सुविचार 4701

*”विचार” “जल” की तरह है …आप उसमें “गंदगी” मिला दो तो, वह “नाला” बन जाऐगा,

अगर उसमें “सुगंध” मिला दो तो वह “गंगाजल” बन जाऐगा ।।*

हर ऊपर से सुंदर दिखने वाली मानवीय गतिविधि के नीचे गंदगी होती है.!!

सुविचार 4700

मुसीबतें रुई से भरे थैले की तरह होती हैं, देखते रहोगे तो बहुत भारी दिखेगी,

और उठा लोगे तो एकदम हल्की हो जायेंगी.

सुविचार 4699

इस जीवन में जीने से अधिक मरने के छण आएँगे, तुम्हें उनमें भी जीना है.

सुविचार 4696

भाषा शरीर का ऐसा अदृश्य अंग है, जिसमें इंसान का सब कुछ दिखाई देता है.
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