Quotes by Ishq Banaras

हर तरफ भाग-दौड़ देख रहा हूं, मानों हर किसी ने अपने वर्तमान को गिरवी रख दिया है सिर्फ उस भविष्य के लिए जिसके बारे में कोई भी निश्चित नहीं है.

_ कितनी अजीब बात है कि लोग कल के लिए जीते हैं और आज को ऐसे कुचल डालते हैं जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो.

_ जबकि सच यही है कि कौन जाने कल किसका होगा, कौन जिंदा रहेगा और कौन सिर्फ याद बन जाएगा.

_ भविष्य की चिंता में खोए लोग अक्सर वर्तमान के छोटे-छोटे सुख गंवा देते हैं.

_ उनकी आँखों में सिर्फ एक दौड़ होती है जमा करने की, पाने की, सुरक्षित कर लेने की.

_ पर ये सब जमा करके किसके लिए ? किस काम का ?

_ जब आज ही जीने की फुर्सत न मिले, तो कल का खजाना किस काम आएगा ?

_ मुझे लगता है, जो लोग वर्तमान की साँसों को दबाकर भविष्य की थैलियाँ भरने में लगे रहते हैं, वे सबसे बड़े मूर्ख हैं.

_ क्योंकि वे न इस पल के रहते हैं न अगले पल के.

_ जैसे एक प्यासा आदमी जो पानी से भरा घड़ा देखकर भी मर जाए, क्योंकि उसने कभी एक घूंट पीने की फुर्सत ही नहीं निकाली.

_ असल में जीना तो आज है. कल का कोई भरोसा नहीं.

_ लेकिन अफसोस, ये सबसे सरल बात समझने में सबसे कठिन लगती है.

– Ishq Banaras

हम सब शायद अपनी-अपनी ज़िंदगी में कुछ ऐसे दर्द लेकर चल रहे हैं, जिनका ज़िक्र किसी से नहीं करते.

_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, आवाज़ में सामान्य होने का अभिनय रहता है और हम दुनिया को यकीन दिलाते रहते हैं कि सब ठीक है.

_ मगर सच तो यह है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी हो सकती है, जिसे सुनने वाला शायद ही कोई हो.

_ कुछ दर्द शब्दों में कहे नहीं जाते, बस आँखों में उतर जाते हैं और इंसान उन्हें उम्र भर अपने भीतर लिए घूमता रहता है.

_ मैं अक्सर सोचता हूँ कि आखिर हम उम्मीदों से इतने थक क्यों गए हैं ?

_ शायद इसलिए कि उम्मीद जितनी खूबसूरत होती है, उसके टूटने की आवाज़ उतनी ही गहरी होती है.

_ हम हर बार सोचते हैं—कल बेहतर होगा, कोई हमें समझेगा, कोई लौट आएगा, हालात बदलेंगे, जिंदगी फिर मुस्कुराएगी.

_ लेकिन जब बार-बार हमारी उम्मीदें खाली हाथ लौटती हैं, तो धीरे-धीरे मन किसी चीज़ की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है.

_ फिर इंसान दुखी कम और उदासीन ज्यादा हो जाता है ; उसे खुशी की चाह भी डराने लगती है, क्योंकि वह जानता है कि हर उम्मीद के पीछे टूटने का एक डर छिपा है.

_ दिन गुजरते रहते हैं.

_ वही जिम्मेदारियाँ, वही भागदौड़, वही चेहरे और वही औपचारिक बातचीत.

_ हम हँसते हैं, दूसरों की बातें सुनते हैं, उनकी परेशानियों में उनका साथ देते हैं और फिर अपनी परेशानियों को लेकर चुपचाप घर लौट आते हैं.

_ अजीब बात है न—हम दूसरों के आँसू पहचान लेते हैं, लेकिन अपनी आँखों की नमी छुपाने में पूरी उम्र लगा देते हैं.

_ शायद इसलिए कि हमें बचपन से सिखाया गया कि मजबूत बनो, मगर किसी ने यह नहीं बताया कि मजबूत होने का मतलब हर दर्द को अकेले सहना नहीं होता.

_ सबसे मुश्किल वक्त अक्सर रात का होता है.

_ दिन के शोर में इंसान खुद से बचा रहता है, लेकिन रात जब कमरे की दीवारों पर सन्नाटा उतरता है, तब भीतर दबे हुए सारे सवाल जाग जाते हैं.

_ पुरानी बातें याद आती हैं, अधूरे रिश्ते सामने आ खड़े होते हैं, कुछ चेहरे बिना बुलाए आँखों में उतर आते हैं और मन पूछता है—आखिर इतना सब सहकर भी हम किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं ?

_ कितनी बार मन करता है कि किसी के सामने बैठकर सब कह दें, बिना कुछ छुपाए, बिना मजबूत बनने का अभिनय किए.

_ लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं सामने वाला हमारी कहानी सुनकर भी हमें समझ न पाए और तब शब्द गले में ही रह जाते हैं.

_ धीरे-धीरे इंसान अपने दर्द के साथ समझौता करना सीख लेता है.

_ मुस्कुराना उसकी आदत बन जाता है, चुप रहना उसका स्वभाव और अकेले सह लेना उसकी मजबूरी.

_ बाहर से देखने वाले को लगता है कि वह बहुत संभला हुआ है, मगर भीतर वह हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा समेट रहा होता है.

_ कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि सुकून कोई बहुत बड़ी चीज़ नहीं, बस कुछ पल ऐसे मिल जाएँ जहाँ मन को किसी बात का जवाब न देना पड़े, किसी रिश्ते को निभाना न पड़े और किसी के सामने अपने ठीक होने का प्रमाण न देना पड़े.

_ फिर भी जिंदगी पूरी तरह बेरहम नहीं होती.

_ कभी किसी पुराने गीत की धुन अचानक भीतर का कोई बंद दरवाज़ा खोल देती है.

_ किसी किताब की एक पंक्ति अपनेपन का एहसास करा देती है.

_ किसी पुराने मित्र का संदेश, किसी अपने की छोटी-सी चिंता या खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी यह याद दिला देती है कि जिंदगी में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.

_ शायद सुकून हमेशा बड़ी खुशियों में नहीं मिलता ; कभी-कभी वह उन छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम अपनी व्यस्त जिंदगी में देखने से चूक जाते हैं.

_ हम अक्सर सोचते हैं कि दर्द कभी खत्म नहीं होगा.

_ लेकिन शायद हर दर्द का खत्म होना जरूरी भी नहीं होता.

_ कुछ दर्द हमें बदलने आते हैं, कुछ हमें रिश्तों की कीमत समझाने, कुछ हमें अपने भीतर झाँकना सिखाने और कुछ हमें यह बताने कि हम जितना खुद को कमजोर समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा सहने की क्षमता हमारे भीतर है.

_ वक्त हर घाव को मिटा दे, यह जरूरी नहीं ; मगर वह उसके साथ जीना जरूर सिखा देता है.

_ शायद जिंदगी का सच यही है कि हममें से कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है.

_ हर किसी के भीतर कोई अधूरी कहानी है, कोई खोया हुआ रिश्ता है, कोई ऐसा वादा है जिसे निभाया नहीं जा सका, कोई ऐसा अपना है जिसे चाहकर भी रोक नहीं पाए और कोई ऐसा समय है जिसे चाहकर भी वापस नहीं ला सकते.

_ हम सब अपने-अपने हिस्से की खामोशी लिए इस दुनिया में चलते रहते हैं.

_ और शायद इसी का नाम जिंदगी है.

_ टूटकर भी बिखर न जाना, थककर भी अगली सुबह उठ जाना, आँखों में नमी होते हुए भी किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना.

_ हम सब अपने भीतर कुछ ऐसा ढो रहे हैं, जिसका वजन दुनिया को दिखाई नहीं देता.

_ फिर भी कदम चलते रहते हैं, दिन गुजरते रहते हैं और उम्मीद की कोई बहुत छोटी-सी लौ कहीं भीतर जलती रहती है.

_ क्योंकि शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच यही है कि अँधेरा चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, मन के किसी कोने में सुबह के लौट आने की संभावना हमेशा बची रहती है.

_ बस हमें उस संभावना को पूरी तरह मरने नहीं देना चाहिए.

_ कभी-कभी खुद के लिए भी उतनी ही नरमी बचाकर रखनी चाहिए, जितनी हम दूसरों के दर्द के लिए रखते हैं.

_ हम सब अपने-अपने दर्द के साथ जी रहे हैं.. कोई उसे शब्द दे देता है, कोई आँसुओं में बहा देता है और कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है.

_ मगर हर दिल के भीतर कहीं न कहीं एक छोटी-सी पुकार जरूर होती है.

_ कोई हमें भी समझ ले.. बिना कुछ पूछे, बिना कोई फैसला सुनाए.

_ शायद इंसान को हमेशा समाधान नहीं चाहिए होता, कभी-कभी उसे बस इतना चाहिए होता है कि कोई उसके पास बैठकर कह दे !

_ तुम्हें हर वक्त मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं है.

– Ishq Banaras

कभी-कभी इस भीड़-भरी दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे मिल जाते हैं जो किसी ऊँचाई, किसी प्रसिद्धि, किसी बड़ी जीत की दौड़ में नहीं हैं.

_ उनके जीवन की कोई चमकदार तमन्ना नहीं होती। न किसी मंच की ख्वाहिश, न किसी ताली की चाह.

_ वे बस चाहते हैं कि उनके भीतर जो कोई अनकहा दर्द पल रहा है, वो किसी तरह कम हो जाए.

_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा सा सुकून है जो हर रात की नींद से पहले खोजते हैं.

_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है बिना पूछे, बिना बताए.

_ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूंढते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.

_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.

_ वे रोज मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए जब उनकी आत्मा शांत हो जाए, कि कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए, कि कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए बिना कहे.

_ वे लोग आखिरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि वह विदा सुकून में हो, शांति में हो, ऐसे कि नींद में कोई सोच न जागे, ऐसे कि मृत्यु से पहले जीवन कुछ हल्का लगे.

_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं. _ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थक कर मुस्कुरा देते हैं.

_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.

– Ishq Banaras

एक उम्र, एक मोड़ ऐसा जरूर आता है, _ जब मन को यह समझाना पड़ता है कि हर उस इंसान के दिल में हमेशा अपनी जगह बनाए रखना संभव नहीं, जिसे हमने कभी अपना समझा था.

_ कुछ लोग हमारे जीवन में बहुत गहराई से आते हैं, हमारी आदतों, हमारी स्मृतियों और हमारी भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं,

_ इसलिए जब उनके भीतर हमारे लिए पहले जैसा अपनापन नहीं बचता, तो सबसे पहले हम खुद को कटघरे में खड़ा कर देते हैं.

_ सोचते हैं—हमसे कहाँ कमी रह गई, हमने क्या कम किया, ऐसा क्या बदल गया कि जो कभी इतने अपने थे, आज इतने दूर हो गए.

_ लेकिन शायद हर दूरी के पीछे कोई गलती नहीं होती.

_ कुछ रिश्ते बस अपने हिस्से की धूप लेकर आते हैं, थोड़ी देर हमारे साथ चलते हैं और फिर समय की किसी अनदेखी राह पर हमसे अलग हो जाते हैं.

_ यह स्वीकार करना कठिन है, मगर जीवन की कुछ सच्चाइयाँ ऐसी ही होती हैं—उन्हें समझने में देर लगती है, पर समझ आ जाएँ तो मन बहुत कुछ छोड़ देना सीख जाता है.

_ हम अक्सर अपने स्नेह को किसी स्थायी वचन की तरह जीते हैं.

_ किसी के लिए अपना समय बचाते हैं, उसकी खामोशियाँ पढ़ते हैं, उसकी परेशानियों में उसके साथ खड़े रहते हैं और मन ही मन मान लेते हैं कि इतनी सच्चाई, इतना अपनापन और इतना समर्पण शायद हमें उसके जीवन में हमेशा के लिए जगह दे देगा.

_ लेकिन रिश्ते केवल हमारे दिए हुए से नहीं चलते; उनमें सामने वाले का मन, उसकी परिस्थितियाँ, उसकी जरूरतें और उसकी बदलती प्राथमिकताएँ भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती हैं.

_ कभी-कभी हम किसी के जीवन में बहुत जरूरी होते हैं, और फिर एक दिन बिना किसी घोषणा के हमारी जरूरत कम हो जाती है.

_ यही वह क्षण होता है जब हमें अपने प्रेम की कीमत नहीं, उसकी प्रकृति समझनी चाहिए.

_ किसी का बदल जाना हमेशा हमारे कम हो जाने का प्रमाण नहीं होता.

_ कई बार बस इतना होता है कि जिंदगी ने दोनों के रास्तों की दिशा बदल दी होती है.

_ और शायद यही मान लेना, अपने मन को सबसे बड़ी राहत देना है.

_ इस सत्य को देर से स्वीकार करने वाला मन सबसे ज़्यादा टूटता है.

_ वह हर बदलते व्यवहार में अपनी ही कमी खोजता है, हर दूरी को अपनी गलती मान लेता है.

_ वह स्वयं को साबित करने की थकाऊ दौड़ में लग जाता है, ये भूलकर कि प्रेम और अपनापन किसी प्रतियोगिता का परिणाम नहीं होते.

_ जितनी जल्दी ये समझ विकसित हो जाती है कि हर रिश्ता स्थायी नहीं होता, उतनी ही जल्दी मन अनावश्यक अपेक्षाओं से मुक्त होने लगता है.

_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.

_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.

_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.

_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या, और आत्मग्लानि जन्म लेती है.

_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.

_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.

_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.

_ वह अपनी ही तकलीफों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढता रहता है.

_ जबकि आत्म-सम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.

_ ये स्वीकार करना कि आप किसी के केंद्र में नहीं हैं, आपको कमजोर नहीं बनाता बल्कि मजबूत करता है.

_ ये आपको सिखाता है कि भावनात्मक सुरक्षा बाहर नहीं, भीतर से आती है.

_ जब आप ये मान लेते हैं कि हर कोई आपके साथ नहीं रहेगा, तब आप उन रिश्तों को अधिक सच्चाई से जी पाते हैं जो वास्तव में मौजूद हैं.

_ तब आप कम लोगों से ही सही पर गहराई से जुड़ते हैं.

_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.

_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.

_ ये समझ आपको भावनात्मक चोटों से नहीं बचाती, पर आपको टूटने से जरूर बचा लेती है._ अंततः ये समझ लीजिए शांति उसी दिन आती है, जब आप ये मान लेते हैं कि आपका मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.

_ आप जैसे हैं, उतने ही पर्याप्त हैं.

_ जो लोग आपके जीवन में रहना चाहेंगे, वे बिना शर्त रहेंगे, और जो जाना चाहेंगे, उन्हें रोके रखना आपके सम्मान के विरुद्ध होगा.

_ इस सत्य को जितनी सहजता से स्वीकार कर लिया जाए, जीवन उतना ही हल्का, संतुलित और सच्चा हो जाता है.!!

-Ishq Banaras

Quotes by Travel Point

कुछ लोग जब दुखी होते हैं, तो अपनी तकलीफ़ बता देते हैं.

_ लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते.

_ वो शिकायत नहीं करते, हिसाब नहीं मांगते और न ही सामने वाले को उसकी गलती का एहसास कराने की कोशिश करते हैं.

_ बस धीरे-धीरे अपने भीतर से उस रिश्ते को समेटने लगते हैं, जिसे उन्होंने कभी पूरे मन से जिया था. _ उनकी सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि चोट खाने के बाद भी उनके भीतर की अच्छाई खत्म नहीं होती.

_ वो वही नरमी रखते हैं, वही अपनापन रखते हैं और दूसरों के दर्द को समझते रहते हैं.

_ फर्क बस इतना आता है कि अब वो अपना दर्द हर किसी के सामने रखना बंद कर देते हैं. _ एक दिन आपको लगेगा कि सब पहले जैसा ही है.

_ वो बात करेंगे, मुस्कुराएंगे, आपकी मदद भी करेंगे.

_ लेकिन उनके भीतर कहीं एक दरवाज़ा बंद हो चुका होगा.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे उन्होंने गुस्से में नहीं, बार-बार निराश होने के बाद बंद किया होगा.

_ किसी अच्छे इंसान को खोना अक्सर किसी रिश्ते के खत्म होने जैसा नहीं दिखता.

_ वो बिना किसी आखिरी लड़ाई के दूर हो जाता है.

_ उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं होती, बस पहले जैसी गर्माहट नहीं रहती.

_ उसकी मौजूदगी होती है, लेकिन उसमें पहले जैसा अपनापन नहीं होता.

_ और शायद सबसे गहरी बात यही है कि सच्चे दिल वाले लोग हमेशा आपको छोड़ना नहीं चाहते.

_ वो बहुत देर तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं.

_ आपकी गलतियों को समझते हैं, आपकी मजबूरियों को जगह देते हैं और कई बार अपने हिस्से का दर्द भी खुद उठा लेते हैं.

_ लेकिन हर दिल की भी एक सीमा होती है.

_ जिस दिन उन्हें महसूस हो जाता है कि उनके होने और न होने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता, उसी दिन वो भीतर से विदा लेना शुरू कर देते हैं. _ फिर उनका जाना अचानक नहीं होता.

_ वो तो बहुत पहले अपने मन में दूर हो चुके होते हैं, बस आपको पता देर से चलता है.

_ इसलिए किसी ऐसे इंसान को बार-बार मत आज़माइए, जो आपको पूरे दिल से अपना मानता है.

_ क्योंकि भरोसा कांच की तरह टूटकर हमेशा आवाज़ नहीं करता.

_ कभी-कभी वह बस इतना करता है कि इंसान आपके सामने खड़ा रहता है, लेकिन अपना दिल आपसे वापस ले लेता है.

_ और जब कोई सच्चा दिल अपना दरवाज़ा बंद कर लेता है, तो उसे खोलने के लिए पछतावा भी कई बार बहुत देर से आता है.!!

– Travel Point

हम अक्सर ऐसे इंसान की तलाश में रहते हैं, जो हमारी अधूरी जिंदगी को पूरा कर दे.

_ कोई ऐसा जो हमें समझे, हमारे डर को पहचान ले और हमारे बिखरे हुए हिस्सों को समेट दे.

_ लेकिन शायद हम यह भूल जाते हैं कि जिस सहारे की तलाश हमें है, उसकी जरूरत सामने वाले को भी हो सकती है.

_ हम चाहते हैं कि कोई हमें बदल दे, हमें मजबूत बना दे, हमारे भीतर उम्मीद जगा दे.

_ लेकिन खुद किसी के अंधेरे में एक छोटी सी रोशनी बनने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं.

_ हम दूसरों से वो हिम्मत मांगते रहते हैं, जिसे अपने भीतर पैदा करने से डरते हैं.

_ सच तो यह है कि कोई भी इंसान पूरी तरह मुकम्मल होकर हमारी जिंदगी में नहीं आता.

_ हर किसी के भीतर कुछ टूटे हुए सपने होते हैं, कुछ अनकहे डर होते हैं और कुछ ऐसी लड़ाइयां होती हैं, जिनके बारे में दुनिया को कुछ पता नहीं होता.

_ शायद रिश्तों का मतलब किसी परफेक्ट इंसान को ढूंढ लेना नहीं, बल्कि दो अधूरे लोगों का एक-दूसरे की कमियों के साथ चलना सीखना है.

_ किसी को बदल देना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे उस इंसान पर भरोसा करना है, जिसे वह खुद भी कभी-कभी भूल जाता है.

_ हम सब चाहते हैं कि कोई हमारा हाथ थामे, लेकिन जिंदगी शायद तब खूबसूरत होती है जब हम किसी का हाथ थामने की शुरुआत खुद करते हैं.

_ किसी के डर का मजाक उड़ाने के बजाय उसके साथ खड़े होना, किसी की कमजोरी गिनाने के बजाय उसे अपनी ताकत पहचानने में मदद करना और किसी के गिरने पर यह कहने के बजाय कि तुम कमजोर हो, बस इतना कहना कि चलो, एक बार फिर कोशिश करते हैं.

_ क्योंकि बेहतर इंसान मिलने से जिंदगी बेहतर नहीं होती, कई बार किसी के साथ चलते-चलते हम खुद बेहतर इंसान बन जाते हैं.

_ शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यही है कि हमें किसी मुकम्मल इंसान का इंतजार नहीं करना चाहिए.

_ हमें खुद इतना बेहतर बनने की कोशिश करनी चाहिए कि किसी और की जिंदगी में हमारे होने से उसे अपने भीतर थोड़ा और उजाला दिखाई देने लगे.

_ आखिर में, किसी बेहतर इंसान की तलाश से ज्यादा जरूरी है, किसी के लिए बेहतर इंसान बनने की कोशिश.!!

– Travel Point

किसी अच्छे इंसान को चोट पहुँचाने की सबसे खतरनाक बात ये नहीं होती कि वो रोएगा या आपसे लड़ाई करेगा…

_ असली बात ये होती है कि एक दिन वो चुप हो जाएगा.

_ वो आपको दोष नहीं देगा. सवाल नहीं करेगा. बदला लेने की कोशिश भी नहीं करेगा.

_ बस धीरे-धीरे अपने उस हिस्से को आपसे वापस ले लेगा, जो कभी पूरी तरह आपका हुआ करता था.

_ पहले आपके एक संदेश का इंतज़ार करने वाला इंसान, आपके जवाब का इंतज़ार करना छोड़ देगा.

_ आपकी छोटी-सी परेशानी पर बेचैन होने वाला इंसान, एक दिन आपकी परेशानियों से अनजान रहने लगेगा.

_ और सबसे अजीब बात… आपको पता भी नहीं चलेगा कि ये दूरी कब शुरू हुई.

_ क्योंकि अच्छे लोग अक्सर रिश्ते तोड़ते नहीं हैं… वे पहले उम्मीदें छोड़ते हैं.

_ वे कई बार खुद को समझाते हैं कि शायद सामने वाला बदल जाएगा.

_ शायद उसे अपनी गलती समझ आएगी.

_ शायद अगली बार वो उस दिल को नहीं दुखाएगा, जिसने हमेशा उसका साथ दिया.

_ लेकिन हर बार थोड़ा-थोड़ा टूटने के बाद एक दिन भीतर कुछ बिल्कुल शांत हो जाता है.

_ फिर शिकायत खत्म हो जाती है, इंतज़ार खत्म हो जाता है.

_ और वो इंसान, जो कभी आपको खोने के ख्याल से डरता था, आपको खोकर भी शांत रहने लगता है.

_ ये नफ़रत नहीं होती.

_ ये वो पल होता है जब इंसान समझ जाता है कि किसी को अपना समझना और किसी का आपके अपने होने की कद्र करना… दोनों अलग बातें हैं.

_ उसके बाद वो आपके खिलाफ कुछ नहीं करेगा.

_ शायद आज भी आपकी खुशी चाहेगा.

_ शायद मुश्किल वक्त में मदद भी कर दे. लेकिन उसके दिल में आपके लिए जो जगह कभी घर जैसी थी, वहां अब सिर्फ एक बंद दरवाज़ा होगा.

_ और सबसे दर्दनाक बात ?

_ उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए शायद आप बहुत देर कर चुके होंगे.

_ क्योंकि कुछ दूरियां अचानक नहीं बनतीं, वो उन छोटी-छोटी चोटों से बनती हैं जिन्हें सामने वाला बार-बार अनदेखा करता रहा.

_ इसलिए अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो आपकी गलतियों के बावजूद आपको समझता है, आपकी खामोशी पढ़ लेता है और बिना मांगे आपका साथ देता है… तो उसकी सहनशीलता को उसकी कमजोरी मत समझिए.

_ क्योंकि कुछ लोग जब चले जाते हैं, तो उनके जाने की आवाज़ नहीं होती.

_ बस एक दिन आपको एहसास होता है कि जिस इंसान को आप हमेशा अपने पास समझते थे, वो अब आपके पास होकर भी आपके जीवन में नहीं है.

_ और तब शायद पछतावा बहुत होगा… लेकिन वो दिल, जो कभी आपके लिए दरवाज़ा खोलकर बैठा था, शायद तब तक अंदर से हमेशा के लिए बंद हो चुका होगा.

_ सबसे मुश्किल बात ये नहीं होगी कि वो आपसे दूर हो गया, बल्कि ये होगी कि आप चाहकर भी उस पुराने रिश्ते को वापस नहीं ला पाएंगे.

_ क्योंकि कुछ रिश्ते टूटने के बाद खत्म नहीं होते… बस उनमें लौटने का रास्ता हमेशा के लिए खो जाता है.

– Travel Point

जिंदगी में सबसे खतरनाक गलती शायद वह नहीं होती जब हम कोई गलत फैसला लेते हैं, बल्कि वह होती है.. जब कोई अपना हमारे लिए सही फैसला ले रहा हो और हम उसे गलत समझ बैठें.

_ कुछ लोग हमारी हर इच्छा पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि हमें उन मुश्किलों से बचाने के लिए हमारे साथ होते हैं, जिनका अंदाजा हमें उस वक्त नहीं होता.

_ वे हमारी बातों से ज्यादा हमारी हालत समझते हैं, इसलिए कई बार हमें वह नहीं देते जो हमें अच्छा लगता है, बल्कि वह करते हैं.. जिसकी हमें सच में जरूरत होती है.

_ मुश्किल यहीं से शुरू होती है.

_ जो मिला है, उसकी खुशी अक्सर जल्दी खत्म हो जाती है, लेकिन जो नहीं मिला उसका दर्द लंबे समय तक पीछा करता रहता है.

_ फिर हम उन्हीं हाथों को कसूरवार समझने लगते हैं, जिन्होंने हमें संभालने के लिए जाने कितनी बार खुद को पीछे किया था.

_ हमें उनकी चिंता दिखाई नहीं देती, उनकी मजबूरी दिखाई नहीं देती, उनके त्याग का अंदाजा नहीं होता.

_ दिखाई देता है तो बस अपना अधूरा सपना.

_ धीरे-धीरे यही अधूरापन इतना बड़ा हो जाता है कि सामने खड़ी पूरी जिंदगी छोटी लगने लगती है.

_ सबसे अजीब बात यह है कि दिल के किसी कोने में हमें यह एहसास भी होता रहता है कि शायद गलती हमारी है.

_ कभी अकेले में मन पूछता है कि क्या सच में मेरे अपने मेरे खिलाफ हैं, या मैं ही उनकी मोहब्बत को समझ नहीं पा रहा ?

_ लेकिन उस सवाल का जवाब स्वीकार करना आसान नहीं होता.

_ अहंकार हमें रोकता है और अपनी चाहतों के आगे बाकी सब कुछ छोटा दिखाई देने लगता है.

_ फिर एक दिन वही इंसान दूर हो जाता है.

_ और तभी उसकी डांट में छिपी चिंता, उसकी रोक-टोक में छिपा डर और उसके फैसलों के पीछे छिपी मोहब्बत समझ आने लगती है.

_ तब एहसास होता है कि जिसे हम अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी समझ रहे थे, शायद वही हमें किसी बड़ी परेशानी से बचा रहा था.

_ जिसे हम अपना दुश्मन समझ बैठे थे, वह शायद आखिरी इंसान था जो हमारे गिरने से पहले हमें पकड़ने की कोशिश कर रहा था.

_ हर किसी को जिंदगी में ऐसा इंसान नहीं मिलता.

_ इसलिए अगर आज कोई आपकी हर इच्छा पूरी नहीं करता, लेकिन आपकी जरूरत के वक्त आपके साथ खड़ा रहता है, तो उसकी कद्र कीजिए.

_ क्योंकि जिंदगी में सबसे बड़ा पछतावा किसी चीज के न मिलने का नहीं होता, सबसे बड़ा पछतावा तब होता है जब हमें समझ आता है कि जिसे हम रोकने वाला समझते रहे, वही हमें टूटने से बचा रहा था… और तब तक वह हमारे पास नहीं रहता.!!

– Travel Point

कभी-कभी जिंदगी हमें किसी इंसान से नहीं, बल्कि अपनी ही उम्मीदों से हरा देती है.

_ हम सोचते हैं कि कोई हमारे साथ हमेशा खड़ा रहेगा, कोई हमारी खामोशी समझ लेगा, कोई मुश्किल वक्त में हाथ नहीं छोड़ेगा.

_ लेकिन जब वक्त करवट लेता है, तब पता चलता है कि जिन कंधों को हमने अपना सहारा समझा था, वे भी कभी रास्ते में छूट सकते हैं.

_ शायद इसी का नाम जिंदगी है, जहां उम्मीदें खूबसूरत तो बहुत होती हैं, लेकिन हर उम्मीद का पूरा होना जरूरी नहीं.

_ उम्मीदें अक्सर धोखा देती हैं.

_ हम किसी को जितना अपना समझते हैं, जरूरी नहीं कि वह भी हमें उतना ही अपना समझे.

_ हम किसी रिश्ते को जिंदगी भर निभाने का सपना देखते हैं, लेकिन सामने वाला शायद उस रिश्ते को कुछ दूर तक का सफर ही मानता हो.

_ सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब हम किसी से कुछ मांगते भी नहीं, बस इतना चाहते हैं कि वह वक्त आने पर हमारे साथ खड़ा रहे.

_ और जब वही इंसान पीछे मुड़कर चला जाता है, तो उसके जाने से ज्यादा उस भरोसे के टूटने की आवाज सुनाई देती है, जिसे हमने बड़ी खामोशी से अपने भीतर बनाया था.

_ ऐसे पल इंसान को अंदर तक हिला देते हैं, लेकिन यही पल उसे एक ऐसी सच्चाई भी सिखाते हैं, जिसे किताबों में नहीं पढ़ाया जा सकता.

_ हर किसी से उम्मीद मत रखो, क्योंकि हर कोई आपकी तरह महसूस नहीं करता.

_ किसी के साथ चलो तो दिल से चलो, लेकिन अपनी पूरी जिंदगी का रास्ता उसके कदमों पर मत छोड़ो.

_ क्योंकि जिंदगी का सबसे बड़ा रोमांच शायद यही है कि जब अपने समझे हुए लोग भी रास्ते में छूट जाएं, तब इंसान अकेला आगे बढ़ना सीखता है.

_ और एक दिन पीछे मुड़कर देखता है तो समझ आता है कि जिसे वह अपना अंत समझ रहा था, वही उसके एक नए सफर की शुरुआत थी.!!

– Travel Point

Rahul Kumar Jha

मैंने जीवन में एक आदत बहुत देर से छोड़ी लोगों को देखकर उनके बारे में निर्णय बना लेना.

_ पहले मुझे लगता था कि जो दिखाई देता है, वही सच है.

_ जो व्यक्ति बार-बार एक ही रास्ते पर जाता है, वह उसी मंज़िल का मुसाफ़िर होगा.

_ जो लोगों की नज़रों में गलत है, वह सचमुच गलत ही होगा.

_ फिर जीवन ने मुझे सिखाया कि आँखें दृश्य देखती हैं, लेकिन सत्य नहीं._ सत्य अक्सर वहाँ रहता है, जहाँ हमारी नज़र पहुँचती ही नहीं.

_ तब से मैंने किसी भी इंसान पर अंतिम निर्णय देने से पहले अपने भीतर एक प्रश्न जगाना शुरू कर दिया…”क्या पता मैं गलत हूँ ?”

_ क्या पता जिस व्यक्ति को मैं पापी समझ रहा हूँ, वह किसी और के पापों का बोझ अपने सिर पर लेकर चल रहा हो.

_ क्या पता जिसे मैं स्वार्थी समझ रहा हूँ, उसने अपना सबसे सुंदर हिस्सा किसी अनजान इंसान की ज़िंदगी सँवारने में खर्च कर दिया हो.

_ क्या पता जिसे मैं गिरा हुआ मान रहा हूँ, वह किसी और को गिरने से बचाने के लिए स्वयं गिरा हुआ दिखाई देना स्वीकार कर चुका हो.

_ जीवन ने मुझे यह भी समझाया कि सबसे गहरे त्याग कभी मंचों पर नहीं होते.

_ उन पर तालियाँ नहीं बजतीं, उनके लिए समाचार नहीं लिखे जाते, उनके सम्मान में स्मारक नहीं बनते.

_ वे त्याग चुपचाप होते हैं…

_ इतने चुपचाप कि दुनिया उन्हें गलत समझ बैठती है.

_ हम अक्सर किसी इंसान की पूरी कहानी उसके जीवन के एक दृश्य से लिख देते हैं.

_ हम उसके संघर्ष नहीं देखते, केवल उसका परिणाम देखते हैं._ हम उसके घाव नहीं देखते, केवल उसका व्यवहार देखते हैं.

_ हम उसकी नीयत नहीं पढ़ते, केवल उसके कदमों का रास्ता देखते हैं.

_ और यहीं हम सबसे बड़ी भूल कर बैठते हैं.

_ क्योंकि संसार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी प्रतिष्ठा बचाने के बजाय किसी और की इज़्ज़त बचा लेते हैं.

_ वे सफ़ाई दे सकते हैं, लेकिन नहीं देते.

_ वे सच बता सकते हैं, लेकिन चुप रहते हैं.

_ वे सम्मान पा सकते हैं, लेकिन किसी और का भविष्य उनसे अधिक मूल्यवान होता है.

_ ऐसे लोग दुनिया की नज़रों में हार जाते हैं, लेकिन ईश्वर की दृष्टि में वही सबसे ऊँचे खड़े होते हैं.

_ अब मैं समझ चुका हूँ कि किसी इंसान की महानता इस बात से नहीं मापी जा सकती कि लोग उसके बारे में क्या कहते हैं.

_ महानता तो वहाँ जन्म लेती है, जहाँ कोई व्यक्ति सही काम करता रहता है, भले ही पूरी दुनिया उसे गलत समझती रहे.

_ इसलिए अब मैं किसी पर उँगली उठाने से पहले अपने भीतर झाँकता हूँ.

_ क्योंकि मैंने सीखा है कि निर्णय देना आसान है, समझना कठिन.

_ आरोप लगाना सरल है, करुणा रखना दुर्लभ.

_ और शायद मनुष्य की सबसे बड़ी परिपक्वता यही है कि वह हर चेहरे के पीछे छिपी उस अनकही कहानी की संभावना को कभी मरने न दे.

_ हो सकता है जिसे मैं आज दोष दे रहा हूँ, वही कल मेरी इंसानियत का सबसे बड़ा पाठ निकले.

_ इसलिए अब मैं लोगों को उनके बारे में सुनी हुई बातों से नहीं, बल्कि अपनी करुणा की आँखों से देखने की कोशिश करता हूँ.

_ क्योंकि जीवन ने मुझे एक ऐसा सत्य सिखाया है जो शायद हर युग में अमर रहेगा…

_ हर दिखाई देने वाला सत्य, पूरा सत्य नहीं होता.

_ और कई बार…

_ सबसे पवित्र आत्माएँ वही होती हैं, जिन्हें दुनिया सबसे पहले अपवित्र घोषित कर देती है.

Rahul Kumar Jha

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“अब कुछ समझ नहीं आता”
_ अब कुछ समझ नहीं आता, जहाँ भी जाऊँ, चैन नहीं आता.
_ जिस मंज़िल की चाह थी दिल में, वहीं पहुँच कर सुकून नहीं आता.
_ पल बीत रहे हैं सैकंडों की तरह, हर रोज़ एक सा लगता है अब हर पहर.
_ कौन अपना है, कौन पराया, इस सवाल का जवाब कभी नहीं आया.
_ रिश्ते पुराने हो गए हैं अब, जैसे किसी पुराने बर्तन पर जंग लग गई हो सब.
_ अब उन रिश्तों को संभालना मुश्किल है, लड़ने की हिम्मत भी कम हो गई है.
_ कभी बच्चों को हँसते-खिलखिलाते देखा, अब वही बच्चे हमें चुप-चुप सा देख रहे हैं.
_ हमने उन्हें बड़ा किया प्यार से, अब वो हमें बूढ़ा बना रहे हैं वक़्त के भार से.
_ कौन सही है, कौन गलत – ये अब हालात तय करते हैं,
_ सच भी कभी-कभी झूठ लगने लगता है, जब अपनी सोच से परे कुछ होता है.
_ “बस अब मन थक गया है सोचते-सोचते, थोड़ी राहत चाहिए, थोड़ी ख़ुशी… थोड़ी शांति”


Krishna Chaudhary

कभी एक दिन हम सभी एक एक करके अचानक ग़ायब हो जाएँगे.

_ बहुत दूर, इतनी दूर कि यहाँ का कोई निशान भी साथ न जाएगा.

_ कोई न जानेगा, और किसी को जानना भी नहीं चाहिए कि कहाँ गए !

_ हम उसी अजनबीपन में खो जायेंगे, और लोग सिर्फ़ सोचते रह जाएँगे कि हम थे भी, या बस एक भ्रम.

_ मैं वहाँ जाना पसंद करूँगा.. जहाँ मुझे कोई नाम से न पुकारे, जहाँ मेरा चेहरा किसी के लिए पहचाना न हो.

_ जहाँ मेरी हर हरकत किसी के लिए मायने न रखे.

_ मैं ऐसे लोक में जाऊँगा, जहाँ खरीदे हुए फूल किसी कोने में मुरझा कर शहर की उदासी में दफ़्न न हों.

_ जहाँ आकाश ही न हो, और प्रेम नाम की चीज़ सिर्फ़ डर का दूसरा नाम हो.

_ मैं उस जगह रहूँगा.. जहाँ मेरा दिल कोई पहेली न बने, जो जीते-जी बुझ जाए और बुझकर भी जीता रहे.

_ वहाँ मैं जीवित रहूँगा, पर अपने दिमाग़ की उलझनों में नहीं.

_ वहाँ मैं नाचूँगा.. जैसे मुझे आता ही न हो, लेकिन पूरे विश्वास के साथ.

_ वहाँ कोई आँखें क्षितिज पर मेरा इंतज़ार न करेंगी, और न ही अनंत का वादा करेंगी, क्योंकि मुझे मालूम है.. वे वादे झूठे हैं.

_ वहाँ कोई पतझड़ की हवा फिर घावों के ऊपर से गुज़रेगी नहीं, घाव जिन्हें मैंने बरसों से यूँ ही अनदेखा छोड़ रखा है.

_ मैं जो चाहूँगा, वही करूँगा.

_ अकेलापन ही मेरा साथी होगा, और वही काफी होगा.

_ यादें मैं बनाऊँगा, पर उन्हें सिर्फ़ मेरी आत्मा सँजोएगी.

_ अजनबियों से मिलूँगा और उन्हें अपने सबसे गहरे डर, सबसे छिपे हुए राज़ बिना झिझक कह दूँगा.

_ हर जगह से विदा लेते हुए, अपने हिस्से का एक टुकड़ा वहीं छोड़ता जाऊँगा.

_ धीरे-धीरे मैं अपने चेहरे को पहचानना सीखूँगा, अपनी हँसी की आवाज़ को पहचानूँगा.

_ तन्हाई चादर होगी और शांति घर.

_ मैं खुद को उन तमाम अपराधों से माफ़ करना सीखूँगा, जो मैंने खुद किए और फिर, मैं इस दुनिया और अपने अतीत से मुक्त हो जाऊँगा.

_ दिन उतने बुरे नहीं लगेंगे, जितने अब लगते हैं. _ मैं खो जाऊँगा, क्योंकि खोना ही मुझे खुद तक पहुँचाएगा.

_ और शायद उसी वक़्त मैं फूलों-सा महकूँगा, उन फूलों-सा, जो शोक में सड़कर भी जीवन को नया अर्थ देते हैं.

_ मैं टूटे दिलों से नया आशियाना बनाऊँगा और कहानियाँ बेचकर अपनी सच्चाई को पहचानूँगा.!!

मासूम लोग ज़िंदगी से बहुत ज़्यादा नहीं माँगते.

_ उन्हें बस एक ऐसा घर चाहिए, जहाँ सुबह की शुरुआत हँसी से हो.

_ जहाँ मुस्कुराहटें हों, फूलों खुशबू हो, न कि टूटे रिश्तों की चुभन और बिखरे बर्तनों की आवाज़.

_ उन्हें बस इतना चाहिए कि वे अपने काम पर खुशी से जाएँ.

_ जहाँ उन्हें सिर्फ़ काम निकालने का साधन न समझा जाए, बल्कि एक इंसान की तरह देखा जाए.

_ जहाँ उनकी बात इसलिए सुनी जाए कि उन्हें समझा जा सके, न कि उन्हें ग़लत साबित करने के लिए.

_ उन्हें ऐसी हवा भी चाहिए जिसमें टारगेट, डेडलाइन और चिंता की घुटन न हो, बल्कि बारिश के बाद भीगी मिट्टी की खुशबू हो, और बालकनी में खड़े होकर चाय पीते हुए गहरी साँस लेने की आज़ादी हो.

_ उन्हें इतना समय चाहिए कि किसी पार्क की बेंच पर बैठकर अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने पढ़ सकें.

_ ऐसा कोना चाहिए जहाँ वे खुलकर गा सकें, नाच सकें, चित्र बना सकें, अपनी लिखी हुई बातें ज़ोर से पढ़ सकें, बिना इस डर के कि कोई उनका मज़ाक ना उड़ाए.

_ वे अपने माँ-बाप के अकेलेपन, दुख और टूटन को विरासत में नहीं पाना चाहते.

_ क्योंकि अकेलापन भी कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चला जाता है.

_ फिर इंसान लोगों के बीच रहकर भी अकेला रह जाता है.

_ रातों को जागता है, ख़ाली बिस्तर पर करवटें बदलता है और सोचता रहता है- “आख़िर मेरे साथ ही क्यों ?”

_ कभी फ़ोन की स्क्रीन पर अनजान लोगों में अपनापन ढूँढ़ता है, सिर्फ़ इसलिए कि कुछ पल के लिए अकेलापन कम हो जाए.

_ कोई भी ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहता.

_ लोग बस ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ बच्चों के चेहरों पर मिट्टी खेलते-खेलते लगे.

_ वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय डर के साथ विदा न करें.

_ ख़ासकर बेटियों के लिए हर पल मन में उठने वाले डर और बुरे ख़यालों के साथ न जिएँ._ हर इंसान चाहता है कि उसकी ज़िंदगी का एक छोटा-सा हिस्सा सिर्फ़ उसका अपना हो.

_ कुछ सपने, कुछ पल, कुछ यादें- जिन्हें कोई उससे छीन न सके._ वे बस कभी-कभी रात भर आसमान के तारों को देखते रहना चाहते हैं.

_ बिना किसी जल्दी के.

_ बिना किसी चिंता के.

_ वे चाहते हैं कि नींद उन्हें लेटते ही आजाये, न कि अपने ही मन के शोर के बीच जागते रहें.!!

मुझे फैसले लेने में हमेशा डर लगता है.

_ इसलिए नहीं कि मुझे अपने फैसलों पर भरोसा नहीं होता, बल्कि इसलिए कि हर फैसले के साथ एक दूसरी ज़िंदगी हमेशा के लिए छूट जाती है.

_ जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, दाएँ जाओ या बाएँ तो मेरा मन बस इतना चाहता है कि जाने से पहले दोनों रास्तों पर थोड़ा-सा आगे तक देख सकूँ.

– बस एक झलक.

_ इतना पता चल जाए कि अगर दाएँ गया तो क्या खोऊँगा, क्या पाऊँगा… और अगर बाएँ गया तो मेरी कहानी किस तरह बदल जाएगी.

– मैं भविष्य जानना नहीं चाहता.

_ मैं बस उन ज़िंदगियों को देखना चाहता हूँ, जो मेरे एक छोटे-से फैसले की वजह से कभी जी ही नहीं गईं.

_ कभी सोचता हूँ अगर उस दिन मैंने हाँ कह दी होती तो ?

_ क्या आज मेरी ज़िंदगी सच में अलग होती ?

_ अगर उस दिन मैंने चुप रहने के बजाय अपने लिए आवाज़ उठाई होती तो ?

_ क्या कुछ बदल जाता ?

_ अगर वो नौकरी चुन ली होती, वो शहर चुन लिया होता, वो इंसान चुन लिया होता, वो रिश्ता बचा लिया होता, या फिर उसे उसी दिन छोड़ दिया होता… तो आज मैं कौन होता ?

_ क्या मैं ज़्यादा खुश होता ?

_ या बस अलग तरह से परेशान ?

_ कभी-कभी मन करता है कि ज़िंदगी के किसी कोने में एक छोटा-सा दरवाज़ा हो.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे खोलकर मैं अपनी दूसरी ज़िंदगियों में झाँक सकूँ.

_ एक कमरे में वो मैं हो जिसने “हाँ” कहा था.

_ दूसरे कमरे में वो, जिसने “नहीं”,

_ कहीं वो मैं हो जो किसी और शहर में रहता है.

_ कहीं वो जो किसी और के साथ बूढ़ा हो रहा है.

_ कहीं वो जिसने वो जोखिम उठा लिया था जिससे मैं डर गया था.

_ और शायद किसी कमरे में वो भी हो जिसने मेरी तरह ही कोई फैसला लिया था, लेकिन आज भी सोचता है, काश, मैंने दूसरा रास्ता चुना होता.

_ शायद यही सबसे अजीब बात है इंसान होने की.

_ हम जिस ज़िंदगी को जी रहे होते हैं, उसके साथ-साथ उन सारी ज़िंदगियों को भी अपने भीतर कहीं चुपचाप ढोते रहते हैं, जिन्हें हम जी सकते थे.

– लेकिन फिर एक बात समझ आती है.

_ शायद हर रास्ते का अंत हमें पहले से दिख जाए, तो चुनाव का मतलब ही खत्म हो जाए.

_ क्योंकि ज़िंदगी शायद सही रास्ता चुनने का नाम नहीं है.

_ ज़िंदगी उस रास्ते को अपना बनाने का नाम है जिसे हमने चुन लिया.

_ लेकिन शायद उन्होंने जो बात हमें नहीं बताई, वो ये है कि इंसान उम्र भर कभी-कभी पीछे मुड़कर उन दोनों रास्तों को देखता रहता है.

_ सोचता है अगर मैं उस तरफ चला होता तो ?

_ और शायद इस सवाल का कोई जवाब कभी नहीं मिलेगा, शायद मिलना भी नहीं चाहिए.

_ क्योंकि अगर हमें हर “क्या होता अगर” का जवाब मिल जाए, तो हम अपनी आज की ज़िंदगी को कभी पूरी तरह जी ही नहीं पाएँगे.

– फिर भी…

_ काश, ज़िंदगी मुझे सिर्फ पाँच मिनट देती.

_ बस पाँच मिनट.

_ मैं अपने उन सारे रूपों से मिलना चाहता, जो मैं हो सकता था.

_ मैं उनसे पूछना चाहता कि क्या वे मुझसे ज़्यादा खुश हैं.

_ क्या उन्हें भी कभी मेरी ज़िंदगी की याद आती है ?

_ क्या उन्हें भी कभी लगता है, कि काश, मैंने वो दूसरा रास्ता चुना होता… और फिर शायद मैं वापस लौट आता.

_ अपने इसी जीवन में.

_ उसी इंसान के पास.

_ उसी अधूरी कहानी के बीच.

– और इस बार शायद मुझे अपने फैसलों से शिकायत न होती.

_ क्योंकि मैंने देख लिया होता कि दूसरी ज़िंदगी भी आखिर एक ज़िंदगी ही थी, उसमें भी कुछ खुशियाँ थीं, कुछ पछतावे थे, कुछ लोग मिले थे, कुछ लोग छूटे थे… और कुछ सवाल वहाँ भी अनुत्तरित थे.

_ तब शायद मैं समझ पाता कि हमें दूसरी ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं होती.

_ हमें बस अपनी इस ज़िंदगी को देखकर ये यक़ीन करने की ज़रूरत होती है कि जो नहीं हुआ, वो ज़रूरी नहीं कि बेहतर होता.

_ और जो हो गया है…शायद उसे बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी अब हमारी है.

_ इसलिए आज भी जब ज़िंदगी मेरे सामने दो रास्ते रखती है, मेरा मन उस पुराने दरवाज़े को ढूँढता है.

_ लेकिन अब मैं शायद बिना खोले ही आगे बढ़ जाऊँगा.

_ क्योंकि हर रास्ते के आगे क्या है, ये जान लेना ज़िंदगी नहीं है.

_ अनजान रास्ते पर अपने कदमों से एक नयी कहानी लिख देना, शायद यही ज़िंदगी है.

‘अपना महत्व समझो’

_ आप भी अपने से पूछो आप sentimental fool क्यों हो ?

‘अपना महत्व समझो’

_ मेरी हमेशा यही कोशिश होती है कि किसी से भी कोई संजीदा बात शुरू करने से पहले मैं सिर्फ़ एक चीज़ टटोलता हूँ-बौद्धिक ह्युमिलिटी.

_ क्या सामने वाले में इतनी ईमानदारी है कि वो मान सके कि उससे भी चूक हो सकती है ?

– अगर हाँ,

_ तो उस बातचीत में घंटों बहाए जा सकते हैं, क्योंकि वहाँ दो इंसान बातचीत कर रहे होते हैं.

_ लेकिन अगर सामने एक बंद दिमाग और अकड़ का पुतला खड़ा है, तो मैं आगे बढ़ जाता हूँ.

_ क्योंकि जिस दीवार पर कोई खिड़की ही न हो, उस पर बार-बार सिर पटक कर सिर्फ़ अपना माथा फोड़ा जा सकता है, रोशनी अंदर नहीं लाई जा सकती.

_ खामोशी ही ऐसे मौकों पर सबसे धारदार जवाब बन जाती है.!!

_ मैं साफ़-स्वच्छ व्यवहार करता हूँ, किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता.

_ मेरा यह विश्वास है कि दूसरे का बुरा करने वालों का अपना ही बुरा होता है और यह भी, कि बुद्धिहीनता से आप कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते.

_ वस्तुतः दूसरा कोई हमारा नुकसान इतना नहीं करता जितना नुकसान हम खुद अपना करते हैं.

– जब कोई तकलीफ़ में हो, उनकी आँखों से आँसू निकलते हैं और मैं चाहकर भी उस तकलीफ़ को कम नहीं कर पाता, सिर्फ़ दिलासा देने के अलावा मेरे पास कुछ नहीं होता.

_ तब शायद उनकी तकलीफ़ से कहीं ज़्यादा दर्द मुझे होता है,

_ क्योंकि उन्हें रोते हुए देखना मेरे लिए सबसे मुश्किल है, और उनके दर्द के सामने अपनी बेबसी से ज़्यादा तकलीफ़ किसी चीज़ में नहीं होती.!!

Quotes by एंथनी हॉपकिंस Anthony Hopkins

“उन लोगों को छोड़ दो जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं” और इसके पीछे कारण ये है:

_ उन्हें छोड़ना जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं — शायद यह सबसे कठिन, और सबसे ज़रूरी काम होगा जो तुम कभी करोगे.

_ उन लोगों के साथ कठिन बातचीत करना बंद करो जो बदलना नहीं चाहते.

_ उन लोगों के लिए बार-बार हाज़िर होना बंद करो जिन्हें तुम्हारी मौजूदगी में कोई दिलचस्पी नहीं.

_ खुद को थकाना बंद करो उन लोगों से प्यार पाने के लिए, जो उसे देने में ही सक्षम नहीं हैं.

_ जब तुम उठने का फ़ैसला करते हो — खुशी, मकसद और जुनून से भरी ज़िंदगी जीने का — तो हर कोई तुम्हारे साथ नहीं उठेगा.

_ यह तुम्हारी गलती नहीं है, और इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि तुम्हें खुद को छोटा करना होगा ताकि वे सहज महसूस कर सकें.

_ अगर कोई तुम्हें नज़रअंदाज़ करता है, अपमान करता है, या भूल जाता है — तो उन्हें अपना समय और ऊर्जा देना बंद करो.

_ तुम सबके लिए नहीं हो और सब तुम्हारे लिए नहीं हैं.

_ यही असली जुड़ाव को इतना दुर्लभ और कीमती बनाता है.

_ जितना ज़्यादा तुम उस इंसान से प्यार पाने के लिए लड़ते हो जो तुम्हें प्यार नहीं कर सकता, उतना ही तुम उन लोगों से वक्त छीन रहे हो — जो कर सकते हैं, जो करेंगे.

_ कुछ लोग तुम्हें सिर्फ एक तकिया बनाना चाहते हैं, एक बैकअप विकल्प, या एक भावनात्मक मरम्मत करने वाला.

_ जितना ज़्यादा तुम खुद को उस भूमिका में फिट करने की कोशिश करते हो, उतना ही तुम उन रिश्तों और उस समुदाय से दूर होते हो जो सच में तुम्हारे लिए बना है.

_ अगर तुम कॉल करना बंद कर दो — शायद कोई वापस कॉल नहीं करेगा.

_ अगर तुम कोशिश करना बंद कर दो — शायद रिश्ता अपने आप फीका पड़ जाएगा.

_ अगर तुम मैसेज भेजना बंद कर दो — शायद फ़ोन खामोश ही रहेगा.

_ यह अस्वीकृति नहीं है — यह स्पष्टता है.

_ इसका मतलब है कि वह जुड़ाव केवल इसलिए ज़िंदा था क्योंकि तुम उसे ज़िंदा रखे हुए थे, अकेले.

_ यह प्यार नहीं है — यह केवल एक आदत है और तुम इससे बेहतर के हकदार हो.

_ तुम्हारा समय और ऊर्जा सबसे कीमती चीजें हैं जो तुम्हारे पास हैं, उन्हें बुद्धिमानी से लगाओ.

_ तुम उन्हें जहाँ रखते हो, वही तुम्हारी पूरी ज़िंदगी की दिशा तय करेगा.

_ और जब तुम सच में यह समझ लेते हो — तब तुम्हें यह भी समझ में आने लगता है कि कुछ लोगों या जगहों के आस-पास क्यों तुम्हें घबराहट, थकावट या अदृश्यता महसूस होती है.

_ क्योंकि वे तुम्हारे भीतर की पवित्रता को खींच रहे हैं, तो अपनी ऊर्जा की रक्षा करो.. पूरी ताकत से,

_ अपनी ज़िंदगी को एक पवित्र जगह बना दो.

_ सिर्फ उन्हें अंदर आने दो जो तुम्हारी आत्मा से मेल खाते हैं.

_ तुम यहाँ किसी को ठीक करने, बचाने या खुद को साबित करने नहीं आए हो.

_ तुम यहाँ हो — पूरी तरह जीने के लिए.

_ प्यार देने और पाने के लिए, पूरी तरह.

_ तुम सच्ची दोस्ती के हकदार हो, असली जुड़ाव के, अडिग प्रेम के.

_ और जब तुम उसे चुनते हो — दुनिया बदल जाती है.

_ क्योंकि जो तुम चुनते हो — वही तुम बन जाते हो.

— एंथनी हॉपकिंस

My philosophy is: It’s none of my business what people say of me and think of me. I am what I am, and I do what I do. I expect nothing and accept everything. And it makes life so much easier.

मेरा दर्शन है: लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं और क्या सोचते हैं, इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मैं वही हूँ जो मैं हूँ, और मैं वही करता हूँ जो मैं करता हूँ. मैं किसी से कुछ भी अपेक्षा नहीं करता और सब कुछ स्वीकार करता हूँ और इससे जीवन बहुत आसान हो जाता है.

I don’t want to be anything else other than what I am. I can say that with passion. No regrets.

मैं जो हूँ उसके अलावा कुछ और नहीं बनना चाहता. मैं यह बात पूरे जोश के साथ कह सकता हूँ. कोई पछतावा नहीं.

Living with reality is a very good trick, it gives you tremendous freedom and it changes the structure of the molecules of your soul by living with reality because you don’t expect anything anymore. Which is a weird paradox.

वास्तविकता के साथ जीना एक बहुत अच्छी तरकीब है, यह आपको जबरदस्त आज़ादी देता है और वास्तविकता के साथ जीने से आपकी आत्मा के अणुओं की संरचना बदल जाती है क्योंकि आप अब किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करते. जो एक अजीब विरोधाभास है.

Multiply it by infinity and take it to the depths of forever, and you will still have barely a glimpse of what I’m talking about.

इसे अनंत से गुणा करें और अनंत की गहराई तक ले जाएं, और फिर भी आपको मुश्किल से ही उसकी एक झलक मिलेगी जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं.

Try not to be concerned with it. It’s a spiritual thing. Don’t look for the results, don’t live in the payoff. Live in the moment which is a spiritual principle. Live in the moment and let the results take care of themselves. It’s in the hands of God. The rest is all ego. And I have learned, over the years, it’s got nothing to do with me. As my life is none of my business.

इससे चिंतित न होने का प्रयास करें. यह एक आध्यात्मिक बात है. परिणाम की तलाश न करें, लाभ में न जियें. वर्तमान में जियें जो एक आध्यात्मिक सिद्धांत है. वर्तमान में जियें और परिणामों को स्वयं ही ठीक होने दें. यह ईश्वर के हाथ में है. बाकी सब अहंकार है. और मैंने वर्षों से सीखा है कि इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. क्योंकि मेरा जीवन मेरा कोई काम नहीं है.

Once you accept the fact that there’s nothing to fear, you drill into the primal oil well. I believe when we do things without fear, we can do anything. As long as you don’t worry about the consequences.

एक बार जब आप इस तथ्य को स्वीकार कर लेते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है, तो आप मूल तेल के कुएं में खुदाई कर लेते हैं. मेरा मानना ​​है कि जब हम बिना किसी डर के काम करते हैं, तो हम कुछ भी कर सकते हैं. जब तक आप परिणामों के बारे में चिंता नहीं करते.

I learn poetry, learn text, and that really keeps you alive.

मैं कविता सीखता हूं, पाठ सीखता हूं और यह वास्तव में आपको जीवित रखता है.

I am a bit of a solitude person – a solitary personality. I like being on my own. I don’t have any major friendships or relationships with people.

मैं एकांतप्रिय व्यक्ति हूँ – एकांतप्रिय व्यक्तित्व. मुझे अकेले रहना पसंद है. मेरी लोगों के साथ कोई बड़ी दोस्ती या रिश्ता नहीं है.

I’m very much a loner. I don’t like long relationships with people and I always keep people at a distance.

मैं बहुत अकेला रहता हूँ. मुझे लोगों के साथ लंबे समय तक संबंध रखना पसंद नहीं है और मैं हमेशा लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ.

I love life because what more is there?

मैं जीवन से प्रेम करता हूं, क्योंकि इससे अधिक और क्या चाहिए ?

My life turned out to be beyond my greatest dreams.

मेरा जीवन मेरे महानतम सपनों से भी परे निकला.

I never cling on to hope or certainty. They’re the enemies of peace.

मैं कभी भी आशा या निश्चितता से नहीं चिपकता. वे शांति के दुश्मन हैं.

I’m more and more convinced that life is a dream. What has happened to me is surely a dream.

मैं धीरे-धीरे इस बात पर यकीन करने लगा हूँ कि जीवन एक सपना है. मेरे साथ जो हुआ है, वह निश्चित रूप से एक सपना है.

By giving up ‘the need’ and ‘the want’, things begin to happen for you.

‘आवश्यकता’ और ‘इच्छा’ को त्यागने से, चीजें आपके लिए घटित होने लगती हैं.

Relish everything that’s inside of you, the imperfections, the darkness, the richness and light and everything. And that makes for a full life.

अपने अंदर की हर चीज़ का आनंद लें, खामियाँ, अंधकार, समृद्धि और प्रकाश और सब कुछ. और इससे एक पूर्ण जीवन बनता है.

We are dying from overthinking. We are slowly killing ourselves by thinking about everything. Think. Think. Think. You can never trust the human mind anyway. It’s a death trap.

हम बहुत ज़्यादा सोचने से मर रहे हैं. हम हर चीज़ के बारे में सोचकर धीरे-धीरे खुद को मार रहे हैं. सोचो। सोचो। सोचो। वैसे भी आप इंसानी दिमाग पर कभी भरोसा नहीं कर सकते. यह मौत का जाल है.

Non-expectation and acceptance. Because expectation leads to resentment and depression, so I have no expectations.

अपेक्षा न रखना और स्वीकार करना. क्योंकि अपेक्षा करने से नाराजगी और अवसाद पैदा होता है, इसलिए मेरी कोई अपेक्षा नहीं है.

No expectations. Ask nothing, expect nothing and accept everything, and life is very well.

कोई अपेक्षा न रखें. कुछ न मांगें, कुछ न अपेक्षा करें और सब कुछ स्वीकार करें, और जीवन बहुत अच्छा रहेगा.

Keep low expectations and life gets pretty good.

उम्मीदें कम रखें और जीवन बहुत अच्छा हो जाएगा.

If you have high expectations you’re going to get resentments and all kinds of tension.

यदि आपकी अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं तो आपको असंतोष और सभी प्रकार का तनाव मिलेगा.

Beware the tyranny of the weak. They just suck you dry.

कमज़ोरों के अत्याचार से सावधान रहें. वे आपको पूरी तरह से चूस लेंगे.

Life’s too short to deal with other people’s insecurities.

दूसरों की असुरक्षाओं से निपटने के लिए जीवन बहुत छोटा है.

When you’re younger you have so many ideas about yourself; everything is important. It’s not when you look back, nothing is that important. It’s only life.

जब आप युवा होते हैं तो आपके पास अपने बारे में बहुत सारे विचार होते हैं; सब कुछ महत्वपूर्ण होता है. जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं लगता. यह केवल जीवन है.

When you’re young, you’re very insecure. And if I could learn, if I could revisit my own past I could say to myself, don’t think too much, just get on and do it.

जब आप युवा होते हैं, तो आप बहुत असुरक्षित होते हैं. और अगर मैं सीख सकता, अगर मैं अपने अतीत को फिर से देख सकता तो मैं खुद से कह सकता, ज़्यादा मत सोचो, बस आगे बढ़ो और काम करो.

When I was a young guy, I knew everything. Now I know very little. I know less and less as the time goes on.

जब मैं जवान था, तो मुझे सब कुछ पता था. अब मुझे बहुत कम पता है. समय बीतने के साथ-साथ मुझे कम जानकारी होती जा रही है.

You look closely enough, you’ll find that everything has a weak spot where it can break, sooner or later.

यदि आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि हर चीज में एक कमजोर जगह होती है, जहां वह देर-सवेर टूट सकती है.

Sachin

Question : हम वास्तव में क्या कर सकते हैं ?

What can we really do ?

हम इस उम्मीद के साथ जीते हैं कि हमारे माता-पिता, दोस्त और दुनिया हमें समझे और हमारा समर्थन करे

_यह समझने की अपेक्षा [ expectation ] रखना सबसे बड़ी गलती है जो हम कर सकते हैं.

_सच तो यह है कि कोई भी ठीक-ठीक यह नहीं समझ सकता कि हम क्या करना चाहते हैं और कैसे अपना जीवन जीना चाहते हैं.

_लोगों को केवल इस बात का अंदाजा हो सकता है कि जीवन में चीजों को कैसे करना है.

_यह उम्मीद न करें कि दुनिया भी आपका समर्थन करेगी.

हम वास्तव में क्या कर सकते हैं ? What can we really do ?

हम सभी को आत्म-जांच [ self inquiry ] की अपनी यात्रा या हमारे पास जो भी लक्ष्य [ whatever goals ] हैं उन्हें जीने की कोशिश अकेले ही शुरू करनी होगी.

_और यदि हम स्वयं के प्रति ईमानदार हैं और जो हम करना चाहते हैं उसे करने के लिए सभी प्रयास करते हैं.

तो दो चीज़ें होंगी: —-

पहली: आप दुनिया की मान्यता नहीं तलाशेंगे क्योंकि आप जो करना चाहते हैं उसे करने में बहुत व्यस्त हैं.

you will not seek validation of the world because you are too busy doing what you want to do.

दूसरा है: दुनिया अनुशासन का सम्मान करती है.

यदि आप लंबे समय तक बहुत जुनून के साथ कुछ करते हैं, तो दुनिया यह देखेगी कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो आपके लिए सार्थक है.

इससे उन्हें अपने जीवन के लक्ष्य [ life goals ] दिखेंगे.

_वे अभी भी समझ नहीं पाएंगे कि आप क्या कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वे स्वीकार करेंगे कि _आप क्या कर रहे हैं _क्योंकि वे आपका दिल और जुनून देखेंगे.

इसलिए, यदि आप कुछ करना चाहते हैं, तो करें. भले ही कोई आपको समझे या न समझे.

so, if you want to do something, do it. Whether someone understands you or not.

एक असाधारण इंसान और एक साधारण इंसान में कोई अंतर नहीं है – सिवाय इसके कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग कैसे करते हैं.

एक प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी ऊर्जा का उपयोग करता है और एक सामान्य व्यक्ति इसे अत्यधिक सोचने और शिकायत करने में बर्बाद कर देता है.

There is no difference between an extraordinary human and the an ordinary – except how they utilise their energy.

A genius use the energy and an ordinary person waste it in overthinking and complaining.

हम अक्सर दूसरों पर दोष मढ़ते रहते हैं.

_ हम अपने जीवन की जिम्मेदारी किसी और को सौंप देते हैं.

_ हम ऐसा इसलिए कहते हैं ..क्योंकि हमारे दुख के लिए हमारे माता-पिता, मित्र, समाज, व्यवस्था, शिक्षा, मन जिम्मेदार हैं.

_ दोष किसी और पर मढ़ने के लिए ..हमारे पास सैकड़ों बहाने और तर्क हैं.

_ लोग अक्सर कहते हैं: अगर यह स्थिति बदल जाए या कोई निश्चित तरीके से व्यवहार करना शुरू कर दे, तभी मुझे खुशी होगी.

_ लोग एक के बाद एक बहाने बनाते हैं और एक काम करने के अलावा ..कुछ भी और सब कुछ करते हैं: सिवाय “जीवन की जिम्मेदारी लेना”

_ हम काम तो करते हैं ..लेकिन अपने कार्यों के परिणामों को अपने ऊपर नहीं लेना चाहते.

_ अगर हम यह कहने लगें: यह मेरा जीवन है और मैं अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं.

_ केवल इस कथन [statement] से 70-80% कष्ट दूर हो जाते हैं और बाकी स्वयं पर काम करने [ working on the self] से पूरा हो जाता है.

_ जब तक हम दुनिया को दोष देते रहेंगे,

_हम खुश या शांतिपूर्ण नहीं रह सकते.

_ सब कुछ कथन [statement] से शुरू होता है:

_ “मैं अपने जीवन के लिए जिम्मेदार हूं.”

इस सदी और इस पीढ़ी की सबसे बड़ी ख़ामी है परस्पर भरोसा खो देना.

_हम किसी पर भरोसा नहीं करते.

_न माँ-बाप अपनी संतान पर न संतान अपने माँ-बाप पर.

_सहोदर अपने ही भाई-बहन पर भरोसा नहीं करता.

_बीवी को शौहर पर भरोसा नहीं न शौहर को अपनी बीवी पर.

_मित्र मित्र पर भरोसा नहीं करता.

_भरोसे की इस कमी से समाज टूट रहा है.

_मैं सभी पर भरोसा कर लेता हूँ तो लोग कहते हैं, “आप बुद्धू हो”.. पर मैं करता हूँ.

_मैंने जिसे अपना माना ..वह कितना भी मेरा भरोसा तोड़े ..पर मैं नहीं तोड़ता..!!

यदि आप उन सभी लोगों के जीवन को देखें _जिन्होंने आपको किसी न किसी तरह से प्रेरित [inspired] किया है – तो उन सभी में एक समान [common ] बात है.

_ वे जीवन के सामान्य परिभाषित तरीके से बंधे नहीं रहे. [They did not stick to the normal defined way of life.]

_वे बहुमत के विचार से सहमत नहीं थे. [They didi not settle with the idea of majority.]

_उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी की सुरक्षा के जाल को तोड़ने का फैसला किया. [They chose to break the net of safety of everyday life.]

–यदि आप चाहते हैं कि जीवन आपके साथ घटित हो, तो आपको जीवन को चुनना होगा. [If you want life to happen to you, then you need to choose life.]

_ आपको अपने दिल की पुकार सुनने की ज़रूरत है. [You need to listen to the call of your heart.]

_दिल की पुकार सुनने का मतलब दुनिया भर में घूमना या यात्रा करना नहीं है. [Listening to the call of heart doesn’t mean wandering or traveling around the world.]

_बहुत से लोग स्वतंत्रता को पर्यटन स्थलों की यात्रा समझने में भ्रमित कर देते हैं. [Lot of people confuse freedom with traveling to touristy spots.]

_आप जो हैं उसके प्रति पूरी तरह सच्चा होना ही स्वतंत्रता है. [Freedom is being fully truthful to who you are.]

_स्वतंत्रता का अर्थ है अपनी क्षमताओं का सम्मान करना. [Freedom means honouring your abilities.]

_ख़ुशी का एक रहस्य है – अपना सब कुछ इस विचार पर लगा देना कि “आप कौन हैं.” [There is one secret- to happiness – to give your everything to the idea of “who you are”.]

_आप कैसे जीना चाहते हैं, इसकी प्रक्रिया में अपना सारा ज्ञान और प्रयास लगाना. [Putting all your knowledge and effort into the process of how you want to live.]

— हम जो जीवन जीना चाहते हैं उसकी कीमत हमें चुकानी होगी. [We have to pay the price for the life we want to live.]

_ आपको नजारे का आनंद लेना है तो आपको पहाड़ पर चढ़ना होगा, पहाड़ पर चढ़ने के लिए आपका स्वस्थ शरीर होना जरूरी है, स्वस्थ शरीर के लिए आपको रोज सुबह उठना होगा- कुछ घंटे व्यायाम, दौड़, ध्यान में लगाएं. [You want to enjoy the view, then you have to climb the mountain, to climb the mountain, you need to have a healthy body, for a healthy body, you need to wake up every morning- put some hours of exercise, running, meditation.]

_ आप जो कुछ भी करते हैं वह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कैसे जीना चाहते हैं. [Everything you do count towards how you want to live.]

_ जब तक आप जीवन के बाहरी आराम से बाहर नहीं जाते, तब तक आपको आंतरिक आराम नहीं मिलेगा. [As long as you don’t go out of outer comfort of life, inner comfort won’t happen to you.]

चुनाव पूरी तरह आपका है, मेरे दोस्त. [The choice is entirely yours, my friend.]

मेरे विचार और मेरा विवेक मेरे साथी हैं और मैं उन्हें किसी भी दबाव में नहीं छोड़ने वाला. My thoughts and my conscience are my companions and I am not going to leave them under any pressure.

जीवन में जो कुछ भी होता है उसे स्वीकार करना जरूरी है.

_ चाय, फूल और सम्मान सब स्वीकार करें.

_ लेकिन क्या हम यह स्वीकार कर सकते हैं कि जब कोई दरवाजा नहीं खोले, जब रास्ता कंटीला हो और लोग आपको संदेह की नजर से देखें.

_ मैं अपमान और सम्मान दोनों का हकदार नहीं हूं ..या मैं दोनों को जीवन यात्रा के हिस्से के रूप में स्वीकार करता हूं.

_ ऐसी स्वीकृति [Such acceptance] तब हो सकती है जब कोई हर समय पूरी तरह से जागरूक [totally aware] हो.

_ हम एक पल के लिए यह समझ [understanding] खो देते हैं और जीवन की इच्छा [ life’s desire] हावी हो जाती है.

_ और अगर इच्छाएं पूरी हो जाएं तो दुनिया अच्छी हो जाती है और अगर इच्छाओं पर ध्यान न दिया जाए तो बुरी हो जाती है.

_लोग हमारे मित्र बन जाते हैं यदि वे हमारी भावना और विचारों से मेल खाते हैं. [People become our friends if they match with our vibe and ideas.]

_और यदि वे हमारी बातों से सहमत नहीं हैं, तो हम उन्हें अब पसंद नहीं करते हैं.

— संक्षेप में, जीवन संघर्षों की एक शृंखला बन जाता है. [In a nutshell, life becomes a series of conflicts.]

_ जब हम जीवन की सभी घटनाओं को एक ही दिल से स्वीकार करना शुरू करते हैं, तो जीवन आसान हो जाता है, और आगे बढ़ना सांस लेने की तरह सहज हो जाता है.

जब कुछ अनुभव होते हैं, तो मुझे अक्सर आश्चर्य होता है कि _ मैंने दुनिया से ऐसी अच्छाई पाने और जो भी कुछ मुझे मिला है _ उसके लिए _क्या अच्छा किया है.

_ दूसरी ओर, मैंने इसे महत्व देना बंद कर दिया है _ जब लोग मेरे कामों के बारे में कठोर शब्द कहते हैं तो _मैंने परेशान होना बंद कर दिया है.

_ मुझे लगता है कि _मुझे किसी भी अनुभव का कोई मतलब निकालने की जरूरत नहीं है.!!

भगवत गीता कहती है – “अजानना अवतरम जनना”

_हमारे सभी दुखों का कारण भ्रम है.

_ और स्वयं का ज्ञान ही शांति है.

_ जब हम अपने आप को अंदर और बाहर समझते हैं, तो सभी संघर्ष एक साथ रह सकते हैं और अशांति नहीं होगी.

_और जीवन बिल्कुल एक नाटक बन जाता है.

_ इसलिए ज्ञान की तलाश करो ..शांति की नहीं.

_ एक बार जब हम जान जाते हैं, तो शांति पहले से ही मौजूद है.

—– हम उन चीज़ों को पकड़कर रखते हैं ..जो बदलने वाली हैं.

_हम लोगों से एक निश्चित तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद करते हैं.

_हम चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें समझें, लेकिन हम दूसरों को या यहां तक ​​कि खुद को समझने की कोशिश नहीं करते.

_ जब तक आप अपना ध्यान खुद पर केंद्रित नहीं करते और खुद पर काम करना शुरू नहीं करते, तब तक निराशाओं का सिलसिला बना रहेगा.

——हम कष्ट क्यों सहते हैं ?

_ हमें इस बात से कष्ट नहीं होता कि लोग हमारे साथ कैसा व्यवहार करते हैं या दुनिया हमारे साथ कैसा व्यवहार करती है.

_ हम सोचते हैं कि ये सही है.. ..लेकिन हमारे दुखों के लिए कोई और नहीं ..बल्कि हमारा भ्रम जिम्मेदार है.

_ हमें इसलिए दुख होता है क्योंकि हम गलत [misunderstand] को सही समझते हैं.

_हम पीड़ित [victim] हैं ..क्योंकि इसके लिए हमने अपना मन बना लिया है.

_हम पीड़ित हैं पर औरो को दोष देते रहते हैं.

_ और बाहर खुश दिखने के लिए पीड़ितों और धोखेबाज़ों की भूमिका निभाना पसंद करते हैं.

मैंने शायद ही कभी किसी को यह कहते हुए देखा हो कि “सब कुछ ठीक है”

_ वाक्य “सब कुछ ठीक है” के बाद हमेशा परंतु आता है.

_हर कोई कहता है “मैं ठीक हूं लेकिन कुछ तो है जो ठीक नहीं है.” – वो क्या है ?

_पूरा समाज इन्हीं प्रकार के व्यक्तियों से बना है और ये व्यक्ति कोई और नहीं ..बल्कि मैं और आप हैं.

_हम शांति और कई बड़े शब्दजाल के बारे में बात करते हैं.

_यदि प्रत्येक व्यक्ति के मानसिक मानस में गुटनिरपेक्षता और संघर्ष है तो ..शांति कैसे हो सकती है.

_यदि व्यक्तिगत शांति नहीं है तो ..सामाजिक शांति भी नहीं हो सकती.

_हम सद्भाव लाने और लोगों को एक साथ लाने के लिए कई कार्यक्रम और त्यौहार मनाते हैं.

_पार्टी ख़त्म होने के बाद ..शायद ही किसी को शांति मिलती है.

_चूंकि हर कोई किसी और की तरह है,

_आंतरिक संघर्ष होने पर ..हमें बाहरी शांति नहीं मिल सकती है.

_ यही कारण है कि संसार वैसा है ..जैसा वह है.

_ लोग बाहरी जीवन को सजाकर ..अपने आंतरिक जीवन को छिपाने की कोशिश करते हैं.

_ लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि बाहरी का निर्माण आंतरिक से ही होता है.

_ वास्तव में कोई आंतरिक और बाह्य नहीं है.

_हम अपने परिवार, दोस्तों, साथियों, समाज, पड़ोसी के साथ सामंजस्य [harmony] बिठाने में सक्षम नहीं हैं.

_हम बस संदिग्ध दोषियों पर अपना गुस्सा उतारने का एक अवसर चाहते हैं.

_सड़कों पर हम दूसरों से डरते हैं, बंद कमरों में हम अपने आप से डरते हैं.

_हम कहते हैं कि पूरी दुनिया जुड़ी हुई है और एक बड़ा परिवार है _लेकिन हमारे पास सीमाएँ हैं.

_ सामाजिक संघर्ष एक ऐसी चीज़ है ..जिस पर कम से कम हम सभी ..थोड़ी बहस के साथ सहमत हो सकते हैं.

_ एक ऐसा द्वंद्व है ..जिसके बारे में बहुत कम लोग ही चिंतन करते हैं.

_ वह संघर्ष प्रकृति के साथ ही संघर्ष है.

_हर दिन हम यह सोचकर प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाने की कोशिश करते हैं कि ..कोई नहीं देख रहा है.

_हम प्रकृति के नियमों के साथ नहीं जी रहे हैं.

_हालाँकि हमारे लिए यह समझना कठिन है कि प्रकृति क्या है.

_शायद प्रकृति से कुछ भी बाहर नहीं रखा गया है, शायद सब कुछ इसमें शामिल है.

अगर एक दिन, हमें एहसास हो कि यह पागलपन भरी व्यस्तता केवल पैसा कमाने और उन लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से है ..जो कभी हमारे नहीं थे ..बल्कि किसी और द्वारा हम पर थोपे गए थे.

_ एक ऐसी दुनिया में जो रात-दिन आपको अपने हिसाब से चलाने की पूरी कोशिश कर रही है.

_ हम क्या करेंगे ?

_क्या हम वह जीवन जीना जारी रखेंगे ?

_ या क्या हम उस जीवन को जीना जारी रखेंगे और उसमें अर्थ ढूंढेंगे और खुद को समझाएंगे या हम यह सब छोड़ देंगे ..क्योंकि यह एक बड़ा झूठ है और फिर से एक बच्चे की तरह तलाश करना शुरू कर देंगे ?

_ कोई भी इंसान जो इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता, उसे बस अपने लिए चीजों को आसान बनाना बंद कर देना चाहिए.

_ उसे अपने विवेक का अनुसरण करने दें, जो उसे पुकारता है: “तुम स्वयं बनो !”

_अभी आप जो कुछ भी कर रहे हैं, सोच रहे हैं, इच्छा कर रहे हैं, वह सब आप नहीं हैं.”

_ प्रत्येक आत्मा दिन और रात में इस पुकार को सुनती है और खुशी की उस डिग्री के उत्साह से कांपती है ..जो अनंत काल से उन लोगों के लिए तैयार की गई है ..जो अपनी सच्ची मुक्ति के बारे में सोचेंगे.

_ हालाँकि, किसी भी आत्मा को इस खुशी को प्राप्त करने में मदद करने का कोई तरीका नहीं है, जब तक कि वह दूसरों की राय और भय की जंजीरों में जकड़ी हुई है.

_और ऐसी मुक्ति के बिना जीवन कितना निराशाजनक और अर्थहीन हो सकता है.

_ प्रकृति में उस आदमी से बड़ा कोई दुःख या दुर्भाग्य नहीं है ..जिसने अपनी प्रतिभा को नजरअंदाज कर दिया है..

..और जो कभी दाहिनी ओर, कभी बायीं ओर, कभी पीछे की ओर, अब किसी भी दिशा में झुकता है.

जब आप दूसरों से सम्मान चाहते थे तो आपने अपना अपमान किया. [You insulted yourself when you wanted respect from others.]

_जिस क्षण आपने किसी और से प्रेम की इच्छा की, उसी क्षण आपने स्वयं को त्याग दिया. [You abandoned yourself the moment you desired love from someone else.]

_अपमानित और त्यागा हुआ वही व्यक्ति हो सकता है जिसके अंदर सच्चा प्यार नहीं है. [Only the one can be insulted and abandoned who does not have true love inside.]

जो बिना मांगे मिले उसे ग्रहण करो और दो क्योंकि यह तुम्हारा स्वभाव है और जब दो तो पूर्णविराम समझो, भूल जाओ कि तुमने कुछ दिया है. [Receive that comes without asking and give because it is your nature. And when you give, consider it a full stop, forget you have given something.]

जीना ही जीवन का लक्ष्य है और इसे जीने का खेल-खेलने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है. [Living itself is the goal of life and what better way to live it than playfulness.]

_ मेरे जीवन में सबसे ख़ूबसूरत और गहरी चीज़ें तब घटित हुईं जब मैंने जीवन को गंभीरता के साथ नहीं बल्कि एक खेल के रूप में जीया. [Most beautiful and profound things happened in my life when I have lived life as a play and not with seriousness.]

_ गंभीरता से जीना सबसे बुरी बात है. [Living seriously is worst thing]

_ यह गलत समझ और विकृत विचारों के अलावा कुछ नहीं लाता है. [It brings nothing but wrong understandings and twisted ideas.]

_ केवल चीज़ें बनाने के लिए जीवन जीना भविष्य का उद्देश्य नहीं है. [Living life just to make things is not a purpose for the future.]

_ जब हम जीवन को खेल की तरह जीते हैं. [When we live life as play.]

_ हम एक समय में केवल एक क्षण खेलते हैं, बिना किसी इच्छा के और इसलिए चंचल जीवन साक्षीभाव का एक तरीका है. [We just play one moment at a time, desiring nothing and hence a life of playfulness is a way of witnessing.]

_ इससे जीवन जादुई ढंग से बदल जाता है. [This change life magically.]

_ वर्तमान का विवरण उपलब्ध हो जाता है और एक पूरी दुनिया एक ही गली में विद्यमान होने लगती है. [The details of present become available and a whole world start existing in a single street.]

_ फिर आप जहां भी हों, वह स्थान ईश्वर का राज्य है[Then wherever you are, that place is kingdom of God.]

आप क्यों चाहते हैं कि जो आपको पसंद आया ..वो दूसरों को भी अच्छा लगे,

_ या जो आपको घटिया, बेहूदा लगा ..वो दूसरे को भी ऐसा ही लगे.

_ पसंद, नापसंद अपनी अपनी होती है, और ये इंसान के इंट्रेस्ट, मिजाज़ पर डिपेंड करती है.

_ किसी को कोई फिल्म सीरीज अच्छी लगी और आपको नहीं ..तो क्या हुआ.

_ सबका अपना अपना मानसिक स्तर भी तो होता है.

_ कोई हमारी तरह नहीं सोचता.. तो क्या वो हिकारत से देखे जाने का हकदार है.

_ नहीं ऐसा नहीं है.

_ सिद्धान्त तो हम सहिष्णुता का बघारते हैं, लेकिन भाव हमारा यह होता है कि सब लोग वैसे ही सोचें, जैसे हम सोचते हैं और जब भी कोई हमसे भिन्न प्रकार से सोचता है ..तब हम उसे बर्दाश्त नहीं कर सकते.

_ जो दूसरे कर रहे हैं ..वही हम आप जैसे लोग करने लगेंगे तो ..क्या फर्क बचेगा ..उनमें और हम में..!!

_ हमें अपने को सरल और सहज रखना होगा.

_ हम अपने अंदर नफरत, हिकारत या दूसरों के लिए हीन भावना नहीं रख सकते.

_ अगर आपके अंदर ये सब है तो ..आप कुछ भी हो सकते हैं ..अच्छे इंसान नहीं..!!

जब धंधा और स्वास्थ्य अच्छा चल रहा हो तो..

_ इन्सान को ‘फील-गुड’ होने लगता है.

_ घर में प्रेम-व्यवहार हो तो और भी अच्छा लगता है,

_ लेकिन शांत जल में कोई-न-कोई कंकड़ टपक ही जाता है और लहरों में हाहाकार मच जाता है.

_ यह समझना बड़ा मुश्किल है कि जीवन में मधुरता कैसे बनी रहे ?

_ अच्छा करो तो बुरा वापस आता है और अगर बुरा करो तो बुरा वापस आना ही है.

_ इसका एक अर्थ यह निकलता है कि अच्छाई ‘वन वे ट्रेफिक’ है,

_ जैसे गुलाब के पौधे की कलम इस उम्मीद से जमीन में खोंसो कि एक दिन इसमें गुलाब के खुशबूदार फूल होंगे,

_ रोज खाद-पानी दिया..

_ वह बढ़ा और जंगली काँटेदार पौधा निकल गया,

_गुलाब का फूल कभी उगा ही नहीं..!!

हम अपने शरीर में घर जैसा महसूस क्यों नहीं करते ?

_ बस बैठना, सांस लेना और आराम करना इतना मुश्किल क्यों है – बिना किसी बाहरी मदद की ज़रूरत के ?

_ तनाव सिर्फ़ मांसपेशियों में नहीं होता.. यह एक मानसिकता है, एक आदत.. पर्याप्त न होने या तैयार न होने का डर..

_ तनाव का मतलब है कि आप पहले से ही कल में जी रहे हैं,

_ ऐसे भविष्य का अभ्यास कर रहे हैं जो अभी तक नहीं हुआ है..

_ या इसका मतलब है कि आप अभी भी कल को घसीट रहे हैं.. जिसे आपने कभी पूरी तरह से नहीं जिया –

– ऐसे अजीवित पल जो लंबे समय तक बने रहते हैं और पूरे होने की मांग करते हैं.

_ कोई भी अनुभव जो पूरी तरह से नहीं जीया गया है, आपके अंदर चक्कर लगाता रहेगा, और पूछता रहेगा—“मुझे खत्म कर दो.. मुझे जियो.. मुझे आगे बढ़ने दो”

_ इसलिए हमें शरीर से शुरुआत करनी चाहिए.

_ रुकें.. अपना ध्यान अंदर की ओर ले जाएँ.

_ पूछें: मैं कहाँ जकड़ रहा हूँ ? जबड़े में ? कंधों में ? छाती में ?

_ फिर धीरे से वहाँ जाएँ.. अपनी आँखें बंद करें..

_ अपने शरीर के उस हिस्से से एक दोस्त की तरह बात करें:

_ “अब तुम छोड़ सकते हो.. “मैं यहाँ हूँ”

_ अगर आप अपने शरीर के साथ प्यार से पेश आते हैं, तो यह आपकी बात सुनता है.. आखिरकार, यह आपका है.

_ जब शरीर भरोसा करना शुरू करता है, तो आप देखेंगे कि कुछ और भी नरम हो जाता है- “मन’

_ लेकिन मन से शुरुआत न करें.. यहीं पर हममें से ज़्यादातर लोग असफल हो जाते हैं.

_ हम बीच से तूफ़ान को शांत करने की कोशिश करते हैं.. किनारे से शुरू करें.. शरीर से शुरू करें.

_ जब शरीर आराम करना सीखता है, तो मन उसका अनुसरण करता है और जब मन शांत होने लगता है, तो दिल खुल जाता है- यह भी सांस लेना शुरू कर देता है.

_ मेरे दोस्त, आराम करना छोड़ देने की कला है. बलपूर्वक नहीं, बल्कि प्रेम से.!!

— इसे याद रखें:

_ हमें एक समय में सिर्फ़ एक पल ही दिया जाता है.

_ इसलिए अच्छी तरह से जीने के लिए, हमें अपने पूरे जीवन का पता लगाने की ज़रूरत नहीं है – – हमें बस यह जानना है कि यहाँ और अभी पूरी तरह से कैसे मौजूद रहना है.

_ अगर हम इस पल का ध्यान रख सकते हैं, तो बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा.!!

NOTES :

“मेरा शरीर जाग चुका है, मैं उसकी सुखद गति में हूँ”

“हम हर चीज़ की शुरुआत मन से करते हैं, इसलिए असफल हो जाते हैं…जबकी शुरुआत शरीर से होनी चाहिए”

“मन को बदलने की चाह, मन से ही करना – एक चक्रव्यूह है :

– “शरीर से शुरू करो, सांस से शुरू करो – मन स्वयं पिघलने लगेगा”

हम सबकी ज़िंदगी किसी बड़ी चीज़ के होने का इंतज़ार करती रहती है.

_ कोई महान उद्देश्य, कोई दिव्य संकेत..

_ हम सोचते रहते हैं कि मैं ये करूँगा और फिर ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी.

_ इसके बाद, मैं अपनी मर्ज़ी से जी पाऊँगा.

_ लेकिन सच्चाई यह है कि यह सब पहले से ही यहाँ है.

_ पवित्रता किसी पहाड़ी गुफा या मंदिर के अनुष्ठान में नहीं है.

_ यह इस बात में है कि हम अपने हाथ कैसे धोते हैं, हम अपनी चाय कैसे बनाते हैं और बर्तन कैसे धोते हैं या हम कैसे जागते और सोते हैं, हम कैसे चलते हैं.

_ हमें अधिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, हमें अधिक उपस्थिति की आवश्यकता है.

_ यही पूरा अंतर है.. वही क्रिया – जागरूकता के साथ – पूजा बन जाती है.

_ जागरूकता के बिना, यह केवल दोहराव है – एक ऑटोपायलट.

_ हममें से ज़्यादातर लोग नींद में जी रहे हैं, यहाँ तक कि जब हम जाग रहे होते हैं,

_ लेकिन जिस पल आप अपनी साँस वापस ले लेते हैं, जिस पल आप यहाँ होते हैं, यहाँ तक कि कंबल मोड़ना भी एक तरह की प्रार्थना बन जाती है.

_ आपको कोई चोगा पहनने या संस्कृत में मंत्रोच्चार करने की ज़रूरत नहीं है.

_ आपको बस वहाँ होना चाहिए,, पूरी तरह से..

_ यही चीज़ किसी चीज़ को पवित्र बनाती है.

_ आप क्या कर रहे हैं, यह नहीं बल्कि आप इसे कैसे कर रहे हैं.. शांति के साथ, सतर्कता के साथ.. यही असली शिक्षा है.

_ आप अपना पूरा जीवन एक ही काम करते हुए जी सकते हैं – लेकिन अगर आप बदलते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.

_ जब आपका कार्य आपके ध्यान के साथ एक हो जाता है, तो आपको सत्य की तलाश करने की ज़रूरत नहीं होती.

_ यह आपके दैनिक जीवन में चमकने लगता है.!!

ये किसी किताब से नहीं, बल्कि मेरी अपनी भटकती हुई ज़िंदगी से सीख हैं…

_ मुझे क्या छोड़ना पड़ा, मुझे क्या स्वीकार करना पड़ा, और आख़िरकार मुझे वो क्या बनाता है जो मैं हूँ-

_ मैंने बार-बार यह देखा है कि चुप रहना कमज़ोरी नहीं—यह ताक़त है.

_ जब मैं बहस करना या खुद को सही ठहराना बंद कर देता हूँ, तो खामोशी मेरे लिए बोलती है.

_ मैं अब कुछ साबित करने के लिए नहीं जीता.

_ मुझे पता है कि यही मेरा इरादा है और अगर दूसरा इसे नहीं देख पा रहा है, तो मैं चाहे कितनी भी कोशिश कर लूँ, मैं उसे यह नहीं दिखा पाऊँगा.

_ मैं किसी को यह समझाने की कोशिश नहीं करता कि मैं अच्छा हूँ.

_ मेरा सच कोई विज्ञापन नहीं, एक खुशबू है—चाहे महसूस हो या न हो.

_ मैंने उन चीज़ों के लिए अपराधबोध पालना छोड़ दिया है.. जो कभी मेरी थीं ही नहीं.

_ उस बोझ को लेकर क्यों चलूँ.. जो मैंने बनाया ही नहीं ?

_ जो मैंने तोड़ा ही नहीं, उसे मैं ठीक नहीं करता या उसका दोष अपने ऊपर नहीं लेता.

_ कभी-कभी प्यार और परवाह का मतलब होता है.. दूसरों को उनके अपने अँधेरे से रूबरू होने देना.

_ मैं अपनी कीमत दिखाने के लिए संघर्ष नहीं करता..

_ अगर यह खुद नहीं चमकती, तो कोई भी तर्क इसे कभी ज़ाहिर नहीं कर पाएगा.

_ मैं दूसरों को अपनी पसंद खुद चुनने देता हूँ..

_ उनका रास्ता उनका है, मेरा अपना है..

_ मैं बस इतना कर सकता हूँ कि बिना दोष लिए उनके साथ रहूँ.

_ और अब, मैं बस एक ही बात पूछता हूँ—क्या मैं उस व्यक्ति का सम्मान कर सकता हूँ.. जिसे मैं आईने में देखता हूँ ?

_ जब जवाब हाँ होता है, चाहे थोड़ा सा ही क्यों न हो, तो मुझे पता है कि मैं सही रास्ते पर चल रहा हूँ.

_ आज़ादी दुनिया को समझाने में नहीं है… “आज़ादी खुद के साथ शांति से रहने में है” – Sachin

“लोग क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे” ये कहना सबसे बड़ा झूठ है जो हम खुद को धोखा देने के लिए खुद से कहते हैं.

_ हमें लगता है कि लोग हमें देख रहे हैं, हमारे फैसलों को आंक रहे हैं, हमारे कदमों को नाप रहे हैं.. – पर यहाँ किसी को परवाह नहीं.

_ हर कोई अपने संघर्षों में खोया हुआ है, अपने मुखौटे पहने हुए व्यस्त है. _ सबसे बड़ा भ्रम कभी बाहर नहीं होता- वो हमारे अंदर होता है, हम खुद अपनी जेल बन गए हैं. _ हम नाच सकते थे, हम गा सकते थे, हम बेखौफ, खामोश, जैसा हमारा दिल चाहता, जी सकते थे. _ लेकिन हम ऐसा नहीं करते और दुनिया की नज़रों को दोष देते हैं.

_ आज़ादी हमेशा हमारी पहुँच में होती है, लेकिन हम उस इजाज़त का इंतज़ार करते रहते हैं जो कभी नहीं मिलती.

_ एक दिन, शायद बहुत देर हो चुकी होगी, हम सब देख लेंगे: कोई नहीं देख रहा था.

_ और उस पल, अफ़सोस डर से भी ज़्यादा भारी लगेगा..

_ तो आइए हम दर्शकों के लिए न जिएं.

_ आइए हम किसी और के होने का दिखावा करके न जिएं.

_ आइए हम कच्चे तौर पर जिएं, आइए हम सच्चे तौर पर जिएं, आइए हम अभी जिएं.

_ आइए हम अपनी सच्चाई जिएं- भले ही उसमें खामियां हों, लेकिन अगर आप अपनी यात्रा के प्रति ईमानदार हैं, तो वो आपको सही रास्ते पर ले आएगी.

_ क्योंकि एक ऐसी दुनिया में, जो हमें लगातार किसी और में बदलने की कोशिश कर रही है, स्वयं बने रहना ही सबसे बड़ा साहस है और यही वास्तविक यात्रा है.!!

-SACHIN

जब आप स्वयं को पूर्णतः महसूस करने लगते हैं, तो सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

_ समस्याएं तभी उत्पन्न होती हैं जब हम स्वयं में केंद्रित नहीं होते.

_ जब तक आप खुद का सामना करने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक आपको सच्चा जीवन नहीं मिल सकता.

_ जब तक आप स्वयं को पूरी तरह समर्पित नहीं करते, आप सतही ही रहते हैं.

_ गहराई में जाने के डर ने हमारे जीवन को सतही और असुरक्षित बना दिया है.

_ एक सच्चे जीवन के लिए गहरी जड़ों की आवश्यकता होती है.

_ हम इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि हमने अपने ज्ञान के प्रति सच्चाई नहीं दिखाई है.

_ अंततः सभी विचार व्यर्थ हो जाते हैं… विचार तो बस मनुष्य की बनाई हुई वस्तु है, ठीक वैसे ही जैसे चार दीवारों और छत वाला घर, जो अंत में ढह जाता है.!!

– Sachin

हम एक ही मन को दो भागों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं.

_ एक मन अनुशासन का पालन करना चाहता है.

_ दूसरा मन इसे तोड़कर स्वतंत्रता के साथ भ्रमित करना चाहता है.

_ इसी ने लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचा दी है.

We are trying to split one mind in twos. The one mind wants to follow the discipline. The other wants to break it & confuse it with freedom. This alone has created a mess in ones’s life.

– SACHIN

एकांत में आप स्वयं को पाते हैं.

_ वृक्ष शहरों की तरह बातें नहीं करते.

_ वे आपसे आपका नाम, आपकी महत्वाकांक्षा या आपका धर्म नहीं पूछते.

_ वे बस मौन और ध्वनि की उस भाषा में फुसफुसाते हैं जिसका कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है.

_ प्रकृति अपने मूल रूप में मात्र एक स्थान नहीं है- यह एक द्वार है.

_ एक ऐसा गहरा मौन कि आपकी धड़कन भी आपके भीतर गूंजने लगती है.

_ वहीं, इस उन्मादी भीड़ से दूर, आप वह सुनना शुरू करते हैं जो हमेशा से सुनने की प्रतीक्षा कर रहा था – आपका अपना सच्चा स्वरूप.

_ यह आपको आपकी परेशानियों और उनसे छुटकारा पाने के तरीके बताएगा.

_ प्रकृति की कोई महत्वाकांक्षा नहीं होती.

_ एक झरना रेगिस्तान बनने की कोशिश नहीं करता.

_ एक चीड़ का पेड़ सेब का पेड़ बनने की इच्छा नहीं रखता.

_ वे संतुष्ट हैं, पूरी तरह से अपने आप में हैं और अपने अस्तित्व में, वे आपको सबसे बड़ा सबक सिखाते हैं: बस मौलिक बनो.

_ हमारे जीवन में जो शोर हम महसूस करते हैं वह केवल ध्वनि नहीं है – शोर विचार, निर्णय, तुलना और निरंतर क्रिया है.

_ व्यवस्था ने हमें कुशल तो बना दिया है, लेकिन शांति नहीं दी.

_ हमने दौड़ना तो सीख लिया है, लेकिन यह भूल गए हैं कि हम कहाँ जा रहे हैं.

_ आपको खुशी किसी पिज्जा की दुकान, थिएटर या बार में नहीं मिल सकती.

_ लेकिन आप इसे जंगल की शांति में, पक्षी के गीत में या नदी की लय में पा सकते हैं.

_ यह बहुत आसान है.

_ जब आप जंगल में जाते हैं, तो आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं – शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से.

_ आपकी पहचान, आपका नाम, आपकी शिक्षा, आपका अतीत, सब कुछ सूरज की गर्मी में बर्फ की तरह पिघलने लगता है.

_ जंगल आपको नंगा कर देता है, और उस नंगेपन में आप किसी पवित्र चीज को छूते हैं.

_ ध्यान पत्तों के बीच की खामोशी को सुनने की कला है, पक्षियों की चहचाहट के बीच के विराम को, हवा चलने से पहले की शांति को.

_ और उस सुनने में, आपके भीतर कुछ प्रकृति की इच्छा के साथ तालमेल बिठाने लगता है.

_ जंगल शब्दों में नहीं बोलता.

_ वह अपनी उपस्थिति से बोलता है.

_ और जितना अधिक आप उसके साथ बैठते हैं, उतना ही भीतरी शोर घुल जाता है- जैसे सुबह के सूरज से पहले की धुंध.!!

– Sachin

मौन की शक्ति : _ आपको स्वयं को साबित करने की आवश्यकता क्यों नहीं है ? _ मनुष्य को हमेशा से स्वयं को साबित करना सिखाया गया है. _ हर प्रश्न का उत्तर दे. _ हर आलोचना से अपना बचाव करे. _ हर अपमान का हिसाब रखे. _ धीरे-धीरे हम यह मानने लगते हैं कि जो सबसे अधिक बोलता है वही सबसे शक्तिशाली होता है. _ लेकिन जीवन इसके ठीक विपरीत दिखाता है. _ जितना अधिक कोई व्यक्ति स्वयं को साबित करने में लगा रहता है, उतना ही वह अपने अस्तित्व से दूर होता चला जाता है. _ एक पल रुकिए. _ जब ​​कोई आपका अपमान करे और आप तुरंत प्रतिक्रिया दें, तो स्वयं से पूछिए : कौन प्रतिक्रिया दे रहा है – आपकी चेतना या आपका अहंकार ? _ यदि भीतर शांति होती, तो क्या प्रतिक्रिया इतनी जल्दी होती ? _ प्रतिक्रिया हमेशा आहत अहंकार की भाषा होती है. _ जागरूकता कभी जल्दबाजी में नहीं होती. _ यह अवलोकन करती है, समझती है और तभी कार्य करती है जब वास्तव में आवश्यक हो. _ अधिकांश लोग इसलिए दुखी नहीं होते क्योंकि जीवन ने उन्हें बहुत सारी समस्याएं दी हैं. _ वे इसलिए पीड़ित होते हैं क्योंकि मन कभी बोलना बंद नहीं करता. _ कोई एक वाक्य कहता है और मन उसके चारों ओर सौ कहानियां गढ़ लेता है. _ ये कहानियां धीरे-धीरे पीड़ा बन जाती हैं. _ क्या आपने कभी अपने मन को ध्यान से देखा है ? _ यह बिना रुके बोलता रहता है. _ यहां तक ​​कि जब कोई आसपास नहीं होता, तब भी यह काल्पनिक लोगों से बहस करता रहता है. _ यह भविष्य की चिंता करता है, अतीत पर पछताता है, किसी के प्रति क्रोध रखता है, या बदला लेने की कल्पना करता है. _ यह अंतहीन आंतरिक संवाद चुपचाप आपकी सारी ऊर्जा को खत्म कर देता है. _ आपको लगता है कि आपका सबसे बड़ा दुश्मन आपके बाहर है. _ लेकिन सच्चाई यह है कि आपका सबसे बड़ा दुश्मन भीतर का निरंतर शोर है—वह आवाज़ जो आपको कभी चैन से नहीं बैठने देती. _ जब मन लगातार बोलता रहता है, तो आप लुप्त हो जाते हैं. _ जब आप पूरी तरह से वर्तमान में आ जाते हैं, तो मन धीरे-धीरे शांत हो जाता है. _ यह जीवन के पहले रहस्यों में से एक है. _ प्रकृति मौन में ही सब कुछ पूरा करती है. _ केवल मनुष्य ही खुद को निरंतर सही ठहराने के लिए विवश महसूस करते हैं. _ जिस दिन आप हर बात का जवाब देना बंद कर देते हैं, आपके भीतर एक नई तरह की शक्ति का जन्म होता है. _ यह दूसरों को हराने की शक्ति नहीं है ; यह स्वयं को जानने की शक्ति है. _ और जो व्यक्ति वास्तव में स्वयं को जान लेता है, उसे अब दुनिया से लड़ने की आवश्यकता महसूस नहीं होती. _ लोग मौन को कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसा नहीं है. _ मौन साहस के सबसे महान रूपों में से एक है. _ क्रोध करना आसान है ; अपने क्रोध को देखना कठिन है. _ चिल्लाना आसान है ; मुस्कुराना और शांत रहना कठिन है. _ बदला लेना आसान है ; क्षमा करने के लिए अपार शक्ति की आवश्यकता होती है. _ मौन कमजोरों का आभूषण नहीं है. _ यह जागृत मन का आभूषण है. _ जिस दिन कोई आपको गलत समझे और आपकी शांति अप्रभावित रहे, समझ लीजिए कि आपके भीतर कुछ गहरा परिवर्तन शुरू हो गया है. _ स्वयं को जानने वाला व्यक्ति दूसरों की राय पर निर्भर नहीं रहता. _ मनुष्य का अधिकांश जीवन दूसरों की स्वीकृति पाने में व्यतीत होता है. _ हम प्रशंसा, सराहना और सही साबित होने की चाह रखते हैं.
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