सुविचार 3995
किसी व्यक्ति के कार्य से यदि आपको घृणा है तो आपको अधिकार है कि उसे ठीक करें, _ लेकिन उस व्यक्ति से घृणा न करें. व्यक्ति और उसके कार्य दो अलग- अलग चीजें हैं.
_इसे यूँ समझें कि अपनी इज्जत आपको खुद ही अर्जित करनी पड़ती है.
_ स्वाभाविक रूप से मन में गलत कर्मों का अपराधबोध भी बना रहता है.
_ जो हो गया उसे मिटाया तो नहीं जा सकता लेकिन इंसान को हर दिन अपराध बोध की आग में जलने को मजबूर होना पड़ता है.