सुविचार 3349
मनुष्य जो स्वयं दूसरों को दे, उसे भूल जाए और जो दूसरों से ले, उसे सर्वदा याद रखे – मित्रता की जड़ यही है.
_ इसमें महारत हासिल करने की आपकी बारी है.
कोई “बांस” का “तीर” बनाकर किसी को “घायल” करता है..!
तो कोई “बांसुरी” बनाकर बांस में “सुर” को भरता है..!
_हमने अपने जीवन में कितनी अच्छाई का अनुभव किया है..
और जब कोई व्यक्ति सुधार कर सकता है, तो वह कभी शिकायत नहीं करता.
क्योंकि सुबह उनकी भी होती है, जिनके दिन खराब हों.