सुविचार 3407
संघर्ष थकाता जरूर है, _ पर हमें अंदर से मजबूत भी बनाता है.
संघर्ष थकाता जरूर है, _ पर हमें अंदर से मजबूत भी बनाता है.
_ जो अपने आपसे उम्मीद रखते हैं किसी और से नहीं.
_ इसलिए जो भी है उसे स्वीकार कर के बेहतर बनाएँ..
हमें इन बातों को ऐसे सहन करना चाहिए जैसे किसी उल्टे घड़े पर पानी उँड़ेला जा रहा हो,
वह घड़ा अपने भीतर पानी को बिलकुल नहीं लेता.