सुविचार 3854

दूसरों को देखते समय हम क्या देखते हैं _ यह आप कि नजर की स्पष्टता पर निर्भर करता है _ जिससे हम देखते हैं.

इसलिए दूसरों को आंकने में जल्दबाजी न करें, _ खासकर अगर आपके जीवन का दृष्टिकोण क्रोध, ईर्ष्या, नकारात्मकता या अधूरी इच्छाओं से घिरा हो.
किसी व्यक्ति को पहचानने से _ यह परिभाषित नहीं होता कि वे कौन हैं ;
_यह ” जो आप हो ” उसे परिभाषित करता है.
नकारात्मकता कभी अपना अस्तित्व नहीं खोती..

_ वो बस रूप बदलकर एक दिल से दूसरे दिल में ट्रांसफर होती रहती है.
_ कभी किसी की जुबान से उतरकर हमारे मन में बस जाती है,
_ तो कभी हमारी थकान और परेशानी बनकर किसी और के हिस्से में चली जाती है.. _ इसलिए इंसान को जितना हो सके उतना हल्का रहना चाहिए..
_ ताकि दूसरों तक सिर्फ सुकून पहुँचे, बोझ नहीं.!!
हर कोई अपनी अपनी जंग लड़ रहा है,

_ बाहर से हंसते हुए चेहरे भी अपने अंदर दुख का अथाह सागर समेटे होते हैं,,

आहिस्ता ही सही बढ़ते रहना, ठहर जाओ तो जंग लग जाता है.!!

सुविचार 3853

किसी पर ज्यादा नाराज होने से बेहतर है की

अपने जीवन में उसकी अहमियत कम कर दो.

सुविचार 3852

मुश्किल वक़्त हमारे लिए आईने की तरह होता है,

जो हमारी छमताओं का सही आभास हमें कराता है.

सुविचार 3851

अगर आप अच्छी ज़िंदगी जीना चाहते हैं तो हर रोज भागना पड़ेगा,

“संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलता हैं.”

संघर्ष थकाता जरूर है, _लेकिन हमें बाहर से सुन्दर और अन्दर से मजबूत बनाता है.!!

सुविचार 3850

जाहिर तौर पर जब आप लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं ;

_जैसा वे आपके साथ करते हैं, तो वे परेशान हो जाते हैं.!!

सुविचार 3849

समस्याओ से बचने के लिए नहीं, _बल्कि समस्याओं को खत्म करने के लिए काम करें.

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