सुविचार 3155
ईमानदारी की कमाई इंसान खाता है और बेईमानी की कमाई इंसान को खा जाती है.
ईमानदारी की कमाई इंसान खाता है और बेईमानी की कमाई इंसान को खा जाती है.
अपनो के अपनत्व का, तब दिखता है साँच ।।
_ मुलाक़ात चाहे जब हो..अपनेपन का अहसास तो रोज महसूस होता रहे..!!
तो शायद वो आपसे अंजान हैं.
और खुश हो तो आप बहुत अमीर हो.
दुनिया को देखकर जो फैसले लेते हैं वो दुखी ही रहते हैं.