सुविचार 4684

क्या आपके पास है, क्या आपके पास नहीं है, इससे सुख का कोई लेना- देना नहीं है ;

क्या आप हो, इससे सुख का संबंध है.

सुविचार 4682

पतझड़ में पेड़ से गिरने वाले पत्तों की तरह न बनें,

_ जिन्हें हवा द्वारा यहाँ से वहाँ दिशाहीन, लछ्यहीन उड़ा दिया जाता है.

हवा ने माफ़ी तो मांगी..

_ लेकिन तब तक सारे पत्ते गिर चुके थे.!!
जिन दरख्तों की जड़ें मज़बूती से धरती यानी अपने मुल्यों से जुड़ी हो वो हवाओ के परवाज़ नहीं होते…

_ ये मज़बूती साख से टूटे पत्तों में कहां.. जो हवा के साथ निकलते हैं, इसलिए उनका अस्तित्व कचरे से ज्यादा नहीं.
_ जो हवा के साथ चलते हैं, वो कभी अपनी पहचान नहीं बना पाते, और हवा के साथ चलना.. ये काम अक्सर कचरे का ही होता है.!!

सुविचार 4681

जब कोई आपकी कीमत नहीं समझे, तो उदास ना होइए ;

बस ये जान लीजिए कि कबाड़ी को कभी हीरे की परख नहीं होती.

सुविचार 4680

किसी से बदला लेने का कोई फायदा नहीं,

बस माफ़ करके सीधा दिल से निकाल दो..

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