सुविचार 569

समस्त रिश्तों के बीच विश्वाश उसी तरह कार्य करता है, जिस तरह जिंदगी में श्वांस काम करता है.

सुविचार 568

बातचीत के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि हम ऐसी बात तो नहीं कह रहे , जिस से हमारा हलकापन झलकता हो. बातचीत के दौरान गंभीरता रखी जाए तो, गरिमा बढ़ती है.

सुविचार 566

मनुष्य जब तक दुनिया में जीता है. अनुकरण और अनुचरण जीवन में लगातार चलता रहता है.

सुविचार 565

वास्तविक सुख मस्तिष्क और शरीर दोनों से पूरा काम लेने से ही प्राप्त हो सकता है.

सुविचार 564

इनसान को अपने ज्ञान का अभिमान तो रहता है, लेकिन अभिमान का ज्ञान नहीं रहता है.
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