सुविचार 2120

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एक इंसान कि उम्र के हिसाब से उसके दृष्टिकोण कि बात करें तो बीस साल उम्र में इंसान अपनी इच्छा से चलता है, तीस साल में बुद्धि से और चालीस में अपने अनुभव से चलने लगता है – यह एक ‘ ग्रेजुअल प्रोसेस ऑफ़ विज़न ” है.

सुविचार 2119

बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.

सुविचार 2118

असल में कोई भी व्यक्ति जब अपनी मंजिल तक पहुंचना चाहता है तो उस के रास्ते में बहुत कठिनाइयां आती हैं और उन से उसे खुद ही निकलना पड़ता है.

सुविचार 2117

“गरीबी इस बात का प्रमाण है कि आपका दिमाग बीमार है.”

गरीब माइंड सेट – “मैं कुछ नहीं कर सकता”
अमीर माइंड सेट – “मैं कुछ भी कर सकता हूं, कुछ करने के लिए मैं क्या-क्या संघर्ष कर सकता हूँ ?”
गरीब इनकार करता है कि अवसर मौजूद है,; _ अमीर देखता है कि उपलब्ध समय, संपत्ति और तरल धन से अवसर कैसे सृजित किए जाएं.

सुविचार 2116

स्वयं को कभी कमज़ोर साबित ना होने दें,

क्यूंकि डूबते देखकर लोग घर के दरवाजे बंद करने लगते हैं.

सुविचार 2115

दुनिया में बड़ा बनना है तो छोटी- छोटी चीजों को इगनोर करना सीखें. हर घटना या हर व्यक्ति की बात पर रिएक्ट करने लग जायेंगे तो व्यक्ति अपना जीवन नहीं जी सकता.

किसी भी चीज का वजन, या किसी के अपशब्द को बोझ के रूप में ज्यादा दिन तक अपने मन पर रखने से इंसान कभी आगे नहीं बढ़ सकता है.

सुबह से शाम तक आप कैसे लोगों से एक्सपोज़ होते हैं, कैसे परिवेश में रहते हैं, यह बहुत मायने रखता है. हमारे अंदर जितना पोजेटिविटी का फ्यूल रहेगा, उतना हम आगे बढ़ते रहेंगे.

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