सुविचार 2970

मन की इच्छाए…

मन की इच्छाए श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते है, जो योग्य है वही कर्म करते है ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!

सुविचार 2969

श्रेष्ठता का आधार कोई ऊँचे आसन पर बैठना नही होता,

श्रेष्ठता का आधार हमारी ऊँची सोच पर निर्भर करता है….

सुविचार 2968

एक शक्तिशाली और सकारात्मक मनोभाव किसी भी अन्य चीज की तुलना में अधिक चमत्कार करता है,

क्योंकि जिंदगी तो, 10% आप इसे कैसे बनाते हैं और 90% आप इसे कैसे अपनाते हैं, यह है.

सुविचार 2966

इच्छाओं के अनुरूप जीने के लिए जुनून चाहिये,

वरना परिस्थितियां तो सदा विपरीत रहती हैं.

सुविचार 2965

समानुभूति याने कि वह तादात्म्य, जो स्वतः ही अन्य व्यक्ति के साथ स्थापित हो जाता है –

-उसकी भावनाओं को महसूस करें, वह जो कहना चाहे समझें.

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