सुविचार 3432
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है.
जहाँ गरीबी है, वहीं असली अमीरी भी चल सकती है.
ग़ुरबत न दे सकी मेरे ज़मीर को शिकस्त,
_ झुक कर किसी अमीर से मिलता नहीं हूँ मैं..!!
जहाँ गरीबी है, वहीं असली अमीरी भी चल सकती है.
_ झुक कर किसी अमीर से मिलता नहीं हूँ मैं..!!
इन तीनो को कभी भी छोटा न समझे, इनकी तरफ से लापरवाह भी नहीं रहें, और इनसे जल्द से जल्द छुटकारा पाने की कोशिश करें ! इनको जड़ से समाप्त करें,
क्योंकि ये जरा से भी रह जाए तो निरंतर बढ़ते रहना इनका स्वभाव होता है ये पुनः बढकर हमसे ज्यादा शक्तिशाली होते है !!!!
हमें वही मिलता है जो हमने पकाया है.
इसे अपना आंतरिक मार्गदर्शक बन जाने दें.
जो थोड़ी सी सफलता पाते ही उफन पड़ते हैं और स्वयं का स्वरुप बिगाड़ बैठते हैं.