सुविचार 1446

जो मनुष्यों के साथ दयालुता का बर्ताव नहीं करता, किंतु पाषाण मूर्ति की पूजा करता रहता है, वह ढोंगी कहा जा सकता है.

सुविचार 1445

जिसके जीवन में संयम- नियम नहीं होते हैं, वह छिछले मन वाला निकृष्ट व्यक्ति होता है. निकृष्ट व्यक्ति हरकतें ही कर सकता है, वह उत्कृष्ट काम नहीं कर सकता.

सुविचार 1444

निर्णय लेना और असफल हो जाना, इससे एक बात तो स्पष्ट है कि आप उस भीड़ का हिस्सा नहीं हैं, जो असफल होने के डर से निर्णय ही नहीं ले पाते हैं.

सुविचार 1443

कई बार हम खुद ही अपने तनाव की वजह बन जाते हैं. खास कर तब, जब हम दूसरों का मन रखने के लिए बेकार की बातों पर भी अपनी सहमति व्यक्त कर देते हैं, जबकि आंतरिक रूप से हम उसे करना नहीं चाहते.

_ अतः जरूरी है हर बात पर “हाँ” कहने के बजाय कभी- कभार “ना” कहना भी सीखें.

कई मुद्दों पर असहमति होती है, कोई बात नहीं है ;

_किन्तु यह भी समझना जरूरी है कि.. “बहुत सी बातें हमें समझ में नहीं आती”.!

सुविचार 1442

जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है, उसी तरह गुणी ही गुणवान की पहचान कर सकता है.

सुविचार 1441

अतीत की स्मृतियां जिंदगी पर बोझ नहीं होती, बल्कि जीवन शक्ति होती है, जो हमारे आज को संवारती है और भविष्य के सपनों में रंग भरती है.
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