सुविचार 1980

भागो नहीं, जागो

हम हमेशा अपने दुखों और जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं, उनसे बचने के बहाने खोजते रहते हैं. अपनी गलतियों और कमियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं, लेकिन ऐसा करके भी हम खुश नहीं रह पाते. हमें परिस्थितियों से भागना नहीं चाहिए.

सुविचार 1979

दूसरे को नहीं, खुद को बदलें…

देखा जाए तो परोक्ष रूप से मनुष्य के तमाम दुखों और तकलीफों का आधार यह सोच रही है कि मेरे दुख का कारण सामने वाला है. हम परिस्थितियों या किस्मत के साथ भी यही रवैया रखते हैं कि वह बदलें हम नहीं.

सुविचार 1978

मनुष्य या तो अपने बीते हुए पलों में खोया रहता है या फिर अपने भविष्य की चिंताओं में डूबा रहता है. दोनों सूरतों में वह दुखी रहता है. जबकि वास्तविक जीवन वर्तमान में है. उसका संबंध किसी बीते हुए या आने वाले कल से नहीं है. जो वर्तमान में जीता है वही हमेशा खुश रहता है.

सुविचार 1977

किसी भी महान कार्य में किसी को वंचित करना, यह उन्हें वंचित करना नहीं, बल्कि स्वंयम को उस महान कार्य से वंचित करना है.

सुविचार 1976

दो ही चीजें ऐसी हैं, जिन्हें देने में किसी का कुछ नहीं जाता….

एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,

हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!

सुविचार 1975

इतना ज्यादा मत बोलो की लोग आप के चुप होने का इन्तजार करें,

बल्कि इतना ही बोलो की लोग आप के बोलने का इन्तजार करें.

error: Content is protected