सुविचार 3600

जिस की अपनी कोई राय नहीं, बल्कि जो दूसरों की राय और रूचि पर निर्भर रहता है वह गुलाम है.

हम हमेशा दूसरों के बारे में अपनी राय बहुत जल्दी बना लेते हैं कि सामने वाला कैसा है !!
आप किसी के बारे में जो राय अपने मन में बनाते हैं,

_ कोई ज़रूरी नहीं कि वही सही हो.
_ राय आपके मन की फैक्ट्री में बनी है.
_ निर्माता आप है.
_ आप आजाद हैं किसी के लिए कुछ भी सोचने के लिए,
_लेकिन सार्वजनिक करने के लिए नहीं.
_ किसी के बारे में अपने मन की फैक्ट्री में बनी राय को ..किसी के सामने जाहिर करना, किसी की निंदा करना, चुगली करना, चरित्र हनन करना ..ये दुर्गुण है,
_ किसी को जज मत कीजिए.
_ तब तक बिल्कुल नहीं, जब तक आपके पास प्रमाण न हो.
_और ज़रूरी नहीं कि ..आपकी नज़रों का प्रमाण प्रमाण ही हो.
— बहुधा परिस्थितियां कुछ और बयां करती हैं ..जबकि वास्तविकता कुछ और होती है,
_ इसलिए किसी भी इंसान के बारे में कुछ राय बनाने से पहले उसके बारे में वास्तविकता का पता कर लेना चाहिए.
— लेकिन आम आदमी तो सोचने की जहमत भी नहीं उठाता,
_ बस कह बैठता है, ..अपने मन की फैक्ट्री से निकली बात..!!

सुविचार 3599

ज़िंदगी की भागदौड़ और तनाव में आपकी हंसी गायब न हो जाए, इसलिए खुलकर हंसे.

खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ी हवा मिलती है.

सुविचार 3598

स्वाभिमानी इंसान हर कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कामयाबी के रास्ते बना लेते हैं … और नाकाम इंसान कामयाबी के आसान रास्तों में भी ढेर सारी कमी निकाल कर बहाना करके अपनी जिन्दगी को तबाह कर लेता है…. !
अपनी परिस्थितियों पर विचार न करने वाला व्यक्ति मूर्ख होता है.

सुविचार 3597

जहां भी जाएगा रौशनी बिखेरेगा,

_ चिरागों का कोई अपना मकां नही होता..

कुछ तेरा मिटेगा कुछ मेरा मिटेगा,

_ चल चराग़ जलाएं अंधेरा मिटेगा !!

सुविचार 3596

छण- प्रतिछण, हर एक कदम पर अपने भीतर झाँकने, अपनी कमियों को देखने

और उन्हें सुधारने के लिए आपको साहसी होना होगा.

सुविचार 3595

हर काम पूरे मन से करें ; अधूरे मन से किया काम आपसे श्रेष्ठ बनने का मौका ; छीन लेता है.

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