सच्ची प्रतिभा का व्यक्ति चालाक नही होता, जो प्रतिभाहीन है, जिनमे कोई प्रतिभा नही, वही चालाक होगा, चालबाज़ होगा.
_ चालबाजी इस बात का परिचायक है कि इसमें प्रतिभा का अभाव है.
_ प्रतिभा जितनी ज़्यादा होगी, उतना ही वो सरल होगा, साफ सुथरा होगा.
_ प्रतिभाहीन, प्रतिभा की प्रतिपूर्ति चालबाजी से करने की कोशिश करता है.!!
वास्तव में, उदाहरण के लिए, अमीर, अच्छे परिवार का, अच्छा दिखने वाला, काफी बुद्धिमान, और यहाँ तक कि अच्छे स्वभाव वाला होने से ज्यादा कष्टप्रद कुछ भी नहीं है,
__ अगर उसमें कोई भी कोई प्रतिभा नहीं है, कोई ख़ासियत भी नहीं है, न ही अपना स्वयं का एक विचार, सिर्फ ठीक “अन्य लोगों की तरह” होना.!!
सुविचार 2974
बुद्धिमान आदमी चालबाज नहीं होता,
जितनी प्रतिभा होती है, उतना आदमी साफ- सुथरा होता है.
सुविचार 2973
समस्याएं ….
अपनी हर तकलीफ, मुश्किल, समस्या रब को अर्पित कर दो, सब आसानी से हल हो जायेगी !!! प्रत्येक समस्या का सहजता से, बहादुरी से मुकाबला करें और जब वो हल न हो तो उन्हें रब के अर्पण करते जाएं, इनसे समस्या का निराकरण मिले न मिले, उससे मिलने वाली पीड़ा और कुंठा से छुटकारा अवश्य मिलता है और साथ ही उनका निराकरण भी ठीक ढंग से हो पाता है !!!
सुविचार 2972
विचारों को पढ़कर बदलाव नहीं आता है,
विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है…
सुविचार 2971
गलतियां हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं …
क्षमा हमारा हृदय छू जाती है.
सुविचार 2970
मन की इच्छाए…
मन की इच्छाए श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते है, जो योग्य है वही कर्म करते है ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!




