सुविचार 4042
*हज़ार जवाबों से,* *अच्छी है ख़ामोशी साहेब..*
*ना जाने कितने सवालों की,* *आबरू तो रखती है…*
नए सफर में ख़ामोशी को चुना है मैंने ;
_ क्योंकि बिना गलती के भी बहुत कुछ सुना है मैंने..!!
*ना जाने कितने सवालों की,* *आबरू तो रखती है…*
_ क्योंकि बिना गलती के भी बहुत कुछ सुना है मैंने..!!
*सावधान, तब तब कोई,* *पंख काटने जरूर आयेगा…*
*जो “प्रतिशोध” के बजाय* *”परिवर्तन” की सोच रखते है…!!!
_ “सब कुछ” कभी भी, किसी को भी नहीं मिल सकता…
_ बल्कि उसका अर्थ यह है कि वह आपके लिए नहीं है.!!