सुविचार 580

आशा नहीं है. इस में मनोरथ का जल भरा हुआ है और तृष्णा की अनंत तरंगें लहरें लेती है.

सुविचार 579

मानव मस्तिष्क ठीक एक पैराशूट की तरह है, जब तक वह खुला रहता है तभी तक कार्यशील रहता है.

सुविचार 578

 समस्या को हल करने की तुलना में बहुत से लोग ज्यादा समय और ताकत उस से जूझने में लगा देते है.

सुविचार 577

तर्क से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता. मूर्ख लोग तर्क करते हैं, जबकि बुद्धिमान विचार करते हैं.

सुविचार 576

जब तुम्हारा जन्म हुआ था, तब तुम रोये थे जब कि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था. जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोये और तुम जश्न मनाओ.
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