सुविचार 4243
प्रेरणा लेनी हो तो लहरों से लीजिए, इसलिए नहीं कि वे उठती हैं, और गिर जाती हैं ;
_ बल्कि इसलिए कि वे जब भी गिरती हैं, नए जोश से फिर उठ जाती हैं..
भवरों से लड़ो उफनती लहरों से उलझो, कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे..
_ बल्कि इसलिए कि वे जब भी गिरती हैं, नए जोश से फिर उठ जाती हैं..
जिन्हें हम कमजोर लम्हों में अपनी सारी सच्चाईयाँ सौंप देते हैं.
_या तो मुझे कोई रास्ता मिल जायेगा या मैं बना लूँगा..
हमने उनसे आशाएं रखी,,,,जिनसे हमें नहीं रखनी चाहिए थी.
_ महज़ पचास साठ साल की जिंदगी में ही इतनी बेचारगी,
_ बेबसी और बोझ है की जिंदगी मजबूरी बन जाती है…!!!
” इसलिए समझदारी और ज्ञान के साथ जियें ”
_ दुनिया का हर चिराग हवा की नज़र में है..!!