Quotes by Sanjay Sinha

फैसला आपका होना चाहिए

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एक बात गांठ बांध लीजिए।

आपकी जिंदगी खराब करने के लिए किसी दुश्मन का होना जरूरी नहीं है।

कई बार आपके आसपास ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जिन्हें आप अपना समझते हैं और वही धीरे धीरे आपकी सोच, आपका आत्मविश्वास और आपकी जिंदगी का सुकून खा जाते हैं।

संजय सिन्हा की आज की कहानी इन्हीं लोगों के बारे में है।

एक आदमी था। उसने तय किया कि अब वह अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करेगा।

उसने अपने दस परिचितों से अपनी योजना साझा की।

पहले ने कहा, रहने दो, तुमसे नहीं होगा।

दूसरे ने कहा, दुनिया बहुत खराब है।

तीसरे ने कहा, इतनी मेहनत करने से क्या मिलेगा?

चौथे ने कहा, तुम्हारी किस्मत ही खराब है।

पांचवें ने उसकी पीठ थपथपाई और फिर पीठ पीछे उसकी कहानी बदल दी।

छठे ने उसकी मदद मांगी, लेकिन जब उसकी मदद करने की बारी आई तो फोन उठाना बंद कर दिया।

सातवें ने उसकी तरक्की की खबर सुनी तो मुस्कुराया जरूर, मगर उसकी आंखों में खुशी नहीं थी।

आठवां अपनी बुरी आदतों में ऐसा डूबा था कि उसे अपनी जिंदगी की फिक्र नहीं थी, लेकिन वह दूसरों को जिंदगी जीने का तरीका सिखाता था।

नौवें के पास खुद करने के लिए कुछ नहीं था, मगर वह हर वक्त उसकी योजनाओं में कमियां निकालता रहता था।

दसवां सबसे खतरनाक था। वह हर बार कहता, मैं तो तुम्हारा भला चाहता हूं। फिर ऐसी सलाह देता कि आदमी अपना फैसला लेने से पहले ही डर जाए।

उस आदमी को लगा कि दुनिया में कोई उसका अपना नहीं है।

लेकिन एक दिन उसे एक बात समझ आई।

उसे दस दुश्मनों ने नहीं रोका था। उसे उन दस लोगों की बातों पर भरोसा करने की आदत ने रोका था।

उस दिन उसने किसी से लड़ाई नहीं की। किसी को बुरा भला नहीं कहा। उसने बस अपनी जिंदगी के दरवाजे पर एक अदृश्य ताला लगा दिया।

अब हर कोई उससे मिल सकता था, लेकिन हर कोई उसके मन में जगह नहीं बना सकता था।

प्रिय परिजनों, जिंदगी में दस तरह के लोगों से हमेशा सावधान रहिए।

शिकायत करने वाले, क्योंकि वे आपको आपकी खुशियां भूलना सिखा देंगे।

हर बात में बुराई खोजने वाले, क्योंकि वे आपकी उम्मीदों को कमजोर कर देंगे।

आलसी लोग, क्योंकि वे आपको मेहनत के बजाय बहाने देना सिखाएंगे।

हर बात में खुद को पीड़ित बताने वाले, क्योंकि वे आपको अपनी जिम्मेदारी से भागना सिखाएंगे।

झूठ बोलने वाले, क्योंकि उनके साथ रहते रहते आपको सच पर भी शक होने लगेगा।

मतलब के रिश्ते रखने वाले, क्योंकि वे आपको इंसान नहीं, इस्तेमाल की चीज समझेंगे।

आपसे जलने वाले, क्योंकि आपकी छोटी सी हार उनके लिए त्योहार और आपकी बड़ी जीत उनके लिए मातम बन जाएगी।

अपनी बुरी आदतों के गुलाम लोग, क्योंकि कई बार उनकी गलतियों की कीमत भी आपको चुकानी पड़ती है।

बिना लक्ष्य वाले लोग, क्योंकि वे आपकी मंजिल को भी बेकार साबित करने में लगे रहेंगे।

और आखिर में वे लोग, जो आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। ये सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, क्योंकि ये आपको रोकते वक्त भी यही कहते हैं कि हम तुम्हारा भला चाहते हैं।

लेकिन संजय सिन्हा की एक बात और समझिए।

इन लोगों से बचने का मतलब यह नहीं कि आप खुद को बहुत अच्छा और बाकी दुनिया को खराब मानने लगें।

हो सकता है, कभी-कभी इनमें से कोई आदत हमारे भीतर भी हो।

इसलिए दूसरों को पहचानने से पहले खुद को पहचानिए।

किसी को अपनी जिंदगी से निकालना हमेशा जरूरी नहीं होता। कई बार बस उसे अपनी जिंदगी का फैसला करने का अधिकार देना बंद करना पड़ता है।

और हां, हर किसी को जवाब देना भी जरूरी नहीं है।

कुछ लोगों को आपकी सफाई चाहिए होती है, ताकि वे आपसे बहस कर सकें।

कुछ को आपकी कमजोरी चाहिए होती है, ताकि वे आपको नीचा दिखा सकें।

और कुछ को आपकी असफलता चाहिए होती है, ताकि वे कह सकें कि हमने तो पहले ही कहा था।

ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी जिंदगी में इतना अच्छा कर जाएं कि आपको जवाब देने की जरूरत ही न पड़े।

याद रखिए, आपके जीवन में कौन आता है, यह हमेशा आपके हाथ में नहीं होता। लेकिन किसे अपने मन में कितनी जगह देनी है, यह फैसला आपका होना चाहिए।

#SanjaySinha

Quotes by Ishq Banaras

हर तरफ भाग-दौड़ देख रहा हूं, मानों हर किसी ने अपने वर्तमान को गिरवी रख दिया है सिर्फ उस भविष्य के लिए जिसके बारे में कोई भी निश्चित नहीं है.

_ कितनी अजीब बात है कि लोग कल के लिए जीते हैं और आज को ऐसे कुचल डालते हैं जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो.

_ जबकि सच यही है कि कौन जाने कल किसका होगा, कौन जिंदा रहेगा और कौन सिर्फ याद बन जाएगा.

_ भविष्य की चिंता में खोए लोग अक्सर वर्तमान के छोटे-छोटे सुख गंवा देते हैं.

_ उनकी आँखों में सिर्फ एक दौड़ होती है जमा करने की, पाने की, सुरक्षित कर लेने की.

_ पर ये सब जमा करके किसके लिए ? किस काम का ?

_ जब आज ही जीने की फुर्सत न मिले, तो कल का खजाना किस काम आएगा ?

_ मुझे लगता है, जो लोग वर्तमान की साँसों को दबाकर भविष्य की थैलियाँ भरने में लगे रहते हैं, वे सबसे बड़े मूर्ख हैं.

_ क्योंकि वे न इस पल के रहते हैं न अगले पल के.

_ जैसे एक प्यासा आदमी जो पानी से भरा घड़ा देखकर भी मर जाए, क्योंकि उसने कभी एक घूंट पीने की फुर्सत ही नहीं निकाली.

_ असल में जीना तो आज है. कल का कोई भरोसा नहीं.

_ लेकिन अफसोस, ये सबसे सरल बात समझने में सबसे कठिन लगती है.

– Ishq Banaras

हम सब शायद अपनी-अपनी ज़िंदगी में कुछ ऐसे दर्द लेकर चल रहे हैं, जिनका ज़िक्र किसी से नहीं करते.

_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, आवाज़ में सामान्य होने का अभिनय रहता है और हम दुनिया को यकीन दिलाते रहते हैं कि सब ठीक है.

_ मगर सच तो यह है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी हो सकती है, जिसे सुनने वाला शायद ही कोई हो.

_ कुछ दर्द शब्दों में कहे नहीं जाते, बस आँखों में उतर जाते हैं और इंसान उन्हें उम्र भर अपने भीतर लिए घूमता रहता है.

_ मैं अक्सर सोचता हूँ कि आखिर हम उम्मीदों से इतने थक क्यों गए हैं ?

_ शायद इसलिए कि उम्मीद जितनी खूबसूरत होती है, उसके टूटने की आवाज़ उतनी ही गहरी होती है.

_ हम हर बार सोचते हैं—कल बेहतर होगा, कोई हमें समझेगा, कोई लौट आएगा, हालात बदलेंगे, जिंदगी फिर मुस्कुराएगी.

_ लेकिन जब बार-बार हमारी उम्मीदें खाली हाथ लौटती हैं, तो धीरे-धीरे मन किसी चीज़ की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है.

_ फिर इंसान दुखी कम और उदासीन ज्यादा हो जाता है ; उसे खुशी की चाह भी डराने लगती है, क्योंकि वह जानता है कि हर उम्मीद के पीछे टूटने का एक डर छिपा है.

_ दिन गुजरते रहते हैं.

_ वही जिम्मेदारियाँ, वही भागदौड़, वही चेहरे और वही औपचारिक बातचीत.

_ हम हँसते हैं, दूसरों की बातें सुनते हैं, उनकी परेशानियों में उनका साथ देते हैं और फिर अपनी परेशानियों को लेकर चुपचाप घर लौट आते हैं.

_ अजीब बात है न—हम दूसरों के आँसू पहचान लेते हैं, लेकिन अपनी आँखों की नमी छुपाने में पूरी उम्र लगा देते हैं.

_ शायद इसलिए कि हमें बचपन से सिखाया गया कि मजबूत बनो, मगर किसी ने यह नहीं बताया कि मजबूत होने का मतलब हर दर्द को अकेले सहना नहीं होता.

_ सबसे मुश्किल वक्त अक्सर रात का होता है.

_ दिन के शोर में इंसान खुद से बचा रहता है, लेकिन रात जब कमरे की दीवारों पर सन्नाटा उतरता है, तब भीतर दबे हुए सारे सवाल जाग जाते हैं.

_ पुरानी बातें याद आती हैं, अधूरे रिश्ते सामने आ खड़े होते हैं, कुछ चेहरे बिना बुलाए आँखों में उतर आते हैं और मन पूछता है—आखिर इतना सब सहकर भी हम किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं ?

_ कितनी बार मन करता है कि किसी के सामने बैठकर सब कह दें, बिना कुछ छुपाए, बिना मजबूत बनने का अभिनय किए.

_ लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं सामने वाला हमारी कहानी सुनकर भी हमें समझ न पाए और तब शब्द गले में ही रह जाते हैं.

_ धीरे-धीरे इंसान अपने दर्द के साथ समझौता करना सीख लेता है.

_ मुस्कुराना उसकी आदत बन जाता है, चुप रहना उसका स्वभाव और अकेले सह लेना उसकी मजबूरी.

_ बाहर से देखने वाले को लगता है कि वह बहुत संभला हुआ है, मगर भीतर वह हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा समेट रहा होता है.

_ कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि सुकून कोई बहुत बड़ी चीज़ नहीं, बस कुछ पल ऐसे मिल जाएँ जहाँ मन को किसी बात का जवाब न देना पड़े, किसी रिश्ते को निभाना न पड़े और किसी के सामने अपने ठीक होने का प्रमाण न देना पड़े.

_ फिर भी जिंदगी पूरी तरह बेरहम नहीं होती.

_ कभी किसी पुराने गीत की धुन अचानक भीतर का कोई बंद दरवाज़ा खोल देती है.

_ किसी किताब की एक पंक्ति अपनेपन का एहसास करा देती है.

_ किसी पुराने मित्र का संदेश, किसी अपने की छोटी-सी चिंता या खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी यह याद दिला देती है कि जिंदगी में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.

_ शायद सुकून हमेशा बड़ी खुशियों में नहीं मिलता ; कभी-कभी वह उन छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम अपनी व्यस्त जिंदगी में देखने से चूक जाते हैं.

_ हम अक्सर सोचते हैं कि दर्द कभी खत्म नहीं होगा.

_ लेकिन शायद हर दर्द का खत्म होना जरूरी भी नहीं होता.

_ कुछ दर्द हमें बदलने आते हैं, कुछ हमें रिश्तों की कीमत समझाने, कुछ हमें अपने भीतर झाँकना सिखाने और कुछ हमें यह बताने कि हम जितना खुद को कमजोर समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा सहने की क्षमता हमारे भीतर है.

_ वक्त हर घाव को मिटा दे, यह जरूरी नहीं ; मगर वह उसके साथ जीना जरूर सिखा देता है.

_ शायद जिंदगी का सच यही है कि हममें से कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है.

_ हर किसी के भीतर कोई अधूरी कहानी है, कोई खोया हुआ रिश्ता है, कोई ऐसा वादा है जिसे निभाया नहीं जा सका, कोई ऐसा अपना है जिसे चाहकर भी रोक नहीं पाए और कोई ऐसा समय है जिसे चाहकर भी वापस नहीं ला सकते.

_ हम सब अपने-अपने हिस्से की खामोशी लिए इस दुनिया में चलते रहते हैं.

_ और शायद इसी का नाम जिंदगी है.

_ टूटकर भी बिखर न जाना, थककर भी अगली सुबह उठ जाना, आँखों में नमी होते हुए भी किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना.

_ हम सब अपने भीतर कुछ ऐसा ढो रहे हैं, जिसका वजन दुनिया को दिखाई नहीं देता.

_ फिर भी कदम चलते रहते हैं, दिन गुजरते रहते हैं और उम्मीद की कोई बहुत छोटी-सी लौ कहीं भीतर जलती रहती है.

_ क्योंकि शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच यही है कि अँधेरा चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, मन के किसी कोने में सुबह के लौट आने की संभावना हमेशा बची रहती है.

_ बस हमें उस संभावना को पूरी तरह मरने नहीं देना चाहिए.

_ कभी-कभी खुद के लिए भी उतनी ही नरमी बचाकर रखनी चाहिए, जितनी हम दूसरों के दर्द के लिए रखते हैं.

_ हम सब अपने-अपने दर्द के साथ जी रहे हैं.. कोई उसे शब्द दे देता है, कोई आँसुओं में बहा देता है और कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है.

_ मगर हर दिल के भीतर कहीं न कहीं एक छोटी-सी पुकार जरूर होती है.

_ कोई हमें भी समझ ले.. बिना कुछ पूछे, बिना कोई फैसला सुनाए.

_ शायद इंसान को हमेशा समाधान नहीं चाहिए होता, कभी-कभी उसे बस इतना चाहिए होता है कि कोई उसके पास बैठकर कह दे !

_ तुम्हें हर वक्त मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं है.

– Ishq Banaras

कभी-कभी इस भीड़-भरी दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे मिल जाते हैं जो किसी ऊँचाई, किसी प्रसिद्धि, किसी बड़ी जीत की दौड़ में नहीं हैं.

_ उनके जीवन की कोई चमकदार तमन्ना नहीं होती। न किसी मंच की ख्वाहिश, न किसी ताली की चाह.

_ वे बस चाहते हैं कि उनके भीतर जो कोई अनकहा दर्द पल रहा है, वो किसी तरह कम हो जाए.

_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा सा सुकून है जो हर रात की नींद से पहले खोजते हैं.

_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है बिना पूछे, बिना बताए.

_ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूंढते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.

_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.

_ वे रोज मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए जब उनकी आत्मा शांत हो जाए, कि कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए, कि कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए बिना कहे.

_ वे लोग आखिरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि वह विदा सुकून में हो, शांति में हो, ऐसे कि नींद में कोई सोच न जागे, ऐसे कि मृत्यु से पहले जीवन कुछ हल्का लगे.

_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं. _ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थक कर मुस्कुरा देते हैं.

_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.

– Ishq Banaras

एक उम्र, एक मोड़ ऐसा जरूर आता है, _ जब मन को यह समझाना पड़ता है कि हर उस इंसान के दिल में हमेशा अपनी जगह बनाए रखना संभव नहीं, जिसे हमने कभी अपना समझा था.

_ कुछ लोग हमारे जीवन में बहुत गहराई से आते हैं, हमारी आदतों, हमारी स्मृतियों और हमारी भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं,

_ इसलिए जब उनके भीतर हमारे लिए पहले जैसा अपनापन नहीं बचता, तो सबसे पहले हम खुद को कटघरे में खड़ा कर देते हैं.

_ सोचते हैं—हमसे कहाँ कमी रह गई, हमने क्या कम किया, ऐसा क्या बदल गया कि जो कभी इतने अपने थे, आज इतने दूर हो गए.

_ लेकिन शायद हर दूरी के पीछे कोई गलती नहीं होती.

_ कुछ रिश्ते बस अपने हिस्से की धूप लेकर आते हैं, थोड़ी देर हमारे साथ चलते हैं और फिर समय की किसी अनदेखी राह पर हमसे अलग हो जाते हैं.

_ यह स्वीकार करना कठिन है, मगर जीवन की कुछ सच्चाइयाँ ऐसी ही होती हैं—उन्हें समझने में देर लगती है, पर समझ आ जाएँ तो मन बहुत कुछ छोड़ देना सीख जाता है.

_ हम अक्सर अपने स्नेह को किसी स्थायी वचन की तरह जीते हैं.

_ किसी के लिए अपना समय बचाते हैं, उसकी खामोशियाँ पढ़ते हैं, उसकी परेशानियों में उसके साथ खड़े रहते हैं और मन ही मन मान लेते हैं कि इतनी सच्चाई, इतना अपनापन और इतना समर्पण शायद हमें उसके जीवन में हमेशा के लिए जगह दे देगा.

_ लेकिन रिश्ते केवल हमारे दिए हुए से नहीं चलते; उनमें सामने वाले का मन, उसकी परिस्थितियाँ, उसकी जरूरतें और उसकी बदलती प्राथमिकताएँ भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती हैं.

_ कभी-कभी हम किसी के जीवन में बहुत जरूरी होते हैं, और फिर एक दिन बिना किसी घोषणा के हमारी जरूरत कम हो जाती है.

_ यही वह क्षण होता है जब हमें अपने प्रेम की कीमत नहीं, उसकी प्रकृति समझनी चाहिए.

_ किसी का बदल जाना हमेशा हमारे कम हो जाने का प्रमाण नहीं होता.

_ कई बार बस इतना होता है कि जिंदगी ने दोनों के रास्तों की दिशा बदल दी होती है.

_ और शायद यही मान लेना, अपने मन को सबसे बड़ी राहत देना है.

_ इस सत्य को देर से स्वीकार करने वाला मन सबसे ज़्यादा टूटता है.

_ वह हर बदलते व्यवहार में अपनी ही कमी खोजता है, हर दूरी को अपनी गलती मान लेता है.

_ वह स्वयं को साबित करने की थकाऊ दौड़ में लग जाता है, ये भूलकर कि प्रेम और अपनापन किसी प्रतियोगिता का परिणाम नहीं होते.

_ जितनी जल्दी ये समझ विकसित हो जाती है कि हर रिश्ता स्थायी नहीं होता, उतनी ही जल्दी मन अनावश्यक अपेक्षाओं से मुक्त होने लगता है.

_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.

_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.

_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.

_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या, और आत्मग्लानि जन्म लेती है.

_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.

_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.

_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.

_ वह अपनी ही तकलीफों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढता रहता है.

_ जबकि आत्म-सम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.

_ ये स्वीकार करना कि आप किसी के केंद्र में नहीं हैं, आपको कमजोर नहीं बनाता बल्कि मजबूत करता है.

_ ये आपको सिखाता है कि भावनात्मक सुरक्षा बाहर नहीं, भीतर से आती है.

_ जब आप ये मान लेते हैं कि हर कोई आपके साथ नहीं रहेगा, तब आप उन रिश्तों को अधिक सच्चाई से जी पाते हैं जो वास्तव में मौजूद हैं.

_ तब आप कम लोगों से ही सही पर गहराई से जुड़ते हैं.

_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.

_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.

_ ये समझ आपको भावनात्मक चोटों से नहीं बचाती, पर आपको टूटने से जरूर बचा लेती है._ अंततः ये समझ लीजिए शांति उसी दिन आती है, जब आप ये मान लेते हैं कि आपका मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.

_ आप जैसे हैं, उतने ही पर्याप्त हैं.

_ जो लोग आपके जीवन में रहना चाहेंगे, वे बिना शर्त रहेंगे, और जो जाना चाहेंगे, उन्हें रोके रखना आपके सम्मान के विरुद्ध होगा.

_ इस सत्य को जितनी सहजता से स्वीकार कर लिया जाए, जीवन उतना ही हल्का, संतुलित और सच्चा हो जाता है.!!

-Ishq Banaras

एक उम्र के बाद धीरे-धीरे यह समझ आने लगता है कि हम हर किसी के लिए हमेशा उतने ही ख़ास नहीं रह सकते, जितने कभी हुआ करते थे.

_ कुछ रिश्ते वक़्त के साथ बदल जाते हैं, कुछ लोगों की प्राथमिकताएँ और कुछ के मन में हमारे लिए बची हुई जगह.

_ जो कभी हमारी आवाज़ सुनने के लिए बेचैन रहते थे, वे एक दिन हमारी ख़ामोशी को भी अनदेखा करने लगते हैं.

_ और सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तब होती है, जब हमें यह एहसास होता है कि जिसे हमने अपने जीवन का अहम हिस्सा माना, उसकी ज़िंदगी में हम धीरे-धीरे एक मामूली-सा हिस्सा बनकर रह गए.

_ दिल इस बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता, क्योंकि हम रिश्तों को केवल निभाते नहीं, उनमें अपनी भावनाएँ, अपनी उम्मीदें और अपने होने का एक हिस्सा भी छोड़ आते हैं.

_ हम अक्सर यह सोचकर किसी से जुड़ते हैं कि हमारा सच्चा अपनापन, हमारी परवाह और हमारा निस्वार्थ प्रेम एक दिन उसके दिल में हमारे लिए ऐसी जगह बना देगा, जिसे वक़्त भी नहीं बदल पाएगा.

_ हम उसकी ख़ुशी में ख़ुश होते हैं, उसके दुःख को अपना समझते हैं और कई बार अपनी परेशानियों को भी इसलिए छिपा लेते हैं, ताकि उसकी मुस्कान फीकी न पड़े.

_ हमें लगता है कि जिस रिश्ते में हमने इतना कुछ सच्चे मन से दिया है, वह रिश्ता हमें कभी पराया नहीं होने देगा.

_ लेकिन ज़िंदगी हमेशा हमारी भावनाओं के हिसाब से नहीं चलती.

_ कभी-कभी हम किसी के लिए उतना सब कुछ होते हैं, जितना वह उस वक़्त चाहता है, और फिर एक दिन उसकी ज़िंदगी बदलती है, उसकी ज़रूरतें बदलती हैं और हमारे लिए उसके भाव भी पहले जैसे नहीं रहते.

_ तब समझ आता है कि किसी को सच्चे दिल से चाहना हमारे हाथ में है, लेकिन उसके दिल में हमेशा वही जगह बनाए रखना हमारे हाथ में नहीं.

_ हम अक्सर ये मान बैठते हैं कि हमारा दिया हुआ समय, हमारी ईमानदारी, हमारा समर्पण किसी के जीवन में हमें स्थायी स्थान दिला देगा.

_ पर सच ये है कि किसी के प्रिय बने रहना हमारी योग्यता या नीयत पर नहीं, बल्कि सामने वाले की ज़रूरतों, मनःस्थिति और स्वार्थों पर भी निर्भर करता है.

_ जब तक आप किसी के लिए उपयोगी हैं, समझे जाते हैं ; और जिस दिन आपकी भूमिका बदल जाती है, उसी दिन भावनाएँ भी बदलने लगती हैं.

_ यह व्यक्तिगत असफलता नहीं है, यह मानवीय स्वभाव है.

_ इस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता.

_ मन बार-बार बीते हुए दिनों में लौटता है, पुराने व्यवहार में आज के अपनापन को तलाशता है और उन सवालों के जवाब ढूँढ़ता रहता है, जिनका शायद कोई जवाब होता ही नहीं.

_ हम सोचते हैं कि आख़िर हमसे ऐसी क्या कमी रह गई, हमने कहाँ गलती की, हमारी कौन-सी बात बदल गई.

_ कभी-कभी तो हम सामने वाले के बदले हुए व्यवहार के लिए भी ख़ुद को ही ज़िम्मेदार मानने लगते हैं.

_ हम और अधिक समझने, और अधिक निभाने और ख़ुद को बार-बार साबित करने की कोशिश करते हैं, जबकि सच यह है कि हर बदलते रिश्ते के पीछे हमारी कोई गलती हो, यह ज़रूरी नहीं.

_ कुछ दूरियाँ किसी शिकायत से नहीं, वक़्त के साथ बदलती भावनाओं से पैदा होती हैं. _ और कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें बचाने की कोशिश में हम ख़ुद से ही दूर होने लगते हैं.

_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.

_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.

_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.

_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या और आत्मग्लानि जन्म लेती है.

_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.

_ शायद जीवन की सबसे कठिन सीख यही है कि हर उस इंसान को रोकना ज़रूरी नहीं, जिसके जाने से हमारा दिल दुखता है.

_ कुछ लोगों को हम जितना भी समझ लें, वे हमें समझने की कोशिश नहीं करते.

_ कुछ रिश्तों में हम जितना भी अपना मन लगा लें, सामने वाला उतनी गहराई से जुड़ नहीं पाता.

_ ऐसे में बार-बार अपनी अहमियत याद दिलाना, अपने प्रेम का प्रमाण देना और अपने होने की वजह समझाना मन को भीतर तक थका देता है.

_ प्रेम वह जगह है, जहाँ इंसान को बार-बार यह साबित नहीं करना चाहिए कि वह भी मायने रखता है.

_ जहाँ हर बार अपने हिस्से का अपनापन माँगना पड़े, वहाँ एक दिन ख़ामोशी से ख़ुद को सँभाल लेना ही बेहतर होता है.

_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.

_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.

_ वह अपनी ही तकलीफ़ों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढ़ता रहता है.

_ जबकि आत्मसम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.

_ इसका अर्थ यह नहीं कि हम लोगों से उम्मीद करना छोड़ दें, किसी से प्रेम न करें या रिश्तों से अपना विश्वास उठा लें.

_ इसका अर्थ केवल इतना है कि हम प्रेम करें, लेकिन ख़ुद को खोकर नहीं ;

_ किसी की परवाह करें, लेकिन अपनी भावनाओं को अनदेखा करके नहीं ;

_ किसी के साथ चलें, लेकिन इस डर में नहीं कि उसके बिना हमारा रास्ता अधूरा हो जाएगा.

_ रिश्ते जीवन को ख़ूबसूरत बनाते हैं, लेकिन हमारी पूरी ज़िंदगी केवल किसी एक रिश्ते के सहारे नहीं टिकी होती.

_ जब यह बात भीतर उतरने लगती है, तब हम दूसरों के बदलने से दुखी तो होते हैं, मगर उनके बदल जाने को अपनी कमी समझकर ख़ुद को सज़ा देना बंद कर देते हैं.

_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.

_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.

_ यह समझ हमें भावनात्मक चोटों से पूरी तरह नहीं बचाती, लेकिन इतना ज़रूर सिखा देती है कि हर चोट के बाद ख़ुद को समेटना है, हर दूरी के बाद अपनी अहमियत याद रखनी है और हर बिछड़ाव के बाद जीवन में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनाए रखनी है.

_ आख़िरकार, शांति तब आने लगती है, जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हमारा मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.

_ किसी का हमें चाहना सुखद है, लेकिन किसी का हमें न चाह पाना हमारी अहमियत का अंत नहीं.

_ जो लोग हमारे जीवन में रहना चाहते हैं, वे अपने व्यवहार से अपने होने का एहसास कराते हैं.

_ और जिन्हें किसी और दिशा में आगे बढ़ना है, उन्हें रोकते रहने से न तो रिश्तों में पहले जैसा अपनापन लौटता है, न मन को वह सुकून मिलता है, जिसकी उसे तलाश होती है.

_ इसलिए किसी के बदल जाने पर अपने भीतर के प्रेम को ग़लत मत समझिए.

_ आपने किसी को सच्चे मन से चाहा, उसकी परवाह की और अपनी तरफ़ से रिश्ता निभाया, तो यह आपकी भावनाओं की सच्चाई है.

_ सामने वाला उसे समझ पाया या नहीं, यह अलग बात है.

_ हर अधूरा रिश्ता आपकी कमी की कहानी नहीं होता और हर बिछड़ाव आपकी हार नहीं होता.

_ कभी-कभी ज़िंदगी हमें उन लोगों से दूर करके नहीं, बल्कि उनके बिना जीना सिखाकर भी बहुत कुछ समझाती है.

_ धीरे-धीरे हम फिर से अपनी छोटी-छोटी ख़ुशियों में लौटने लगते हैं, अपने मन की सुनने लगते हैं और यह जानने लगते हैं कि सुकून केवल किसी के साथ होने में नहीं, अपने साथ सहज होने में भी है.

_ तब किसी की याद आती है, तो दिल उदास ज़रूर होता है, मगर हम अपनी पूरी दुनिया को उस याद के हवाले नहीं कर देते.

_ आख़िर में बस इतना याद रखिए कि हर किसी की ज़िंदगी में हमेशा ख़ास बने रहना संभव नहीं, लेकिन किसी के बदल जाने की वजह से ख़ुद की नज़रों में कम हो जाना भी ज़रूरी नहीं.

_ कुछ लोग हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं, कुछ के मन में हमारी जगह बदल जाती है, मगर इन सबके बीच हमें ख़ुद का साथ नहीं छोड़ना चाहिए.

_ क्योंकि रिश्तों के बदलने का दुःख वक़्त के साथ हल्का पड़ सकता है, लेकिन ख़ुद को भुलाकर किसी की स्वीकृति पाने की कोशिश हमें भीतर से थका देती है.

_ इसलिए जो साथ हैं, उन्हें पूरे मन से सँभालिए ;

_ जो दूर हो रहे हैं, उन्हें समझने की कोशिश कीजिए.

_ और जहाँ बार-बार ख़ुद को साबित करना पड़े, वहाँ अपने मन को थोड़ा आराम दीजिए.

_ हर किसी के लिए प्रिय बने रहना ज़रूरी नहीं, अपने लिए सम्मान और सुकून बचाए रखना ज़रूरी है.!!

– Ishq Banaras

किसी को अपने जीवन में बनाए रखने की ज़िद को प्रेम समझ लेना, शायद मनुष्य की सबसे गहरी भावनात्मक भूल है.

_ प्रेम किसी के पैरों में बाँधी गई वह बेड़ी नहीं, जिसे कसकर हम उसके ठहरने का भरोसा कर लें.

_ प्रेम तो वह विश्वास है, जिसमें सामने वाले को पूरी आज़ादी देकर भी उसके लौट आने की उम्मीद से मन का एक कोना रोशन रहता है.

_ किसी का हाथ थामना प्रेम है, मगर उस हाथ को अपनी मुट्ठी में कैद कर लेना मोह है.

_ जो रिश्ता बार-बार यह साबित करने की माँग करे कि तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगे, वहाँ प्रेम से अधिक खो देने की आशंका पल रही होती है.

_ क्योंकि जो मन से आपका है, उसे हर पल अपने होने का प्रमाण नहीं देना पड़ता, और जो मन से जा चुका है, उसे हज़ार वादों, हज़ार आँसुओं और हज़ार मिन्नतों से भी अपने पास नहीं रखा जा सकता.

_ इसलिए जब कोई आपके जीवन से जाने का निर्णय कर ले, तो उसके पीछे अपनी पूरी दुनिया लेकर मत भागिए.

_ किसी के लौट आने की प्रतीक्षा में अपने भीतर के उस इंसान को मत खो दीजिए, जो कभी हँसता था, सपने देखता था और छोटी-छोटी खुशियों में भी जीवन का अर्थ खोज लेता था.

_ याद रखिए, किसी के चले जाने से आपका प्रेम असफल नहीं हो जाता, न ही आपकी अहमियत कम हो जाती है.

_ कुछ लोग हमारे जीवन में साथ निभाने नहीं, हमें जीवन का कोई कठिन सत्य समझाने आते हैं.

_ उनके जाने का दुःख अपनी जगह है, लेकिन उस दुःख के कारण स्वयं से दूर हो जाना उससे भी बड़ी त्रासदी है.

_ किसी के लिए आँखें नम होना स्वाभाविक है, मगर उन्हीं आँखों में अपने भविष्य के सारे सपने बुझा देना ज़रूरी नहीं.

_ जो आपको छोड़कर चला गया, उसे जाने दीजिए.

_ अपने भीतर उस व्यक्ति को बचाकर रखिए, जिसने कभी पूरे विश्वास से प्रेम करना सीखा था.

_ जीवन में कभी-कभी हम किसी के लिए अपना समय, अपनी ऊर्जा, अपनी भावनाएँ, अपने सपने और अपना सर्वस्व तक समर्पित कर देते हैं.

_ हम उसके संघर्ष में साथ खड़े रहते हैं, उसके अंधेरों में दीपक बनते हैं, उसकी असफलताओं में सहारा बनते हैं.

_ लेकिन फिर एक दिन वही व्यक्ति सफलता की सीढ़ियाँ चढ़कर पीछे मुड़कर देखना भी आवश्यक नहीं समझता.

_ वह आगे बढ़ जाता है, और पीछे छूट जाता है वह इंसान जिसने उसकी यात्रा में अपना बहुत कुछ लगा दिया था.

_ ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग टूट जाते हैं.

_ वे सोचते हैं कि उनके साथ अन्याय हुआ है, उन्हें धोखा मिला है, उनकी निष्ठा का अपमान हुआ है.

_ यह पीड़ा स्वाभाविक है, लेकिन यदि थोड़ी गहराई से देखा जाए तो शायद यह कहानी उतनी दुखद नहीं, जितनी दिखाई देती है.

_ यदि किसी ने आपके समर्पण के बदले विश्वासघात चुना, तो उसने आपके चरित्र को छोटा नहीं किया, उसने अपने चरित्र का परिचय दिया है.

_ आपके द्वारा किया गया प्रेम, आपकी निष्ठा, आपका त्याग आज भी उतना ही पवित्र है, जितना उस दिन था जब आपने उसे निभाया था.

_ किसी दूसरे के कर्म आपकी अच्छाई को कम नहीं कर सकते. और सच मानिए, कभी-कभी किसी का छोड़कर चले जाना भी एक प्रकार की मुक्ति होता है.

_ जो व्यक्ति आपके मूल्य को नहीं समझता, जो आपके प्रेम का सम्मान नहीं करता, जो आपके समर्पण को केवल एक सीढ़ी की तरह उपयोग करता है, उसका दूर हो जाना शायद जीवन की उन व्यवस्थाओं में से एक है, जिन्हें हम पहले दुख समझते हैं और बाद में वरदान मानने लगते हैं.

_ इसलिए जब कोई आपको छोड़कर जाए, तो हर बार उसे अभिशाप मत दीजिए.

_ मन ही मन उसे धन्यवाद भी दीजिए कि उसने भ्रम समाप्त कर दिया.

_ उसने आपको उस दरवाज़े के सामने खड़े रहने से बचा लिया, जो कभी खुलने वाला ही नहीं था.

_ उसने आपको यह समझा दिया कि आपका जीवन किसी एक व्यक्ति की स्वीकृति पर निर्भर नहीं है.

_ कर्म का विधान बड़ा अद्भुत है.

_ संसार में कोई भी व्यक्ति अपने कर्मों के परिणाम से हमेशा बचा नहीं रह सकता.

_ जो छल करेगा, उसे अपने छल के परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

_ जो विश्वास तोड़ेगा, वह कभी न कभी विश्वास की कीमत समझ सकता है.

_ जो प्रेम का अपमान करेगा, वह किसी दिन प्रेम की अनुपस्थिति का शून्य भी महसूस कर सकता है.

_ इसलिए किसी के लिए न्यायाधीश बनने की आवश्यकता नहीं है.

_ समय और कर्म, दोनों अपना कार्य करते हैं ; हमें हर परिणाम का हिसाब अपने हाथों में लेने की आवश्यकता नहीं.

_ आपका काम केवल इतना है कि आप अपने हिस्से की सच्चाई निभाइए.

_ प्रेम करिए तो पूरी ईमानदारी से करिए.

_ मित्रता निभाइए तो पूरे मन से निभाइए.

_ किसी का साथ दीजिए तो बिना हिसाब-किताब के दीजिए.

_ लेकिन बदले में क्या मिलेगा, इसकी अपेक्षाओं की गठरी अपने कंधों पर मत रखिए.

_ क्योंकि अपेक्षाएँ जितनी बड़ी होती हैं, निराशाएँ भी उतनी ही गहरी हो सकती हैं.

_ जीवन का सबसे सुंदर मार्ग शायद यही है कि हम अपने कर्मों को अपनी पहचान बनाएँ, उनके परिणामों को नहीं.

_ फूल जब खिलता है तो यह नहीं सोचता कि उसकी सुगंध किस तक पहुँचेगी.

_ नदी जब बहती है तो यह नहीं गिनती कि उसने कितनों की प्यास बुझाई.

_ सूर्य जब प्रकाश देता है तो यह अपेक्षा नहीं रखता कि कौन उसका धन्यवाद करेगा.

_ वे अपना स्वभाव निभाते हैं, और शायद मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म भी यही है.

_ अपने स्वभाव की अच्छाई को बनाए रखना.

_ इसलिए यदि कोई चला गया है, तो उसे जाने दीजिए.

_ यदि किसी ने धोखा दिया है, तो उसे उसके कर्मों के साथ छोड़ दीजिए.

_ यदि किसी ने आपका मूल्य नहीं समझा, तो स्वयं को उसके निर्णयों की कसौटी पर मत तौलिये.

_ किसी का आपको न चुनना इस बात का प्रमाण नहीं कि आप प्रेम के योग्य नहीं हैं.

_ हर व्यक्ति की दृष्टि में आपकी कीमत एक जैसी हो, यह आवश्यक नहीं.

_ लेकिन किसी की दृष्टि आपको छोटा कर दे, यह स्वीकार कर लेना भी आवश्यक नहीं.

_ अपने भीतर कड़वाहट नहीं, शांति रखिए.

_ शिकायत नहीं, अनुभव रखिए.

_ प्रतिशोध नहीं, प्रार्थना रखिए.

_ जीवन से यह शिकायत मत कीजिए कि उसने आपको गलत व्यक्ति से मिलवा दिया.

_ कभी-कभी एक गलत ठहराव ही हमें अपने सही रास्ते की पहचान कराता है.

_ जो चला गया, उसके साथ बिताए अच्छे पलों को झुठलाइए मत, मगर उन यादों को अपने वर्तमान की सज़ा भी मत बनने दीजिए.

_ अतीत को सम्मान दीजिए, उससे सीखिए और फिर अपने आज को जीने की अनुमति स्वयं को दीजिए.

_ क्योंकि जीवन का अर्थ केवल किसी का होकर रह जाना नहीं है, बल्कि किसी के चले जाने के बाद भी अपने भीतर मनुष्यता, विश्वास और प्रेम को जीवित रख पाना है.

_ टूटे हुए भरोसे के बाद भी सच्चाई पर विश्वास करना, मिले हुए छल के बाद भी छल को अपना स्वभाव न बनने देना और बिछड़ने के बाद भी किसी के प्रति नफ़रत से अपना हृदय न भर लेना, _ शायद यही भीतर से समृद्ध होने की सबसे कठिन साधना है.

_ याद रखिए, हर रिश्ता जीवन भर साथ रहने के लिए नहीं आता और हर विदाई किसी हार की घोषणा नहीं होती.

_ कुछ विदाइयाँ हमें वापस अपने पास ले आती हैं.

_ कुछ बिछड़ने हमें सिखाते हैं कि दूसरों के लिए दीपक बनते-बनते अपने भीतर के उजाले को बुझने नहीं देना चाहिए.

_ आप किसी के जीवन में क्या बनकर रहे, यह उसके व्यवहार से तय नहीं होता.

_ यह आपके प्रेम, आपकी निष्ठा और आपके आचरण से तय होता है.

_ इसलिए कर्म करते रहिए, प्रेम करते रहिए, सच्चाई पर चलते रहिए.

_ किसी के बदल जाने के कारण अपने स्वभाव की सुंदरता मत बदलिए.

_ किसी की बेवफ़ाई को अपने हृदय की भाषा मत बनने दीजिए.

_ और जब कभी बीते हुए रिश्तों की याद मन को उदास करे, तो स्वयं से बस इतना कहिए.

_ मैंने अपनी ओर से प्रेम में कोई कमी नहीं रखी.

_ अब जो मेरे हाथ में नहीं था, उसके लिए स्वयं को दोषी ठहराना भी छोड़ता हूँ.

_ आख़िरकार, जीवन में सबसे बड़ी जीत किसी को रोक लेने में नहीं, बल्कि किसी के चले जाने के बाद भी अपने भीतर के अच्छे इंसान को बचाए रखने में है.

_ क्योंकि लोग आपके जीवन से जा सकते हैं, आपकी स्मृतियों का अर्थ बदल सकता है, आपके सपने कुछ समय के लिए ठहर सकते हैं ;

_ लेकिन यदि आपने अपने भीतर की सच्चाई को बचाए रखा, तो दुनिया का कोई भी बिछोह आपसे आपका सबसे अनमोल हिस्सा नहीं छीन सकता.

_ प्रेम कीजिए, मगर स्वयं को खोकर नहीं.

_ साथ निभाइए, मगर अपने स्वाभिमान की कीमत पर नहीं.

_ और किसी को विदा करना पड़े, तो इस विश्वास के साथ कीजिए कि जीवन की कहानी किसी एक व्यक्ति के चले जाने से समाप्त नहीं होती.

_ जो चला गया, उसे जाने दीजिए.

_ जो बचा है, उसे सँभालिए.

_ क्योंकि अंततः आपको जीवन भर जिस इंसान के साथ रहना है, वह आप स्वयं हैं.!!

– Ishq Banaras

यहाँ हर चेहरे पर मुस्कान है, मगर कौन जाने कितनी आँखें रात के अँधेरे में चुपचाप भीगती हैं.

_ कितने लोग हैं जो दिनभर दुनिया को हँसाते हैं और रात को अपने ही सवालों के सामने निःशब्द बैठ जाते हैं.

_ जिनकी ज़िंदगी देखकर तुम्हें अपनी ज़िंदगी अधूरी लगने लगती है, हो सकता है वे खुद अपने हिस्से की ख़ुशियाँ जाने कब की खो चुके हों.

_ किसी ने मोहब्बत में अपना सबसे क़ीमती रिश्ता खोया है, किसी ने अपनों की उम्मीदें पूरी करते-करते अपने ही सपनों को दफ़न कर दिया है.

_ कोई घर की ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा है, कोई भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान खो रहा है, तो कोई सबको सँभालते-सँभालते इस क़दर बिखर चुका है कि अब उसे ख़ुद को समेटने का भी वक़्त नहीं मिलता.

_ अजीब दुनिया है यह !

_ यहाँ टूटे हुए लोगों से भी उम्मीद की जाती है कि वे मुस्कुराएँ, थके हुए कंधों से भी कहा जाता है कि वे और बोझ उठाएँ, और उदास आँखों को भी समझाया जाता है कि ज़िंदगी बहुत ख़ूबसूरत है.

_ मगर कोई यह नहीं पूछता कि उस ख़ूबसूरती को महसूस करने की ताक़त बची भी है या नहीं.

_ कितने लोग हैं जो हर रोज़ दूसरों के सामने सामान्य होने का अभिनय करते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि उनकी ख़ामोशी से किसी को परेशानी न हो.

_ वे अपने दर्द को शब्द नहीं देते, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनकी तकलीफ़ किसी के लिए बोझ न बन जाए.

_ और इस तरह, धीरे-धीरे, वे सबके अपने बने रहते हैं, मगर ख़ुद से ही दूर होते चले जाते हैं.

_ कभी-कभी लगता है, यह दुनिया जितनी आबाद बाहर से दिखाई देती है, भीतर से उतनी ही वीरान होती जा रही है.

_ हर इंसान के पास अपनी एक कहानी है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं ;

_ हर दिल में कोई अधूरा ख़्वाब है, मगर उसे समझने वाला कोई नहीं.

_ लोग अपनी उपलब्धियों की तस्वीरें साझा करते हैं, अपनी कामयाबी के क़िस्से सुनाते हैं, अपनी ख़ुशियों को दुनिया के सामने सजाकर रखते हैं, लेकिन उन तस्वीरों के बाहर छूट गए आँसुओं का हिसाब कौन रखता है ?

_ कौन देखता है उस पिता को, जो अपनी संतान के भविष्य के लिए अपनी इच्छाओं को उम्रभर टालता रहता है ?

_ कौन समझता है उस माँ को, जो पूरे घर की ख़ुशियों का ख़याल रखते-रखते अपनी उदासी का नाम तक भूल जाती है ?

_ कौन पूछता है उस नौजवान से, जो सबकी नज़रों में सफल है, मगर अपने ही जीवन से संतुष्ट नहीं ?

_ हमने इंसान की क़ीमत उसके भीतर की अच्छाई से नहीं, उसकी बाहरी चमक से आँकनी शुरू कर दी है.

_ अब किसी का दर्द सुनने से ज़्यादा दिलचस्प हमें उसकी कामयाबी जानना लगता है.

_ शायद इसीलिए चेहरे सँवरते जा रहे हैं और दिलों की थकान बढ़ती जा रही है.

_ हम एक-दूसरे को देखने में इतने व्यस्त हैं कि एक-दूसरे को महसूस करना ही भूल गए हैं. यह दुनिया अब आत्माओं का कब्रिस्तान है, जहाँ हर कोई अपने ही बनाए भ्रम में दफ़्न है.

_ यहाँ दिखावे की एक ऐसी परत चढ़ चुकी है कि सच्चाई अब असहज कर देती है.

_ लोग इंसान नहीं, ब्रांड बन गए हैं.

_ वे मुस्कुराते हैं ताकि कोई उनकी पीड़ा न देख सके.

_ वे सफल दिखते हैं ताकि कोई उनकी बेचैनी न समझ सके.

_ उनके जीवन में सब कुछ है—पैसा, पहचान, प्रतिष्ठा—पर चैन नहीं, सुकून नहीं, आत्मीयता नहीं.

_ यहाँ हर कोई दौड़ रहा है, पर किसी को नहीं पता कि मंज़िल कहाँ है.

_ महत्वाकांक्षा अब ज़हर बन चुकी है.

_ लोग अपनी सीमाओं को भूल गए हैं, अपने भीतर की थकान को झुठला रहे हैं, बस दूसरों से बेहतर दिखने की होड़ में खुद को खपा रहे हैं.

_ किसी को लगता है सारा समाज दोषी है, कोई किस्मत को गाली देता है, कोई व्यवस्था को कोसता है ;

_ पर असल में इस गंदगी के निर्माण में हमारा भी हिस्सा है.

_ हमने अपने भीतर की सच्चाई को दफ़न कर दिया और झूठ को सोने के फ़्रेम में सजाकर दीवार पर टाँग लिया.

_ हर घर अब एक मंच है, जहाँ अभिनय चल रहा है.

_ पति मुस्कुरा रहा है क्योंकि समाज को मुस्कुराहट चाहिए, पत्नी ख़ुश दिख रही है क्योंकि दुनिया को ख़ुशियाँ चाहिए, बच्चे हँस रहे हैं क्योंकि सबको दिखाने के लिए कुछ चाहिए.

_ सच्चा दुख अब लाइक नहीं लाता, सच्ची बातें अब वायरल नहीं होतीं.

_ इसलिए सब झूठ में जी रहे हैं और यही झूठ अब उनका सच बन चुका है.

_ माता-पिता अपनी खो चुकी जवानी के पछतावे में हैं, बच्चे अपनी नक़ली आज़ादी के भ्रम में.

_किसी को एक-दूसरे की ज़रूरत नहीं, बस सहूलियत चाहिए.

_ रिश्ते अब आत्मीयता नहीं, लेन-देन बन गए हैं.

_ प्यार अब एक सीन है, नीयत अब एक समझौता और फिर भी लोग कहते हैं, “हम ठीक हैं” नहीं, शायद हममें से बहुत-से लोग ठीक नहीं हैं.

_ फ़र्क़ बस इतना है कि किसी ने अपना दर्द दबा लिया है, किसी ने उसे अपनी पहचान बना लिया है, और किसी ने मुस्कुराहट के पीछे छिपना सीख लिया है.

_ इसलिए अब दूसरों को देखकर ख़ुद को मत तौलो.

_ मत बनो किसी और की कॉपी, क्योंकि हर चमकती ज़िंदगी के पीछे की कहानी तुम्हें नहीं मालूम.

_ जो चमक तुम्हें अपनी ओर खींचती है, हो सकता है उसके पीछे भी कोई ऐसी उदासी हो, जिसे दुनिया ने कभी देखा ही न हो.

_ जिसे तुम अपनी प्रेरणा समझ रहे हो, वह भी शायद अपने जीवन के किसी मोड़ पर जवाब तलाश रहा हो.

_ किसी की बाहरी कामयाबी को अपनी नाकामी का पैमाना मत बनाओ.

_ तुम्हारी ज़िंदगी की अपनी गति है, अपनी परिस्थितियाँ हैं, अपने संघर्ष हैं.

_ तुम्हें किसी और की तरह बनने की नहीं, अपने भीतर के इंसान को पहचानने की ज़रूरत है.

_ सच्ची प्रेरणा वही है जो तुम्हारे भीतर से उठे, जब तुम ख़ुद से ईमानदारी से बात करो, जब अपनी कमज़ोरियों को स्वीकारने और अपनी सच्चाई के साथ जीने की हिम्मत रखो.

_ क्योंकि यह दुनिया तुम्हें छल सकती है, चकाचौंध तुम्हें बहका सकती है, और दूसरों की ज़िंदगी से अपनी तुलना करते-करते तुम उस ख़ुशी को भी खो सकते हो, जो पहले से तुम्हारे पास है.

_ एक दिन ऐसा भी आता है, जब इंसान सब कुछ हासिल कर लेने के बाद पीछे मुड़कर देखता है और सोचता है कि इस दौड़ में उसने आख़िर अपने लिए क्या बचाया ?

_ कितने अपने पीछे छूट गए, कितनी छोटी-छोटी ख़ुशियाँ अनदेखी रह गईं, कितनी शामें बेवजह की चिंताओं में गुज़र गईं और कितनी सुबहें किसी बेहतर कल की प्रतीक्षा में बीत गईं.

_ इसलिए ठहरो, सोचो और फिर ख़ुद को सँभालो.

_ किसी और की परछाईं बनने के बजाय अपने भीतर की लौ को पहचानो.

_ अपने मन की सुनो, अपनों को वक़्त दो, अपनी थकान को स्वीकारो और ज़रूरत पड़े तो किसी अपने के सामने बिखर जाने से मत डरो.

_ हर वक़्त मज़बूत बने रहना ज़रूरी नहीं ; कभी-कभी अपनी कमज़ोरी स्वीकार कर लेना भी ख़ुद से मोहब्बत करने का सबसे सच्चा तरीक़ा होता है.

_ याद रखना, ज़िंदगी का अर्थ हर किसी से आगे निकल जाना नहीं है.

_ कभी किसी के दुःख में उसके पास बैठ जाना, बिना किसी स्वार्थ के किसी का हाथ थाम लेना, अपनों के साथ दो पल सुकून से बिता लेना और रात को सोने से पहले अपने ज़मीर के सामने शर्मिंदा न होना भी बहुत बड़ी कामयाबी है.

_ दुनिया की नज़रों में सफल होने से पहले अपनी नज़रों में इंसान बने रहना ज़रूरी है.

_ क्योंकि जिस दिन तुम्हारे पास सब कुछ होगा, मगर महसूस करने के लिए संवेदना नहीं बचेगी, उस दिन तुम्हारी सारी उपलब्धियाँ भी तुम्हारे भीतर के ख़ालीपन को नहीं भर पाएँगी.

_ यहाँ सब दिखावे में डूबे हैं.

_ सब जिए जा रहे हैं, मगर अपने भीतर की आवाज़ सुनना भूलते जा रहे हैं.

_ तुम कोशिश करना कि भीड़ में शामिल होकर ख़ुद को मत खो देना.

_ अपनी हँसी को किसी की स्वीकृति का मोहताज मत बनाना, अपने सपनों को दूसरों की अपेक्षाओं के नीचे मत दबाना और अपने मन की शांति को दुनिया की वाहवाही के बदले कभी मत बेचना.

_ तुम कोशिश करना, सिर्फ़ ज़िंदगी गुज़ारने की नहीं, उसे महसूस करने की.

_ सिर्फ़ साँसें पूरी करने की नहीं, हर साँस में थोड़ा-सा सुकून बचाए रखने की.

_ सिर्फ़ दुनिया को यह दिखाने की नहीं कि तुम ख़ुश हो, बल्कि अपने भीतर सचमुच ख़ुश होने की वजह तलाशने की.

_ क्योंकि आख़िर में तुम्हारे पास वही पल बचेंगे, जिनमें तुमने किसी को दिल से चाहा होगा, किसी के आँसू समझे होंगे, किसी के लिए बिना किसी स्वार्थ के कुछ किया होगा और कभी दुनिया की तमाम आवाज़ों के बीच अपने दिल की आवाज़ सुनी होगी.

_ ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसे दूसरों को प्रभावित करने में मत गँवाना.

_ इसे इस तरह जीना कि जब कभी तुम ख़ुद से आँखें मिलाओ, तो तुम्हें अपने ही भीतर एक ऐसा इंसान मिले, जिसके साथ तुम्हारा मन शांति से रह सके.!!

-Ishq Banaras

कभी-कभी ज़िंदगी की भीड़ में चलते-चलते इंसान इतनी दूर निकल जाता है कि एक दिन पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे अपना ही अतीत किसी अनजान शहर की तरह दिखाई देने लगता है.

_ वही रास्ते, वही चेहरे, वही दुनिया होती है, बस कहीं कुछ ऐसा छूट चुका होता है, जिसकी कमी को कोई दूसरा भर नहीं पाता.

_ चेहरे पर मुस्कुराहट अब भी होती है, होंठों पर बातें भी होती हैं, लोगों के बीच हँसना-बोलना भी चलता रहता है, मगर भीतर एक हिस्सा ऐसा होता है जो जाने कब से चुप बैठा है.

_ कभी जिन छोटी-छोटी बातों से आँखें चमक उठती थीं, अब वही बातें मन को छूकर भी नहीं गुज़रतीं.

_ कुछ ख़्वाब थे, जिन्हें पूरा करने की ज़िद में कभी रातें छोटी पड़ जाती थीं, आज उनका ख़याल तक आए तो मन चुपचाप कहीं और देखने लगता है.

_ शायद उम्र बढ़ने से ज़्यादा थका देती है वह ज़िंदगी, जिसमें हम सबको सँभालते-सँभालते ख़ुद को ही पीछे छोड़ आते हैं.

_ सबसे अजीब बात यह है कि इंसान की सबसे गहरी उदासी हमेशा उसकी आँखों में दिखाई नहीं देती.

_ कई बार वह अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी करता है, लोगों की परेशानियों में उनका साथ देता है, दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करता है, मगर जब रात को अकेला होता है, तो उसे समझ नहीं आता कि अपने भीतर पसरी इस ख़ामोशी को किस नाम से पुकारे.

_ वह किसी से शिकायत भी नहीं करना चाहता, क्योंकि उसे मालूम है कि हर किसी के पास अपनी-अपनी लड़ाइयाँ हैं.

_ मगर कभी-कभी उसका मन भी चाहता है कि कोई उसके चेहरे के पीछे छिपी थकान पढ़ ले.

_ कोई यह न पूछे कि परेशानी क्या है, बस इतना समझ ले कि हर बार मज़बूत दिखाई देने वाला इंसान भी कभी-कभी भीतर से सहारे की उम्मीद करता है.

_ और शायद सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तब होती है, जब हम पूरी दुनिया को यह यक़ीन दिलाते-दिलाते कि हम ठीक हैं, एक दिन ख़ुद भी अपनी ही आवाज़ पर यक़ीन करने लगते हैं.

_ कभी-कभी सचमुच लगता है कि आदमी दूसरों से नहीं, सबसे ज़्यादा ख़ुद से हारता है.

_ दुनिया से लड़ना आसान है, क्योंकि वहाँ सामने कोई दूसरा होता है ;

_ मगर अपने भीतर उठते सवालों से लड़ना बहुत मुश्किल है.

_ वहाँ कोई गवाह नहीं होता, कोई फैसला सुनाने वाला नहीं होता, बस एक ख़ामोश कमरा होता है, कुछ बिखरे हुए ख़याल होते हैं और हम होते हैं, अपने ही सामने खड़े हुए.

_ रात के किसी पहर जब नींद आँखों से रूठ जाती है, तब बीते हुए बरस जाने क्यों एक-एक करके सामने आ बैठते हैं.

_ कोई चेहरा याद आता है, कोई आवाज़, कोई अधूरी बातचीत, कोई ऐसा लम्हा जिसे उस वक़्त मामूली समझकर गुज़र गया था, मगर आज वही लम्हा दिल के सबसे क़रीब बैठा हुआ है.

_ तब समझ आता है कि ज़िंदगी में सबसे कीमती चीज़ें अक्सर हमें उनकी क़ीमत समझ आने से पहले ही छोड़ जाती हैं.

_ कभी-कभी लगता है, काश कोई मेरे पास बैठकर मुझसे ये न पूछे कि क्या हुआ है.

_ बस चुपचाप बैठा रहे.

_ क्योंकि कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें बयान करने बैठो तो शब्द छोटे पड़ जाते हैं और आँखें बड़ी हो जाती हैं.

_ कुछ पीड़ाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें कह देने से हल्का नहीं हुआ जाता, बल्कि उन्हें अपने भीतर सम्मान से रखना पड़ता है, क्योंकि वे हमारे उन हिस्सों की निशानी होती हैं जो कभी बहुत सच्चे थे.

_ मैंने भी शायद यही सीखा है.

_हर बात कह देना ज़रूरी नहीं, हर रिश्ते को बचा लेना हमारे हाथ में नहीं, और हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता.

_ कुछ लोग ज़िंदगी में आते हैं और हमें बदलकर चले जाते हैं.

_ कुछ हमें मोहब्बत सिखाते हैं, कुछ बिछड़ना, कुछ इंतज़ार और कुछ ये कि अपने होने का अर्थ किसी दूसरे के होने पर निर्भर नहीं होना चाहिए.

_ फिर भी दिल है कि मानता नहीं.

_ वह आज भी किसी अनदेखी दस्तक की उम्मीद करता है. आज भी कभी-कभी लगता है कि कोई आएगा और बिना कुछ पूछे कहेगा, “तुम बहुत थक गए हो, अब थोड़ी देर आराम कर लो”

_ शायद यही उम्मीद इंसान को जीवित रखती है.

_ वरना सच तो यही है कि कई बार जीने की वजहें हमारे पास नहीं होतीं,

_ हम बस किसी एक छोटी-सी उम्मीद को वजह मानकर आगे बढ़ते रहते हैं.

_ आज जब ये सब लिख रहा हूँ, तो महसूस हो रहा है कि मेरे भीतर भी बहुत कुछ ऐसा है जिसे मैंने वर्षों से किसी के सामने नहीं रखा.

_ शायद इसलिए नहीं कि मुझे डर है कि लोग क्या सोचेंगे, बल्कि इसलिए कि कुछ बातें इतनी निजी होती हैं कि उन्हें शब्दों में उतारते हुए भी लगता है जैसे अपने ही दिल के दरवाज़े किसी अजनबी के सामने खोल रहा हूँ, और शायद मैं अब भी अजनबियों से नहीं, अपने ही भीतर से डरता हूँ.

_ क्योंकि मुझे मालूम है, अगर एक दिन सचमुच अपने भीतर उतर गया, तो वहाँ बहुत कुछ मिलेगा जिसे मैंने बड़ी मेहनत से भुलाने का अभिनय किया है.

_ कुछ चेहरे मिलेंगे, कुछ बिछोह मिलेंगे, कुछ पछतावे मिलेंगे, कुछ अधूरे ख़्वाब मिलेंगे और शायद वह इंसान भी मिलेगा, जो कभी बहुत खुश हुआ करता था और जिसे ज़िंदगी की आपाधापी में मैं कहीं पीछे छोड़ आया हूँ.

_ कभी-कभी लगता है, मुझे उसी इंसान को फिर से ढूँढ़ना है.

_ उसे वापस लाना है.

_ उसे समझाना है कि हर हार अंत नहीं होती, हर बिछड़ना मृत्यु नहीं होता और हर अँधेरी रात के हिस्से में हमेशा के लिए अँधेरा नहीं लिखा होता.

_ शायद अभी देर हुई है, मगर सब ख़त्म नहीं हुआ.

_ शायद मेरे हिस्से में अभी कुछ उजाला बाकी है.

_ शायद कुछ रास्ते अभी मेरा इंतज़ार कर रहे हैं.

_ शायद कुछ लोग अभी मुझसे मिले ही नहीं हैं और शायद मेरी ज़िंदगी की सबसे ख़ूबसूरत पंक्ति अभी लिखी ही नहीं गई.

_ इसी उम्मीद के साथ आज फिर यह पन्ना बंद कर रहा हूँ.

_ कल अगर मन ने साथ दिया, तो फिर लिखूँगा और अगर नहीं लिखा तो भी कोई बात नहीं.

_ कुछ बातें काग़ज़ पर नहीं उतरतीं, वे बस उम्र भर दिल में धड़कती रहती हैं.!!

– Ishq Banaras

कुछ दुःख ऐसे होते हैं, जिन्हें ज़िंदगी हमें नहीं देती, बल्कि हम ख़ुद अपने भीतर पाल लेते हैं.

_ न किसी ने हमारा कुछ छीना होता है, न वक़्त ने हमसे कोई वादा तोड़ा होता है, न ही हमारे हिस्से की ख़ुशियों पर किसी और ने अपना नाम लिखवा लिया होता है.

_ फिर भी मन के किसी कोने में एक टीस जन्म ले लेती है.

_ हम उन बातों के लिए उदास होने लगते हैं, जो हमारे साथ कभी हुई ही नहीं ;

_ उन ख़ुशियों के लिए तरसने लगते हैं, जिनकी कमी हमने कभी महसूस ही नहीं की थी.

_ दूसरों की ज़िंदगी में झाँकते-झाँकते हम अपनी ज़िंदगी की ख़ूबसूरती भूल जाते हैं.

_ और सबसे दर्दनाक बात यह है कि जिस दुःख को हम सीने से लगाकर बैठ जाते हैं, उसे जन्म देने वाला कोई दूसरा नहीं, हमारा अपना मन होता है.

_ हम ख़ुद ही अपने भीतर उदासी की दीवारें खड़ी करते हैं, फिर उन्हीं दीवारों के बीच बैठकर दुनिया को कोसते हैं कि हमारे हिस्से में उजाला कम क्यों है.

_ मनुष्य की सबसे बड़ी त्रासदी शायद यही है कि वह अपनी ख़ुशियों को महसूस करने से पहले दूसरों की ख़ुशियों का हिसाब लगाने लगता है.

_ वह भूल जाता है कि हर इंसान की ज़िंदगी एक अलग कहानी है, हर कहानी का अपना मौसम है, अपने आँसू हैं, अपने इंतज़ार हैं और अपनी मंज़िलें हैं.

_ किसी की मुस्कुराहट देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि उसके भीतर कोई दर्द नहीं, और किसी की सफलता देखकर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि हमारी अपनी यात्रा अधूरी है.

_ मगर मन है कि दूसरों के आँगन में खिले फूल गिनते-गिनते अपने घर में महकते फूलों को देखना ही भूल जाता है.

_ फिर एक दिन उसे लगता है कि उसकी ज़िंदगी में कुछ भी ख़ास नहीं, जबकि सच यह होता है कि उसकी ज़िंदगी में बहुत कुछ ख़ास था—बस उसकी नज़र दूसरों की दुनिया में उलझकर अपने ही संसार से दूर हो गई थी.

_ कभी-कभी कोई व्यक्ति अपने दोस्त को देखता है, जो करियर में आगे बढ़ रहा है, हर जगह सराहा जा रहा है, हर दिन उसके नाम की चर्चा है.

_ वह व्यक्ति जो स्वयं अपने जीवन से अभी तक संतुष्ट था, अचानक भीतर से खालीपन महसूस करने लगता है.

_ वह सोचता है, “मेरे हिस्से में ऐसा क्यों नहीं आया ?”

_ धीरे-धीरे वह यह मान बैठता है कि वह असफल है.

_ जबकि सच तो यह है कि उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया, बदला है तो सिर्फ़ उसका देखने का नज़रिया.

_ अब वह अपने जीवन को किसी और के फ़्रेम से देखने लगा है, और यही बदलाव एक कृत्रिम दुःख को जन्म देता है.

_ रिश्तों में भी यही खेल चलता है.

_ जब कोई यह सुनता है कि किसी का साथी हर दिन ‘आई लव यू’ कहता है, तो वह अपने रिश्ते को उसी पैमाने पर परखने लगता है.

_ उसे लगता है कि शायद उसका साथी उतना प्यार नहीं करता.

_ उसे यह महसूस नहीं होता कि हर व्यक्ति के प्रेम जताने का ढंग अलग होता है.

_ कोई शब्दों से अपना प्रेम व्यक्त करता है, तो कोई बिना कहे आपकी पसंद याद रखता है, आपकी थकान समझता है, आपकी ख़ामोशी में छिपी उदासी पढ़ लेता है.

_ लेकिन मन तुलना में उलझ जाए, तो सामने मौजूद प्रेम भी कम लगने लगता है.

_ और फिर इंसान उस प्यार से शिकायत करने लगता है, जो शायद इतने दिनों से ख़ामोशी के साथ उसके पास बैठा था.

_ सोशल मीडिया ने तो इन कृत्रिम दुःखों को एक नया रूप दे दिया है.

_ अब कोई अपने दिनभर की थकान से गुज़रता है और शाम को स्क्रीन पर किसी और की मुस्कुराती तस्वीर देखता है, किसी की यात्रा, किसी का जश्न, किसी का तथाकथित “परफ़ेक्ट” जीवन.

_ वह भूल जाता है कि तस्वीरें सच्चाई नहीं होतीं, वे सिर्फ़ चुने हुए क्षण होते हैं.

_ किसी तस्वीर में दिखाई देने वाली मुस्कान किसी के पूरे जीवन का प्रमाण नहीं होती.

_ कैमरा ख़ुशी का एक पल सँभाल सकता है, मगर वह उन रातों को नहीं दिखाता जिनमें नींद नहीं आई,

_ उन चिंताओं को नहीं दिखाता जिन्हें किसी ने अपने तकिए के नीचे छिपाकर रखा है.

_ फिर भी हम दूसरों के जीवन के कुछ सुंदर पलों की तुलना अपनी पूरी ज़िंदगी से करने लगते हैं.

_ यही वह भूल है, जो अपने ही हिस्से की ख़ुशियों को हमारी आँखों में छोटा कर देती है.

_ लोगों के जीवन का बड़ा हिस्सा इस भ्रम में बीत जाता है कि कोई और बेहतर है, कोई और ख़ुश है, कोई और आगे है.

_ वे यह नहीं समझते कि तुलना धीरे-धीरे मनुष्य को उसकी अपनी नज़रों में ही छोटा कर देती है.

_ जो व्यक्ति दूसरों की तुलना में ख़ुद को आँकना शुरू कर देता है, वह अपने अस्तित्व का मूल्य दूसरों की उपलब्धियों से तय करने लगता है.

_ किसी की सफलता उसे अपनी हार लगने लगती है, किसी की ख़ुशी उसे अपनी कमी का एहसास कराने लगती है.

_ जबकि किसी दूसरे के जीवन में खिली धूप का अर्थ यह नहीं कि हमारे हिस्से का सूरज बुझ गया है.

_ दुनिया में ख़ुशियाँ कोई ऐसी सीमित दौलत नहीं हैं, जो एक व्यक्ति को मिल जाएँ तो दूसरे के हिस्से में कम पड़ जाएँ.

_ सच्चे दुःख और कृत्रिम दुःख में यही फ़र्क़ है.

_ सच्चा दुःख किसी वास्तविक चोट, बिछोह, हानि या अधूरी रह गई चाहत से जन्म ले सकता है.

_ वह हमें भीतर तक हिला देता है, हमें अपनी कमज़ोरियों और अपनी मानवीय संवेदनाओं से परिचित कराता है.

_ वहीं तुलना से उपजा दुःख कई बार हमें उस चीज़ के लिए भी रुलाने लगता है, जिसे हमने कभी सचमुच चाहा तक नहीं था.

_ हम दूसरों को देखकर अपनी ज़िंदगी से नाराज़ होने लगते हैं, अपने रिश्तों में कमियाँ खोजने लगते हैं और अपने ही अस्तित्व पर सवाल उठाने लगते हैं.

_ हालाँकि हर दुःख को काल्पनिक कहकर नकार देना भी उचित नहीं ;

_ मन की पीड़ा भी वास्तविक होती है, भले ही उसका कारण हमारी धारणाएँ हों.

_ ज़रूरत उस पीड़ा को झुठलाने की नहीं, बल्कि यह समझने की है कि वह जन्म कहाँ से ले रही है.

_ कभी ठहरकर अपने भीतर झाँकिए.

_ ख़ुद से पूछिए कि जिस चीज़ की कमी आपको आज बेचैन कर रही है, क्या उसकी चाहत सचमुच आपके दिल में थी, या किसी और के पास उसे देखकर आपने उसे अपने लिए ज़रूरी मान लिया ?

_ क्या आप वास्तव में अपने जीवन से असंतुष्ट हैं, या आपको यह डर सता रहा है कि दुनिया की नज़र में आपका जीवन उतना शानदार नहीं है ?

_ क्या आपको सचमुच प्रेम की कमी महसूस होती है, या आप अपने प्रेम की तुलना किसी दूसरे के प्रेम जताने के तरीक़े से कर रहे हैं ?

_ इन सवालों के जवाब कभी-कभी मन के भीतर बरसों से जमा धुंध को साफ़ कर देते हैं.

_ जब कोई व्यक्ति यह समझने लगता है कि हर जीवन की गहराई अलग है, हर इंसान का संघर्ष अलग है और हर किसी के खिलने का मौसम अलग है, तब वह धीरे-धीरे इन अनावश्यक तुलनाओं से मुक्त होने लगता है.

_ उसे एहसास होता है कि किसी का आगे निकल जाना उसके पीछे रह जाने का प्रमाण नहीं है.

_ किसी का अधिक पा लेना उसके कम होने की घोषणा नहीं है.

_ और किसी की चमक के सामने अपने उजाले को छोटा समझ लेना अपने ही साथ की गई नाइंसाफ़ी है.

_ ज़िंदगी कोई दौड़ नहीं, जिसमें हर किसी को एक ही समय पर एक ही मंज़िल तक पहुँचना हो.

_ कुछ लोग जल्दी सफल होते हैं, कुछ देर से अपनी राह पहचानते हैं.

_ कोई कम उम्र में बहुत कुछ पा लेता है, तो कोई लंबा सफ़र तय करने के बाद समझ पाता है कि उसे वास्तव में चाहिए क्या.

_ किसी के जीवन में रिश्तों की बहार होती है, तो किसी के जीवन में आत्मनिर्भरता का सुकून.

_ किसी के पास दुनिया को दिखाने के लिए बहुत कुछ होता है, तो किसी के पास रात को सिरहाने बैठकर महसूस करने लायक एक छोटी-सी शांति होती है.

_ हर जीवन की अपनी गरिमा है, बशर्ते हम उसे दूसरों की कसौटी पर तौलना बंद कर दें.

_ अगर इंसान हर बात को अपने ऊपर लेना, हर दृश्य में ख़ुद को तलाशना और हर अनुभव को अपनी कमी का प्रमाण मानना छोड़ दे, तो उसकी मानसिक पीड़ा का एक बड़ा हिस्सा हल्का हो सकता है.

_ हर ख़ुशी को देखकर यह सोचना ज़रूरी नहीं कि हमारे पास वह क्यों नहीं है.

_ हर सफलता को देखकर अपने भीतर असफलता का ऐलान करना ज़रूरी नहीं.

_ हर रिश्ते को दूसरे रिश्ते जैसा होना भी ज़रूरी नहीं.

_ कभी-कभी जीवन को बेहतर बनाने के लिए कुछ नया हासिल करने से ज़्यादा ज़रूरी होता है, पहले से मौजूद चीज़ों को एक नई दृष्टि से देखना.

_ हमें यह सीखना होगा कि हर चीज़ को अपने जीवन से जोड़कर देखना आवश्यक नहीं है.

_ कुछ चीज़ों को केवल देखकर भी आगे बढ़ा जा सकता है.

_ किसी की ख़ुशी को देखकर उसके लिए ख़ुश हुआ जा सकता है, बिना अपनी उदासी का हिसाब लगाए.

_ किसी की सफलता की सराहना की जा सकती है, बिना अपनी असफलताओं की सूची खोले.

_ किसी के सुंदर जीवन की तस्वीर देखकर मुस्कुराया जा सकता है, बिना अपने जीवन को कमतर ठहराए.

_ दूसरों की ख़ुशी में ख़ुश हो पाना और अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों से प्रमाण न माँगना, मन की एक बड़ी आज़ादी है.

_ क्योंकि जीवन की शांति हर इच्छा पूरी हो जाने में नहीं, बल्कि हर इच्छा को अपनी शांति पर हावी न होने देने में भी छिपी है.

_ हर सवाल का जवाब मिल जाना ज़रूरी नहीं, हर कमी का पूरा हो जाना भी ज़रूरी नहीं.

_ कभी-कभी ज़रूरी सिर्फ़ इतना होता है कि हम अपने मन को थोड़ी देर के लिए चुपचाप बैठने दें,

_ उसे दूसरों की ज़िंदगी के हिसाब-किताब से छुट्टी दें और अपने भीतर मौजूद उस जीवन को महसूस करें, जिसे हम लगातार बेहतर बनाने की कोशिश में जीना ही भूल गए हैं.

_ याद रखिए, आपके पास जो है, वह इसलिए छोटा नहीं हो जाता कि किसी दूसरे के पास उससे अधिक है.

_ आपकी मुस्कान की क़ीमत किसी और की मुस्कान से तय नहीं होती.

_ आपके संघर्षों का महत्व किसी और की उपलब्धियों से कम नहीं होता.

_ और आपका जीवन इसलिए अधूरा नहीं हो जाता कि वह किसी दूसरे के जीवन जैसा नहीं है.

_ जिस दिन आप दूसरों के आँगन में खिले फूलों को देखकर अपने आँगन की मिट्टी से शिकायत करना छोड़ देंगे, उसी दिन आपको एहसास होगा कि आपके भीतर भी बहुत कुछ खिलने की प्रतीक्षा कर रहा था.

_ जिस दिन आप दूसरों की रोशनी में अपनी चमक तलाशना बंद कर देंगे, उसी दिन अपने भीतर का दीपक दिखाई देने लगेगा.

_ आख़िरकार, जीवन का सबसे गहरा सुकून शायद किसी और जैसा बन जाने में नहीं, बल्कि अपने जैसा होने को स्वीकार कर लेने में है.

_ यह समझ लेने में है कि हर चमक हमारी आँखों के लिए नहीं, हर मंज़िल हमारे रास्ते की नहीं और हर ख़ुशी का हमारे जीवन में होना आवश्यक नहीं.

_ कुछ चीज़ें दूसरों के हिस्से में सुंदर लगती हैं, और कुछ हमारे हिस्से में आकर अपना अर्थ पाती हैं.

_ जब मन तुलना की बेड़ियों से मुक्त होता है, तब जीवन अचानक बदल नहीं जाता, लेकिन उसे देखने वाली आँखें बदल जाती हैं.

_ वही घर थोड़ा अधिक अपना लगने लगता है, वही रिश्ते थोड़े अधिक अनमोल, वही सुबह थोड़ी अधिक सुंदर और वही साधारण-सा दिन जीने लायक लगने लगता है.

_ हमें समझ आता है कि शांति कहीं दूर से मिलने वाली कोई उपलब्धि नहीं थी ;

_ वह तो हमारे भीतर ही थी, बस हम उसे दूसरों की ज़िंदगी में खोजते रहे.

_ इसलिए कभी अपने मन से भी प्रेम कीजिए.

_ उसे हर दिन किसी परीक्षा में मत बैठाइए.

_ उसे दूसरों से जीतने के लिए मजबूर मत कीजिए.

_ उसे यह विश्वास दीजिए कि उसे हर किसी से बेहतर साबित हुए बिना भी ख़ुश रहने का अधिकार है.

_ उसे समझाइए कि जीवन कोई प्रतियोगिता नहीं, एक अनुभव है ; कोई हिसाब की किताब नहीं, एक यात्रा है.

_ और जब कभी मन फिर किसी तुलना में उलझने लगे, तो बस एक पल ठहरकर अपने जीवन की ओर देखिए..- उन लोगों की ओर, जो आपकी परवाह करते हैं.

_ उन छोटी-छोटी ख़ुशियों की ओर, जिन्हें आपने मामूली समझकर अनदेखा कर दिया.

_ उन कठिन दिनों की ओर, जिन्हें पार करके आप आज यहाँ तक पहुँचे हैं.

_ शायद तब महसूस होगा कि जिस शांति को पाने के लिए आप दुनिया भर में भटक रहे थे, वह आपके अपने ही भीतर आपका इंतज़ार कर रही थी.

_ क्योंकि ज़िंदगी की सबसे बड़ी ख़ुशी हमेशा वह नहीं होती, जो हमें मिल जाती है ;

_ कई बार वह भी होती है, जो दूसरों के पास देखकर हम अपने जीवन से माँगना छोड़ देते हैं.

_ और जिस दिन मन यह सीख लेता है, उस दिन दुनिया की सारी चमक के बीच भी वह अपने छोटे-से उजाले में ख़ुश रहना सीख जाता है.

_ फिर न किसी की सफलता उसे छोटा करती है, न किसी की ख़ुशी उसे उदास करती है.

_ वह बस जीता है..- अपने हिस्से की धूप में, अपने हिस्से की छाँव में, अपनी अधूरी इच्छाओं और छोटी-छोटी संतुष्टियों के साथ.

_ शायद यही जीवन का सबसे सुंदर सत्य है.

_ ‌सुकून तब नहीं आता, जब हमारे पास दुनिया की हर चीज़ आ जाती है ;

_ सुकून तब आता है, जब दुनिया की हर चीज़ पाने की बेचैनी हमारे भीतर से उतरने लगती है.

_ और उस पल मन बहुत धीरे से कहता है.

_ अब किसी और जैसा होने की ज़रूरत नहीं.

_ जो जीवन मेरे पास है, उसे प्रेम से जीना ही मेरे लिए पर्याप्त है.!!

– Ishq Banaras

कभी-कभी जीवन की आपाधापी से दूर, जब इंसान अपने ही भीतर उतरकर देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसने दूसरों के लिए जीते-जीते अपने हिस्से का जीवन कब पीछे छोड़ दिया, उसे पता ही नहीं चला.

_ जिस दिल ने बचपन से अपनों की खुशियों के लिए अपनी इच्छाओं को चुपचाप दफ़न किया, जिसने हर मुश्किल में दूसरों का हाथ थामा, हर टूटते रिश्ते को बचाने की कोशिश की और हर बार स्वयं बिखरकर भी दूसरों को समेटता रहा, उसी दिल के हिस्से में यदि बार-बार उपेक्षा, अपमान, छल और तिरस्कार आए, तो उसकी ख़ामोशी के पीछे कितना गहरा दर्द जमा होता होगा ?

_ वह बाहर से भले ही सामान्य दिखाई दे, लेकिन उसके भीतर न जाने कितनी अनकही शिकायतें, अधूरे सवाल और आँसुओं में भीगती हुई यादें एक-दूसरे से लिपटकर जी रही होती हैं.

_ और सबसे अधिक पीड़ा तब होती है, जब वह किसी और से नहीं, बल्कि अपने ही लोगों से पूछने लगता है कि आख़िर मेरी कमी क्या थी ?

_ मैंने तो बस तुम्हें अपना समझा था.

_ कभी-कभी सोचता हूँ, क्या किसी का सच्चे दिल से चाहना ही उसकी सबसे बड़ी भूल बन जाता है ?

_ क्या हर बार दूसरों के लिए खड़े रहने वाले इंसान को यह हक़ नहीं कि कभी कोई उसके लिए भी खड़ा हो ?

_ क्या जो व्यक्ति सबकी तकलीफ़ समझता रहा, उसकी ख़ामोशी को समझने वाला कोई नहीं हो सकता ?

_ बचपन में हम रिश्तों को किसी हिसाब-किताब की तरह नहीं जीते.

_ हम यह सोचकर किसी का हाथ नहीं थामते कि बदले में हमें क्या मिलेगा.

_ हम तो बस अपनेपन को सच मान लेते हैं, अपनों की मुस्कान में अपनी खुशी ढूँढ़ लेते हैं और उनके दुःख को अपना समझकर उनके साथ चल पड़ते हैं.

_ लेकिन जब वही अपने बार-बार हमारे विश्वास को चोट पहुँचाते हैं, जब हमारी निष्ठा को हमारी मजबूरी और हमारी अच्छाई को हमारी कमज़ोरी समझ लिया जाता है, तब इंसान केवल दूसरों से निराश नहीं होता, उसका अपने ही उस रूप से विश्वास उठने लगता है, जो कभी दुनिया को बेहद साफ़ नज़र से देखा करता था.

_ बचपन में हमें सिखाया जाता है कि अच्छे बनो, सबकी मदद करो, अपनों के लिए त्याग करो.

_ हम सचमुच विश्वास कर लेते हैं कि निस्वार्थता ही जीवन का सबसे ऊँचा धर्म है.

_ और फिर हम उसी धर्म का निर्वाह करते रहते हैं परिवार के लिए, रिश्तेदारों के लिए, मित्रों के लिए, शिक्षकों के लिए… हर उस व्यक्ति के लिए जिसे हम अपना मानते हैं.

_ हम थकान नहीं गिनते, हम अपमान नहीं गिनते, हम अपने हिस्से की इच्छाएँ तक स्थगित कर देते हैं.

_ पर धीरे-धीरे एक अजीब सन्नाटा पनपने लगता है.

_ जब हर बार तुम्हें ही समझौता करना पड़े.

_ जब हर गलती का बोझ तुम्हारे कंधे पर डाल दिया जाए.

_ जब तुम्हारे त्याग को स्वाभाविक और तुम्हारे दर्द को अतिशयोक्ति कहा जाए.

_ तब भीतर कहीं एक महीन दरार पड़ती है.

_ शुरुआत में वह दरार दिखाई नहीं देती.

_ व्यक्ति मुस्कुराता रहता है, निभाता रहता है, अपने को समझाता रहता है कि कोई बात नहीं, यही जीवन है, अपेक्षा नहीं करनी चाहिए.

_ लेकिन अपेक्षा करना मानवीय है.

_ सम्मान की चाह रखना अपराध नहीं है.

_स्नेह की प्रत्याशा स्वार्थ नहीं है.

_ जब वर्षों तक इन मूल मानवीय जरूरतों को नकारा जाता है, तब मन में एक धीमा विष जमा होने लगता है.

_ वह अचानक नहीं फैलता, वह बूंद-बूंद रिसता है हर अपमान के साथ, हर धोखे के साथ, हर उस क्षण के साथ जब तुम्हारी सच्चाई को हल्के में लिया जाता है.

_ और फिर एक दिन वही मन जो कभी सबके लिए पिघलता था, कठोर होने लगता है.

_ तुम्हें लोग स्वार्थी दिखने लगते हैं.

_ हर मुस्कान में गणित दिखता है.

_ हर संबंध में लाभ-हानि का हिसाब दिखता है.

_ तुम्हें स्वयं से भी घिन आने लगती है कि तुम इतने सरल क्यों थे.

_ और सबसे भयानक बात यह है कि जब तुम्हारा आक्रोश बाहर आता है, जब तुम्हारा मौन भारी हो जाता है, जब तुम पीछे हटने लगते हो, तब भी दोषी तुम्हें ही ठहराया जाता है.

_ यह कहकर कि तुम बदल गए हो, तुम नकारात्मक हो गए हो, तुम्हारे भीतर कड़वाहट आ गई है.

_ कोई यह नहीं पूछता कि यह कड़वाहट उगी कहाँ से.

_ कोई यह नहीं देखता कि जिस व्यक्ति को आज कठोर कहा जा रहा है, वही कभी सबसे अधिक कोमल था.

_ सच्चाई यही है कि निरंतर उपेक्षा मन को विषैला बना सकती है.

_ वह ज्वालामुखी बनता है—बाहर से शांत, भीतर से लावा से भरा हुआ.

_ और जब वह फटता है, तो सबसे पहले उसी व्यक्ति को झुलसा देता है जिसके भीतर वह पल रहा था.

_ नफ़रत धीरे-धीरे दूसरों से अधिक स्वयं को खाती है.

_ मैं मानता हूँ कि यह जीवन बहुतों का है.

_ बहुत लोग ऐसे हैं जो निभाते-निभाते भीतर से टूट जाते हैं.

_ जो दूसरों की ढाल बनते-बनते स्वयं नंगे खड़े रह जाते हैं.

_ जो सबकी सुनते-सुनते अपने मन की आवाज़ पहचानना भूल जाते हैं.

_ लेकिन एक और सत्य है.

_ यदि यह विष भीतर ही भीतर पलता रहा, तो अंततः वह जीवन की दिशा को अंधकार में ले जा सकता है.

_ नफ़रत स्थायी निवास नहीं है ; वह एक ऐसी प्रतिक्रिया है जो लंबे समय तक अनसुने रहे दर्द से जन्म ले सकती है.

_ घृणा समाधान नहीं है ; वह थके हुए मन का बचाव है.

_ शायद जीवन की दिशा तब बदलती है, जब व्यक्ति पहली बार यह स्वीकार करता है कि मैं भी महत्वपूर्ण हूँ.

_ जब वह सीमाएँ खींचना सीखता है.

_ जब वह बिना अपराधबोध के ‘न’ कहना सीखता है.

_ जब वह यह समझता है कि त्याग और आत्म-उपेक्षा एक ही चीज़ नहीं हैं.

_ दर्द को नकारना समाधान नहीं है.

_ उसे पहचानना, स्वीकारना और उसकी जड़ों को समझना—यही शायद पहला उपचार है.

_ मैं यह नहीं कहता कि सब अचानक बदल जाएगा.

_ जो वर्षों से जमा हुआ है, वह एक दिन में नहीं धुलेगा.

_ लेकिन यदि मन में यह बोध जाग जाए कि मेरी करुणा मेरी कमजोरी नहीं थी, बस उसका दुरुपयोग हुआ, तो शायद भीतर की आग थोड़ी शांत हो सके.

_ जीवन को नफ़रत में बदल देना आसान है.

_ विश्वास को पुनः गढ़ना कठिन है.

_ पर अंततः वही व्यक्ति विजयी होता है, जो अपने भीतर के विष को पहचानकर उसे धीरे-धीरे बाहर निकालने का साहस रखता है.

_ क्योंकि यदि हम भी वही बन जाएँ, जिससे हमें घृणा है, तो हमारे सारे त्याग, सारे संघर्ष व्यर्थ हो जाएँगे.

_ शायद दिशा यह नहीं कि हम कठोर हो जाएँ.

_ दिशा यह है कि हम सजग हो जाएँ.

_ निष्क्रिय होकर सब कुछ सहने वाले नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ खड़े रहने वाले बनें.

_ हर किसी के लिए उपलब्ध रहने के बजाय उन रिश्तों को महत्व दें, जहाँ हमारी भावनाओं की भी कद्र हो.

_ हर टूटे हुए संबंध को अकेले जोड़ने के बजाय यह भी समझें कि कुछ रिश्तों को बचाने की जिम्मेदारी दोनों तरफ होती है.

_ क्योंकि हर बार झुक जाना बड़प्पन नहीं होता, हर बार चुप रहना शांति नहीं होती और हर बार माफ़ कर देना इस बात की गारंटी नहीं कि सामने वाला बदल जाएगा.

_ कभी-कभी अपने मन की रक्षा के लिए दूरी बनाना भी आवश्यक होता है.

_ किसी को क्षमा कर देना और उसे फिर से वही अधिकार दे देना—दो अलग बातें हैं.

_ और शायद एक दिन ऐसा भी आता है, जब इंसान पीछे मुड़कर अपने बीते हुए कल को देखता है और स्वयं से कहता है—मैंने लोगों को चाहने में कोई गलती नहीं की थी.

_ मेरी गलती बस इतनी थी कि मैं सबको बचाते-बचाते स्वयं को बचाना भूल गया था.

_ अब मैं किसी से नफ़रत करके नहीं, बल्कि स्वयं को समझकर आगे बढ़ूँगा.

_ अब मेरी अच्छाई मेरी विवशता नहीं होगी, मेरा त्याग मेरी पहचान का अकेला आधार नहीं होगा और मेरा मौन किसी के अन्याय की सहमति नहीं बनेगा.

_ तब शायद यह ज्वालामुखी राख में बदल जाए—ऐसी राख, जिसमें बीते हुए दुःखों की स्मृतियाँ तो रहें, लेकिन वे भविष्य की हरियाली को न रोकें.

_ और उसी राख से एक दिन फिर कोई नया, संतुलित और शांत जीवन अंकुरित हो सके.

_ क्योंकि अंततः हमें अपने भीतर की अच्छाई को बचाना है, लेकिन उस अच्छाई की कीमत पर स्वयं को मिटाना नहीं है.

_ हमें प्रेम करना है, मगर अपने आत्मसम्मान को खोकर नहीं.

_ हमें अपनों का साथ देना है, मगर अपने ही मन को अकेला छोड़कर नहीं.

_ और यदि कभी जीवन की लंबी यात्रा में ऐसा लगे कि अब भीतर कुछ भी शेष नहीं बचा, तो बस एक बार अपने उस पुराने रूप को याद करना, जिसने बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश की थी.

_ उसे दोष मत देना.

_ वह भोला नहीं था, वह सच्चा था.

_ वह कमज़ोर नहीं था, वह संवेदनशील था.

_ उसे दुनिया की कठोरता ने थकाया होगा, लेकिन उसकी अच्छाई अपने आप में कोई अपराध नहीं थी.

_ अब बस इतना करना है कि जिस करुणा को तुमने जीवन भर दूसरों पर लुटाया, उसकी थोड़ी-सी रोशनी अपने भीतर भी बचाकर रखना.

_ क्योंकि दुनिया को अच्छा बनाने की कोशिश में स्वयं के भीतर की दुनिया को उजाड़ देना कोई त्याग नहीं है.

_ सच्ची जीत तब होगी, जब इतने दर्द से गुज़रने के बाद भी तुम्हारे भीतर इंसानियत जीवित रहे.

_ और इस बार उस इंसानियत में तुम्हारे लिए भी उतनी ही जगह हो, जितनी तुमने हमेशा दूसरों के लिए बनाई थी.!!

– Ishq Banaras

इंसान को समझने में अक्सर हम पूरी उम्र लगा देते हैं, और जब समझ आती है, तब तक बहुत कुछ हमारे हाथों से छूट चुका होता हैं.

_ मनुष्य होने की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि हम सब भीतर से अधूरे हैं.

_ किसी के भीतर बीते हुए कल के घाव हैं, किसी की आँखों में अनकहे दुःख हैं, किसी के स्वभाव में कुछ कमियाँ हैं, तो किसी के व्यक्तित्व में ऐसे बिखरे हुए टुकड़े हैं, जिन्हें समेटने में उसने अपनी आधी उम्र गुज़ार दी है.

_ फिर भी हम चाहते हैं कि जो हमारी ज़िंदगी में आए, वह बिल्कुल वैसा हो, जैसा हमने अपनी कल्पनाओं में सोच रखा है.

_ वह हमारी तरह सोचे, हमारी तरह समझे, हमारी ख़ामोशी का अर्थ जाने, हमारी नाराज़गी के पीछे छिपे दर्द को पहचाने और बिना कुछ कहे हमारी हर उम्मीद पूरी कर दे.

_ लेकिन ज़रा सोचिए, जो इंसान स्वयं अपने भीतर की लड़ाइयों से जूझ रहा है, वह हर बार हमारी उम्मीदों पर खरा कैसे उतर सकता है ?

_ वह भी तो इंसान है.

_ उसे भी कभी-कभी थक जाने का हक़ है.

_ उसे भी टूटने, बिखरने, ग़लती करने और फिर से ख़ुद को समेटने का अधिकार है.

_ उसके भीतर भी कुछ ऐसे अँधेरे कमरे हैं, जहाँ वह दुनिया की नज़रों से छिपकर अपने आँसू पोंछता है.

_ उसके चेहरे की मुस्कान हमेशा उसकी ख़ुशी की गवाही नहीं होती और उसकी ख़ामोशी हमेशा उसके भीतर के अहंकार का प्रमाण नहीं होती.

_ कभी-कभी इंसान बोलना चाहता है, लेकिन उसके पास शब्द नहीं होते.

_ वह प्रेम करना चाहता है, लेकिन अपने पुराने ज़ख़्मों के कारण प्रेम जताना नहीं जानता.

_ वह किसी को खोना नहीं चाहता, मगर उसे सँभालकर रखने का सलीका भी नहीं सीख पाया होता.

_ और हम हैं कि उसकी एक ग़लती को उसके पूरे व्यक्तित्व का परिचय मान लेते हैं.

_ हम यह भूल जाते हैं कि किसी इंसान की सबसे बुरी घड़ी ही उसकी पूरी पहचान नहीं होती.

_ कभी-कभी उसके व्यवहार में दिखाई देने वाली कठोरता के पीछे वर्षों की उपेक्षा छिपी होती है.

_ कभी उसकी चिड़चिड़ाहट के पीछे वह थकान होती है, जिसे वह किसी के सामने स्वीकार नहीं कर पाता.

_ कभी उसका दूर हो जाना बेपरवाही नहीं, बल्कि भीतर चल रहे किसी ऐसे संघर्ष का परिणाम होता है, जिसे समझाने की हिम्मत भी उसमें नहीं बची होती.

_ यह सच है कि हर इंसान अपनी कमियों के लिए जवाबदेह है.

_ प्रेम का अर्थ किसी के घावों के नाम पर हर चोट को सहते रहना नहीं है.

_ लेकिन यह भी सच है कि हर भूल धोखा नहीं होती, हर असमर्थता बेवफ़ाई नहीं होती और हर अधूरापन किसी इंसान के प्रेम को झूठा नहीं बना देता.

_ कुछ लोग हमें चोट पहुँचाना नहीं चाहते, फिर भी अनजाने में दुख दे जाते हैं.

_ कुछ लोग हमें खोने से डरते हैं, फिर भी अपने डर और कमज़ोरियों के कारण वही कर बैठते हैं, जिससे रिश्ते दूर होने लगते हैं.

_ वे हर बार सही नहीं होते, लेकिन हर बार ग़लत करने की नीयत भी नहीं रखते.

_ उनके भीतर भी एक मन होता है, जो चाहता है कि कोई उन्हें उनकी कमियों के बावजूद समझे ;

_ कोई उनकी हर ग़लती पर उन्हें कठघरे में खड़ा करने के बजाय कभी उनका हाथ थामकर पूछे— “तुम ठीक तो हो न ?

_ आख़िर तुम्हारे भीतर इतना कुछ चल क्या रहा है ?”

_ मगर अफ़सोस, हम अक्सर सवाल पूछने से पहले फ़ैसला सुना देते हैं.

_ समझने से पहले दूरियाँ बना लेते हैं और किसी के बदलने की संभावना को स्वीकार करने से पहले उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल देते हैं.

_ हमें एक ऐसा इंसान चाहिए, जो कभी नाराज़ न हो, कभी कमज़ोर न पड़े, कभी हमारी भावनाओं को न समझने की भूल न करे.

_ हम उसके लिए एक अदृश्य साँचा तैयार करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी सारी स्वाभाविकता छोड़कर उसमें समा जाए.

_ हम भूल जाते हैं कि रिश्ते किसी मूर्ति की तरह नहीं होते, जिन्हें अपनी पसंद के आकार में तराश लिया जाए.

_ रिश्ते दो जीवित मनुष्यों के बीच का वह संसार हैं, जहाँ दोनों को एक-दूसरे को समझना, सीखना, बदलना और कभी-कभी अपनी ज़िद से पीछे हटना पड़ता है.

_ फिर एक दिन हम किसी की छोटी-छोटी कमियों से थककर उससे मुँह मोड़ लेते हैं.

_ हमें लगता है कि कहीं और कोई ऐसा मिल जाएगा, जिसके साथ जीवन में कभी शिकायत नहीं होगी, कभी मन नहीं दुखेगा और कभी आँसू आँखों तक नहीं आएँगे.

_ हम एक निर्दोष चेहरे की तलाश में निकल पड़ते हैं, यह भूलकर कि निर्दोष दिखाई देना और सचमुच संवेदनशील होना दो अलग बातें हैं.

_ कुछ लोग शब्दों से इतने सुंदर होते हैं कि उनकी ख़ामोशी का असली अर्थ समझने में बरसों लग जाते हैं.

_ कुछ लोग हर परिस्थिति में सही दिखाई देते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी कमज़ोरियों को छिपाने की कला सीख ली होती है.

_ और कुछ लोग अपनी कमियाँ छिपाना नहीं जानते, इसलिए अपनी सच्चाई के साथ हमारे सामने खड़े रहते हैं.

_ हम अक्सर उसी सच्चे, मगर अधूरे इंसान को ठुकरा देते हैं, जिसकी आँखों में हमारे लिए अपनापन था.

_ हमें उसकी कमियाँ दिखाई देती हैं, उसकी कोशिशें नहीं.

_ हमें उसकी असफलताएँ याद रहती हैं, उसकी छोटी-छोटी कुर्बानियाँ नहीं.

_ हमें वह दिन याद रहता है, जब उसने हमें दुख पहुँचाया था ; मगर वे अनगिनत दिन याद नहीं रहते, जब उसने अपनी परेशानियों के बावजूद हमारी ख़ुशी के लिए कुछ करने की कोशिश की थी.

_ और जब वह चला जाता है, तब उसके होने का अर्थ धीरे-धीरे समझ में आने लगता है.

_ उसके बिना घर तो वही रहता है, मगर घर जैसा महसूस नहीं होता.

_ फ़ोन में वही पुरानी बातचीत रहती है, मगर उसे दोबारा पढ़ते हुए दिल में एक अजीब-सी टीस उठती है.

_ रास्ते वही होते हैं, शामें वही होती हैं, मौसम भी बदलते रहते हैं, मगर किसी एक इंसान की अनुपस्थिति जीवन के सबसे परिचित दृश्यों तक का अर्थ बदल देती है.

_ तब याद आता है कि वह हमारी हर बात नहीं समझ पाता था, मगर हमारी उदासी देखकर बेचैन हो जाता था.

_ वह हर बार सही शब्द नहीं चुन पाता था, मगर कभी-कभी उसकी साधारण-सी मौजूदगी ही हमारे लिए सबसे बड़ी राहत होती थी.

_ वह हमारी सारी समस्याएँ हल नहीं कर सकता था, मगर मुश्किल दिनों में हमारे साथ खड़े रहने की कोशिश करता था.

_ और हम… हम उसकी उन्हीं कमियों को लेकर उससे दूर हो गए, जिन्हें समझने के लिए शायद थोड़े धैर्य, थोड़े संवाद और थोड़े प्रेम की ज़रूरत थी.

_ ज़िंदगी की सबसे गहरी पीड़ा किसी को खो देना भर नहीं है.

_ सबसे गहरी पीड़ा तो तब होती है, जब उसके चले जाने के बाद हमें अपनी ही कठोरता का एहसास होता है.

_ जब समझ आता है कि हर रिश्ता इसलिए नहीं टूटता कि उसमें प्रेम कम था ;

_ कुछ रिश्ते इसलिए भी टूट जाते हैं, क्योंकि प्रेम के होते हुए भी दोनों एक-दूसरे की सीमाओं को समझ नहीं पाए.

_ कहीं अपेक्षाएँ संवाद से बड़ी हो गईं, कहीं अहंकार ने माफ़ी माँगने नहीं दी, कहीं शिकायतों ने कृतज्ञता को ढक लिया और कहीं दोनों यह सोचते रह गए कि पहल दूसरा करेगा.

_ काश! हम उस वक़्त थोड़ा और ठहर गए होते.

_ काश! किसी एक ग़लती के बाद अंतिम निर्णय लेने के बजाय एक बार और बात कर ली होती.

_ काश! हम यह समझ पाते कि सामने वाला हमारी तरह प्रेम जताना नहीं जानता, इसका अर्थ यह नहीं कि उसके भीतर प्रेम नहीं है.

_ काश! हम किसी को उसकी सबसे कमज़ोर अवस्था में देखकर यह तय न करते कि वह जीवन भर ऐसा ही रहेगा.

_ लेकिन जीवन में सबसे कठिन शब्द शायद ‘काश’ ही है, क्योंकि इसमें पछतावा तो होता है, पर बीते हुए समय को वापस बुलाने की ताक़त नहीं होती.

_ धीरे-धीरे उम्र हमें सिखाती है कि प्रेम किसी परिपूर्ण इंसान को पा लेने का नाम नहीं है.

_ प्रेम उस इंसान के साथ मिलकर बेहतर बनने की यात्रा है, जो अपनी अच्छाइयों और कमियों, दोनों के साथ हमारे जीवन में आया है.

_ प्रेम का अर्थ किसी की हर भूल को सही ठहराना नहीं, बल्कि जहाँ सुधार की गुंजाइश हो, वहाँ उसे एक अवसर देना है.

_ प्रेम का अर्थ स्वयं को मिटा देना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अस्तित्व के लिए ऐसी जगह बनाना है, जहाँ दोनों बिना किसी मुखौटे के जी सकें.

_ क्योंकि किसी रिश्ते में सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि दो लोग कभी एक-दूसरे को दुख न दें.

_ बल्कि यह है कि दुख पहुँच जाने के बाद भी वे अपनी ग़लती स्वीकार करने, एक-दूसरे की बात सुनने और टूटे हुए भरोसे को जोड़ने की ईमानदार कोशिश करें.

_ हाँ, कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जिन्हें बचाने की हर कोशिश के बावजूद छोड़ देना ही बेहतर होता है.

_ जहाँ अपमान बार-बार लौटे, जहाँ विश्वास को जानबूझकर तोड़ा जाए और जहाँ प्रेम के नाम पर किसी की गरिमा कुचली जाए, वहाँ दूर हो जाना कमज़ोरी नहीं, आत्मसम्मान है.

_ हर बिछड़ना ग़लती नहीं होता और हर लौटना ज़रूरी नहीं होता.

_ मगर किसी सच्चे रिश्ते को केवल इसलिए खो देना कि सामने वाला हमारी कल्पना के मुताबिक़ परिपूर्ण नहीं था, शायद जीवन की उन भूलों में से एक है, जिनका दर्द बहुत देर तक साथ चलता है.

_ आख़िरकार, हम सबको कोई ऐसा चाहिए, जो हमें समझे.

_ लेकिन शायद उससे भी ज़्यादा ज़रूरी यह है कि हम किसी को समझने की कोशिश करना सीखें.

_ हम यह स्वीकार करना सीखें कि हमारे सामने खड़ा इंसान हमारी ख़ुशियों का माध्यम भर नहीं है.

_ उसकी अपनी थकान, अपनी इच्छाएँ, अपनी असुरक्षाएँ और अपने सपने भी हैं.

_ किसी को प्रेम करना आसान है, जब वह हमारी उम्मीदों के अनुसार व्यवहार करे.

_ असली परीक्षा तब होती है, जब उसकी कोई कमी हमारे सामने आती है, जब वह हमसे असहमत होता है, जब वह हमारी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता.

_ उसी क्षण हमें तय करना होता है कि हम उसे केवल अपनी सुविधा के लिए चाहते हैं या उसके संपूर्ण अस्तित्व को समझने की भी इच्छा रखते हैं.

_ कभी-कभी एक छोटी-सी माफ़ी वर्षों का रिश्ता बचा सकती है.

_ कभी एक ईमानदार बातचीत किसी ग़लतफ़हमी को हमेशा के लिए मिटा सकती है.

_ कभी किसी की बात पूरी सुन लेना, उसे हज़ार सलाह देने से अधिक सुकून दे सकता है.

_ और कभी-कभी केवल इतना कह देना कि “मैं तुम्हारी हर बात से सहमत नहीं हूँ, लेकिन तुम्हें समझने की कोशिश करना चाहता हूँ” किसी टूटते हुए रिश्ते को एक और अवसर दे सकता है.

_ इसलिए, अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो पूर्ण नहीं है, लेकिन सच्चे मन से आपके साथ चलना चाहता है, तो उसकी कमियों को समझिए, उसकी कोशिशों को पहचानिए और अपने मन की बात उससे कहिए.

_ उसे यह अवसर दीजिए कि वह अपनी भूल सुधारे, और स्वयं भी इतनी विनम्रता रखिए कि अपनी भूल स्वीकार कर सकें.

_ क्योंकि एक दिन सब कुछ पीछे छूट जाएगा.

_ चेहरे बदल जाएँगे, रास्ते अलग हो जाएँगे, समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहेगा.

_ तब शायद हमें इस बात का उतना अफ़सोस नहीं होगा कि किसी ने हमारे लिए क्या-क्या नहीं किया ; जितना इस बात का होगा कि जो हमारे पास था, उसकी क़द्र हम समय रहते क्यों नहीं कर पाए.

_ और अगर कोई चला गया है, तो उसकी याद में स्वयं को उम्र भर दोषी ठहराना भी ज़रूरी नहीं.

_ अपनी भूलों से सीखिए, अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी स्वीकार कीजिए और आगे किसी रिश्ते को अधिक समझदारी, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ जीने का प्रयास कीजिए.

_ बीता हुआ प्रेम लौटे या न लौटे, उससे मिली समझ आपके आने वाले कल को बेहतर बना सकती है.

_ क्योंकि अंत में इंसान को किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश नहीं होती, जिसके भीतर कोई कमी न हो.

_ उसे तो बस कोई ऐसा चाहिए होता है, जिसके सामने वह अपनी कमियों के साथ भी इंसान बना रह सके.

_ कोई ऐसा, जो उसके बिखरने पर उसका मज़ाक न बनाए, उसकी ख़ामोशी को हमेशा ग़लत न समझे और उसकी एक भूल के कारण उसके सारे प्रेम को झूठा न मान ले.

_ कोई ऐसा, जो यह जानता हो कि इंसान को सुधारने के लिए हर बार उसे छोड़ देना ज़रूरी नहीं होता.

_ कभी-कभी उसका हाथ थामकर साथ चलना भी ज़रूरी होता है.

_ और सबसे बढ़कर, कोई ऐसा जो वक़्त रहते यह समझ जाए कि रिश्ते हमेशा इसलिए नहीं टूटते कि लोग एक-दूसरे से प्रेम करना छोड़ देते हैं.

_ कभी-कभी वे इसलिए भी टूट जाते हैं, क्योंकि दोनों अपने-अपने सच में इतने उलझ जाते हैं कि एक-दूसरे का दर्द देखना भूल जाते हैं.

_ ज़िंदगी बहुत छोटी है और इंसान बहुत अनमोल.

_ इसलिए किसी की छोटी-सी कमी को इतना बड़ा मत बना दीजिए कि उसके चले जाने के बाद उसकी हज़ार अच्छाइयाँ भी आपको उसे वापस न दिला सकें.

_ क्योंकि कुछ लोग जीवन में दोबारा मिल भी जाएँ, तो पहले जैसे नहीं मिलते.

_ कुछ रिश्तों में लौटने के रास्ते होते हैं, मगर लौटने का वह समय नहीं होता.

_ और कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनने की सबसे अधिक इच्छा हमें तभी होती है, जब उन्हें पुकारने का अधिकार हम अपने ही हाथों से खो चुके होते हैं.

_ शायद इसी का नाम जीवन है.

_ पहले हम इंसानों से परिपूर्ण होने की उम्मीद करते हैं, फिर उनकी अपूर्णताओं को समझने में उम्र गुज़ार देते हैं और अंत में यह जान पाते हैं कि प्रेम का सबसे सुंदर रूप किसी को बदलकर अपना बना लेना नहीं, बल्कि उसे समझते हुए साथ बढ़ना था.

_ बस, काश यह समझ थोड़ी पहले आ जाती तो शायद कुछ लोग आज भी हमारे साथ होते.

_ कुछ शामें इतनी सूनी न होतीं.

_ कुछ यादें आँखों को नम करने के बजाय चेहरे पर मुस्कान ले आतीं.

_ और दिल के किसी कोने में यह टीस न रहती कि जिसे हम उसकी कमियों के कारण खो बैठे, वह शायद अपनी सारी कमियों के बावजूद हमारे जीवन का सबसे सच्चा हिस्सा था.

_ लेकिन अब जो बीत गया, वह लौट नहीं सकता.

_ हमारे पास केवल आज है.

_ आज किसी को समझ लेने का, आज किसी की बात सुन लेने का, आज अपनी ग़लती स्वीकार कर लेने का और आज उस प्रेम की क़द्र कर लेने का, जो कल केवल एक याद बनकर रह सकता है.

_ क्योंकि इंसानों को खोने के बाद उनकी अहमियत समझना बहुत आसान है, लेकिन उनके पास रहते हुए उनकी अपूर्णताओं में भी प्रेम खोज पाना ही असली परिपक्वता है.

_ और सच तो यह है.

_ हमारी ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा याद वही लोग नहीं आते, जिन्होंने हमारे लिए सब कुछ सही किया था.

_ कभी-कभी सबसे गहरी याद उस इंसान की आती है, जो ख़ुद अधूरा था, हमें भी अधूरा जानता था, फिर भी हमारे बीच एक ऐसा अपनापन था, जिसे हम उसकी कमियों से बड़ा मानना सीख ही नहीं पाए.

_ अब बस उसकी याद है, कुछ अधूरे सवाल हैं और एक ख़ामोश-सा पछतावा कि काश, हमने उसे खोने से पहले समझ लिया होता.

_ कि काश, हमने प्रेम को अपनी उम्मीदों से थोड़ा बड़ा होने दिया होता.

_ और काश, ज़िंदगी ने हमें यह सबक सिखाने के लिए किसी अपने के बिछड़ने का इंतज़ार न किया होता.!!

– Ishq Banaras

कभी-कभी ज़िंदगी इंसान से इतना कुछ छीन लेती है कि फिर उसे पाने की कोई ज़िद भी नहीं बचती.

_ कुछ लोग बस दिन काटते हैं, रातें गुज़ारते हैं और हर सुबह अपने बिखरे हुए मन को समेटकर दुनिया के सामने ऐसे खड़े हो जाते हैं, जैसे सब कुछ ठीक हो.

_ उनके पास कहने को बहुत कुछ होता है, मगर सुनने वाला कोई नहीं ;

_ आँखों में न जाने कितनी कहानियाँ होती हैं, मगर उन्हें पढ़ने की फुर्सत किसी के पास नहीं.

_ वे किसी से अपनी तकलीफ़ का हिसाब नहीं माँगते, न किसी से अपने हिस्से की खुशियाँ छीनना चाहते हैं.

_ उन्हें तो बस कोई ऐसा मिल जाए, जिसके सामने उन्हें मज़बूत होने का अभिनय न करना पड़े, जिसके पास बैठकर वे कुछ देर के लिए अपनी सारी थकान उतार सकें और बिना कुछ कहे भी यह महसूस कर सकें कि दुनिया में कोई तो है, जिसके लिए उनका होना मायने रखता है.

_ सबसे ज़्यादा दर्द शायद उन्हें होता है, जो टूटने के बाद भी दूसरों को संभालते रहते हैं.

_ जो अपने भीतर कितनी ही बार रो चुके होते हैं, मगर किसी दूसरे की आँखों में आँसू देखकर सबसे पहले उसका हाथ थाम लेते हैं.

_ जिनके अपने हिस्से में उदासी होती है, फिर भी वे दूसरों के जीवन में हँसी बाँटते फिरते हैं.

_ वे किसी से बहुत बड़ी उम्मीद नहीं रखते, बस चाहते हैं कि कोई कभी उनके चेहरे की उस मुस्कान के पीछे भी झाँककर देखे, जो उन्होंने अपने दर्द को छिपाने के लिए ओढ़ रखी है.

_ कोई उनसे एक बार पूछे कि “तुम सच में ठीक हो न ?”

_ और फिर उनके जवाब देने से पहले ही समझ जाए कि कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में कह पाना भी एक और पीड़ा बन जाता है.

_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा-सा सुकून है, जिसे हर रात सोने से पहले खोजते हैं.

_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए, जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है.

_ बिना पूछे, बिना बताए.

_ कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूँढ़ते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.

_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.

_ वे रोज़ मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए, जब उनकी आत्मा शांत हो जाए ;

_ कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए ;

_ कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए, बिना कुछ कहे.

_ वे लोग आख़िरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि जीवन में इतना सुकून ज़रूर मिल जाए कि हर दिन का अंत थोड़ी शांति के साथ हो.

_ कि रात को आँखें बंद करते समय बीते हुए कल का बोझ और आने वाले कल का डर मन पर हावी न हो.

_ कि उन्हें भी कभी ऐसा लगे कि ज़िंदगी ने उनसे सब कुछ नहीं छीना, कि अभी कुछ अपनापन बाकी है, कुछ उम्मीद बाकी है और कुछ सुबहें ऐसी भी आएँगी, जिन्हें जीने के लिए खुद को समझाना नहीं पड़ेगा.

_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं.

_ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थककर मुस्कुरा देते हैं.

_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है, जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.

_ इसलिए कभी किसी ख़ामोश इंसान को देखकर यह मत समझिए कि उसे किसी की ज़रूरत नहीं.

_ हो सकता है, वह बस अपनी तकलीफ़ को शब्द देने की हिम्मत खो चुका हो.

_ कभी उसके पास बैठ जाइए, उसकी बातें सुन लीजिए, या बिना कोई सवाल किए बस इतना कह दीजिए.

_ तुम्हें हर बार मज़बूत बने रहने की ज़रूरत नहीं, कभी थक जाओ तो मेरे पास बैठ जाना.

_ यक़ीन मानिए, कभी-कभी किसी इंसान को बचाने के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती.

_ उसे बस यह एहसास दिलाना होता है कि उसके दर्द के इस विशाल संसार में वह बिल्कुल अकेला नहीं है.!!

– Ishq Banaras

कभी-कभी किसी रिश्ते से विदा लेने के लिए न अलविदा कहना पड़ता है, न कोई आखिरी बात.

_ बस एक दिन मन थककर उन उम्मीदों के सामने चुपचाप बैठ जाता है, जिन्हें बचाने में उसने अपनी कितनी ही रातें गुज़ार दी थीं.

_ हम सामने वाले से कुछ कहना चाहते हैं, मगर फिर शब्दों को भीतर ही कहीं दफ़न कर देते हैं, क्योंकि समझ आ जाता है कि जहाँ हमारी भावनाओं की कोई क़ीमत न हो, वहाँ अपनी तकलीफ़ बयान करना भी स्वयं को बार-बार उसी दर्द से गुज़ारना है.

_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, बातचीत भी सामान्य रहती है, मगर भीतर का कोई कोना हमेशा के लिए ख़ामोश हो चुका होता है.

_ वह ख़ामोशी नाराज़गी नहीं होती, न ही किसी को खो देने का डर.

_ वह उस दिल की थकान होती है, जिसने बहुत देर तक किसी अपने के लिए जगह बचाए रखी, लेकिन अंत में उसी जगह पर अपने लिए भी थोड़ी-सी जगह नहीं पा सका.

_ सबसे अधिक पीड़ा किसी के चले जाने से नहीं होती, बल्कि उस एहसास से होती है कि जिसके लिए हमने अपने भीतर इतनी दुनिया बसा रखी थी, उसकी दुनिया में शायद हमारी मौजूदगी कभी उतनी मायने ही नहीं रखती थी.

_ हम छोटी-छोटी बातों में अपनापन खोजते रहे, उसकी ख़ामोशी के पीछे वजहें तलाशते रहे, उसके बदलते व्यवहार को परिस्थितियों का नाम देकर खुद को समझाते रहे.

_ हमें लगता रहा कि एक दिन वह हमारे मौन में छिपी पुकार सुन लेगा, हमारी आँखों के पीछे ठहरे दर्द को पढ़ लेगा और हमारे इंतज़ार की थकान समझ जाएगा.

_ मगर हर बार उम्मीद ने ही हमें संभाला और हर बार उसी उम्मीद ने हमें थोड़ा और तोड़ दिया.

_ फिर एक दिन एहसास होता है कि किसी के जीवन में अपनी जगह माँगते रहना प्रेम नहीं, अपने ही अस्तित्व को धीरे-धीरे भुला देना है.

_ और उस दिन हम किसी से प्रेम करना बंद नहीं करते, बस उस प्रेम के नाम पर स्वयं को खोते रहने से इनकार कर देते हैं.

_ सच तो ये है कि मनुष्य स्थान नहीं छोड़ता, वह अपना भ्रम छोड़ता है.

_ वह उन कल्पनाओं का त्याग करता है जिनमें उसे लगता था कि उसकी कमी कभी किसी को खलेगी, उसके मौन को कोई पढ़ लेगा, उसके इंतज़ार की कोई कीमत होगी.

_ लेकिन समय धीरे-धीरे सिखा देता है कि हर दरवाज़ा हमारे लिए नहीं बना होता और हर ठहराव हमारी नियति नहीं होता.

_ फिर एक दिन हम बिना शोर किए अपने हिस्से की मोहब्बत, अपने अधूरे प्रश्न, अपनी अनकही बातें और अपनी भीगी हुई उम्मीदें समेट लेते हैं.

_ किसी को दोष दिए बिना, किसी से हिसाब माँगे बिना.

_ क्योंकि कुछ रिश्ते टूटते नहीं, बस उनकी ओर जाने वाले रास्ते भीतर ही भीतर बंद हो जाते हैं.

_ उसके बाद पीछे मुड़कर देखने की इच्छा भी कम होने लगती है.

_ शिकायतों की जगह प्रार्थनाएँ ले लेती हैं और अपेक्षाओं की जगह स्वीकार.

_ तब समझ आता है कि आत्मसम्मान का सबसे शांत रूप प्रतिशोध नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण प्रस्थान होता है.

_ हर ठिकाना अपना नहीं होता, हर अपनापन स्थायी नहीं होता.

_ इसलिए कभी-कभी सबसे कठिन निर्णय रुक जाना नहीं, बल्कि प्रेम के साथ वहाँ से चले आना होता है जहाँ हमारी अनुपस्थिति से किसी व्यवस्था में कोई अंतर नहीं पड़ता.

_ और शायद उसी दिन से जीवन हमें सिखाना शुरू करता है कि अपने लिए भी एक घर होना चाहिए !

_ ऐसा घर, जो किसी व्यक्ति, किसी संबंध या किसी स्वीकृति पर नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान, अपने कर्म और अपनी आत्मा की शांति पर टिका हो.!!

– Ishq Banaras

Quotes by Travel Point

कुछ लोग जब दुखी होते हैं, तो अपनी तकलीफ़ बता देते हैं.

_ लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते.

_ वो शिकायत नहीं करते, हिसाब नहीं मांगते और न ही सामने वाले को उसकी गलती का एहसास कराने की कोशिश करते हैं.

_ बस धीरे-धीरे अपने भीतर से उस रिश्ते को समेटने लगते हैं, जिसे उन्होंने कभी पूरे मन से जिया था. _ उनकी सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि चोट खाने के बाद भी उनके भीतर की अच्छाई खत्म नहीं होती.

_ वो वही नरमी रखते हैं, वही अपनापन रखते हैं और दूसरों के दर्द को समझते रहते हैं.

_ फर्क बस इतना आता है कि अब वो अपना दर्द हर किसी के सामने रखना बंद कर देते हैं. _ एक दिन आपको लगेगा कि सब पहले जैसा ही है.

_ वो बात करेंगे, मुस्कुराएंगे, आपकी मदद भी करेंगे.

_ लेकिन उनके भीतर कहीं एक दरवाज़ा बंद हो चुका होगा.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे उन्होंने गुस्से में नहीं, बार-बार निराश होने के बाद बंद किया होगा.

_ किसी अच्छे इंसान को खोना अक्सर किसी रिश्ते के खत्म होने जैसा नहीं दिखता.

_ वो बिना किसी आखिरी लड़ाई के दूर हो जाता है.

_ उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं होती, बस पहले जैसी गर्माहट नहीं रहती.

_ उसकी मौजूदगी होती है, लेकिन उसमें पहले जैसा अपनापन नहीं होता.

_ और शायद सबसे गहरी बात यही है कि सच्चे दिल वाले लोग हमेशा आपको छोड़ना नहीं चाहते.

_ वो बहुत देर तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं.

_ आपकी गलतियों को समझते हैं, आपकी मजबूरियों को जगह देते हैं और कई बार अपने हिस्से का दर्द भी खुद उठा लेते हैं.

_ लेकिन हर दिल की भी एक सीमा होती है.

_ जिस दिन उन्हें महसूस हो जाता है कि उनके होने और न होने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता, उसी दिन वो भीतर से विदा लेना शुरू कर देते हैं. _ फिर उनका जाना अचानक नहीं होता.

_ वो तो बहुत पहले अपने मन में दूर हो चुके होते हैं, बस आपको पता देर से चलता है.

_ इसलिए किसी ऐसे इंसान को बार-बार मत आज़माइए, जो आपको पूरे दिल से अपना मानता है.

_ क्योंकि भरोसा कांच की तरह टूटकर हमेशा आवाज़ नहीं करता.

_ कभी-कभी वह बस इतना करता है कि इंसान आपके सामने खड़ा रहता है, लेकिन अपना दिल आपसे वापस ले लेता है.

_ और जब कोई सच्चा दिल अपना दरवाज़ा बंद कर लेता है, तो उसे खोलने के लिए पछतावा भी कई बार बहुत देर से आता है.!!

– Travel Point

हम अक्सर ऐसे इंसान की तलाश में रहते हैं, जो हमारी अधूरी जिंदगी को पूरा कर दे.

_ कोई ऐसा जो हमें समझे, हमारे डर को पहचान ले और हमारे बिखरे हुए हिस्सों को समेट दे.

_ लेकिन शायद हम यह भूल जाते हैं कि जिस सहारे की तलाश हमें है, उसकी जरूरत सामने वाले को भी हो सकती है.

_ हम चाहते हैं कि कोई हमें बदल दे, हमें मजबूत बना दे, हमारे भीतर उम्मीद जगा दे.

_ लेकिन खुद किसी के अंधेरे में एक छोटी सी रोशनी बनने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं.

_ हम दूसरों से वो हिम्मत मांगते रहते हैं, जिसे अपने भीतर पैदा करने से डरते हैं.

_ सच तो यह है कि कोई भी इंसान पूरी तरह मुकम्मल होकर हमारी जिंदगी में नहीं आता.

_ हर किसी के भीतर कुछ टूटे हुए सपने होते हैं, कुछ अनकहे डर होते हैं और कुछ ऐसी लड़ाइयां होती हैं, जिनके बारे में दुनिया को कुछ पता नहीं होता.

_ शायद रिश्तों का मतलब किसी परफेक्ट इंसान को ढूंढ लेना नहीं, बल्कि दो अधूरे लोगों का एक-दूसरे की कमियों के साथ चलना सीखना है.

_ किसी को बदल देना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे उस इंसान पर भरोसा करना है, जिसे वह खुद भी कभी-कभी भूल जाता है.

_ हम सब चाहते हैं कि कोई हमारा हाथ थामे, लेकिन जिंदगी शायद तब खूबसूरत होती है जब हम किसी का हाथ थामने की शुरुआत खुद करते हैं.

_ किसी के डर का मजाक उड़ाने के बजाय उसके साथ खड़े होना, किसी की कमजोरी गिनाने के बजाय उसे अपनी ताकत पहचानने में मदद करना और किसी के गिरने पर यह कहने के बजाय कि तुम कमजोर हो, बस इतना कहना कि चलो, एक बार फिर कोशिश करते हैं.

_ क्योंकि बेहतर इंसान मिलने से जिंदगी बेहतर नहीं होती, कई बार किसी के साथ चलते-चलते हम खुद बेहतर इंसान बन जाते हैं.

_ शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यही है कि हमें किसी मुकम्मल इंसान का इंतजार नहीं करना चाहिए.

_ हमें खुद इतना बेहतर बनने की कोशिश करनी चाहिए कि किसी और की जिंदगी में हमारे होने से उसे अपने भीतर थोड़ा और उजाला दिखाई देने लगे.

_ आखिर में, किसी बेहतर इंसान की तलाश से ज्यादा जरूरी है, किसी के लिए बेहतर इंसान बनने की कोशिश.!!

– Travel Point

किसी अच्छे इंसान को चोट पहुँचाने की सबसे खतरनाक बात ये नहीं होती कि वो रोएगा या आपसे लड़ाई करेगा…

_ असली बात ये होती है कि एक दिन वो चुप हो जाएगा.

_ वो आपको दोष नहीं देगा. सवाल नहीं करेगा. बदला लेने की कोशिश भी नहीं करेगा.

_ बस धीरे-धीरे अपने उस हिस्से को आपसे वापस ले लेगा, जो कभी पूरी तरह आपका हुआ करता था.

_ पहले आपके एक संदेश का इंतज़ार करने वाला इंसान, आपके जवाब का इंतज़ार करना छोड़ देगा.

_ आपकी छोटी-सी परेशानी पर बेचैन होने वाला इंसान, एक दिन आपकी परेशानियों से अनजान रहने लगेगा.

_ और सबसे अजीब बात… आपको पता भी नहीं चलेगा कि ये दूरी कब शुरू हुई.

_ क्योंकि अच्छे लोग अक्सर रिश्ते तोड़ते नहीं हैं… वे पहले उम्मीदें छोड़ते हैं.

_ वे कई बार खुद को समझाते हैं कि शायद सामने वाला बदल जाएगा.

_ शायद उसे अपनी गलती समझ आएगी.

_ शायद अगली बार वो उस दिल को नहीं दुखाएगा, जिसने हमेशा उसका साथ दिया.

_ लेकिन हर बार थोड़ा-थोड़ा टूटने के बाद एक दिन भीतर कुछ बिल्कुल शांत हो जाता है.

_ फिर शिकायत खत्म हो जाती है, इंतज़ार खत्म हो जाता है.

_ और वो इंसान, जो कभी आपको खोने के ख्याल से डरता था, आपको खोकर भी शांत रहने लगता है.

_ ये नफ़रत नहीं होती.

_ ये वो पल होता है जब इंसान समझ जाता है कि किसी को अपना समझना और किसी का आपके अपने होने की कद्र करना… दोनों अलग बातें हैं.

_ उसके बाद वो आपके खिलाफ कुछ नहीं करेगा.

_ शायद आज भी आपकी खुशी चाहेगा.

_ शायद मुश्किल वक्त में मदद भी कर दे. लेकिन उसके दिल में आपके लिए जो जगह कभी घर जैसी थी, वहां अब सिर्फ एक बंद दरवाज़ा होगा.

_ और सबसे दर्दनाक बात ?

_ उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए शायद आप बहुत देर कर चुके होंगे.

_ क्योंकि कुछ दूरियां अचानक नहीं बनतीं, वो उन छोटी-छोटी चोटों से बनती हैं जिन्हें सामने वाला बार-बार अनदेखा करता रहा.

_ इसलिए अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो आपकी गलतियों के बावजूद आपको समझता है, आपकी खामोशी पढ़ लेता है और बिना मांगे आपका साथ देता है… तो उसकी सहनशीलता को उसकी कमजोरी मत समझिए.

_ क्योंकि कुछ लोग जब चले जाते हैं, तो उनके जाने की आवाज़ नहीं होती.

_ बस एक दिन आपको एहसास होता है कि जिस इंसान को आप हमेशा अपने पास समझते थे, वो अब आपके पास होकर भी आपके जीवन में नहीं है.

_ और तब शायद पछतावा बहुत होगा… लेकिन वो दिल, जो कभी आपके लिए दरवाज़ा खोलकर बैठा था, शायद तब तक अंदर से हमेशा के लिए बंद हो चुका होगा.

_ सबसे मुश्किल बात ये नहीं होगी कि वो आपसे दूर हो गया, बल्कि ये होगी कि आप चाहकर भी उस पुराने रिश्ते को वापस नहीं ला पाएंगे.

_ क्योंकि कुछ रिश्ते टूटने के बाद खत्म नहीं होते… बस उनमें लौटने का रास्ता हमेशा के लिए खो जाता है.

– Travel Point

जिंदगी में सबसे खतरनाक गलती शायद वह नहीं होती जब हम कोई गलत फैसला लेते हैं, बल्कि वह होती है.. जब कोई अपना हमारे लिए सही फैसला ले रहा हो और हम उसे गलत समझ बैठें.

_ कुछ लोग हमारी हर इच्छा पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि हमें उन मुश्किलों से बचाने के लिए हमारे साथ होते हैं, जिनका अंदाजा हमें उस वक्त नहीं होता.

_ वे हमारी बातों से ज्यादा हमारी हालत समझते हैं, इसलिए कई बार हमें वह नहीं देते जो हमें अच्छा लगता है, बल्कि वह करते हैं.. जिसकी हमें सच में जरूरत होती है.

_ मुश्किल यहीं से शुरू होती है.

_ जो मिला है, उसकी खुशी अक्सर जल्दी खत्म हो जाती है, लेकिन जो नहीं मिला उसका दर्द लंबे समय तक पीछा करता रहता है.

_ फिर हम उन्हीं हाथों को कसूरवार समझने लगते हैं, जिन्होंने हमें संभालने के लिए जाने कितनी बार खुद को पीछे किया था.

_ हमें उनकी चिंता दिखाई नहीं देती, उनकी मजबूरी दिखाई नहीं देती, उनके त्याग का अंदाजा नहीं होता.

_ दिखाई देता है तो बस अपना अधूरा सपना.

_ धीरे-धीरे यही अधूरापन इतना बड़ा हो जाता है कि सामने खड़ी पूरी जिंदगी छोटी लगने लगती है.

_ सबसे अजीब बात यह है कि दिल के किसी कोने में हमें यह एहसास भी होता रहता है कि शायद गलती हमारी है.

_ कभी अकेले में मन पूछता है कि क्या सच में मेरे अपने मेरे खिलाफ हैं, या मैं ही उनकी मोहब्बत को समझ नहीं पा रहा ?

_ लेकिन उस सवाल का जवाब स्वीकार करना आसान नहीं होता.

_ अहंकार हमें रोकता है और अपनी चाहतों के आगे बाकी सब कुछ छोटा दिखाई देने लगता है.

_ फिर एक दिन वही इंसान दूर हो जाता है.

_ और तभी उसकी डांट में छिपी चिंता, उसकी रोक-टोक में छिपा डर और उसके फैसलों के पीछे छिपी मोहब्बत समझ आने लगती है.

_ तब एहसास होता है कि जिसे हम अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी समझ रहे थे, शायद वही हमें किसी बड़ी परेशानी से बचा रहा था.

_ जिसे हम अपना दुश्मन समझ बैठे थे, वह शायद आखिरी इंसान था जो हमारे गिरने से पहले हमें पकड़ने की कोशिश कर रहा था.

_ हर किसी को जिंदगी में ऐसा इंसान नहीं मिलता.

_ इसलिए अगर आज कोई आपकी हर इच्छा पूरी नहीं करता, लेकिन आपकी जरूरत के वक्त आपके साथ खड़ा रहता है, तो उसकी कद्र कीजिए.

_ क्योंकि जिंदगी में सबसे बड़ा पछतावा किसी चीज के न मिलने का नहीं होता, सबसे बड़ा पछतावा तब होता है जब हमें समझ आता है कि जिसे हम रोकने वाला समझते रहे, वही हमें टूटने से बचा रहा था… और तब तक वह हमारे पास नहीं रहता.!!

– Travel Point

कभी-कभी जिंदगी हमें किसी इंसान से नहीं, बल्कि अपनी ही उम्मीदों से हरा देती है.

_ हम सोचते हैं कि कोई हमारे साथ हमेशा खड़ा रहेगा, कोई हमारी खामोशी समझ लेगा, कोई मुश्किल वक्त में हाथ नहीं छोड़ेगा.

_ लेकिन जब वक्त करवट लेता है, तब पता चलता है कि जिन कंधों को हमने अपना सहारा समझा था, वे भी कभी रास्ते में छूट सकते हैं.

_ शायद इसी का नाम जिंदगी है, जहां उम्मीदें खूबसूरत तो बहुत होती हैं, लेकिन हर उम्मीद का पूरा होना जरूरी नहीं.

_ उम्मीदें अक्सर धोखा देती हैं.

_ हम किसी को जितना अपना समझते हैं, जरूरी नहीं कि वह भी हमें उतना ही अपना समझे.

_ हम किसी रिश्ते को जिंदगी भर निभाने का सपना देखते हैं, लेकिन सामने वाला शायद उस रिश्ते को कुछ दूर तक का सफर ही मानता हो.

_ सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब हम किसी से कुछ मांगते भी नहीं, बस इतना चाहते हैं कि वह वक्त आने पर हमारे साथ खड़ा रहे.

_ और जब वही इंसान पीछे मुड़कर चला जाता है, तो उसके जाने से ज्यादा उस भरोसे के टूटने की आवाज सुनाई देती है, जिसे हमने बड़ी खामोशी से अपने भीतर बनाया था.

_ ऐसे पल इंसान को अंदर तक हिला देते हैं, लेकिन यही पल उसे एक ऐसी सच्चाई भी सिखाते हैं, जिसे किताबों में नहीं पढ़ाया जा सकता.

_ हर किसी से उम्मीद मत रखो, क्योंकि हर कोई आपकी तरह महसूस नहीं करता.

_ किसी के साथ चलो तो दिल से चलो, लेकिन अपनी पूरी जिंदगी का रास्ता उसके कदमों पर मत छोड़ो.

_ क्योंकि जिंदगी का सबसे बड़ा रोमांच शायद यही है कि जब अपने समझे हुए लोग भी रास्ते में छूट जाएं, तब इंसान अकेला आगे बढ़ना सीखता है.

_ और एक दिन पीछे मुड़कर देखता है तो समझ आता है कि जिसे वह अपना अंत समझ रहा था, वही उसके एक नए सफर की शुरुआत थी.!!

– Travel Point

एक दिन सब पीछे छूट जाएगा… फिर आज किस बात का इतना मोह है ?

_ सोचो, तुम एक अनजान रास्ते पर निकल पड़े हो.

_ सामने ऊंचे पहाड़ हैं, नीचे गहरी खाई और दूर तक फैला जंगल.

_ तुम्हारे साथ चल रहा कोई मुसाफिर अचानक कहता है, “मुझे अब तुम्हारे साथ नहीं चलना”

_ तुम क्या करोगे ? उसकी राह में बैठकर अपनी पूरी यात्रा रोक दोगे, या अपना बैग उठाकर आगे बढ़ जाओगे ?

_ बस, जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है.

_ लोग मिलेंगे, वादे करेंगे, तुम्हारे साथ सपने देखेंगे और फिर किसी मोड़ पर रास्ता बदल लेंगे.

_ कुछ तुम्हें बिना वजह छोड़ेंगे, कुछ तुम्हारी हजार कोशिशों के बाद भी तुम्हें नहीं समझेंगे.

_ लेकिन उनकी पसंद को अपनी किस्मत का फैसला बना लेना, यह तुम्हारी सबसे बड़ी भूल होगी.

_ दुनिया बहुत बड़ी है.

_ किसी एक इंसान के बदल जाने से यहां के रास्ते खत्म नहीं होते, आसमान से तारे गायब नहीं हो जाते और सुबह होना बंद नहीं हो जाता.

_ तुम उन लोगों के पीछे अपनी रातें क्यों बर्बाद कर रहे हो, जिन्हें तुम्हारी सुबह की परवाह तक नहीं ?

_ एक बार अपने भीतर झांककर देखो.

_ तुमने कितने सपने सिर्फ इसलिए टाल दिए, क्योंकि तुम्हारा मन किसी के लौटने की उम्मीद में अटका रहा.

_ कितनी जगहें नहीं देखीं, कितने फैसले नहीं लिए और कितनी बार अपनी खुशी को किसी दूसरे के व्यवहार से जोड़ दिया.

_ अब जरा उस जिंदगी की कल्पना करो, जिसमें तुम्हें किसी के जवाब का इंतजार नहीं, किसी के बदलते मिजाज का डर नहीं और किसी को अपनी अहमियत समझाने की मजबूरी नहीं.

_ सुबह उठो, अपना बैग उठाओ और उस रास्ते पर निकल पड़ो, जहां तुम्हारा दिल जाना चाहता है.

_ कभी पहाड़ों में खो जाओ, कभी किसी अनजान गांव की गलियों में घूमो, कभी नदी किनारे बैठकर खुद से बातें करो.

_ दुनिया को अपनी आंखों से देखो, न कि किसी एक इंसान की नजरों से.

_ क्योंकि एक दिन उम्र का यह सफर भी पीछे छूट जाएगा.

_ तब शायद तुम्हें इस बात का अफसोस नहीं होगा कि कौन तुम्हारे साथ नहीं चला, बल्कि इस बात का होगा कि तुम किसी के इंतजार में खुद कितना कम जिए.

_ इसलिए किसी को अपनी जिंदगी से बांधकर मत रखो और खुद भी किसी की बेरुखी की जंजीरों में मत बंधो.

_ जिसे जाना है, उसे जाने दो- तुम्हें अभी बहुत दूर जाना है.

_ याद रखना, मुसाफिर की सबसे बड़ी हार रास्ते में अकेला रह जाना नहीं है.

_ उसकी सबसे बड़ी हार है, किसी के साथ छूट जाने के डर से अपनी मंजिल तक पहुंचने का सफर ही छोड़ देना.!!

– Travel Point

खिड़की के बाहर एक पुराना पेड़ था.

_ उसकी कुछ शाखाएँ सूख चुकी थीं, कुछ पर नए पत्ते आ गए थे.

_ वह देर तक उसे देखता रहा और सोचता रहा कि शायद ज़िंदगी भी इसी पेड़ की तरह होती है.

_ कुछ चीज़ें हमारे साथ बहुत दूर तक चलती हैं, फिर अचानक एक दिन हमसे अलग हो जाती हैं.

_ हम उन्हें रोकना चाहते हैं, उनके लौट आने की उम्मीद करते हैं, कभी बीते हुए दिनों में जाकर उन्हें ढूँढ़ते हैं, तो कभी आने वाले कल में उनके वापस मिलने के सपने देखते हैं.

_ लेकिन वक़्त किसी के लिए नहीं ठहरता, और न ही हर बिछड़ी हुई चीज़ दोबारा हमारी ज़िंदगी में लौटती है.

_ फिर उसने सोचा, आखिर कब तक वह उन दरवाज़ों के सामने खड़ा रहेगा, जिनके पीछे से कोई आवाज़ नहीं आती ?

_ कब तक उन लोगों के लिए अपने भीतर जगह बचाकर रखेगा, जिन्होंने कभी पलटकर यह भी नहीं पूछा कि वह कैसा है ?

_ कब तक उन ख़्वाबों को सीने से लगाए रखेगा, जिनकी नींव अब कहीं बाकी नहीं रही ?

_ अजीब बात है, हम जानते हैं कि कुछ चीज़ें अब हमारी नहीं रहीं, फिर भी उन्हें छोड़ने से डरते हैं.

_ शायद इसलिए नहीं कि उनके बिना जी नहीं पाएँगे, बल्कि इसलिए कि उनके साथ जीने की आदत पड़ चुकी होती है.

_ उसने खिड़की बंद कर दी.

_ बाहर पेड़ अब भी वहीं था, लेकिन उसे पहली बार महसूस हुआ कि हर गिरते पत्ते को देखकर उदास होना ज़रूरी नहीं, हर गुज़रते इंसान को रोकना ज़रूरी नहीं और हर अधूरी कहानी को अंत तक पहुँचाना भी ज़रूरी नहीं.

_ कुछ चीज़ों का हमारी ज़िंदगी से चले जाना ही उनका आख़िरी सच होता है.

_ तुम चाहो भी तो बीते हुए कल को आज में नहीं बदल सकते.

_ इसलिए अपने हिस्से की ज़िंदगी उन चीज़ों के इंतज़ार में मत गुज़ारो, जो अब तुम्हारे हिस्से में नहीं हैं.

_ जो चला गया, उसे जाने दो… जो बदल गया, उसे बदल जाने दो.

_ हर बार किसी चीज़ को खोना तुम्हारी हार नहीं होती.

_ कभी-कभी छोड़ देना ही ख़ुद को बचा लेने का आख़िरी तरीका होता है.!! 🍂💚

– Travel Point

कुछ लड़ाइयाँ ऐसी होती हैं, जिनमें इंसान हारकर भी हार मान नहीं सकता..

..क्योंकि उसके टूटने से किसी को फर्क पड़े या न पड़े, उसकी ज़िम्मेदारियाँ उसका इंतज़ार ज़रूर करती हैं.

_ दिल में दफ़न कितनी ही ख्वाहिशें दम तोड़ देती हैं, कितने ही अरमान वक़्त की धूल में कहीं खो जाते हैं, और कितने ही अपने धीरे-धीरे अजनबी बन जाते हैं.

_ फिर भी ज़िंदगी रुकने का नाम नहीं लेती.

_ सुबह होती है, काम पर जाना होता है, लोगों से मिलना होता है, उनके सवालों का जवाब देना होता है….और इन सबके बीच अपने भीतर चल रहे तूफ़ान को चुपचाप संभालना होता है.

_ कभी आईने के सामने खड़े होकर ख़ुद को देखना….चेहरा वही रहता है, मगर आँखों में छिपी कहानी हर गुज़रते दिन के साथ बदल जाती है.

_ जिन आँखों में कभी बेफिक्र सपने चमकते थे, आज उन्हीं में अधूरी ख्वाहिशों का बोझ है.

_ जिन होंठों पर कभी दिल से हँसी आती थी, आज वही मुस्कान कई बार सिर्फ़ दूसरों को यक़ीन दिलाने के लिए होती है कि हम ठीक हैं.

_ कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें किसी से कहने का मन नहीं करता, और कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में ढालने बैठो तो आँखें सब कुछ बयां कर देती हैं.

_ हम भी अजीब दौर से गुज़र रहे हैं….अपने ही भीतर ख़ुद को ढूँढ़ते हैं, अपनी ही ख़ामोशी में जवाब तलाशते हैं और हर बार टूटने के बाद अपने टुकड़ों को ख़ुद ही समेट लेते हैं.

_ किसी से शिकायत करना छोड़ दिया है, हर बात पर सफ़ाई देना छोड़ दिया है, और अब हर किसी को अपनी तकलीफ़ समझाने की कोशिश भी नहीं करते.

_ बस इतना सीख लिया है कि हर दर्द को दुनिया के सामने रखना ज़रूरी नहीं, कुछ ज़ख्मों को वक़्त के हवाले करके भी आगे बढ़ना पड़ता है.

_ शायद हमारी असली बहादुरी यही है कि ज़िंदगी ने हमसे बहुत कुछ छीन लिया, फिर भी हमने ख़ुद से उम्मीद करना नहीं छोड़ा.

_ आज भी अच्छे कपड़े पहनते हैं, ख़ुद को सँवारते हैं, मुस्कुराते हैं और अपने अधूरे सपनों की तरफ़ एक क़दम बढ़ा देते हैं.

_ क्योंकि कहीं न कहीं दिल के किसी कोने में अब भी एक उम्मीद ज़िंदा है कि एक दिन ये मुश्किल वक़्त भी गुज़र जाएगा..

..और जिस सुकून को हम इतने दिनों से दूसरों की भीड़ में, रिश्तों की उलझनों में और अपनी तन्हाई में तलाश रहे हैं, शायद एक दिन वही सुकून हमें अपने ही भीतर मिल जाएगा.!!

– Travel Point

बदलाव तकलीफ़ देता है, लेकिन ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है.

_ जब हम कुछ नया करने निकलते हैं, तो सबसे पहले हमारा मन ही हमारा रास्ता रोकता है.

_ पुरानी यादें, पुराने लोग और पुरानी आदतें हमें पीछे खींचती हैं.

_ दिल कहता है कि सब कुछ पहले जैसा ही रहने दो, लेकिन ज़िंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती.

_ कभी आगे बढ़ने के लिए कुछ लोगों को छोड़ना पड़ता है, कभी अपनी आदतों को बदलना पड़ता है और कभी खुद को नए सिरे से खड़ा करना पड़ता है.

_ शुरुआत में हर कदम मुश्किल लगता है, लेकिन धीरे-धीरे वही मुश्किलें हमारी ताकत बन जाती हैं.

_ कई बार बदलाव के दौरान ऐसा लगता है जैसे हम सब कुछ खो रहे हैं.

_ जिन चीज़ों में कभी खुशी मिलती थी, उनसे मन हटने लगता है और जिन रास्तों पर चलने की आदत थी, वे अब अपने नहीं लगते.

_ लेकिन यही वह समय होता है, जब इंसान अपने अंदर छिपी ताकत को पहचानता है.

_ जब साथ देने वाला कोई नहीं होता, तब हम खुद का सहारा बनना सीखते हैं.

_ जब रास्ता साफ़ नहीं दिखता, तब भी एक कदम आगे बढ़ाना सीखते हैं.

_ और एक दिन पीछे मुड़कर देखते हैं, तो समझ आता है कि जिस मुश्किल दौर से हम डर रहे थे, उसी ने हमें पहले से ज़्यादा मज़बूत बना दिया.

_ याद रखना, एक जगह रुके रहने से रास्ते नहीं बदलते और डर के कारण कदम रोक देने से मंज़िल नहीं मिलती.

_ बदलाव से डरो मत, क्योंकि हो सकता है कि आज जिस बदलाव से तुम्हें तकलीफ़ हो रही है, वही कल तुम्हारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ बन जाए.!!

– Travel Point

जीवन में कुछ रिश्तों के मायने वक्त के साथ इतने बदल जाते हैं कि कल तक जो काम हमें खुशी देता था, आज वही हमें अपना नुकसान लगने लगता है.

_ कभी किसी की परेशानी देखकर हम बिना कुछ सोचे उसकी मदद कर देते हैं, लेकिन जब भविष्य में उसी इंसान से हमारे रिश्ते बिगड़ते हैं, तो अचानक हमें अपनी हर मदद याद आने लगती है.

_ मन में सवाल उठता है कि मैंने उसके लिए इतना कुछ किया और बदले में मुझे क्या मिला ?

_ फिर हम अपनी अच्छाइयों का हिसाब लेकर बैठ जाते हैं और उसे अपने एहसान गिनवाने लगते हैं.

_ लेकिन कभी ठहरकर खुद से पूछिए, जिस दिन आपने उसकी मदद की थी, उस दिन आपकी नीयत क्या थी ?

_ क्या आप सच में उसकी परेशानी कम करना चाहते थे या मन में यह उम्मीद भी थी कि एक दिन वह आपके इस एहसान का बदला जरूर चुकाएगा ?

_ अगर आपने दिल से मदद की थी, तो आज उसके बदल जाने से आपकी नीयत कैसे बदल गई ?

_ हो सकता है उसने आपके साथ गलत किया हो, आपकी कद्र न की हो या आपकी उम्मीदें तोड़ दी हों.

_ आपको उससे दूरी बनाने का पूरा हक है, लेकिन अपनी पुरानी मदद को हथियार बनाकर उसे नीचा दिखाना क्या सही है ?

_ कई बार हमें सामने वाले की गलती से ज्यादा इस बात का दुख होता है कि उसने हमारी अच्छाई की कीमत नहीं समझी.

_ हम चाहते हैं कि वह हमेशा याद रखे कि बुरे वक्त में हमने उसका साथ दिया था.

_ जब ऐसा नहीं होता, तो हमारा अहंकार हमें अपनी ही मदद का हिसाब मांगने पर मजबूर कर देता है.

_ यहीं हमें अपनी नीयत पर विचार करने की जरूरत होती है.

_ याद रखिए, किसी की मदद करना और उसे अपने एहसानों के बोझ तले दबाकर रखना, दोनों अलग बातें हैं.

_ अगर किसी की मदद करके आपको खुशी मिली थी, तो उस खुशी को उसके आज के व्यवहार के कारण नफरत में मत बदलिए.

_ रिश्ते टूट सकते हैं, लोग बदल सकते हैं और हर मदद का बदला भी नहीं मिलता.

_ लेकिन किसी के बदल जाने पर अपनी अच्छाई से ही नफरत करने लगना, आखिर किस बात की समझदारी है ?

_ आखिर में सवाल यह नहीं है कि आपने किसके लिए कितना किया और बदले में आपको क्या मिला.

_ सवाल यह है कि किसी के बदल जाने के बाद भी क्या आप अपने भीतर की अच्छाई को बचाकर रख पाए ?

– Travel Point

इंसान के भीतर एक पूरी दुनिया छिपी होती है,

_ कभी गुस्सा उसे बेचैन कर देता है, कभी डर उसके कदम रोक देता है और कभी बिना किसी वजह के मन उदास हो जाता है.

_ बाहर से सब कुछ ठीक दिखता है, लेकिन भीतर एक ऐसी लड़ाई चल रही होती है, जिसके बारे में किसी को पता नहीं चलता.

_ हम अपने गुस्से को दबाते हैं, अपने डर को छिपाते हैं और अपनी कमजोरियों से भागते रहते हैं.

_ लेकिन क्या कभी सोचा है कि जिस चीज से हम भाग रहे हैं, कहीं वही हमारे जीवन को चला तो नहीं रही ?

_ हम दुनिया से तो बहुत कुछ छिपा सकते हैं, लेकिन अपने आप से कब तक छिपेंगे ?

_ बदलाव की शुरुआत तब होती है, जब हम खुद को सच में देखना शुरू करते हैं.

_ गुस्सा आए तो समझें कि ऐसा क्यों हुआ.

_ डर लगे तो जानें कि हमें किस बात का डर है.

_ किसी से जलन हो तो खुद से पूछें कि आखिर हम अपने जीवन में क्या चाहते हैं.

_ खुद से ऐसे सवाल पूछना आसान नहीं है, लेकिन यहीं से एक नई राह खुलती है.

_ याद रखिए, मन में गुस्सा आना गलत नहीं, लेकिन गुस्से में किसी को चोट न पहुँचाना हमारे हाथ में है.

_ डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन डर के कारण हर बार पीछे हट जाना जरूरी नहीं.

_ मन में हजारों विचार उठ सकते हैं, लेकिन हमें हर विचार के पीछे चलने की जरूरत नहीं है.

_ हम अपने मन की हर बात मानने के लिए मजबूर नहीं हैं.

_ इस रास्ते पर कई बार हम हारेंगे.

_ पुरानी आदतें लौटेंगी, गुस्सा फिर आएगा और हम वही गलतियाँ दोहराएँगे, जिन्हें छोड़ने का फैसला कर चुके होंगे.

_ लेकिन हर बार अपनी गलती पहचानकर खुद को सुधारने की कोशिश करना ही आगे बढ़ना है.

_ जरूरी नहीं कि हम एक दिन में बदल जाएँ, जरूरी यह है कि हम बदलने की कोशिश करना न छोड़ें.

_ सबसे बड़ा रोमांच खुद को जीतने में है.

_ जब हम अपने डर के बावजूद आगे बढ़ते हैं, गुस्से के बावजूद शांत रहते हैं और अहंकार के बजाय सच्चाई को चुनते हैं, तब हम धीरे-धीरे अपने पुराने रूप से बाहर निकलने लगते हैं.

_ आखिर जिंदगी का असली बदलाव दुनिया को बदलने से नहीं, खुद को समझने और बेहतर बनाने से शुरू होता है.

– Travel Point

किसी के प्यार में खुद को इतना मत मिटा देना कि एक दिन खुद को ही ढूँढ़ना पड़े.

_ जो तुम्हारी कद्र नहीं करता, उसके दरवाजे पर अपनी भावनाएँ लेकर बार-बार मत जाना.

_ दिल टूटेगा, रातें बेचैन होंगी, उसकी याद भी सताएगी, लेकिन एक दिन तुम्हें समझ आएगा कि किसी को खोने के डर में तुम खुद को हर दिन खो रहे थे.

_ उस दिन अपने आँसू पोंछना और पीछे मुड़कर मत देखना.

_ जो तुम्हारा होकर भी तुम्हारा नहीं बन सका, उसके लिए अपनी जिंदगी क्यों रोकना ?

_ उठो, खुद को संभालो और अपनी कहानी का ऐसा नया अध्याय लिखो कि कल तुम्हें किसी के लौटने की नहीं, अपने बदल जाने की खुशी हो.

_ एक दिन वही दिल, जो किसी के लिए रोता था, फिर से मुस्कुराना सीख जाएगा.

_ जिन रास्तों पर कभी उसकी यादें तुम्हें रोकती थीं, उन्हीं रास्तों पर तुम नई मंजिलें तलाशोगे.

_ जिंदगी बहुत खूबसूरत है, इसे किसी एक इंसान की बेरुखी के नाम मत कर देना.

_ क्योंकि असली जीत किसी को वापस पाना नहीं, बल्कि खुद को दोबारा पा लेना है.!!

– Travel Point

Rahul Kumar Jha

मैंने जीवन में एक आदत बहुत देर से छोड़ी लोगों को देखकर उनके बारे में निर्णय बना लेना.

_ पहले मुझे लगता था कि जो दिखाई देता है, वही सच है.

_ जो व्यक्ति बार-बार एक ही रास्ते पर जाता है, वह उसी मंज़िल का मुसाफ़िर होगा.

_ जो लोगों की नज़रों में गलत है, वह सचमुच गलत ही होगा.

_ फिर जीवन ने मुझे सिखाया कि आँखें दृश्य देखती हैं, लेकिन सत्य नहीं._ सत्य अक्सर वहाँ रहता है, जहाँ हमारी नज़र पहुँचती ही नहीं.

_ तब से मैंने किसी भी इंसान पर अंतिम निर्णय देने से पहले अपने भीतर एक प्रश्न जगाना शुरू कर दिया…”क्या पता मैं गलत हूँ ?”

_ क्या पता जिस व्यक्ति को मैं पापी समझ रहा हूँ, वह किसी और के पापों का बोझ अपने सिर पर लेकर चल रहा हो.

_ क्या पता जिसे मैं स्वार्थी समझ रहा हूँ, उसने अपना सबसे सुंदर हिस्सा किसी अनजान इंसान की ज़िंदगी सँवारने में खर्च कर दिया हो.

_ क्या पता जिसे मैं गिरा हुआ मान रहा हूँ, वह किसी और को गिरने से बचाने के लिए स्वयं गिरा हुआ दिखाई देना स्वीकार कर चुका हो.

_ जीवन ने मुझे यह भी समझाया कि सबसे गहरे त्याग कभी मंचों पर नहीं होते.

_ उन पर तालियाँ नहीं बजतीं, उनके लिए समाचार नहीं लिखे जाते, उनके सम्मान में स्मारक नहीं बनते.

_ वे त्याग चुपचाप होते हैं…

_ इतने चुपचाप कि दुनिया उन्हें गलत समझ बैठती है.

_ हम अक्सर किसी इंसान की पूरी कहानी उसके जीवन के एक दृश्य से लिख देते हैं.

_ हम उसके संघर्ष नहीं देखते, केवल उसका परिणाम देखते हैं._ हम उसके घाव नहीं देखते, केवल उसका व्यवहार देखते हैं.

_ हम उसकी नीयत नहीं पढ़ते, केवल उसके कदमों का रास्ता देखते हैं.

_ और यहीं हम सबसे बड़ी भूल कर बैठते हैं.

_ क्योंकि संसार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी प्रतिष्ठा बचाने के बजाय किसी और की इज़्ज़त बचा लेते हैं.

_ वे सफ़ाई दे सकते हैं, लेकिन नहीं देते.

_ वे सच बता सकते हैं, लेकिन चुप रहते हैं.

_ वे सम्मान पा सकते हैं, लेकिन किसी और का भविष्य उनसे अधिक मूल्यवान होता है.

_ ऐसे लोग दुनिया की नज़रों में हार जाते हैं, लेकिन ईश्वर की दृष्टि में वही सबसे ऊँचे खड़े होते हैं.

_ अब मैं समझ चुका हूँ कि किसी इंसान की महानता इस बात से नहीं मापी जा सकती कि लोग उसके बारे में क्या कहते हैं.

_ महानता तो वहाँ जन्म लेती है, जहाँ कोई व्यक्ति सही काम करता रहता है, भले ही पूरी दुनिया उसे गलत समझती रहे.

_ इसलिए अब मैं किसी पर उँगली उठाने से पहले अपने भीतर झाँकता हूँ.

_ क्योंकि मैंने सीखा है कि निर्णय देना आसान है, समझना कठिन.

_ आरोप लगाना सरल है, करुणा रखना दुर्लभ.

_ और शायद मनुष्य की सबसे बड़ी परिपक्वता यही है कि वह हर चेहरे के पीछे छिपी उस अनकही कहानी की संभावना को कभी मरने न दे.

_ हो सकता है जिसे मैं आज दोष दे रहा हूँ, वही कल मेरी इंसानियत का सबसे बड़ा पाठ निकले.

_ इसलिए अब मैं लोगों को उनके बारे में सुनी हुई बातों से नहीं, बल्कि अपनी करुणा की आँखों से देखने की कोशिश करता हूँ.

_ क्योंकि जीवन ने मुझे एक ऐसा सत्य सिखाया है जो शायद हर युग में अमर रहेगा…

_ हर दिखाई देने वाला सत्य, पूरा सत्य नहीं होता.

_ और कई बार…

_ सबसे पवित्र आत्माएँ वही होती हैं, जिन्हें दुनिया सबसे पहले अपवित्र घोषित कर देती है.

Rahul Kumar Jha

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“अब कुछ समझ नहीं आता”
_ अब कुछ समझ नहीं आता, जहाँ भी जाऊँ, चैन नहीं आता.
_ जिस मंज़िल की चाह थी दिल में, वहीं पहुँच कर सुकून नहीं आता.
_ पल बीत रहे हैं सैकंडों की तरह, हर रोज़ एक सा लगता है अब हर पहर.
_ कौन अपना है, कौन पराया, इस सवाल का जवाब कभी नहीं आया.
_ रिश्ते पुराने हो गए हैं अब, जैसे किसी पुराने बर्तन पर जंग लग गई हो सब.
_ अब उन रिश्तों को संभालना मुश्किल है, लड़ने की हिम्मत भी कम हो गई है.
_ कभी बच्चों को हँसते-खिलखिलाते देखा, अब वही बच्चे हमें चुप-चुप सा देख रहे हैं.
_ हमने उन्हें बड़ा किया प्यार से, अब वो हमें बूढ़ा बना रहे हैं वक़्त के भार से.
_ कौन सही है, कौन गलत – ये अब हालात तय करते हैं,
_ सच भी कभी-कभी झूठ लगने लगता है, जब अपनी सोच से परे कुछ होता है.
_ “बस अब मन थक गया है सोचते-सोचते, थोड़ी राहत चाहिए, थोड़ी ख़ुशी… थोड़ी शांति”


Krishna Chaudhary

कभी एक दिन हम सभी एक एक करके अचानक ग़ायब हो जाएँगे.

_ बहुत दूर, इतनी दूर कि यहाँ का कोई निशान भी साथ न जाएगा.

_ कोई न जानेगा, और किसी को जानना भी नहीं चाहिए कि कहाँ गए !

_ हम उसी अजनबीपन में खो जायेंगे, और लोग सिर्फ़ सोचते रह जाएँगे कि हम थे भी, या बस एक भ्रम.

_ मैं वहाँ जाना पसंद करूँगा.. जहाँ मुझे कोई नाम से न पुकारे, जहाँ मेरा चेहरा किसी के लिए पहचाना न हो.

_ जहाँ मेरी हर हरकत किसी के लिए मायने न रखे.

_ मैं ऐसे लोक में जाऊँगा, जहाँ खरीदे हुए फूल किसी कोने में मुरझा कर शहर की उदासी में दफ़्न न हों.

_ जहाँ आकाश ही न हो, और प्रेम नाम की चीज़ सिर्फ़ डर का दूसरा नाम हो.

_ मैं उस जगह रहूँगा.. जहाँ मेरा दिल कोई पहेली न बने, जो जीते-जी बुझ जाए और बुझकर भी जीता रहे.

_ वहाँ मैं जीवित रहूँगा, पर अपने दिमाग़ की उलझनों में नहीं.

_ वहाँ मैं नाचूँगा.. जैसे मुझे आता ही न हो, लेकिन पूरे विश्वास के साथ.

_ वहाँ कोई आँखें क्षितिज पर मेरा इंतज़ार न करेंगी, और न ही अनंत का वादा करेंगी, क्योंकि मुझे मालूम है.. वे वादे झूठे हैं.

_ वहाँ कोई पतझड़ की हवा फिर घावों के ऊपर से गुज़रेगी नहीं, घाव जिन्हें मैंने बरसों से यूँ ही अनदेखा छोड़ रखा है.

_ मैं जो चाहूँगा, वही करूँगा.

_ अकेलापन ही मेरा साथी होगा, और वही काफी होगा.

_ यादें मैं बनाऊँगा, पर उन्हें सिर्फ़ मेरी आत्मा सँजोएगी.

_ अजनबियों से मिलूँगा और उन्हें अपने सबसे गहरे डर, सबसे छिपे हुए राज़ बिना झिझक कह दूँगा.

_ हर जगह से विदा लेते हुए, अपने हिस्से का एक टुकड़ा वहीं छोड़ता जाऊँगा.

_ धीरे-धीरे मैं अपने चेहरे को पहचानना सीखूँगा, अपनी हँसी की आवाज़ को पहचानूँगा.

_ तन्हाई चादर होगी और शांति घर.

_ मैं खुद को उन तमाम अपराधों से माफ़ करना सीखूँगा, जो मैंने खुद किए और फिर, मैं इस दुनिया और अपने अतीत से मुक्त हो जाऊँगा.

_ दिन उतने बुरे नहीं लगेंगे, जितने अब लगते हैं. _ मैं खो जाऊँगा, क्योंकि खोना ही मुझे खुद तक पहुँचाएगा.

_ और शायद उसी वक़्त मैं फूलों-सा महकूँगा, उन फूलों-सा, जो शोक में सड़कर भी जीवन को नया अर्थ देते हैं.

_ मैं टूटे दिलों से नया आशियाना बनाऊँगा और कहानियाँ बेचकर अपनी सच्चाई को पहचानूँगा.!!

मासूम लोग ज़िंदगी से बहुत ज़्यादा नहीं माँगते.

_ उन्हें बस एक ऐसा घर चाहिए, जहाँ सुबह की शुरुआत हँसी से हो.

_ जहाँ मुस्कुराहटें हों, फूलों खुशबू हो, न कि टूटे रिश्तों की चुभन और बिखरे बर्तनों की आवाज़.

_ उन्हें बस इतना चाहिए कि वे अपने काम पर खुशी से जाएँ.

_ जहाँ उन्हें सिर्फ़ काम निकालने का साधन न समझा जाए, बल्कि एक इंसान की तरह देखा जाए.

_ जहाँ उनकी बात इसलिए सुनी जाए कि उन्हें समझा जा सके, न कि उन्हें ग़लत साबित करने के लिए.

_ उन्हें ऐसी हवा भी चाहिए जिसमें टारगेट, डेडलाइन और चिंता की घुटन न हो, बल्कि बारिश के बाद भीगी मिट्टी की खुशबू हो, और बालकनी में खड़े होकर चाय पीते हुए गहरी साँस लेने की आज़ादी हो.

_ उन्हें इतना समय चाहिए कि किसी पार्क की बेंच पर बैठकर अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ सकें.

_ ऐसा कोना चाहिए जहाँ वे खुलकर गा सकें, नाच सकें, चित्र बना सकें, अपनी लिखी हुई बातें ज़ोर से पढ़ सकें, बिना इस डर के कि कोई उनका मज़ाक ना उड़ाए.

_ वे अपने माँ-बाप के अकेलेपन, दुख और टूटन को विरासत में नहीं पाना चाहते.

_ क्योंकि अकेलापन भी कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चला जाता है.

_ फिर इंसान लोगों के बीच रहकर भी अकेला रह जाता है.

_ रातों को जागता है, ख़ाली बिस्तर पर करवटें बदलता है और सोचता रहता है- “आख़िर मेरे साथ ही क्यों ?”

_ कभी फ़ोन की स्क्रीन पर अनजान लोगों में अपनापन ढूँढ़ता है, सिर्फ़ इसलिए कि कुछ पल के लिए अकेलापन कम हो जाए.

_ कोई भी ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहता.

_ लोग बस ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ बच्चों के चेहरों पर मिट्टी खेलते-खेलते लगे.

_ वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय डर के साथ विदा न करें.

_ ख़ासकर बेटियों के लिए हर पल मन में उठने वाले डर और बुरे ख़यालों के साथ न जिएँ._ हर इंसान चाहता है कि उसकी ज़िंदगी का एक छोटा-सा हिस्सा सिर्फ़ उसका अपना हो.

_ कुछ सपने, कुछ पल, कुछ यादें- जिन्हें कोई उससे छीन न सके._ वे बस कभी-कभी रात भर आसमान के तारों को देखते रहना चाहते हैं.

_ बिना किसी जल्दी के.

_ बिना किसी चिंता के.

_ वे चाहते हैं कि नींद उन्हें लेटते ही आजाये, न कि अपने ही मन के शोर के बीच जागते रहें.!!

मुझे फैसले लेने में हमेशा डर लगता है.

_ इसलिए नहीं कि मुझे अपने फैसलों पर भरोसा नहीं होता, बल्कि इसलिए कि हर फैसले के साथ एक दूसरी ज़िंदगी हमेशा के लिए छूट जाती है.

_ जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, दाएँ जाओ या बाएँ तो मेरा मन बस इतना चाहता है कि जाने से पहले दोनों रास्तों पर थोड़ा-सा आगे तक देख सकूँ.

– बस एक झलक.

_ इतना पता चल जाए कि अगर दाएँ गया तो क्या खोऊँगा, क्या पाऊँगा… और अगर बाएँ गया तो मेरी कहानी किस तरह बदल जाएगी.

– मैं भविष्य जानना नहीं चाहता.

_ मैं बस उन ज़िंदगियों को देखना चाहता हूँ, जो मेरे एक छोटे-से फैसले की वजह से कभी जी ही नहीं गईं.

_ कभी सोचता हूँ अगर उस दिन मैंने हाँ कह दी होती तो ?

_ क्या आज मेरी ज़िंदगी सच में अलग होती ?

_ अगर उस दिन मैंने चुप रहने के बजाय अपने लिए आवाज़ उठाई होती तो ?

_ क्या कुछ बदल जाता ?

_ अगर वो नौकरी चुन ली होती, वो शहर चुन लिया होता, वो इंसान चुन लिया होता, वो रिश्ता बचा लिया होता, या फिर उसे उसी दिन छोड़ दिया होता… तो आज मैं कौन होता ?

_ क्या मैं ज़्यादा खुश होता ?

_ या बस अलग तरह से परेशान ?

_ कभी-कभी मन करता है कि ज़िंदगी के किसी कोने में एक छोटा-सा दरवाज़ा हो.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे खोलकर मैं अपनी दूसरी ज़िंदगियों में झाँक सकूँ.

_ एक कमरे में वो मैं हो जिसने “हाँ” कहा था.

_ दूसरे कमरे में वो, जिसने “नहीं”,

_ कहीं वो मैं हो जो किसी और शहर में रहता है.

_ कहीं वो जो किसी और के साथ बूढ़ा हो रहा है.

_ कहीं वो जिसने वो जोखिम उठा लिया था जिससे मैं डर गया था.

_ और शायद किसी कमरे में वो भी हो जिसने मेरी तरह ही कोई फैसला लिया था, लेकिन आज भी सोचता है, काश, मैंने दूसरा रास्ता चुना होता.

_ शायद यही सबसे अजीब बात है इंसान होने की.

_ हम जिस ज़िंदगी को जी रहे होते हैं, उसके साथ-साथ उन सारी ज़िंदगियों को भी अपने भीतर कहीं चुपचाप ढोते रहते हैं, जिन्हें हम जी सकते थे.

– लेकिन फिर एक बात समझ आती है.

_ शायद हर रास्ते का अंत हमें पहले से दिख जाए, तो चुनाव का मतलब ही खत्म हो जाए.

_ क्योंकि ज़िंदगी शायद सही रास्ता चुनने का नाम नहीं है.

_ ज़िंदगी उस रास्ते को अपना बनाने का नाम है जिसे हमने चुन लिया.

_ लेकिन शायद उन्होंने जो बात हमें नहीं बताई, वो ये है कि इंसान उम्र भर कभी-कभी पीछे मुड़कर उन दोनों रास्तों को देखता रहता है.

_ सोचता है अगर मैं उस तरफ चला होता तो ?

_ और शायद इस सवाल का कोई जवाब कभी नहीं मिलेगा, शायद मिलना भी नहीं चाहिए.

_ क्योंकि अगर हमें हर “क्या होता अगर” का जवाब मिल जाए, तो हम अपनी आज की ज़िंदगी को कभी पूरी तरह जी ही नहीं पाएँगे.

– फिर भी…

_ काश, ज़िंदगी मुझे सिर्फ पाँच मिनट देती.

_ बस पाँच मिनट.

_ मैं अपने उन सारे रूपों से मिलना चाहता, जो मैं हो सकता था.

_ मैं उनसे पूछना चाहता कि क्या वे मुझसे ज़्यादा खुश हैं.

_ क्या उन्हें भी कभी मेरी ज़िंदगी की याद आती है ?

_ क्या उन्हें भी कभी लगता है, कि काश, मैंने वो दूसरा रास्ता चुना होता… और फिर शायद मैं वापस लौट आता.

_ अपने इसी जीवन में.

_ उसी इंसान के पास.

_ उसी अधूरी कहानी के बीच.

– और इस बार शायद मुझे अपने फैसलों से शिकायत न होती.

_ क्योंकि मैंने देख लिया होता कि दूसरी ज़िंदगी भी आखिर एक ज़िंदगी ही थी, उसमें भी कुछ खुशियाँ थीं, कुछ पछतावे थे, कुछ लोग मिले थे, कुछ लोग छूटे थे… और कुछ सवाल वहाँ भी अनुत्तरित थे.

_ तब शायद मैं समझ पाता कि हमें दूसरी ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं होती.

_ हमें बस अपनी इस ज़िंदगी को देखकर ये यक़ीन करने की ज़रूरत होती है कि जो नहीं हुआ, वो ज़रूरी नहीं कि बेहतर होता.

_ और जो हो गया है…शायद उसे बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी अब हमारी है.

_ इसलिए आज भी जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, मेरा मन उस पुराने दरवाज़े को ढूँढता है.

_ लेकिन अब मैं शायद बिना खोले ही आगे बढ़ जाऊँगा.

_ क्योंकि हर रास्ते के आगे क्या है, ये जान लेना ज़िंदगी नहीं है.

_ अनजान रास्ते पर अपने कदमों से एक नयी कहानी लिख देना, शायद यही ज़िंदगी है.

‘अपना महत्व समझो’

_ आप भी अपने से पूछो आप sentimental fool क्यों हो ?

‘अपना महत्व समझो’

_ मेरी हमेशा यही कोशिश होती है कि किसी से भी कोई संजीदा बात शुरू करने से पहले मैं सिर्फ़ एक चीज़ टटोलता हूँ-बौद्धिक ह्युमिलिटी.

_ क्या सामने वाले में इतनी ईमानदारी है कि वो मान सके कि उससे भी चूक हो सकती है ?

– अगर हाँ,

_ तो उस बातचीत में घंटों बहाए जा सकते हैं, क्योंकि वहाँ दो इंसान बातचीत कर रहे होते हैं.

_ लेकिन अगर सामने एक बंद दिमाग और अकड़ का पुतला खड़ा है, तो मैं आगे बढ़ जाता हूँ.

_ क्योंकि जिस दीवार पर कोई खिड़की ही न हो, उस पर बार-बार सिर पटक कर सिर्फ़ अपना माथा फोड़ा जा सकता है, रोशनी अंदर नहीं लाई जा सकती.

_ खामोशी ही ऐसे मौकों पर सबसे धारदार जवाब बन जाती है.!!

_ मैं साफ़-स्वच्छ व्यवहार करता हूँ, किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता.

_ मेरा यह विश्वास है कि दूसरे का बुरा करने वालों का अपना ही बुरा होता है और यह भी, कि बुद्धिहीनता से आप कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते.

_ वस्तुतः दूसरा कोई हमारा नुकसान इतना नहीं करता जितना नुकसान हम खुद अपना करते हैं.

– जब कोई तकलीफ़ में हो, उनकी आँखों से आँसू निकलते हैं और मैं चाहकर भी उस तकलीफ़ को कम नहीं कर पाता, सिर्फ़ दिलासा देने के अलावा मेरे पास कुछ नहीं होता.

_ तब शायद उनकी तकलीफ़ से कहीं ज़्यादा दर्द मुझे होता है,

_ क्योंकि उन्हें रोते हुए देखना मेरे लिए सबसे मुश्किल है, और उनके दर्द के सामने अपनी बेबसी से ज़्यादा तकलीफ़ किसी चीज़ में नहीं होती.!!

Quotes by एंथनी हॉपकिंस Anthony Hopkins

“उन लोगों को छोड़ दो जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं” और इसके पीछे कारण ये है:

_ उन्हें छोड़ना जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं — शायद यह सबसे कठिन, और सबसे ज़रूरी काम होगा जो तुम कभी करोगे.

_ उन लोगों के साथ कठिन बातचीत करना बंद करो जो बदलना नहीं चाहते.

_ उन लोगों के लिए बार-बार हाज़िर होना बंद करो जिन्हें तुम्हारी मौजूदगी में कोई दिलचस्पी नहीं.

_ खुद को थकाना बंद करो उन लोगों से प्यार पाने के लिए, जो उसे देने में ही सक्षम नहीं हैं.

_ जब तुम उठने का फ़ैसला करते हो — खुशी, मकसद और जुनून से भरी ज़िंदगी जीने का — तो हर कोई तुम्हारे साथ नहीं उठेगा.

_ यह तुम्हारी गलती नहीं है, और इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि तुम्हें खुद को छोटा करना होगा ताकि वे सहज महसूस कर सकें.

_ अगर कोई तुम्हें नज़रअंदाज़ करता है, अपमान करता है, या भूल जाता है — तो उन्हें अपना समय और ऊर्जा देना बंद करो.

_ तुम सबके लिए नहीं हो और सब तुम्हारे लिए नहीं हैं.

_ यही असली जुड़ाव को इतना दुर्लभ और कीमती बनाता है.

_ जितना ज़्यादा तुम उस इंसान से प्यार पाने के लिए लड़ते हो जो तुम्हें प्यार नहीं कर सकता, उतना ही तुम उन लोगों से वक्त छीन रहे हो — जो कर सकते हैं, जो करेंगे.

_ कुछ लोग तुम्हें सिर्फ एक तकिया बनाना चाहते हैं, एक बैकअप विकल्प, या एक भावनात्मक मरम्मत करने वाला.

_ जितना ज़्यादा तुम खुद को उस भूमिका में फिट करने की कोशिश करते हो, उतना ही तुम उन रिश्तों और उस समुदाय से दूर होते हो जो सच में तुम्हारे लिए बना है.

_ अगर तुम कॉल करना बंद कर दो — शायद कोई वापस कॉल नहीं करेगा.

_ अगर तुम कोशिश करना बंद कर दो — शायद रिश्ता अपने आप फीका पड़ जाएगा.

_ अगर तुम मैसेज भेजना बंद कर दो — शायद फ़ोन खामोश ही रहेगा.

_ यह अस्वीकृति नहीं है — यह स्पष्टता है.

_ इसका मतलब है कि वह जुड़ाव केवल इसलिए ज़िंदा था क्योंकि तुम उसे ज़िंदा रखे हुए थे, अकेले.

_ यह प्यार नहीं है — यह केवल एक आदत है और तुम इससे बेहतर के हकदार हो.

_ तुम्हारा समय और ऊर्जा सबसे कीमती चीजें हैं जो तुम्हारे पास हैं, उन्हें बुद्धिमानी से लगाओ.

_ तुम उन्हें जहाँ रखते हो, वही तुम्हारी पूरी ज़िंदगी की दिशा तय करेगा.

_ और जब तुम सच में यह समझ लेते हो — तब तुम्हें यह भी समझ में आने लगता है कि कुछ लोगों या जगहों के आस-पास क्यों तुम्हें घबराहट, थकावट या अदृश्यता महसूस होती है.

_ क्योंकि वे तुम्हारे भीतर की पवित्रता को खींच रहे हैं, तो अपनी ऊर्जा की रक्षा करो.. पूरी ताकत से,

_ अपनी ज़िंदगी को एक पवित्र जगह बना दो.

_ सिर्फ उन्हें अंदर आने दो जो तुम्हारी आत्मा से मेल खाते हैं.

_ तुम यहाँ किसी को ठीक करने, बचाने या खुद को साबित करने नहीं आए हो.

_ तुम यहाँ हो — पूरी तरह जीने के लिए.

_ प्यार देने और पाने के लिए, पूरी तरह.

_ तुम सच्ची दोस्ती के हकदार हो, असली जुड़ाव के, अडिग प्रेम के.

_ और जब तुम उसे चुनते हो — दुनिया बदल जाती है.

_ क्योंकि जो तुम चुनते हो — वही तुम बन जाते हो.

— एंथनी हॉपकिंस

My philosophy is: It’s none of my business what people say of me and think of me. I am what I am, and I do what I do. I expect nothing and accept everything. And it makes life so much easier.

मेरा दर्शन है: लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं और क्या सोचते हैं, इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मैं वही हूँ जो मैं हूँ, और मैं वही करता हूँ जो मैं करता हूँ. मैं किसी से कुछ भी अपेक्षा नहीं करता और सब कुछ स्वीकार करता हूँ और इससे जीवन बहुत आसान हो जाता है.

I don’t want to be anything else other than what I am. I can say that with passion. No regrets.

मैं जो हूँ उसके अलावा कुछ और नहीं बनना चाहता. मैं यह बात पूरे जोश के साथ कह सकता हूँ. कोई पछतावा नहीं.

Living with reality is a very good trick, it gives you tremendous freedom and it changes the structure of the molecules of your soul by living with reality because you don’t expect anything anymore. Which is a weird paradox.

वास्तविकता के साथ जीना एक बहुत अच्छी तरकीब है, यह आपको जबरदस्त आज़ादी देता है और वास्तविकता के साथ जीने से आपकी आत्मा के अणुओं की संरचना बदल जाती है क्योंकि आप अब किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करते. जो एक अजीब विरोधाभास है.

Multiply it by infinity and take it to the depths of forever, and you will still have barely a glimpse of what I’m talking about.

इसे अनंत से गुणा करें और अनंत की गहराई तक ले जाएं, और फिर भी आपको मुश्किल से ही उसकी एक झलक मिलेगी जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं.

Try not to be concerned with it. It’s a spiritual thing. Don’t look for the results, don’t live in the payoff. Live in the moment which is a spiritual principle. Live in the moment and let the results take care of themselves. It’s in the hands of God. The rest is all ego. And I have learned, over the years, it’s got nothing to do with me. As my life is none of my business.

इससे चिंतित न होने का प्रयास करें. यह एक आध्यात्मिक बात है. परिणाम की तलाश न करें, लाभ में न जियें. वर्तमान में जियें जो एक आध्यात्मिक सिद्धांत है. वर्तमान में जियें और परिणामों को स्वयं ही ठीक होने दें. यह ईश्वर के हाथ में है. बाकी सब अहंकार है. और मैंने वर्षों से सीखा है कि इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. क्योंकि मेरा जीवन मेरा कोई काम नहीं है.

Once you accept the fact that there’s nothing to fear, you drill into the primal oil well. I believe when we do things without fear, we can do anything. As long as you don’t worry about the consequences.

एक बार जब आप इस तथ्य को स्वीकार कर लेते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है, तो आप मूल तेल के कुएं में खुदाई कर लेते हैं. मेरा मानना ​​है कि जब हम बिना किसी डर के काम करते हैं, तो हम कुछ भी कर सकते हैं. जब तक आप परिणामों के बारे में चिंता नहीं करते.

I learn poetry, learn text, and that really keeps you alive.

मैं कविता सीखता हूं, पाठ सीखता हूं और यह वास्तव में आपको जीवित रखता है.

I am a bit of a solitude person – a solitary personality. I like being on my own. I don’t have any major friendships or relationships with people.

मैं एकांतप्रिय व्यक्ति हूँ – एकांतप्रिय व्यक्तित्व. मुझे अकेले रहना पसंद है. मेरी लोगों के साथ कोई बड़ी दोस्ती या रिश्ता नहीं है.

I’m very much a loner. I don’t like long relationships with people and I always keep people at a distance.

मैं बहुत अकेला रहता हूँ. मुझे लोगों के साथ लंबे समय तक संबंध रखना पसंद नहीं है और मैं हमेशा लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ.

I love life because what more is there?

मैं जीवन से प्रेम करता हूं, क्योंकि इससे अधिक और क्या चाहिए ?

My life turned out to be beyond my greatest dreams.

मेरा जीवन मेरे महानतम सपनों से भी परे निकला.

I never cling on to hope or certainty. They’re the enemies of peace.

मैं कभी भी आशा या निश्चितता से नहीं चिपकता. वे शांति के दुश्मन हैं.

I’m more and more convinced that life is a dream. What has happened to me is surely a dream.

मैं धीरे-धीरे इस बात पर यकीन करने लगा हूँ कि जीवन एक सपना है. मेरे साथ जो हुआ है, वह निश्चित रूप से एक सपना है.

By giving up ‘the need’ and ‘the want’, things begin to happen for you.

‘आवश्यकता’ और ‘इच्छा’ को त्यागने से, चीजें आपके लिए घटित होने लगती हैं.

Relish everything that’s inside of you, the imperfections, the darkness, the richness and light and everything. And that makes for a full life.

अपने अंदर की हर चीज़ का आनंद लें, खामियाँ, अंधकार, समृद्धि और प्रकाश और सब कुछ. और इससे एक पूर्ण जीवन बनता है.

We are dying from overthinking. We are slowly killing ourselves by thinking about everything. Think. Think. Think. You can never trust the human mind anyway. It’s a death trap.

हम बहुत ज़्यादा सोचने से मर रहे हैं. हम हर चीज़ के बारे में सोचकर धीरे-धीरे खुद को मार रहे हैं. सोचो। सोचो। सोचो। वैसे भी आप इंसानी दिमाग पर कभी भरोसा नहीं कर सकते. यह मौत का जाल है.

Non-expectation and acceptance. Because expectation leads to resentment and depression, so I have no expectations.

अपेक्षा न रखना और स्वीकार करना. क्योंकि अपेक्षा करने से नाराजगी और अवसाद पैदा होता है, इसलिए मेरी कोई अपेक्षा नहीं है.

No expectations. Ask nothing, expect nothing and accept everything, and life is very well.

कोई अपेक्षा न रखें. कुछ न मांगें, कुछ न अपेक्षा करें और सब कुछ स्वीकार करें, और जीवन बहुत अच्छा रहेगा.

Keep low expectations and life gets pretty good.

उम्मीदें कम रखें और जीवन बहुत अच्छा हो जाएगा.

If you have high expectations you’re going to get resentments and all kinds of tension.

यदि आपकी अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं तो आपको असंतोष और सभी प्रकार का तनाव मिलेगा.

Beware the tyranny of the weak. They just suck you dry.

कमज़ोरों के अत्याचार से सावधान रहें. वे आपको पूरी तरह से चूस लेंगे.

Life’s too short to deal with other people’s insecurities.

दूसरों की असुरक्षाओं से निपटने के लिए जीवन बहुत छोटा है.

When you’re younger you have so many ideas about yourself; everything is important. It’s not when you look back, nothing is that important. It’s only life.

जब आप युवा होते हैं तो आपके पास अपने बारे में बहुत सारे विचार होते हैं; सब कुछ महत्वपूर्ण होता है. जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं लगता. यह केवल जीवन है.

When you’re young, you’re very insecure. And if I could learn, if I could revisit my own past I could say to myself, don’t think too much, just get on and do it.

जब आप युवा होते हैं, तो आप बहुत असुरक्षित होते हैं. और अगर मैं सीख सकता, अगर मैं अपने अतीत को फिर से देख सकता तो मैं खुद से कह सकता, ज़्यादा मत सोचो, बस आगे बढ़ो और काम करो.

When I was a young guy, I knew everything. Now I know very little. I know less and less as the time goes on.

जब मैं जवान था, तो मुझे सब कुछ पता था. अब मुझे बहुत कम पता है. समय बीतने के साथ-साथ मुझे कम जानकारी होती जा रही है.

You look closely enough, you’ll find that everything has a weak spot where it can break, sooner or later.

यदि आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि हर चीज में एक कमजोर जगह होती है, जहां वह देर-सवेर टूट सकती है.

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