सुविचार 3010

जीवन में नित नए परिवर्तन और नए विकास होते रहते हैं, यदि हम स्वयं को सर्वज्ञाता समझने की भूल करेंगे, तो जीवन की दौड़ में पिछड़ जायेंगे.

क्योंकि इस दौड़ में जीतता वही है, जो लगातार दौड़ता रहता है. जिसें दौड़ना छोड़ दिया, उसकी हार निश्चित है,

इसलिए सीखने की ललक खुद में बनाये रखें, फिर कोई बदलाव, कोई उतार-चढ़ाव आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता.

सुविचार 3009

जीवन में सफल होने के लिए एक बार में केवल एक लछ्य ही बनाएं और जब तक एक लछ्य को प्राप्त न कर लें, तब तक दूसरा न बनाए.

क्योंकि कई लछ्य एकसाथ बना लेने से हम कन्फ्यूज हो जाएंगे और कुछ भी प्राप्त नहीं होगा.

सुविचार 3008

अहंकार ….

लोभ और क्रोध क्षणिक भी आये तो ठीक नहीं, किन्तु यदि ये आ जाये तो इन्हें शीघ्र विदा कर दें, यदि ये ज्यादा देर तक ठहरे और अहंकार से जुड़ गए तो फिर इनको विदा करना लगभग असंभव हो जाता है ! क्योंकि अहंकार कई बातों की आड़ ले लेता है और इन दोनों से तो क्या सबसे ज्यादा खतरनाक होता है ! अतः ध्यान रखे काम क्रोध लोभ मोह वैसे तो क्षणिक भी ठीक नहीं किन्तु अहंकार के साथ ये स्थायी हो जाते हैं !!!

सुविचार 3007

इस तरह मुस्कुराने की आदत डालिये कि ..! परिस्थिति भी आपको परेशान

कर – कर के थक जाए …!! और जाते जाते जिंदगी भी मुस्कुरा कर बोले …!!!

आप से मिल कर खुशी हुई …!

सुविचार 3006

या तो स्थितियों को जस का तस स्वीकार कर लो, _

_ या फिर जिम्मेदारी उठाओ उन्हें बदलने की..

सुविचार 3005

कभी कभी ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि

बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.

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