सुविचार 4687
जिस प्रकार आज लगाया गया छोटा सा पौधा भविष्य में विशाल वृछ बनता है,
_ उसी प्रकार वर्तमान में किए गए हर छोटे प्रयास भविष्य में बड़े परिवर्तन की ओर ले जाते हैं.!!
परिवर्तन का द्वार भीतर से खुलता है, जो अपनी गलती नहीं देख सकता, वो कभी मंज़िल नहीं पा सकता.!!
वृछ कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए,
_ वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है.
_ जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है….





