सुविचार 4083
नियति का पहला सिद्धांत है कि हम इसे केवल वर्तमान में ही बदल सकते हैं.
हंसने वालों की “हंसी उड़ते” हम देख चुके हैं, इसलिए किसी पर हंसना नहीं चाहिए.
_हम अपने कर्म का सिद्धांत क्यों बिगाड़ रहे हैं ?
_हम अपने कर्म का सिद्धांत क्यों बिगाड़ रहे हैं ?
_ आदमी नीचा हो जाए तो समस्या है, बाक़ी पसंद अपनी-अपनी.!!
_ यदि आप किसी से नाराज़ होंगे तो लोग आप को छोड़ना पसंद करेंगे, मनाना नहीं !!
_जो हकीकत और ख़्वाब के बीच होता है..!!
_ दूसरे द्वारा प्रमाणित सच्चाई में, खोट का खतरा खड़ा रहता है “
_ क्योंकि वह आपकी अच्छाई में भी खोट निकाल ही देगा.
_ बल्कि कभी-कभी आपकी अच्छाई भी वजह बन जाती है इस नापसंदगी की..!!
_ आदमी वो होता है, जो नहीं दिखलाता, नहीं बताता.
_ फिर यात्रा निरर्थक और बेमंजिल रह जाती है.
उस पर नहीं ; जिसे आप खो चुके हो..