सुविचार 1782

एक हद के बाद इंसान, सब कुछ छोड़ देता है..

शिकायत करना, मिन्नतें करना, मनाना और फिर दिल ऐसा हो जाता है,

कि कोई बात करे तो ठीक, ना करें तो भी ठीक,

क्योंकि पता लग चुका होता है, कि दुनिया बहुत झूठी और मतलबी है.

सुविचार 1781

छमा करने से पिछले समय तो नहीं बदलता, लेकिन भविष्य सुनहरा हो उठता है.

सुविचार 1780

यदि आप के चंद मीठे बोलों से किसी का रक्त बढ़ता है तो यह भी रक्त दान है.

सुविचार 1779

दूसरों पर निर्भर रहने वाले लोग कभी खुश नहीं रह पाते हैं. इसलिए इस लायक बनिए कि अपनी जरूरतों और इच्छाओं को खुद पूरा कर सकें.

सुविचार 1777

मनुष्य वही श्रेष्ठ माना जाएगा जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है.
error: Content is protected