सुविचार 3449
आस्था अस्तित्व की नीवं है, बिना आस्था के हमारा अस्तित्व एक ऐसे नीवं रहित भवन जैसा होगा
जो हवा के हर झोंके और आँधी की दया पर निर्भर होता है.
जो हवा के हर झोंके और आँधी की दया पर निर्भर होता है.
_ सबसे कठिन है अलविदा कहना, __ पर उससे भी ज्यादा पीड़ादायी हैं, अलविदा भी न कह पाना ..
_ वो तय कर चुका है जाना, अब बस तुम्हें विदा करना होगा..!!
तब हमारे जीवन का हर पहलू फैलने- फूलने लगता है.
जो दुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे लौट आएँगे.
जो सुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे भी लौट आएँगे.
दुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं,
सुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं.
दूसरे के दुख पर निर्भर न हो.
_ जिसके फलस्वरूप सम्बन्ध बनते हैं.
_ किसी भी व्यक्ति के जीवन में 10% चीजें अपने आप होती हैं और 90% दुःख का कारण मनुष्य की उन वस्तुओं पर प्रतिक्रियाएं होती हैं.