सुविचार 2187

 

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यदि हमारी इच्छा शक्ति दृढ है तो दुनिया की कोई ताकत हमें हार मानने पर मजबूर नहीं कर सकती.

 

सुविचार 2186

स्वहित….

आप यदि केवल स्वयं का ही ध्यान रखेंगे, स्वयं का हित साधने में लगे रहेंगे, तो धीरे धीरे अन्य लोग भी आप पर ध्यान देना बंद कर देंगे !

इसलिए सभी का ध्यान रखते हुए सब से मिल जुल कर चलें !!!

सुविचार 2185

संघर्ष प्रकृति का आमन्त्रण है,

जो स्वीकार करता है, वही आगे बढ़ता है.

सुविचार 2184

कहते हैं कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, इसलिए अपने विचारों के घोड़े सकारात्मक दिशा में दौड़ाइए, ताकि आप का तन और मन दोनों स्वस्थ रहें.

जैसे हमारे विचार होते हैं, कुछ हद तक हमारा तन और मन भी वैसी ही प्रतिक्रिया देता है. हमारे मन में यदि ये बात बैठ गई कि ठंड मुझे बिलकुल बर्दाश्त नहीं होती तो तन भी वैसी ही प्रतिक्रिया करनी शुरू कर देगा.

सुविचार 2183

आनंद लेते हुए ज़िन्दगी की यात्रा करो, ज़िन्दगी आसान हो जाएगी.

The journey of life will become a lot easier if you enjoy every moment of it.

सुविचार 2182

मन और मकान को समय-समय पर साफ करना जरूरी है

क्योंकि समय बीतने के साथ मकान में बेवजह सामान

और मन में गलतफहमियां भर जाती है.

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