सुविचार 4092

जिंदगी को खुली किताब ना बनाओ, क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं,

_पन्ने फाड़ने में ज्यादा मज़ा आता है.

सुविचार 4091

प्रतिदिन करें…..

प्रतिदिन प्रात: अपने हाथों की ओर देख कर विचार करें, “मेरे इन हाथों से सभी का भला हो,”

_यह भी सोचें की “क्या मैं इन हाथों से जो कुछ भी कर रहा हूँ वह उचित है,”

_यदि मन इंकार करे तो वह कार्य कभी न करें ; यही एक बात जीवन को सुखमय बना देगी..

सुविचार 4090

आजकल जो जितना लंबा फेंक सकता है उसी के आस -पास लोग ज्यादा होंगे,

_ स्पष्ट बोलने वालों के पास कोई नहीं फटकता.!

सुविचार 4089

अक्सर समस्याएं उतनी बड़ी होती नहीं है ;

_ जितनी बड़ी हम उसे सोच- सोच के बना देते हैं !

सुविचार 4087

‘जो हुआ सो अच्छा हुआ’, ‘जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है’

_ये भाव यदि मन में रहे तो कोई दुख आपके आसपास नहीं फटक सकता..!!

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