सुविचार 3292
जिन्दगी की ठोकर बहुत निराली है…_ जब भी लगती है
किसी की असलियत दिखा ही जाती है _ या फिर कुछ न कुछ जरूर सिखा जाती है.
किसी की असलियत दिखा ही जाती है _ या फिर कुछ न कुछ जरूर सिखा जाती है.
जब वो सकारात्मक बात पर नकारात्मक टिप्पणी कर देता है,”
आपका संघर्ष नहीं देखा…
क्योंकि छांव मिलते ही कदम रुकने लगते हैं.
कि पाया हुआ भी हाथों से फिसलने लगता है..
पहले वो बात करना बंद कर देते हैं.