सुविचार 4872

खून के संबंध से ही कोई, अपना नही होता है, प्रेम, सहयोग, विश्वास,

निष्ठा, सहानुभूति, सम्मान..ये ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं.

विश्वास करना तब मुश्किल हो जाता है जब वही लोग, आपके सम्मान को गंदा करते

है, जो आपके साथ हैं.
दुनिया ने मुझे एक बात सिखाई-

_ यहाँ विश्वास से पहले विवेक ज़रूरी है, क्योंकि झूठ सिर्फ़ बोला नहीं जाता, कई बार उसे इतने विश्वास से परोसा जाता है कि लोग उसे सच मानने लगते हैं”
विश्वास पर ही तो दुनिया जिंदा है, वरना अगर ये न होता, तो न जाने क्या होता.

_ न रिश्ते टिकते, न अपनेपन का एहसास होता, न कोई किसी के लिए कुछ कर पाता.
_ सोचिए, अगर हर इंसान हर इंसान पर शक करने लगे, तो शायद दुनिया तो होती,
_ लेकिन उसे जीने लायक बनाने वाला सुकून कहीं खो जाता.!
– Nirarthak Nirarthak

सुविचार 4871

स्थिरता की उम्मीद हम अक्सर ही दुनिया से करते हैं,

यह जानते हुए भी कि यहाँ कुछ स्थिर नहीं है.

सुविचार 4870

अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधारी जाये,

तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!

सुविचार 4869

जीवन एक प्रयोगशाला है, जिसमें सुख दुःख के मिश्रण से अनुभवों की खोज होती है.
अनुभवों में विविधता ही अलग-अलग मनोदशा का मुख्य कारण है.!!
समझ जीवन को गहराई देती है, लेकिन अनुभव जीवन को रस देता है.

_ केवल गहराई हो और रस न हो, तो जीवन गंभीर हो जाता है.
_ केवल रस हो और गहराई न हो, तो जीवन सतही हो जाता है.
_ सौंदर्य दोनों के संतुलन में है.!!

सुविचार 4868

इस पल की गुणवत्ता जीवन की गुणवत्ता तय करती है.

यदि यह जीवन है, तो इस पल की सार्थकता जीवन की सार्थकता है.

सुविचार 4867

जिंदगी के अंतिम पलों में …..अपने पूरे जीवन का …

एक एक कर्म, एक फिल्म…. की तरह अपनी निगाहों ….के सामने झलकेगा …..

कोशिश करें कि ….अपनी फिल्म सबके देखने लायक हो …

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