सुविचार 4111

कभी परिस्थितियों के हाथों की कठपुतली न बनें,

_क्योंकि आप हालात बदलने का दम रखते हैं.

सुविचार 4110

अपनी “कमज़ोरियों” का “जिक्र” कभी न करना “ज़मानें” से,

_लोग “कटी” “पतंग” को जमकर “लूटा” करते हैं,..।।

नाम और पतंग जितने ही ऊँचे उठते जाते हैं,

_उतने ही दूसरों की आंखों में खटकते जाते हैं..!!

सुविचार 4109

“जानकारी” किसी भी “उम्र” में आ सकती हैं ,

_मगर “अनुभव”…आज भी “उम्र” का “इंतज़ार” करता है..

सुविचार 4108

आज के जमाने में शुभचिंतक ऐसे होते हैं,

_जो आपका शुभ होता हुआ देख कर चिंतित हो जाते हैं.

सुविचार 4107

सिर्फ पुरानी तस्वीरों के ही नहीं बल्कि बीते “वक़्त” के साथ..

उस “तस्वीर” में शामिल रहे किरदारों के भी “रंग” फीके पड़ जाते हैं !

किरदार मत देखिए, ये जरूरतों का दौर है,

_आदमी होता कुछ और है दिखता कुछ और है..!!

सिर और किरदार हमेशा ऊँचा रखें, अच्छे और बुरे दिन आते जाते रहते हैं.
अपने किरदार पर भरोसा रखें, चीखने-चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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