सुविचार 4092
जिंदगी को खुली किताब ना बनाओ, क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं,
_पन्ने फाड़ने में ज्यादा मज़ा आता है.
_पन्ने फाड़ने में ज्यादा मज़ा आता है.
प्रतिदिन प्रात: अपने हाथों की ओर देख कर विचार करें, “मेरे इन हाथों से सभी का भला हो,”
_यह भी सोचें की “क्या मैं इन हाथों से जो कुछ भी कर रहा हूँ वह उचित है,”
_यदि मन इंकार करे तो वह कार्य कभी न करें ; यही एक बात जीवन को सुखमय बना देगी..
_ जितनी बड़ी हम उसे सोच- सोच के बना देते हैं !
_ये भाव यदि मन में रहे तो कोई दुख आपके आसपास नहीं फटक सकता..!!