सुविचार 3449

आस्था अस्तित्व की नीवं है, बिना आस्था के हमारा अस्तित्व एक ऐसे नीवं रहित भवन जैसा होगा

जो हवा के हर झोंके और आँधी की दया पर निर्भर होता है.

सुविचार 3448

जीवन की सबसे बड़ी निराशा है, उन लोगों का साथ छूट जाना, जो आपकी ज़िंदगी का हिस्सा थे, _

_ सबसे कठिन है अलविदा कहना, __ पर उससे भी ज्यादा पीड़ादायी हैं, अलविदा भी न कह पाना ..

जो जा रहा है उसे जाने दो, ‘उसका रूकना’ रह जाना नहीं होगा.

_ वो तय कर चुका है जाना, अब बस तुम्हें विदा करना होगा..!!

कभी-कभी ऐसा लगता है कि सबसे खूबसूरत चीज है बिना कुछ कहे, बिना अलविदा कहे चले जाना.

_ क्योंकि जब आप चुपचाप किसी की ज़िंदगी से चुपचाप चले जाते हैं, तो आप अपने पीछे एक अंतहीन इंतज़ार छोड़ जाते हैं –
जो आपको उस शख़्स में हमेशा जीवित रखता है,
_ आप चले तो जाते हैं, मगर मरते नहीं बल्कि उस इंतज़ार में साँस लेते रहते हैं, हर रोज़, हर पल..!!

सुविचार 3447

जब हम स्वीकार करना और प्रेम करना सीख लेते हैं,

तब हमारे जीवन का हर पहलू फैलने- फूलने लगता है.

आप मक्खी को नहीं समझा सकते कि फूल कचरे से ज़्यादा खूबसरत हैं.!!

सुविचार 3446

जीवन में करीब करीब ऐसा ही हो रहा है,

जो दुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे लौट आएँगे.

जो सुख हमने दूसरों को दिए हैं, वे भी लौट आएँगे.

दुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं,

सुख भी हजार गुने होकर लौट आते हैं.

अपना सुख ऐसा बनाना कि आप पर ही निर्भर हो,

दूसरे के दुख पर निर्भर न हो.

सुविचार 3445

एक समर्पित ह्रदय कृपा, ख़ुशी, प्रसन्नता और हर्ष को आकर्षित करता है, _

_ जिसके फलस्वरूप सम्बन्ध बनते हैं.

सुविचार 3444

किसी भी मनुष्य का जीवन सदैव दुखों या मुसीबतों से भरा नहीं होता है, _ यह केवल हमारे देखने का और प्रतिक्रिया का नजरिया होता है _

_ किसी भी व्यक्ति के जीवन में 10% चीजें अपने आप होती हैं और 90% दुःख का कारण मनुष्य की उन वस्तुओं पर प्रतिक्रियाएं होती हैं.

error: Content is protected