सुविचार 3010
क्योंकि इस दौड़ में जीतता वही है, जो लगातार दौड़ता रहता है. जिसें दौड़ना छोड़ दिया, उसकी हार निश्चित है,
इसलिए सीखने की ललक खुद में बनाये रखें, फिर कोई बदलाव, कोई उतार-चढ़ाव आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता.
क्योंकि इस दौड़ में जीतता वही है, जो लगातार दौड़ता रहता है. जिसें दौड़ना छोड़ दिया, उसकी हार निश्चित है,
इसलिए सीखने की ललक खुद में बनाये रखें, फिर कोई बदलाव, कोई उतार-चढ़ाव आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता.
क्योंकि कई लछ्य एकसाथ बना लेने से हम कन्फ्यूज हो जाएंगे और कुछ भी प्राप्त नहीं होगा.
लोभ और क्रोध क्षणिक भी आये तो ठीक नहीं, किन्तु यदि ये आ जाये तो इन्हें शीघ्र विदा कर दें, यदि ये ज्यादा देर तक ठहरे और अहंकार से जुड़ गए तो फिर इनको विदा करना लगभग असंभव हो जाता है ! क्योंकि अहंकार कई बातों की आड़ ले लेता है और इन दोनों से तो क्या सबसे ज्यादा खतरनाक होता है ! अतः ध्यान रखे काम क्रोध लोभ मोह वैसे तो क्षणिक भी ठीक नहीं किन्तु अहंकार के साथ ये स्थायी हो जाते हैं !!!
कर – कर के थक जाए …!! और जाते जाते जिंदगी भी मुस्कुरा कर बोले …!!!
आप से मिल कर खुशी हुई …!
_ या फिर जिम्मेदारी उठाओ उन्हें बदलने की..
बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.