सुविचार 1968

जब जब आपके खास लोग दूर होने लगें तो समझ लीजिए कि उनकी जरूरतें पूरी हो चुकी.

सुविचार 1967

नेतृत्व का उद्देश्य लोगों को सही रास्ता बताना है, हुकूमत करना नहीं.

सुविचार 1966

लोगों को तब फर्क पड़ना शुरू होता है, जब आपको उनकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता.

सुविचार 1965

परिवार में आपस में प्रेम होना बहुत जरूरी है, इसलिए अपने परिवार को पूरा समय दिजिए इससे प्रेम और विश्वास पनपता है तथा परिवार में खुशहाली आती है.

सुविचार 1964

हमलोग दूसरों के काम का मूल्यांकन बहुत बारीकी से करते हैं, लेकिन अपने काम के मूल्यांकन में इस तरह की ईमानदारी नहीं बरतते हैं.

_अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए और हमेशा सीखते रहने के लिए अपने काम का मूल्यांकन खुद करते रहना चाहिए.

गुणवत्ता यदि व्यक्तित्व में हो तो वस्तु में स्वयम् ही शामिल हो जाएगी.

If quality is present in the personality then it will automatically be included in the object.

सुविचार 1963

सहज सरल…..

कठिन परिस्थितियों और अपने द्वारा नहीं चाही गई स्थिति में भी जो शांत, सहज और सरल रहते हैं वो थोड़े समय में ही ख़राब से ख़राब स्थिति से उबर जाते हैं, किन्तु जो जरा जरा सी बात में चिढते हैं क्रोधित होते हैं वो अच्छी भली परिस्थिति को भी बिगाड़ लेते है !! अतः शांत-सहज -सरल रहे या कम से कम ऐसी कोशिश तो की जा सकती है, ऐसा करें और जीवन का आनंद ले !!!!

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