सकते थे. _ लेकिन हम ऐसा नहीं करते और दुनिया की नज़रों को दोष देते हैं.

_ आज़ादी हमेशा हमारी पहुँच में होती है, लेकिन हम उस इजाज़त का इंतज़ार करते रहते हैं जो कभी नहीं मिलती.

_ एक दिन, शायद बहुत देर हो चुकी होगी, हम सब देख लेंगे: कोई नहीं देख रहा था.

_ और उस पल, अफ़सोस डर से भी ज़्यादा भारी लगेगा..

_ तो आइए हम दर्शकों के लिए न जिएं.

_ आइए हम किसी और के होने का दिखावा करके न जिएं.

_ आइए हम कच्चे तौर पर जिएं, आइए हम सच्चे तौर पर जिएं, आइए हम अभी जिएं.

_ आइए हम अपनी सच्चाई जिएं- भले ही उसमें खामियां हों, लेकिन अगर आप अपनी यात्रा के प्रति ईमानदार हैं, तो वो आपको सही रास्ते पर ले आएगी.

_ क्योंकि एक ऐसी दुनिया में, जो हमें लगातार किसी और में बदलने की कोशिश कर रही है, स्वयं बने रहना ही सबसे बड़ा साहस है और यही वास्तविक यात्रा है.!!

-SACHIN

जब आप स्वयं को पूर्णतः महसूस करने लगते हैं, तो सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

_ समस्याएं तभी उत्पन्न होती हैं जब हम स्वयं में केंद्रित नहीं होते.

_ जब तक आप खुद का सामना करने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक आपको सच्चा जीवन नहीं मिल सकता.

_ जब तक आप स्वयं को पूरी तरह समर्पित नहीं करते, आप सतही ही रहते हैं.

_ गहराई में जाने के डर ने हमारे जीवन को सतही और असुरक्षित बना दिया है.

_ एक सच्चे जीवन के लिए गहरी जड़ों की आवश्यकता होती है.

_ हम इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि हमने अपने ज्ञान के प्रति सच्चाई नहीं दिखाई है.

_ अंततः सभी विचार व्यर्थ हो जाते हैं… विचार तो बस मनुष्य की बनाई हुई वस्तु है, ठीक वैसे ही जैसे चार दीवारों और छत वाला घर, जो अंत में ढह जाता है.!!

– Sachin

हम एक ही मन को दो भागों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं.

_ एक मन अनुशासन का पालन करना चाहता है.

_ दूसरा मन इसे तोड़कर स्वतंत्रता के साथ भ्रमित करना चाहता है.

_ इसी ने लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचा दी है.

We are trying to split one mind in twos. The one mind wants to follow the discipline. The other wants to break it & confuse it with freedom. This alone has created a mess in ones’s life.

– SACHIN

एकांत में आप स्वयं को पाते हैं.

_ वृक्ष शहरों की तरह बातें नहीं करते.

_ वे आपसे आपका नाम, आपकी महत्वाकांक्षा या आपका धर्म नहीं पूछते.

_ वे बस मौन और ध्वनि की उस भाषा में फुसफुसाते हैं जिसका कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है.

_ प्रकृति अपने मूल रूप में मात्र एक स्थान नहीं है- यह एक द्वार है.

_ एक ऐसा गहरा मौन कि आपकी धड़कन भी आपके भीतर गूंजने लगती है.

_ वहीं, इस उन्मादी भीड़ से दूर, आप वह सुनना शुरू करते हैं जो हमेशा से सुनने की प्रतीक्षा कर रहा था – आपका अपना सच्चा स्वरूप.

_ यह आपको आपकी परेशानियों और उनसे छुटकारा पाने के तरीके बताएगा.

_ प्रकृति की कोई महत्वाकांक्षा नहीं होती.

_ एक झरना रेगिस्तान बनने की कोशिश नहीं करता.

_ एक चीड़ का पेड़ सेब का पेड़ बनने की इच्छा नहीं रखता.

_ वे संतुष्ट हैं, पूरी तरह से अपने आप में हैं और अपने अस्तित्व में, वे आपको सबसे बड़ा सबक सिखाते हैं: बस मौलिक बनो.

_ हमारे जीवन में जो शोर हम महसूस करते हैं वह केवल ध्वनि नहीं है – शोर विचार, निर्णय, तुलना और निरंतर क्रिया है.

_ व्यवस्था ने हमें कुशल तो बना दिया है, लेकिन शांति नहीं दी.

_ हमने दौड़ना तो सीख लिया है, लेकिन यह भूल गए हैं कि हम कहाँ जा रहे हैं.

_ आपको खुशी किसी पिज्जा की दुकान, थिएटर या बार में नहीं मिल सकती.

_ लेकिन आप इसे जंगल की शांति में, पक्षी के गीत में या नदी की लय में पा सकते हैं.

_ यह बहुत आसान है.

_ जब आप जंगल में जाते हैं, तो आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं – शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से.

_ आपकी पहचान, आपका नाम, आपकी शिक्षा, आपका अतीत, सब कुछ सूरज की गर्मी में बर्फ की तरह पिघलने लगता है.

_ जंगल आपको नंगा कर देता है, और उस नंगेपन में आप किसी पवित्र चीज को छूते हैं.

_ ध्यान पत्तों के बीच की खामोशी को सुनने की कला है, पक्षियों की चहचाहट के बीच के विराम को, हवा चलने से पहले की शांति को.

_ और उस सुनने में, आपके भीतर कुछ प्रकृति की इच्छा के साथ तालमेल बिठाने लगता है.

_ जंगल शब्दों में नहीं बोलता.

_ वह अपनी उपस्थिति से बोलता है.

_ और जितना अधिक आप उसके साथ बैठते हैं, उतना ही भीतरी शोर घुल जाता है- जैसे सुबह के सूरज से पहले की धुंध.!!

– Sachin

मौन की शक्ति : _ आपको स्वयं को साबित करने की आवश्यकता क्यों नहीं है ? _ मनुष्य को हमेशा से स्वयं को साबित करना सिखाया गया है. _ हर प्रश्न का उत्तर दे. _ हर आलोचना से अपना बचाव करे. _ हर अपमान का हिसाब रखे. _ धीरे-धीरे हम यह मानने लगते हैं कि जो सबसे अधिक बोलता है वही सबसे शक्तिशाली होता है. _ लेकिन जीवन इसके ठीक विपरीत दिखाता है. _ जितना अधिक कोई व्यक्ति स्वयं को साबित करने में लगा रहता है, उतना ही वह अपने अस्तित्व से दूर होता चला जाता है. _ एक पल रुकिए. _ जब ​​कोई आपका अपमान करे और आप तुरंत प्रतिक्रिया दें, तो स्वयं से पूछिए : कौन प्रतिक्रिया दे रहा है – आपकी चेतना या आपका अहंकार ? _ यदि भीतर शांति होती, तो क्या प्रतिक्रिया इतनी जल्दी होती ? _ प्रतिक्रिया हमेशा आहत अहंकार की भाषा होती है. _ जागरूकता कभी जल्दबाजी में नहीं होती. _ यह अवलोकन करती है, समझती है और तभी कार्य करती है जब वास्तव में आवश्यक हो. _ अधिकांश लोग इसलिए दुखी नहीं होते क्योंकि जीवन ने उन्हें बहुत सारी समस्याएं दी हैं. _ वे इसलिए पीड़ित होते हैं क्योंकि मन कभी बोलना बंद नहीं करता. _ कोई एक वाक्य कहता है और मन उसके चारों ओर सौ कहानियां गढ़ लेता है. _ ये कहानियां धीरे-धीरे पीड़ा बन जाती हैं. _ क्या आपने कभी अपने मन को ध्यान से देखा है ? _ यह बिना रुके बोलता रहता है. _ यहां तक ​​कि जब कोई आसपास नहीं होता, तब भी यह काल्पनिक लोगों से बहस करता रहता है. _ यह भविष्य की चिंता करता है, अतीत पर पछताता है, किसी के प्रति क्रोध रखता है, या बदला लेने की कल्पना करता है. _ यह अंतहीन आंतरिक संवाद चुपचाप आपकी सारी ऊर्जा को खत्म कर देता है. _ आपको लगता है कि आपका सबसे बड़ा दुश्मन आपके बाहर है. _ लेकिन सच्चाई यह है कि आपका सबसे बड़ा दुश्मन भीतर का निरंतर शोर है—वह आवाज़ जो आपको कभी चैन से नहीं बैठने देती. _ जब मन लगातार बोलता रहता है, तो आप लुप्त हो जाते हैं. _ जब आप पूरी तरह से वर्तमान में आ जाते हैं, तो मन धीरे-धीरे शांत हो जाता है. _ यह जीवन के पहले रहस्यों में से एक है. _ प्रकृति मौन में ही सब कुछ पूरा करती है. _ केवल मनुष्य ही खुद को निरंतर सही ठहराने के लिए विवश महसूस करते हैं. _ जिस दिन आप हर बात का जवाब देना बंद कर देते हैं, आपके भीतर एक नई तरह की शक्ति का जन्म होता है. _ यह दूसरों को हराने की शक्ति नहीं है ; यह स्वयं को जानने की शक्ति है. _ और जो व्यक्ति वास्तव में स्वयं को जान लेता है, उसे अब दुनिया से लड़ने की आवश्यकता महसूस नहीं होती. _ लोग मौन को कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसा नहीं है. _ मौन साहस के सबसे महान रूपों में से एक है. _ क्रोध करना आसान है ; अपने क्रोध को देखना कठिन है. _ चिल्लाना आसान है ; मुस्कुराना और शांत रहना कठिन है. _ बदला लेना आसान है ; क्षमा करने के लिए अपार शक्ति की आवश्यकता होती है. _ मौन कमजोरों का आभूषण नहीं है. _ यह जागृत मन का आभूषण है. _ जिस दिन कोई आपको गलत समझे और आपकी शांति अप्रभावित रहे, समझ लीजिए कि आपके भीतर कुछ गहरा परिवर्तन शुरू हो गया है. _ स्वयं को जानने वाला व्यक्ति दूसरों की राय पर निर्भर नहीं रहता. _ मनुष्य का अधिकांश जीवन दूसरों की स्वीकृति पाने में व्यतीत होता है. _ हम प्रशंसा, सराहना और सही साबित होने की चाह रखते हैं.

Quotes by मार्क ट्वेन

” आज से बीस साल बाद आप उन चीजों से ज्यादा निराश होंगे जो आपने नहीं कीं _बजाय उन चीजों से जो आपने कीं”
“आज से बीस साल बाद आप यह सोचकर निराश हो उठोगे कि आपको वह सब नहीं करना चाहिए था जो आप कर बैठे. इसीलिए मैं आपसे कहता हूँ कि अपने पाल गिरा दो और सुरक्षित बंदरगाहों से बहुत दूर चले जाओ. पूर्वी हवाओं को पकड़ कर अपने सपनों की राह पर चलते चलो. जाने कितना कुछ अभी खोजने के लिए है !”
यह कहते हुए न घूमें कि दुनिया आपके लिए जीवित है। दुनिया को आपसे कुछ नहीं चाहिए। यह यहाँ पहले से ही थी.
ये बेहतर है कि आप सम्मान के लायक हों और वो आपको ना मिले बजाय इसके कि वो आपको मिले और आप उसके लायक ना हों.
यदि आप सत्य बोलते हैं, तो इसके आलावा आपको कुछ भी और याद रखने की जरूरत नहीं है.
“बोल कर सारा संदेह ख़तम कर देने से अच्छा है चुप रह कर बेवकूफ समझा जाना”
भले ही आप कपडे पहनने में लापरवाह रहिये पर अपनी आत्मा को दुरुस्त रखिये.
हमेशा सही करें. ये कुछ लोगों को संतुष्ट करेगा और बाकियों को अचंभित.
इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो शर्मिंदा होता है- या जिसे जरूरत पड़ती है.

Quotes by आर्थर शोपेनहावर

अपने भीतर आनंद खोजना मुश्किल है, लेकिन इसे कहीं और खोजना असंभव है.
हमारे लगभग सभी दर्द अन्य लोगों के साथ हमारे संबंधों से उत्पन्न होते हैं.
दर्द से बचने के लिए सुख का त्याग करना एक स्पष्ट लाभ है.
बहुत दुखी होने से बचने का पक्का तरीका _बहुत खुश होने का नाटक नहीं करना है.
खुद के अंदर प्रसन्नता को ढूंढना बड़ा ही मुश्किल काम है लेकिन इसके अलावा कहीं दूसरी जगह प्रसन्नता को पाना नामुमकिन है.

प्रसन्नता, निरंतर छोटी छोटी खुशियों के पल में निहित होती है.

बिना कांटों का कोई गुलाब नहीं खिलता _परंतु बिना गुलाब के हजारों कांटे मिलते हैं.
वह जो एकांत का आनंद नहीं लेता, वह स्वतंत्रता से प्रेम नहीं करेगा.
एक उच्च कोटि के दिमाग वाला इंसान _हमेशा असामाजिक होने की प्रवृत्ति रखता है.
प्रतिभा और पागलपन में कुछ समान है: वे दोनों एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जो हर किसी के लिए मौजूद है _से अलग है.
जीनियस लोग चील पक्षी की तरह होते हैं, जो अपना घरौंदा बहुत ऊंचाई, पर एकांत स्थान पर बनाते हैं.
टैलेंट, उस लक्ष्य को भेद सकता है जिसे अन्य कोई नहीं भेद सकता लेकिन जीनियस, उस लक्ष्य को भेद सकता है, जिसकी अन्य कोई कल्पना भी नहीं कर सकता.
प्रत्येक व्यक्ति अपनी दृष्टि के क्षेत्र की सीमा को दुनिया की सीमा के रूप में लेता है.
हमें असामान्य चीजों को कहने के लिए सामान्य शब्दों का उपयोग करना चाहिए.
हम शायद ही कभी सोचते हैं कि हमारे पास क्या है, लेकिन हम हमेशा सोचते हैं कि हमारे पास क्या कमी है.
स्वास्थ्य सभी बाहरी वस्तुओं पर हावी है _कि एक स्वस्थ भिखारी एक बीमार राजा की तुलना में अधिक खुश हो सकता है.
आम आदमी केवल यह सोचते हैं कि समय कैसे गुजारा जाए ; एक बुद्धिमान व्यक्ति इसका फायदा उठाने की कोशिश करता है.
अगर हमें संदेह है कि एक इंसान झूठ बोल रहा है, तो हमें उसे विश्वास करने का नाटक करना चाहिए; तब वह बोल्ड हो जाता है और अधिक आत्मविश्वास से, अधिक बलपूर्वक झूठ बोलता है, और बेपर्दा होता है.
अगर कोई इंसान अच्छी किताबें पढ़ना चाहता है, तो उसे बुरे लोगों से बचना चाहिए; क्योंकि जीवन छोटा है, और समय और ऊर्जा सीमित है.
जब आप किताबों को खरीद रहे होते हैं, तो आपके दिमाग में कहीं ना कहीं यह बात चल रही होती है कि मैं इन किताबों के साथ-साथ उनके पढ़ने के लिए समय भी खरीद रहा हूं.
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