सुविचार 3132
रे मन विपदा के समय कोउ न झांकै द्वार,
ज्यों ही विपदा चल बसी सहयोगी तैयार…
‘पहले अपनी व्यवस्था करो,
_बाद में दूसरों को सहयोग की सोचो’
ज्यों ही विपदा चल बसी सहयोगी तैयार…
_बाद में दूसरों को सहयोग की सोचो’
यदि आप १ या २ बातों को आधार बना कर जीवन जीना शुरू करें तो आपको सफलता मिलनी शुरू हो जाएगी.
_अभी आपका मस्तिष्क बहुत सारे विचारों में उलझा हुआ है, _जब आपका मस्तिष्क एक विचार पर पक्का हो जाएगा _तब वो अपनी पूरी एनेर्जी के साथ काम करना शुरू कर देगा.
भटकना बंद कीजिए और जीवन को सही तरीक़े से जीना शुरू किजिए.
*जितना मनुष्य उलझा है अपने बुने ख्यालों में !!*