सुविचार 3878

सहजता ही सबसे बड़ी सभ्यता है.

जो शिष्ट नहीं है, वह कभी विशिष्ट नहीं बन सकता.

सुविचार 3877

निर्णय क्रोध में लिया गया हो या फिर भावनाओं में बह कर ;

अंततः दोनों ही पछतावे का कारण बनते हैं.

सुलझा हुआ मनुष्य वह है जो अपने निर्णय स्वयं करता है,

और उन निर्णयों के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नहीं देता..!

जब किसी को आपकी ज़रूरत हो और फुर्सत हो तो ‘आप ही आप’..

न हों तो करो माफ़…वाली policy चलती है.. __आपकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं..

सुविचार 3876

हाथ उसका पकड़ो जिसे सुख में आप ना छोड़ो

और दुःख में वो आपको ना छोड़े.

सुविचार 3875

जिन्दगी में अक्सर ऐसा होता है, हम जिनके साथ के लिए तरसते हैं ;

वो किसी और को खुश करने में व्यस्त होते हैं.

सुविचार 3874

अगर हम आभारी रहें और अपनी भावनाओं पर ईमानदारी से काम करें _ तो हम बहुत सारे अनावश्यक दबाव को खत्म कर सकते हैं.

_ आप हर समय खुश नहीं रह सकते, दुखी या क्रोधित होना स्वाभाविक है,
– यदि आप वास्तव में खुद से प्यार करना चाहते हैं _ तो अपने आप को स्वीकार करें,
_ जो समस्या है उस पर काम करें _और जो आपके पास है उसके लिए आभारी रहें..
बाकी दिन के लिए माहौल तैयार करने के लिए सुबह अपने दिन की शुरुआत अच्छी भावनाओं के साथ करें.

सुविचार 3873

जब कोई दूसरों से धोखा खाता है तो वो उनसे लड़ पड़ता है,

_ लेकिन जब कोई अपनों से धोखा खाता है तो मौन हो जाता है.

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