इंसान को समझने में अक्सर हम पूरी उम्र लगा देते हैं, और जब समझ आती है, तब तक बहुत कुछ हमारे हाथों से छूट चुका होता हैं.
_ मनुष्य होने की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि हम सब भीतर से अधूरे हैं.
_ किसी के भीतर बीते हुए कल के घाव हैं, किसी की आँखों में अनकहे दुःख हैं, किसी के स्वभाव में कुछ कमियाँ हैं, तो किसी के व्यक्तित्व में ऐसे बिखरे हुए टुकड़े हैं, जिन्हें समेटने में उसने अपनी आधी उम्र गुज़ार दी है.
_ फिर भी हम चाहते हैं कि जो हमारी ज़िंदगी में आए, वह बिल्कुल वैसा हो, जैसा हमने अपनी कल्पनाओं में सोच रखा है.
_ वह हमारी तरह सोचे, हमारी तरह समझे, हमारी ख़ामोशी का अर्थ जाने, हमारी नाराज़गी के पीछे छिपे दर्द को पहचाने और बिना कुछ कहे हमारी हर उम्मीद पूरी कर दे.
_ लेकिन ज़रा सोचिए, जो इंसान स्वयं अपने भीतर की लड़ाइयों से जूझ रहा है, वह हर बार हमारी उम्मीदों पर खरा कैसे उतर सकता है ?
_ वह भी तो इंसान है.
_ उसे भी कभी-कभी थक जाने का हक़ है.
_ उसे भी टूटने, बिखरने, ग़लती करने और फिर से ख़ुद को समेटने का अधिकार है.
_ उसके भीतर भी कुछ ऐसे अँधेरे कमरे हैं, जहाँ वह दुनिया की नज़रों से छिपकर अपने आँसू पोंछता है.
_ उसके चेहरे की मुस्कान हमेशा उसकी ख़ुशी की गवाही नहीं होती और उसकी ख़ामोशी हमेशा उसके भीतर के अहंकार का प्रमाण नहीं होती.
_ कभी-कभी इंसान बोलना चाहता है, लेकिन उसके पास शब्द नहीं होते.
_ वह प्रेम करना चाहता है, लेकिन अपने पुराने ज़ख़्मों के कारण प्रेम जताना नहीं जानता.
_ वह किसी को खोना नहीं चाहता, मगर उसे सँभालकर रखने का सलीका भी नहीं सीख पाया होता.
_ और हम हैं कि उसकी एक ग़लती को उसके पूरे व्यक्तित्व का परिचय मान लेते हैं.
_ हम यह भूल जाते हैं कि किसी इंसान की सबसे बुरी घड़ी ही उसकी पूरी पहचान नहीं होती.
_ कभी-कभी उसके व्यवहार में दिखाई देने वाली कठोरता के पीछे वर्षों की उपेक्षा छिपी होती है.
_ कभी उसकी चिड़चिड़ाहट के पीछे वह थकान होती है, जिसे वह किसी के सामने स्वीकार नहीं कर पाता.
_ कभी उसका दूर हो जाना बेपरवाही नहीं, बल्कि भीतर चल रहे किसी ऐसे संघर्ष का परिणाम होता है, जिसे समझाने की हिम्मत भी उसमें नहीं बची होती.
_ यह सच है कि हर इंसान अपनी कमियों के लिए जवाबदेह है.
_ प्रेम का अर्थ किसी के घावों के नाम पर हर चोट को सहते रहना नहीं है.
_ लेकिन यह भी सच है कि हर भूल धोखा नहीं होती, हर असमर्थता बेवफ़ाई नहीं होती और हर अधूरापन किसी इंसान के प्रेम को झूठा नहीं बना देता.
_ कुछ लोग हमें चोट पहुँचाना नहीं चाहते, फिर भी अनजाने में दुख दे जाते हैं.
_ कुछ लोग हमें खोने से डरते हैं, फिर भी अपने डर और कमज़ोरियों के कारण वही कर बैठते हैं, जिससे रिश्ते दूर होने लगते हैं.
_ वे हर बार सही नहीं होते, लेकिन हर बार ग़लत करने की नीयत भी नहीं रखते.
_ उनके भीतर भी एक मन होता है, जो चाहता है कि कोई उन्हें उनकी कमियों के बावजूद समझे ;
_ कोई उनकी हर ग़लती पर उन्हें कठघरे में खड़ा करने के बजाय कभी उनका हाथ थामकर पूछे— “तुम ठीक तो हो न ?
_ आख़िर तुम्हारे भीतर इतना कुछ चल क्या रहा है ?”
_ मगर अफ़सोस, हम अक्सर सवाल पूछने से पहले फ़ैसला सुना देते हैं.
_ समझने से पहले दूरियाँ बना लेते हैं और किसी के बदलने की संभावना को स्वीकार करने से पहले उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल देते हैं.
_ हमें एक ऐसा इंसान चाहिए, जो कभी नाराज़ न हो, कभी कमज़ोर न पड़े, कभी हमारी भावनाओं को न समझने की भूल न करे.
_ हम उसके लिए एक अदृश्य साँचा तैयार करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी सारी स्वाभाविकता छोड़कर उसमें समा जाए.
_ हम भूल जाते हैं कि रिश्ते किसी मूर्ति की तरह नहीं होते, जिन्हें अपनी पसंद के आकार में तराश लिया जाए.
_ रिश्ते दो जीवित मनुष्यों के बीच का वह संसार हैं, जहाँ दोनों को एक-दूसरे को समझना, सीखना, बदलना और कभी-कभी अपनी ज़िद से पीछे हटना पड़ता है.
_ फिर एक दिन हम किसी की छोटी-छोटी कमियों से थककर उससे मुँह मोड़ लेते हैं.
_ हमें लगता है कि कहीं और कोई ऐसा मिल जाएगा, जिसके साथ जीवन में कभी शिकायत नहीं होगी, कभी मन नहीं दुखेगा और कभी आँसू आँखों तक नहीं आएँगे.
_ हम एक निर्दोष चेहरे की तलाश में निकल पड़ते हैं, यह भूलकर कि निर्दोष दिखाई देना और सचमुच संवेदनशील होना दो अलग बातें हैं.
_ कुछ लोग शब्दों से इतने सुंदर होते हैं कि उनकी ख़ामोशी का असली अर्थ समझने में बरसों लग जाते हैं.
_ कुछ लोग हर परिस्थिति में सही दिखाई देते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी कमज़ोरियों को छिपाने की कला सीख ली होती है.
_ और कुछ लोग अपनी कमियाँ छिपाना नहीं जानते, इसलिए अपनी सच्चाई के साथ हमारे सामने खड़े रहते हैं.
_ हम अक्सर उसी सच्चे, मगर अधूरे इंसान को ठुकरा देते हैं, जिसकी आँखों में हमारे लिए अपनापन था.
_ हमें उसकी कमियाँ दिखाई देती हैं, उसकी कोशिशें नहीं.
_ हमें उसकी असफलताएँ याद रहती हैं, उसकी छोटी-छोटी कुर्बानियाँ नहीं.
_ हमें वह दिन याद रहता है, जब उसने हमें दुख पहुँचाया था ; मगर वे अनगिनत दिन याद नहीं रहते, जब उसने अपनी परेशानियों के बावजूद हमारी ख़ुशी के लिए कुछ करने की कोशिश की थी.
_ और जब वह चला जाता है, तब उसके होने का अर्थ धीरे-धीरे समझ में आने लगता है.
_ उसके बिना घर तो वही रहता है, मगर घर जैसा महसूस नहीं होता.
_ फ़ोन में वही पुरानी बातचीत रहती है, मगर उसे दोबारा पढ़ते हुए दिल में एक अजीब-सी टीस उठती है.
_ रास्ते वही होते हैं, शामें वही होती हैं, मौसम भी बदलते रहते हैं, मगर किसी एक इंसान की अनुपस्थिति जीवन के सबसे परिचित दृश्यों तक का अर्थ बदल देती है.
_ तब याद आता है कि वह हमारी हर बात नहीं समझ पाता था, मगर हमारी उदासी देखकर बेचैन हो जाता था.
_ वह हर बार सही शब्द नहीं चुन पाता था, मगर कभी-कभी उसकी साधारण-सी मौजूदगी ही हमारे लिए सबसे बड़ी राहत होती थी.
_ वह हमारी सारी समस्याएँ हल नहीं कर सकता था, मगर मुश्किल दिनों में हमारे साथ खड़े रहने की कोशिश करता था.
_ और हम… हम उसकी उन्हीं कमियों को लेकर उससे दूर हो गए, जिन्हें समझने के लिए शायद थोड़े धैर्य, थोड़े संवाद और थोड़े प्रेम की ज़रूरत थी.
_ ज़िंदगी की सबसे गहरी पीड़ा किसी को खो देना भर नहीं है.
_ सबसे गहरी पीड़ा तो तब होती है, जब उसके चले जाने के बाद हमें अपनी ही कठोरता का एहसास होता है.
_ जब समझ आता है कि हर रिश्ता इसलिए नहीं टूटता कि उसमें प्रेम कम था ;
_ कुछ रिश्ते इसलिए भी टूट जाते हैं, क्योंकि प्रेम के होते हुए भी दोनों एक-दूसरे की सीमाओं को समझ नहीं पाए.
_ कहीं अपेक्षाएँ संवाद से बड़ी हो गईं, कहीं अहंकार ने माफ़ी माँगने नहीं दी, कहीं शिकायतों ने कृतज्ञता को ढक लिया और कहीं दोनों यह सोचते रह गए कि पहल दूसरा करेगा.
_ काश! हम उस वक़्त थोड़ा और ठहर गए होते.
_ काश! किसी एक ग़लती के बाद अंतिम निर्णय लेने के बजाय एक बार और बात कर ली होती.
_ काश! हम यह समझ पाते कि सामने वाला हमारी तरह प्रेम जताना नहीं जानता, इसका अर्थ यह नहीं कि उसके भीतर प्रेम नहीं है.
_ काश! हम किसी को उसकी सबसे कमज़ोर अवस्था में देखकर यह तय न करते कि वह जीवन भर ऐसा ही रहेगा.
_ लेकिन जीवन में सबसे कठिन शब्द शायद ‘काश’ ही है, क्योंकि इसमें पछतावा तो होता है, पर बीते हुए समय को वापस बुलाने की ताक़त नहीं होती.
_ धीरे-धीरे उम्र हमें सिखाती है कि प्रेम किसी परिपूर्ण इंसान को पा लेने का नाम नहीं है.
_ प्रेम उस इंसान के साथ मिलकर बेहतर बनने की यात्रा है, जो अपनी अच्छाइयों और कमियों, दोनों के साथ हमारे जीवन में आया है.
_ प्रेम का अर्थ किसी की हर भूल को सही ठहराना नहीं, बल्कि जहाँ सुधार की गुंजाइश हो, वहाँ उसे एक अवसर देना है.
_ प्रेम का अर्थ स्वयं को मिटा देना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अस्तित्व के लिए ऐसी जगह बनाना है, जहाँ दोनों बिना किसी मुखौटे के जी सकें.
_ क्योंकि किसी रिश्ते में सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि दो लोग कभी एक-दूसरे को दुख न दें.
_ बल्कि यह है कि दुख पहुँच जाने के बाद भी वे अपनी ग़लती स्वीकार करने, एक-दूसरे की बात सुनने और टूटे हुए भरोसे को जोड़ने की ईमानदार कोशिश करें.
_ हाँ, कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जिन्हें बचाने की हर कोशिश के बावजूद छोड़ देना ही बेहतर होता है.
_ जहाँ अपमान बार-बार लौटे, जहाँ विश्वास को जानबूझकर तोड़ा जाए और जहाँ प्रेम के नाम पर किसी की गरिमा कुचली जाए, वहाँ दूर हो जाना कमज़ोरी नहीं, आत्मसम्मान है.
_ हर बिछड़ना ग़लती नहीं होता और हर लौटना ज़रूरी नहीं होता.
_ मगर किसी सच्चे रिश्ते को केवल इसलिए खो देना कि सामने वाला हमारी कल्पना के मुताबिक़ परिपूर्ण नहीं था, शायद जीवन की उन भूलों में से एक है, जिनका दर्द बहुत देर तक साथ चलता है.
_ आख़िरकार, हम सबको कोई ऐसा चाहिए, जो हमें समझे.
_ लेकिन शायद उससे भी ज़्यादा ज़रूरी यह है कि हम किसी को समझने की कोशिश करना सीखें.
_ हम यह स्वीकार करना सीखें कि हमारे सामने खड़ा इंसान हमारी ख़ुशियों का माध्यम भर नहीं है.
_ उसकी अपनी थकान, अपनी इच्छाएँ, अपनी असुरक्षाएँ और अपने सपने भी हैं.
_ किसी को प्रेम करना आसान है, जब वह हमारी उम्मीदों के अनुसार व्यवहार करे.
_ असली परीक्षा तब होती है, जब उसकी कोई कमी हमारे सामने आती है, जब वह हमसे असहमत होता है, जब वह हमारी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता.
_ उसी क्षण हमें तय करना होता है कि हम उसे केवल अपनी सुविधा के लिए चाहते हैं या उसके संपूर्ण अस्तित्व को समझने की भी इच्छा रखते हैं.
_ कभी-कभी एक छोटी-सी माफ़ी वर्षों का रिश्ता बचा सकती है.
_ कभी एक ईमानदार बातचीत किसी ग़लतफ़हमी को हमेशा के लिए मिटा सकती है.
_ कभी किसी की बात पूरी सुन लेना, उसे हज़ार सलाह देने से अधिक सुकून दे सकता है.
_ और कभी-कभी केवल इतना कह देना कि “मैं तुम्हारी हर बात से सहमत नहीं हूँ, लेकिन तुम्हें समझने की कोशिश करना चाहता हूँ” किसी टूटते हुए रिश्ते को एक और अवसर दे सकता है.
_ इसलिए, अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो पूर्ण नहीं है, लेकिन सच्चे मन से आपके साथ चलना चाहता है, तो उसकी कमियों को समझिए, उसकी कोशिशों को पहचानिए और अपने मन की बात उससे कहिए.
_ उसे यह अवसर दीजिए कि वह अपनी भूल सुधारे, और स्वयं भी इतनी विनम्रता रखिए कि अपनी भूल स्वीकार कर सकें.
_ क्योंकि एक दिन सब कुछ पीछे छूट जाएगा.
_ चेहरे बदल जाएँगे, रास्ते अलग हो जाएँगे, समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहेगा.
_ तब शायद हमें इस बात का उतना अफ़सोस नहीं होगा कि किसी ने हमारे लिए क्या-क्या नहीं किया ; जितना इस बात का होगा कि जो हमारे पास था, उसकी क़द्र हम समय रहते क्यों नहीं कर पाए.
_ और अगर कोई चला गया है, तो उसकी याद में स्वयं को उम्र भर दोषी ठहराना भी ज़रूरी नहीं.
_ अपनी भूलों से सीखिए, अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी स्वीकार कीजिए और आगे किसी रिश्ते को अधिक समझदारी, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ जीने का प्रयास कीजिए.
_ बीता हुआ प्रेम लौटे या न लौटे, उससे मिली समझ आपके आने वाले कल को बेहतर बना सकती है.
_ क्योंकि अंत में इंसान को किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश नहीं होती, जिसके भीतर कोई कमी न हो.
_ उसे तो बस कोई ऐसा चाहिए होता है, जिसके सामने वह अपनी कमियों के साथ भी इंसान बना रह सके.
_ कोई ऐसा, जो उसके बिखरने पर उसका मज़ाक न बनाए, उसकी ख़ामोशी को हमेशा ग़लत न समझे और उसकी एक भूल के कारण उसके सारे प्रेम को झूठा न मान ले.
_ कोई ऐसा, जो यह जानता हो कि इंसान को सुधारने के लिए हर बार उसे छोड़ देना ज़रूरी नहीं होता.
_ कभी-कभी उसका हाथ थामकर साथ चलना भी ज़रूरी होता है.
_ और सबसे बढ़कर, कोई ऐसा जो वक़्त रहते यह समझ जाए कि रिश्ते हमेशा इसलिए नहीं टूटते कि लोग एक-दूसरे से प्रेम करना छोड़ देते हैं.
_ कभी-कभी वे इसलिए भी टूट जाते हैं, क्योंकि दोनों अपने-अपने सच में इतने उलझ जाते हैं कि एक-दूसरे का दर्द देखना भूल जाते हैं.
_ ज़िंदगी बहुत छोटी है और इंसान बहुत अनमोल.
_ इसलिए किसी की छोटी-सी कमी को इतना बड़ा मत बना दीजिए कि उसके चले जाने के बाद उसकी हज़ार अच्छाइयाँ भी आपको उसे वापस न दिला सकें.
_ क्योंकि कुछ लोग जीवन में दोबारा मिल भी जाएँ, तो पहले जैसे नहीं मिलते.
_ कुछ रिश्तों में लौटने के रास्ते होते हैं, मगर लौटने का वह समय नहीं होता.
_ और कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनने की सबसे अधिक इच्छा हमें तभी होती है, जब उन्हें पुकारने का अधिकार हम अपने ही हाथों से खो चुके होते हैं.
_ शायद इसी का नाम जीवन है.
_ पहले हम इंसानों से परिपूर्ण होने की उम्मीद करते हैं, फिर उनकी अपूर्णताओं को समझने में उम्र गुज़ार देते हैं और अंत में यह जान पाते हैं कि प्रेम का सबसे सुंदर रूप किसी को बदलकर अपना बना लेना नहीं, बल्कि उसे समझते हुए साथ बढ़ना था.
_ बस, काश यह समझ थोड़ी पहले आ जाती तो शायद कुछ लोग आज भी हमारे साथ होते.
_ कुछ शामें इतनी सूनी न होतीं.
_ कुछ यादें आँखों को नम करने के बजाय चेहरे पर मुस्कान ले आतीं.
_ और दिल के किसी कोने में यह टीस न रहती कि जिसे हम उसकी कमियों के कारण खो बैठे, वह शायद अपनी सारी कमियों के बावजूद हमारे जीवन का सबसे सच्चा हिस्सा था.
_ लेकिन अब जो बीत गया, वह लौट नहीं सकता.
_ हमारे पास केवल आज है.
_ आज किसी को समझ लेने का, आज किसी की बात सुन लेने का, आज अपनी ग़लती स्वीकार कर लेने का और आज उस प्रेम की क़द्र कर लेने का, जो कल केवल एक याद बनकर रह सकता है.
_ क्योंकि इंसानों को खोने के बाद उनकी अहमियत समझना बहुत आसान है, लेकिन उनके पास रहते हुए उनकी अपूर्णताओं में भी प्रेम खोज पाना ही असली परिपक्वता है.
_ और सच तो यह है.
_ हमारी ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा याद वही लोग नहीं आते, जिन्होंने हमारे लिए सब कुछ सही किया था.
_ कभी-कभी सबसे गहरी याद उस इंसान की आती है, जो ख़ुद अधूरा था, हमें भी अधूरा जानता था, फिर भी हमारे बीच एक ऐसा अपनापन था, जिसे हम उसकी कमियों से बड़ा मानना सीख ही नहीं पाए.
_ अब बस उसकी याद है, कुछ अधूरे सवाल हैं और एक ख़ामोश-सा पछतावा कि काश, हमने उसे खोने से पहले समझ लिया होता.
_ कि काश, हमने प्रेम को अपनी उम्मीदों से थोड़ा बड़ा होने दिया होता.
_ और काश, ज़िंदगी ने हमें यह सबक सिखाने के लिए किसी अपने के बिछड़ने का इंतज़ार न किया होता.!!
– Ishq Banaras