सुविचार 3446

जीवन में करीब करीब ऐसा ही हो रहा है,

जो दुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे लौट आएँगे.

जो सुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे भी लौट आएँगे.

दुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं,

सुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं.

अपना सुख ऐसा बनाना कि आप पर ही निर्भर हो,

दूसरे के दुख पर निर्भर न हो.

सुविचार 3445

एक समर्पित ह्रदय कृपा, ख़ुशी, प्रसन्नता और हर्ष को आकर्षित करता है, _

_ जिसके फलस्वरूप सम्बन्ध बनते हैं.

सुविचार 3444

किसी भी मनुष्य का जीवन सदैव दुखों या मुसीबतों से भरा नहीं होता है, _ यह केवल हमारे देखने का और प्रतिक्रिया का नजरिया होता है _

_ किसी भी व्यक्ति के जीवन में 10% चीजें अपने आप होती हैं और 90% दुःख का कारण मनुष्य की उन वस्तुओं पर प्रतिक्रियाएं होती हैं.

सुविचार 3443

यदि आप सही के लिए सक्रिय रूप से खड़े नहीं हैं, तो आप समस्या का हिस्सा हैं.

If you aren’t actively standing up for what’ right, You’re part of the problem.

जीवन में कुछ भी समस्या नहीं है – सब कुछ एक संभावना है.

Nothing in life is a problem – everything is a possibility.

हर समस्या अपने साथ उसका हल भी ले कर आती है ,अगर अपने विवेक से हल को ढूँढ लेंगे तब आपकी मेहनत और भाग्य का संगम सफलता कहलाएगी !

समस्या का गुलाम बनने वाले कभी खुद के भाग्य का निर्माता नहीं बन पाते..

समस्या के बिना जीवन की कल्पना असंभव है. कई लोग इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते हैं और हमेशा चाहते हैं कि उनके जीवन में उतार- चढ़ाव नहीं आये. इस तरह के लोग समस्याओं के आगे हार मान लेते हैं. अपनी समस्याओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं.

हर व्यक्ति का परिस्थितियों को देखने का नजरिया अलग- अलग होता है. कुछ लोग मुसीबतों के आगे टूट जाते हैं, तो कुछ संभल जाते हैं.

मुसीबतों के आगे वैसे लोग ही टूटते हैं, जिनका ध्यान सिर्फ समस्या की तरफ जाता है. जिन लोगों का ध्यान समस्या के समाधान की तरफ रहता है वे मुसीबत में अपने आप को और निखारते हैं.

मुसीबत चाय की प्याली में जमी मलाई की तरह है. कामयाब लोग फूंक मार कर मलाई अलग कर देते हैं और चाय पी जाते हैं. अगर उसे निकालने की कोशिश करेंगे, तो चाय ठंडी और बेस्वाद हो जायेगी. जीवन में आनेवाली समस्याओं से भी इसी तरह डील करने की जरुरत है.

सुविचार 3442

जरा संभल के रहना उन इंसानों से दोस्तों,,,,

जिनके दिल में भी दिमाग होता है….

सुविचार 3441

अहंकार का उपयोग ख़ुद से प्रतिस्पर्धा करने में किया जाना चाहिए न कि दूसरों के ख़िलाफ़,

ताकि बीते हुए कल के मुक़ाबले हम बेहतर बन सकें.

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