सुविचार 3239
प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को निरंतर उन्नतिशील बने रहना पड़ता है.
प्रसिद्ध होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को निरंतर उन्नतिशील बने रहना पड़ता है.
कोई हताश हो के बिखर जाता है, तो कोई संघर्ष करके निखर जाता है.
जिसे आप तोड़ो, मरोड़ो, काटो, आपको उससे मीठा रस ही मिलेगा.
तो समझ लीजिए कि वह व्यक्ति आपसे कुछ चाहता है…