Quotes by Ishq Banaras
_ कितनी अजीब बात है कि लोग कल के लिए जीते हैं और आज को ऐसे कुचल डालते हैं जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो.
_ जबकि सच यही है कि कौन जाने कल किसका होगा, कौन जिंदा रहेगा और कौन सिर्फ याद बन जाएगा.
_ भविष्य की चिंता में खोए लोग अक्सर वर्तमान के छोटे-छोटे सुख गंवा देते हैं.
_ उनकी आँखों में सिर्फ एक दौड़ होती है जमा करने की, पाने की, सुरक्षित कर लेने की.
_ पर ये सब जमा करके किसके लिए ? किस काम का ?
_ जब आज ही जीने की फुर्सत न मिले, तो कल का खजाना किस काम आएगा ?
_ मुझे लगता है, जो लोग वर्तमान की साँसों को दबाकर भविष्य की थैलियाँ भरने में लगे रहते हैं, वे सबसे बड़े मूर्ख हैं.
_ क्योंकि वे न इस पल के रहते हैं न अगले पल के.
_ जैसे एक प्यासा आदमी जो पानी से भरा घड़ा देखकर भी मर जाए, क्योंकि उसने कभी एक घूंट पीने की फुर्सत ही नहीं निकाली.
_ असल में जीना तो आज है. कल का कोई भरोसा नहीं.
_ लेकिन अफसोस, ये सबसे सरल बात समझने में सबसे कठिन लगती है.
– Ishq Banaras
_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, आवाज़ में सामान्य होने का अभिनय रहता है और हम दुनिया को यकीन दिलाते रहते हैं कि सब ठीक है.
_ मगर सच तो यह है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी हो सकती है, जिसे सुनने वाला शायद ही कोई हो.
_ कुछ दर्द शब्दों में कहे नहीं जाते, बस आँखों में उतर जाते हैं और इंसान उन्हें उम्र भर अपने भीतर लिए घूमता रहता है.
_ मैं अक्सर सोचता हूँ कि आखिर हम उम्मीदों से इतने थक क्यों गए हैं ?
_ शायद इसलिए कि उम्मीद जितनी खूबसूरत होती है, उसके टूटने की आवाज़ उतनी ही गहरी होती है.
_ हम हर बार सोचते हैं—कल बेहतर होगा, कोई हमें समझेगा, कोई लौट आएगा, हालात बदलेंगे, जिंदगी फिर मुस्कुराएगी.
_ लेकिन जब बार-बार हमारी उम्मीदें खाली हाथ लौटती हैं, तो धीरे-धीरे मन किसी चीज़ की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है.
_ फिर इंसान दुखी कम और उदासीन ज्यादा हो जाता है ; उसे खुशी की चाह भी डराने लगती है, क्योंकि वह जानता है कि हर उम्मीद के पीछे टूटने का एक डर छिपा है.
_ दिन गुजरते रहते हैं.
_ वही जिम्मेदारियाँ, वही भागदौड़, वही चेहरे और वही औपचारिक बातचीत.
_ हम हँसते हैं, दूसरों की बातें सुनते हैं, उनकी परेशानियों में उनका साथ देते हैं और फिर अपनी परेशानियों को लेकर चुपचाप घर लौट आते हैं.
_ अजीब बात है न—हम दूसरों के आँसू पहचान लेते हैं, लेकिन अपनी आँखों की नमी छुपाने में पूरी उम्र लगा देते हैं.
_ शायद इसलिए कि हमें बचपन से सिखाया गया कि मजबूत बनो, मगर किसी ने यह नहीं बताया कि मजबूत होने का मतलब हर दर्द को अकेले सहना नहीं होता.
_ सबसे मुश्किल वक्त अक्सर रात का होता है.
_ दिन के शोर में इंसान खुद से बचा रहता है, लेकिन रात जब कमरे की दीवारों पर सन्नाटा उतरता है, तब भीतर दबे हुए सारे सवाल जाग जाते हैं.
_ पुरानी बातें याद आती हैं, अधूरे रिश्ते सामने आ खड़े होते हैं, कुछ चेहरे बिना बुलाए आँखों में उतर आते हैं और मन पूछता है—आखिर इतना सब सहकर भी हम किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं ?
_ कितनी बार मन करता है कि किसी के सामने बैठकर सब कह दें, बिना कुछ छुपाए, बिना मजबूत बनने का अभिनय किए.
_ लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं सामने वाला हमारी कहानी सुनकर भी हमें समझ न पाए और तब शब्द गले में ही रह जाते हैं.
_ धीरे-धीरे इंसान अपने दर्द के साथ समझौता करना सीख लेता है.
_ मुस्कुराना उसकी आदत बन जाता है, चुप रहना उसका स्वभाव और अकेले सह लेना उसकी मजबूरी.
_ बाहर से देखने वाले को लगता है कि वह बहुत संभला हुआ है, मगर भीतर वह हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा समेट रहा होता है.
_ कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि सुकून कोई बहुत बड़ी चीज़ नहीं, बस कुछ पल ऐसे मिल जाएँ जहाँ मन को किसी बात का जवाब न देना पड़े, किसी रिश्ते को निभाना न पड़े और किसी के सामने अपने ठीक होने का प्रमाण न देना पड़े.
_ फिर भी जिंदगी पूरी तरह बेरहम नहीं होती.
_ कभी किसी पुराने गीत की धुन अचानक भीतर का कोई बंद दरवाज़ा खोल देती है.
_ किसी किताब की एक पंक्ति अपनेपन का एहसास करा देती है.
_ किसी पुराने मित्र का संदेश, किसी अपने की छोटी-सी चिंता या खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी यह याद दिला देती है कि जिंदगी में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.
_ शायद सुकून हमेशा बड़ी खुशियों में नहीं मिलता ; कभी-कभी वह उन छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम अपनी व्यस्त जिंदगी में देखने से चूक जाते हैं.
_ हम अक्सर सोचते हैं कि दर्द कभी खत्म नहीं होगा.
_ लेकिन शायद हर दर्द का खत्म होना जरूरी भी नहीं होता.
_ कुछ दर्द हमें बदलने आते हैं, कुछ हमें रिश्तों की कीमत समझाने, कुछ हमें अपने भीतर झाँकना सिखाने और कुछ हमें यह बताने कि हम जितना खुद को कमजोर समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा सहने की क्षमता हमारे भीतर है.
_ वक्त हर घाव को मिटा दे, यह जरूरी नहीं ; मगर वह उसके साथ जीना जरूर सिखा देता है.
_ शायद जिंदगी का सच यही है कि हममें से कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है.
_ हर किसी के भीतर कोई अधूरी कहानी है, कोई खोया हुआ रिश्ता है, कोई ऐसा वादा है जिसे निभाया नहीं जा सका, कोई ऐसा अपना है जिसे चाहकर भी रोक नहीं पाए और कोई ऐसा समय है जिसे चाहकर भी वापस नहीं ला सकते.
_ हम सब अपने-अपने हिस्से की खामोशी लिए इस दुनिया में चलते रहते हैं.
_ और शायद इसी का नाम जिंदगी है.
_ टूटकर भी बिखर न जाना, थककर भी अगली सुबह उठ जाना, आँखों में नमी होते हुए भी किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना.
_ हम सब अपने भीतर कुछ ऐसा ढो रहे हैं, जिसका वजन दुनिया को दिखाई नहीं देता.
_ फिर भी कदम चलते रहते हैं, दिन गुजरते रहते हैं और उम्मीद की कोई बहुत छोटी-सी लौ कहीं भीतर जलती रहती है.
_ क्योंकि शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच यही है कि अँधेरा चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, मन के किसी कोने में सुबह के लौट आने की संभावना हमेशा बची रहती है.
_ बस हमें उस संभावना को पूरी तरह मरने नहीं देना चाहिए.
_ कभी-कभी खुद के लिए भी उतनी ही नरमी बचाकर रखनी चाहिए, जितनी हम दूसरों के दर्द के लिए रखते हैं.
_ हम सब अपने-अपने दर्द के साथ जी रहे हैं.. कोई उसे शब्द दे देता है, कोई आँसुओं में बहा देता है और कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है.
_ मगर हर दिल के भीतर कहीं न कहीं एक छोटी-सी पुकार जरूर होती है.
_ कोई हमें भी समझ ले.. बिना कुछ पूछे, बिना कोई फैसला सुनाए.
_ शायद इंसान को हमेशा समाधान नहीं चाहिए होता, कभी-कभी उसे बस इतना चाहिए होता है कि कोई उसके पास बैठकर कह दे !
_ तुम्हें हर वक्त मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं है.
– Ishq Banaras
_ उनके जीवन की कोई चमकदार तमन्ना नहीं होती। न किसी मंच की ख्वाहिश, न किसी ताली की चाह.
_ वे बस चाहते हैं कि उनके भीतर जो कोई अनकहा दर्द पल रहा है, वो किसी तरह कम हो जाए.
_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा सा सुकून है जो हर रात की नींद से पहले खोजते हैं.
_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है बिना पूछे, बिना बताए.
_ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूंढते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.
_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.
_ वे रोज मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए जब उनकी आत्मा शांत हो जाए, कि कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए, कि कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए बिना कहे.
_ वे लोग आखिरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि वह विदा सुकून में हो, शांति में हो, ऐसे कि नींद में कोई सोच न जागे, ऐसे कि मृत्यु से पहले जीवन कुछ हल्का लगे.
_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं. _ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थक कर मुस्कुरा देते हैं.
_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.
– Ishq Banaras
_ कुछ लोग हमारे जीवन में बहुत गहराई से आते हैं, हमारी आदतों, हमारी स्मृतियों और हमारी भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं,
_ इसलिए जब उनके भीतर हमारे लिए पहले जैसा अपनापन नहीं बचता, तो सबसे पहले हम खुद को कटघरे में खड़ा कर देते हैं.
_ सोचते हैं—हमसे कहाँ कमी रह गई, हमने क्या कम किया, ऐसा क्या बदल गया कि जो कभी इतने अपने थे, आज इतने दूर हो गए.
_ लेकिन शायद हर दूरी के पीछे कोई गलती नहीं होती.
_ कुछ रिश्ते बस अपने हिस्से की धूप लेकर आते हैं, थोड़ी देर हमारे साथ चलते हैं और फिर समय की किसी अनदेखी राह पर हमसे अलग हो जाते हैं.
_ यह स्वीकार करना कठिन है, मगर जीवन की कुछ सच्चाइयाँ ऐसी ही होती हैं—उन्हें समझने में देर लगती है, पर समझ आ जाएँ तो मन बहुत कुछ छोड़ देना सीख जाता है.
_ हम अक्सर अपने स्नेह को किसी स्थायी वचन की तरह जीते हैं.
_ किसी के लिए अपना समय बचाते हैं, उसकी खामोशियाँ पढ़ते हैं, उसकी परेशानियों में उसके साथ खड़े रहते हैं और मन ही मन मान लेते हैं कि इतनी सच्चाई, इतना अपनापन और इतना समर्पण शायद हमें उसके जीवन में हमेशा के लिए जगह दे देगा.
_ लेकिन रिश्ते केवल हमारे दिए हुए से नहीं चलते; उनमें सामने वाले का मन, उसकी परिस्थितियाँ, उसकी जरूरतें और उसकी बदलती प्राथमिकताएँ भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती हैं.
_ कभी-कभी हम किसी के जीवन में बहुत जरूरी होते हैं, और फिर एक दिन बिना किसी घोषणा के हमारी जरूरत कम हो जाती है.
_ यही वह क्षण होता है जब हमें अपने प्रेम की कीमत नहीं, उसकी प्रकृति समझनी चाहिए.
_ किसी का बदल जाना हमेशा हमारे कम हो जाने का प्रमाण नहीं होता.
_ कई बार बस इतना होता है कि जिंदगी ने दोनों के रास्तों की दिशा बदल दी होती है.
_ और शायद यही मान लेना, अपने मन को सबसे बड़ी राहत देना है.
_ इस सत्य को देर से स्वीकार करने वाला मन सबसे ज़्यादा टूटता है.
_ वह हर बदलते व्यवहार में अपनी ही कमी खोजता है, हर दूरी को अपनी गलती मान लेता है.
_ वह स्वयं को साबित करने की थकाऊ दौड़ में लग जाता है, ये भूलकर कि प्रेम और अपनापन किसी प्रतियोगिता का परिणाम नहीं होते.
_ जितनी जल्दी ये समझ विकसित हो जाती है कि हर रिश्ता स्थायी नहीं होता, उतनी ही जल्दी मन अनावश्यक अपेक्षाओं से मुक्त होने लगता है.
_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.
_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.
_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.
_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या, और आत्मग्लानि जन्म लेती है.
_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.
_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.
_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.
_ वह अपनी ही तकलीफों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढता रहता है.
_ जबकि आत्म-सम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.
_ ये स्वीकार करना कि आप किसी के केंद्र में नहीं हैं, आपको कमजोर नहीं बनाता बल्कि मजबूत करता है.
_ ये आपको सिखाता है कि भावनात्मक सुरक्षा बाहर नहीं, भीतर से आती है.
_ जब आप ये मान लेते हैं कि हर कोई आपके साथ नहीं रहेगा, तब आप उन रिश्तों को अधिक सच्चाई से जी पाते हैं जो वास्तव में मौजूद हैं.
_ तब आप कम लोगों से ही सही पर गहराई से जुड़ते हैं.
_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.
_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.
_ ये समझ आपको भावनात्मक चोटों से नहीं बचाती, पर आपको टूटने से जरूर बचा लेती है._ अंततः ये समझ लीजिए शांति उसी दिन आती है, जब आप ये मान लेते हैं कि आपका मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.
_ आप जैसे हैं, उतने ही पर्याप्त हैं.
_ जो लोग आपके जीवन में रहना चाहेंगे, वे बिना शर्त रहेंगे, और जो जाना चाहेंगे, उन्हें रोके रखना आपके सम्मान के विरुद्ध होगा.
_ इस सत्य को जितनी सहजता से स्वीकार कर लिया जाए, जीवन उतना ही हल्का, संतुलित और सच्चा हो जाता है.!!
-Ishq Banaras






